Live In Relationship Aur Jyotish

Live in relationship aur hindi jyotish, असफल लीव-ईन रिलेशनशिप के ज्योतिषीय कारण क्या है, क्या समस्याएं आती है साथ में रहने से.

युग बदलता जा रहा है और समय के बदलने के साथ थी रीती रिवाज, रहन सहन भी बदलता जा रहा है. आज के इस डिजिटल दूनिया में एक नया रिवाज चलन में आ चूका है और वो है लिव-इन रिलेशनशिप में रहना. Live-in Relationship में दो विपरीत लिंग के लोग साथ साथ रहते हैं बिना विवाह के. इस रिवाज के शुरू होने के साथ ही बहुत सी परेशानिया भी बढ़ने लगी है. कुछ लोग तो सफलता पूर्वक लिव-इन में रह लेते हैं पर कुछ लोगो का जीवन परेशानियों से भर जाता है, कुछ समय बाद सम्बन्ध ख़त्म होने लगते हैं, काम काजी जीवन भी ख़राब हो जाता है आदि.
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Live In Relationship Aur Jyotish

Live-in Relationship के ख़राब होने के पीछे कई कारण सामने आये है जैसे -

  • किसी एक साथी की तरफ से पूरा सहयोग न मिलना कार्यो में.
  • ना चाहते हुए भी किसी न किसी बिमारी से परेशान रहना जिससे संबंधो में खटास आने लगती है.
  • कुछ समय Live-in Relationship में रहने के बाद एक दुसरे के प्रति रूचि ख़त्म होने लग्न.
  • वैचारिक मतभेद भी एक कारण होता है जिसका पता कुछ समय बाद चलता है.
  • किसी एक साथी द्वारा धोखा दिया जाना आदि ...

ज्योतिष से लोग प्रश्न करते है की-

  1. साथ रहने से पहले सब ठीक था, बाद में हम अलग क्यों हुए ?
  2. क्यों सामने वाले का व्यवहार बदल गया साथ रहने के बाद.
  3. कैसे हम प्रेम संबंधो को ठीक करे?
  4. कैसे हम अपने व्यक्तिगत जीवन को ठीक करे?
इस ज्योतिषीय लेख में हम Live-in Relationship के विभिन्न पहलुओ को देखेंगे ज्योतिष की दृष्टि से.
जैसा की हम सभी जानते हैं की हम भगवान् नहीं है, हम तो ऊपर वाले की कठपुतली है और हमारे भाग्य अनुसार हमारे साथ घटनाएं घटती हैं.
ज्योतिष के द्वारा हम अपने भाग्य को जान पाते हैं और सही रास्ते को खोज पाते हैं. ज्योतिष के द्वारा हम जान पाते हैं की किसी भी घटना के पीछे के कारण क्या हैं. पढ़िएPrem me Safalta Ke liye Kaun Si Pooja Kare?.

आइये जानते हैं की Live-in Relationship में समस्याओं का ज्योतिषीय कारण क्या हैं?

  1. अगर कुंडली में पार्टनरशिप भाव दूषित हो जाए ख़राब ग्रहों द्वारा तो ये संभव है की व्यक्ति को Live-in Relationship में समस्या आये.
  2. अगर कुंडली में सुख स्थान दूषित हो जाए तो भी जातक को व्यक्तिगत सुख में समस्या आने लगती है, मनचाहा साथी नहीं मिल पाता है.
  3. अगर व्यक्ति का भाग्य स्थान ख़राब हो तो भी जातक को अच्छे सम्बन्ध बनाने में समस्या आ सकती है.
  4. कुंडली में अगर ग्रह सही स्थिति में न हो या फिर शक्तिहीन हो तो जातक को जीवन में बहुत समस्याओं का सामना करना होता है.
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Live-in Relationship का समाधान कैसे किया जा सकता है ज्योतिष में ?

ज्योतिष के द्वारा हम समस्याओं का कारण और समाधान पा सकते हैं. अगर सम्बन्ध बार बार ख़राब हो रहे है तो कुंडली दिखाना चाहिए, अगर जीवन में व्यक्तिगत सुख मिल नहीं पा रहा है तो कुंडली दिखाना चाहिए और समाधान जानना चाहिए.
  • कुंडली में अगर किसी विशेष ग्रह के कारण समस्या आ रही हो तो उस ग्रह की शान्ति करके लाभ लिया जा सकता है.
  • कुंडली के अनुसार सही रत्न धारण करके भी Live-in Relationship को ठीक किया जा सकता है.
  • कुछ टोटके भी जीवन से समस्याओं को ख़त्म कर सकते हैं.
  • कुछ विशेष मंत्रो का प्रयोग भी जीवन को सफल बनाने में मदद करते हैं.
अतः अगर आप को भी Live-in Relationship में समस्या आ रही है या फिर जीवन में कोई साथी नहीं मिल रहा है तो आप भी ज्योतिष से संपर्क करके मार्गदर्शन ले सकते हैं.



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Yogini Ekadashi Ka Mahattw In Hindi

Yogini Ekadashi Ka Mahattw In Hindi, योगिनी एकादशी का महत्तव hindi में जानिये, क्या फायदा होगा योगिनी एकादशी व्रत से, क्या करे सफलता के लिए. 

हिन्दू पंचांग के हिसाब से जब अषाढ़ महीने की कृष्ण पक्ष का ग्यारहवां दिन आता है तब एक महत्त्वपूर्ण उपवास लोग करते हैं जिसको की योगिनी एकादशी के उपवास के नाम से जाना जाता है. इस उपवास को करने से लोग पापों और बीमारियों से मुक्ति पाते हैं.
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Yogini Ekadashi Ka Mahattw In Hindi
एकादशी की ग्यारस के नाम से भी जानते हैं और ये दिन भगवान् विष्णु के पूजा को समर्पित होता है. इस दिन पीपल पूजा भी विशेष फलदाई होती है. 
जब हम बात करते हैं योगिनी एकादशी की तो बताना चाहेंगे की ये दिन बहुत ही पुण्यशाली, पवित्र और शक्तिशाली है, हिन्दू पौराणिक कथाओं से पता चलता है की योगिनी एकादशी के व्रत को करके एक यक्ष को कोढ़ रोग से मुक्ति मिली थी फिर वो पूरी जिन्दगी अच्छी तरह से रहा. इसी कारण योगिनी एकादशी का महत्तव बहुत माना जाता है. 

योगिनी एकादशी व्रत और पूजा से लाभ:

अगर कोई भक्त श्रद्धा और भक्ति से भगवान् विष्णु की आराधना करता है तो इसमे कोई शक नहीं की उसकी मनोकामनाए पूरी होती है. 
  1. योगिनी एकादशी का व्रत उन लोगो के लिए बहुत लाभदायक है जो की किसी भी प्रकार के त्वचा रोगों से ग्रस्त है. 
  2. साधको के लिए भी ये दिन बहुत ख़ास है, साधना को बढ़ाने के लिए ये दिन ख़ास है.
  3. ये व्रत पापों से भी मुक्त करता है. 
  4. योगिनी एकादशी का व्रत और पूजा से सफलता के रास्ते खुलते हैं. 
  5. जीवन की परेशानियां हटती हैं. 

क्या करना चाहिए योगिनी एकादशी को कृपा प्राप्त करने के लिए ?

प्रातः काल जल्दी उठके अपने दैनिक कार्यो को करले फिर घर के मंदिर में भगवान् विष्णु के मूर्ती के सामने संकल्प ले की योगिनी एकादशी का उपवास आप अपनी किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए कर रहे हैं.
हां ये भी अच्छा रहेगा की आप नहाने के पानी में तुलसी दल डाल के स्नान करें. 
इस दिन विष्णु जी की हो सके तो पंचोपचार पूजा करे पुरे दिन और रात उपवास रखे और वासुदेव जी की किसी मंत्र का जप करे. 
इस दिन झूट न बोले, किसी से गलत व्यवहार न करे, किसी जरूरतमंद की मदद करे, फल , कपडे, धन का जरूरतमंद को दान दे. ब्राह्मणों का आशीर्वाद ले.
इस दिन अन्न ग्रहण न करे, फल , रस का प्रयोग करे, मोरधन का प्रयोग करे, साबूदाना भी प्रयोग कर सकते हैं.
योगिनी एकादशी का एक रहस्य ये भी है की ये दिन धन के देवता कुबेर जी से भी सम्बन्ध रखता है अतः इस दिन विष्णु जी के साथ कुबेर जी की पूजा की जाए तो भी बहुत अच्छा है. 
योगिकी एकादशी को पीपल पूजा भी बहुत लाभदायक होता है.

2019 के योगिनी एकादशी की खास बात:

इस साल योगिनी एकादशी 20 जून , शुक्रवार को आ रही है जो की अषाढ़ महीने की कृष्ण पक्ष में है. शुक्रवार का दिन शक्ति का प्रतिक है अतः इस दिन महालक्ष्मी की पूजा भी विशेष की जाती है अतः विष्णु जी के साथ अगर माता लक्ष्मी की पूजा की जाए तो विशेष फलदाई होगा.

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Pet ke rog door karne ke asaan upaay

Pet ke rog door karne ke asaan upaay,  tips for healthy stomach, पेट रोग दूर करने के आसान उपाय 

पेट के रोग आज के इस युग में एक साधारण समस्या बन चुकी है , अधिकतर लोग पेट के रोग की शिकायत करते रहते हैं. जैसे किसी को कब्ज रहती है, किसी को गैस की समस्या है, किसी को भूख नहीं लगती है, किसी को अजीर्ण रहती है आदि . यहाँ पर आपको वो आसान तरीके बताये जा रहे है जो की हमने अपने बुजुर्गों से सुना है और जिनका असर शत प्रतिशत सही होता है. ये नुस्खे आसान भी होते है और इनमे कोई ज्यादा खर्चा भी नहीं अत है.
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Pet ke rog door karne ke asaan upaay

अगर कब्ज पीछा नही छोड़ रहा है तो क्या करे-

समाधान:
  1. खाने को खूब चबा चबा कर खाए, जल्दी न करे और खाने के ४५ मिनट बाद ही जल पिए.
  2. रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा ले और खाने के बाद थोडा टहला करे.
  3. सुबह उठने के बाद कुल्ला करके 1 गिलास ठंडा पानी पिए फिर 1 ग्लास गुनगुने पानी में निम्बू निचोड़कर पिए फिर शौच के लिए जाए. कुछ ही दिनों में आपका पेट अच्छा हो जायेगा और आप तरोताजा महसूस करेंगे.
  4. सोने से पहले 2 चम्मच इसबगोल की भूसी 1 गिलास पानी के साथ पिया करे , इससे भी बहुत लाभ होगा.
  5. भोजन के बाद 1 छोटी हरड़ को करीब घंटे भर तक चूसे , इससे खाना अच्छा पचेगा.
  6. फ़ास्ट फ़ूड का सेवन रात को न करे और हो सके तो इस प्रकार के भोजन को कभी कभार ही ले तो अच्छा है.
तो हो गया न कब्ज दूर , अब लीजिये भोजन का मजा और जिन्दगी का भी.

अगर भूख नहीं लग रही है तो क्या करे ?

समाधान:
  1. कुछ मुनक्का ले और उसमे से बीज निकाल ले, अब उनको तवे पर सके और काली मिर्च और कला नमक लगा के उनको धीरे धीरे चूसते रहे 1 -1 करके , इससे आपको भूख भी लगेगी और अगर किसी बिमारी के बाद दवाइयों के कारण मूह का स्वाद बिगड़ा है तो वो भी ठीक होगा.
  2. आधा चम्मच शहद और अदरक का रस मिला कर दोनों समय खाने के बाद ले, फिर देखे कितना आराम मिलता है. 
  3. 1 चम्मच जीरा, 1 चुटकी हींग , 1 चोथाई चम्मच अजवाइन लेकर आधा ग्लास पानी में मिला कर दिन में दो बार ले.

नाभी खिसकने से परेशान हैं क्या करें-

समाधान:
  1. बीस ग्राम सौंफ के साथ २० ग्राम गुड मिलाये और सुबह हाली पेट सेवन करे. इससे लाभ होगा. 
  2. अगर आप बार बार नाभी खिसकने से परेशान है तो नाभि को बिठाने के बाद पैरों के दोनों अंगूठे में काला धागा बाँध दे या फिर ताम्बे का छल्ला बनवा के दोनों अंगूठे में दाल ले . आपकी नाभि खिसकना बंद हो जाएगी.

विशेष टोटका खाना पचाने के लिए:

खाना खाने के बाद पेट पे हाथ फेरते हुए अगर भीम या कुम्भकरण जी का ध्यान किया जाए तो भी खाना पचाने में बहुत मदद मिलती है.


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How To Get A Healthy Sleep In Hindi

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नींद भगवान् का दिया एक ऐसा वरदान है जिसके बाद हम सभी उर्जावान महसूस करते हैं, परन्तु आज के इस भाग्दोड़ की जिन्दगी में ऐसे भी बहुत से लोग है जो अपनी नींद खो चुके है जिसके कारण विभिन्न प्रकार के रोगों ने जीवन में नई परेशानियों को जन्म दे दिया है.

परन्तु ये जरुरी है की हम अपनी नींद के प्रति सजग हो और उसे प्राप्त करे जिससे की हम एक स्वस्थ जीवन जी सके.
नींद के लिए क्या अरे ज्योतिष में
अच्छी नींद के लिए क्या करे

आइये जानते है क्या कारण हो सकते हैं अच्छी नींद न होने के :

  • हो सकता है की ऑफिसियल जीवन में कुछ तनाव चल रहा हो जिसकी चिंता से हम सो नहीं पा रहे है.
  • हो सकता है की व्यक्तिगत जीवन की कठिनाइयों ने नींद चीन ली हो.
  • हो सकता है की किसी प्रकार के बिमारी ने हमारे जीवन में मुश्किलें पैदा कर दी है.
  • हो सकता है की हम किसी प्रकार के नशे के आदि हो जिसके कारण भी हम परेशान हो. 
  • इसके अलावा अधिक ख़ुशी भी नींद चीन लेती है.
अतः कई प्रकार के कारण हो सकते हैं जिसके कारण हम अपने नींद का आनंद नहीं ले पा रहे हो और परेशान हो रहे हो.

अच्छी नींद न होने के कई प्रकार के दुष्प्रभाव देखे गए हैं जो की निम्न है :

  1. पुरे दिन अल्स्यता बने रहना जिससे काम करने में जी न लगना.
  2. स्वभाव में चिडचिडाहट आ जाना जिसके कारण समाज में इज्जत घटना.
  3. लोगो के साथ संबंधों में खटास आ जाना.
  4. ह्रदय रोग और मानसिक रोग भी इसके कारण जन्म लेते हैं.
  5. पाचन प्रणाली में खराबी आने के कारण भूख भी कम होने लगती है जिससे व्यक्ति शक्तिहीन महसूस करता है.
    अतः नींद की कमी बहुत घातक हो सकती है इसीलिए एक अच्छी नींद के लिए जरुर प्रयास करना चाहिए अगर हम उससे वंचित हैं.

    आइये जानते हैं कुछ ख़ास उपाय एक भरपूर नींद के लिए और एक अच्छे जीवन के लिए :

    • सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालके कम से कम 15 से 30 मिनट तक पैरों को डूबा के रखे इससे जहा आप तनाव मुक्त होंगे आपका शारीर हल्का होगा और अच्छी नींद आएगी
    • रोज प्राणायाम करने की आदत बनाए जिससे शारीर के अन्दर प्राणशक्ति बढे और आप प्रसन्न रह सके, उर्जावान रह सके.
    • शाम के समय चाय या कॉफ़ी को ना कहें.
    • सोने के कमरे में टीवी या रेडियो न रखे साथ ही अधिक देर रात तक टीवी देखने की आदत को धीरे धीरे छोड़ दे.
    • सोने से पहले ध्यान करना या मंत्र जप करना भी बहुत सहायक है नींद में. 

    ज्योतिष और नींद:

    नींद का ग्रहों के साथ भी बहुत गहरा सम्बन्ध है, अगर कुंडली में शत्रु राशि की दशा चल रही हो या फिर कुछ विशेष भावों में खराब ग्रह बैठे हो तो भी व्यक्ति का जीवन पर्रेशानियों से भर जाता है और नींद चली जाती है अतः ये भी जरुरी है की ऐसे समय में किसी अच्छे ज्योतिष से सलाह लेके पूजा, दान, रत्नों का प्रयोग किया जाए. कई बार नकरात्मक उर्जाओं के कारण भी जीवन में समस्याए आ जाती है जिससे भी समस्याए आ जाती है अतः ये जरुरी है की इन सब बातों का ध्यान रखा जाए.
    ऐसे में शिव आराधना भी अच्छा फल देती हैं. परन्तु कैसे पूजा करे, ये एक अच्छा ज्योतिष आपको बता सकता है. 



    अतः अच्छी नींद प्राप्त करे और बनाए अपने जीवन को सुखी और संपन्न.

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Gajkesari Yoga Jyotish Mai in Hindi

Gajkesari Yoga Jyotish Mai in Hindi, क्या होता है गजकेसरी योग, क्या लाभ होता है गजकेसरी योग के, कब इस योग का असर जीवन में दिखाई नहीं देता है?

ज्योतिष के अन्दर जब भी राज योग की बात होती है तो गजकेसरी योग एक महत्वपूर्ण योग के रूप में सामने आता है. अगर ये योग कुंडली में सही तरीके से बनता है तो निश्चित ही व्यक्ति भाग्यशाली होता है, स्वास्थ्य, संपत्ति, सम्पन्नता जीवन में प्रवेश करता है और जीवन आसान हो जाता है.
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Gajkesari Yoga Jyotish Mai in Hindi

परन्तु ऐसे बहुत से लोग है जो की इस योग के होने पर भी संतोषप्रद जीवन नहीं जी रहे है. इस लेख में आपको मैं इस विषय पर बताने जा रहा हूँ. इस लेख के द्वारा आप जानेंगे की कब बनता है गजकेसरी योग, कब ये कमजोर पड़ता है और जीवन को सफल बनाने के लिए क्या करना चाहिए?.

क्या होता है गजकेसरी योग ज्योतिष में?

इस योग के अंतर्गत चन्द्रमा को या फिर चन्द्र लग्न को गुरु या अन्य शुभ ग्रहों द्वारा शक्ति और शुभता प्राप्त होती है और चन्द्र जो की मन का करक है और जल तत्त्व को संबोधित करता है तो व्यक्ति को मान सम्मान, स्वस्थ्य, स्थिरता, शक्ति, धैर्य, धन, प्रेम, पारिवारिक सुख आदि की प्राप्ति आसानी से हो जाती है.

ज्योतिष में प्राप्त जानकारी के हिसाब से गजकेसरी योग निम्न प्रकार से बनते हैं:

  1. जब गुरु चन्द्रमा से केंद्र में स्थापित हो जाता है और ये उच्च का हो या फिर शुभ हो और शक्तिशाली हो.
  2. जब चन्द्रमा गुरु, शुक्र , बुध आदि शुभ ग्रहों द्वारा दृष्ट हो.
यहाँ पर जानने योग्य बात ये है की ग्रहों की दृष्टि तो ठीक है पर ग्रहों का शुभ होना , शक्तिशाली होना भी बहुत जरुरी है. 
मैंने ऐसे बहुत से कुंडली को देखा है जिसमे जातक को संघर्षो के साथ जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है कुंडली में गजकेसरी योग होते हुए भी, इसके अनेक कारण सामने आये है.

आइये जानते है कैसे गजकेसरी योग का प्रभाव जीवन मे नहीं पड़ता है?

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  1. जब गुरु कमजोर हो या शत्रु का हो कुंडली में तब जातक को इस योग का शुभ प्रभाव पूरा नहीं मिल पता है.
  2. जब चन्द्रमा खुद ही कमजोर हो या दोष से युक्त हो तो उस दशा में भी जातक को इस का शुभ प्रभाव पूरा नहीं मिल पाता.
  3. जब चन्द्रमा , गुरु या अन्य शुभ ग्रहों की शक्ति अत्यंत कम हो तो उस दशा में भी जातक को लाभ नहीं होता है. 

आइये अब देखते हैं की गजकेसरी योग अगर अच्छा बना हो तो जातक को क्या लाभ हो सकते हैं ?

  • कुंडली में अगर राज योग हो तो व्यक्ति समाज में अपने कार्यो के कारण, अपने दिमाग के कारण एक अलग छवि बनाता है.
  • लोग उसको अपना आदर्श बनाते हैं.
  • सफलता सभी दिशाओं से जीवन में आती है.
  • हर प्रकार का ऐशोआराम जीवन में होता है जिससे व्यक्ति खूब आनंद करता है.
  • लोग ऐसे व्यक्ति से बहुत कुछ सीखते हैं.
  • ऐसे व्यक्ति प्रेम में भी सफल होते दिखाई देते हैं.

एक महत्वपूर्ण बात याद रखना जरुरी है :

हमेशा किसी भी योग पर आश्रित नहीं होना चाहिए या फिर योग को जानकार ही निर्णय नहीं लेना चाहिए. ऐसा होता है की जिनके कुंडली में कोई योग नहीं बन रहा हो पर ग्रहों का बल अच्छा हो तो ऐसे लोग भी खूब सफल जीवन जीते हैं. अतः ये जरुरी है की अच्छे ज्योतिष को कुंडली दिखा कर ही कोई निर्णय ले.
क्या आपके कुंडली में गजकेसरी योग है, क्या कमियां है आपके कुंडली में, कौन से ग्रहों की शक्ति है आपके जीवन में, जीवन को सफल बनाने के लिए क्या कर सकते हैं , इन सभी सवालों के जवाब आप पा सकते हैं ज्योतिष से.
अभी संपर्क करे अपने कुंडली का विवाचन जाने के लिए और सफलता के सूत्र जानने के लिए.

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Kaise Kare Bimariyo Se Bachaaw

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शारीर को स्वस्थ रखना हमारी बुनियादी जिम्मेदारी बनती है क्यूंकि एक स्वस्थ शारीर की जरुरत सबसे ज्यादा होती है एक अच्छे जीवन जीने के लिए.

क्या आप जानते हैं की खाना का हमारे जीवन से सबसे गहरा नाता है, एक कहावत है की “जैसा अन्न वैसा मन और जैसा मन वैसा तन ” अर्थात हमारे भोजन का हमारे शारीर पर पूरा प्रभाव पड़ता है इसी कारण योग और आयुर्वेद में भोजन शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
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Kaise Kare Bimariyo Se Bachaaw
आज के इस तेज रफ़्तार जिन्दगी में हम जिस चीज से सबसे ज्यादा दूर हुए हैं वो है शुद्ध और पौष्टिक भोजन. इसका कारण है सब काम जल्दी करना और इसी से फ़ास्ट फ़ूड का प्रचलन बड़ा है जो की हमे सबसे ज्यादा नुक्सान पहुंचा रहा है.

टीवी , पेपर, मग्ज़िनो में सब तरफ ये बताया जा रहा है की फ़ास्ट फ़ूड घातक है परन्तु फिर भी इसका प्रचलन और तेज होता जा रहा है. ये एक नशे की तरह लोगो के साथ चिपका हुआ है.
इस लेख आपको यही जानकारी देगा की किस प्रकार हम अपने सेहत पर ध्यान रख सकते हैं भोजन पर ध्यान केन्द्रित करके. 

आइये देखते हैं की हम किस प्रकार अपने सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं:

1. प्यास लगने पर कोल्ड ड्रिंक का सेवन करना –

एक कहावत है की “जल ही जीवन है” परन्तु आज की पीढ़ी ये भूलती जा रही है आज हम जल की जगह सोडा को जगह देते जा रहे है जो की हमारे पेट के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है. इसके अन्दर carbondioxide की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जिससे धीरे धीरे व्यक्ति के अन्दर अलास्यता, जड़ता, मंद्बुद्धिता बदती जाती है. परन्तु हम इससे बेखबर इनका इस्तेमाल करते रहते हैं और बच्चों को भी निर्भीक होक इसे पीने देते हैं. जिससे उनका भी पूर्ण विकास सही समय पर नहीं हो पाता है. 

2. चाय और कॉफ़ी का अत्यधिक इस्तेमाल करना –

ये बात सही है की चाय या कॉफ़ी जैसे पैय हमे ऊर्जा का अहसास देते हैं परन्तु ये एक अप्राकृतिक तरीका है तरोताजा महसूस करने का. जिससे लम्बे समय में शारीर कमजोर और बलहीन होता है. इन सब के इस्तेमाल का एक नकारात्मक पहलु ये है की अगर व्यक्ति को समय पर चाय या कॉफ़ी न मिले तो वो चिडचिडा हो जाता है, काम में मन नहीं लगता है, घबराहट होती है आदि.

3. Fast Food का जमके इस्तेमाल –

जितने भी फ़ास्ट फ़ूड हैं इनमे preservatives डाले जाते हैं और अन्य प्रकार के chemicals भी डाले जाते हैं इन्हें स्वादिस्ट बनाने के लिए जो की शारीर के लिए अत्यंत हानिकारक है. इनके लगातार सेवन से भी व्यक्ति इनके आदत का शिकार हो जाता है और फिर धीरे धीरे समस्याए बदती जाती है. 

4. व्यायाम के लिए समय न निकलना –

व्यायाम हमारे दिमाग और शारीर दोनों के लिए जरुरी है परन्तु आज के भाग्दोड़ की जिन्दगी में हम इसे पूरी तरह से भूल चुके हैं. हमे इनकी याद तब आती है जब डॉक्टर बोलता है की ये जरुरी है आपके लिए, या पेट बड़ा हो जाता है, ह्रदय की क्षमता कम होने लगती है आदि. 
अतः जितनी जल्दी हम ये समाज जायेंगे उतनी जल्दी हम अपने जीवन को अच्छा बना पायेंगे. 

5. ध्यान न करना –

ध्यान हमारे अंतर बल को बदता है और मन के कचरे को भी साफ़ करने का एक सशक्त साधन है. परन्तु ये भी एक फैशन शो जैसा हो गया है . हम ध्यान केंद्र तो जाते हैं पर वहां भी दुनियादारी को नहीं छोड़ते हैं. कुछ तो जाते ही इसीलिए है की और परिचाल बढाया जाए और स्वार्थ साधा जाए. 

6. नशे को न छोड़ना –

नशा न छोड़ना भी एक खतरनाक आदत है हमारे जीवन का. सिगरेट, दारु, तम्बाखू आदि का नशा कुछ लोग छोड़ना ही नहीं चाहते हैं. ये भी दिमाग को और शारीर को धीरे धीरे ख़त्म करता जाता है. अतः इसको जितनी जल्दी छोड़ेंगे उतनी जल्दी अच्छे जीवन की राह पकड़ पाएंगे. 

7. खाने में रेशा न खाना भी एक बहुत गलत बात है –

रेशा युक्त भोजन हमारे पाचन क्रिया के लिए अत्यधिक जरुरी हैं , ये विषाक्त तत्त्व को शारीर से निकालने में सबसे ज्यादा सहायक होते हैं परन्तु हम इन्ही को नहीं लेते हैं.
जिससे पाचन सम्बंधित समस्याओं से हम ग्रस्त हो जाते हैं. आज के युग में कब्ज , एसिडिटी तो एक आम समस्या बन चुकी है.
ऊपर कुछ ऐसे कारणों का उल्लेख किया है जिससे हमारा जीवन रोग ग्रस्त होता जा रहा है अगर हम इनपे ध्यान नहीं देंगे तो निश्चित ही हमे हमारे धन का एक हिस्सा सिर्फ डॉक्टर को देने के लिए ही रखना होगा.
अतः हमे आज ही सही उपाय करके अपने जीवन को स्वस्थ और उर्जावान बनाना चाहिए. 

एक अच्छी दिनचर्या हमे बहुत लाभ दे सकती है जैसे –

  • प्रातः काल जल्दी उठ के प्राणायाम करना, ध्यान करना जिससे मन और नसे मजबूत हो सके.
  • चाय और कॉफ़ी आदि को सिमित मात्र में ही लेना.
  • खाने में रेशा युक्त भोजन करना.
  • रोज कसरत के लिए समय निकलना जिससे की शारीर स्वस्थ हो सके.
  • फ़ास्ट फ़ूड को भी सिमित मात्रा में ही खाए जिससे की शारीर स्वस्थ रह सके.
  • इसी के साथ घर में गूगल या लोबान या फिर जड़ीबूटियों की धुप देना भी बहुत जरुरी है जिससे की बिमारी के कितानुओ को जगह न मिले. इसी कारण हमारे शास्त्रों में में घर में समय समय पर हवन करने का प्रावधान है.


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Bhagya Rekha Haatho Mai

जानिए भाग्य रेखा को और इसके जीवन में प्रभाव, क्या करे अगर भाग्य साथ न दे, जानिए हाथ देखने के कुछ तरीके.
bhagya rekha kya bataati hai jyotish me
bhagya rekha kaha hoti hai

भाग्य हमारे पुरे जीवन को प्रभावित करता है, हर घटना जो घट रहा है जीवन में उसमे भाग्य का खेल चल रहा है. अगर भाग्य साथ दे किसी का तो इसमें शक नहीं की वो इस जीवन में अपार सफलता आसानी से प्राप्त कर सकता है.
  • अच्छा भाग्य व्यक्तिगत जीवन को अच्छा करता है.
  • अच्छा भाग्य कामकाजी जीवन को भी अच्छा करता है.
  • अच्छा भाग्य कामकाजी जीवन को भी अच्छा करता है.
  • अच्छा भाग्य प्रेम जीवन को भी मजेदार बना देता है.

आइये जानते हैं भाग्य रेखा को हाथो में:

हमारे हथेली में एक रेखा ऐसी होती है जो की हथेली के तली से शुरू होक शनि पर्वत की तरफ जाती है. इस रेखा को भाग्य रेखा कहा जाता है. इस रेखा का अध्ययन ये बताता है की जातक जीवन में कितना संघर्ष करता होगा.

आइये जानते हैं अच्छे भाग्य रेखा की क्या पहचान है:

अच्छी भाग्य रेखा वो होती है जो की पतली परन्तु गहरी होती है. इसमें किसी प्रकार का कटाव नहीं दीखता है अर्थात इसमें किसी प्रकार की आदि तिरछी लाइन नहीं होती है. अगर ऐसी रेखा किसी के हाथ में हो तो वो जातक बहुत भाग्यशाली होता है, ऐसे जातक के जीवन में स्वास्थ्य, सम्पन्नता, मान-सम्मान आसानी से आ जाता है.

आइये जानते हैं की भाग्य रेखा में उम्र को कैसे जाने?

भाग्य रेखा में उम्र के हिसाब से घटनाओं को जानने के लिए इसे बराबर भागो में बांटा जाता है. शुरुआत करे ५ सालो से और ५ सालो के हिसाब से रेखा को बांटते चले.

आइये अब जानते हैं कुछ ख़ास बाते भाग्य रेखा के बारे में :

  1. जिग जेग भाग्य रेखा अस्थिरता को प्रदर्शित करता है व्यक्तिगत और कामकाजी जीवन में. ऐसे लोग एक ही कार्य में स्थिर नहीं रह पाते हैं और संतुष्टि को पाने के लिए इधर उधर घूमते रहते हैं. ऐसे जातक जॉब भी जल्दी जल्दी बदलते रहते हैं. ऐसे लोग अगर व्यापार में हो तो जल्दी जल्दी बदलाव करते है जो की निराशा भी देता है कभी कभी.
  2. एक लम्बी, गहरी, बिना टूटी भाग्य रेखा सफल जीवन का प्रतिक है. ऐसे जातक अपने इच्छित क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर लेते हैं और जीवन का आनंद अपने हिसाब से उठाते हैं.
  3. अगर भाग्य रेखा का अंत मस्तिष्क रेखा पर हो तो इसका अर्थ है की जीवन के मध्य में से जातक को पतन देखना पड़ सकता है या फिर यूँ कहे की जीवन में उतार देखना पड़ सकता है. ऐसे में निर्णय गलत होने से हानि हो सकती है आदि.
  4. अगर किसी जगह पर आके भाग्य रेखा रास्ता बदले तो इसका अर्थ है की उस उम्र में जातक जॉब बदलेगा या फिर कोई बड़ा निर्णय लेगा.
  5. अगर भाग्य रेखा के साथ कोई और रेखा भी बढ़ता हुआ दिखे तो इसका अर्थ है की भाग्य ज्यादा मजबूत होने वाला है. इससे सफलता के रास्ते खुलते हैं. ऐसे लोगो के एक से अधिक आय के स्त्रोत होते हैं. और ऐसे लोगो को दोस्तों, रिश्तेदारों का साथ भी खूब मिलता है.
  6. हाथो में भाग्य रेखा का न होना कर्मठ व्यक्ति को बताता है. ऐसे जातक खूब मेहनती होते हैं और अपनी उन्नति के लिए वे खुद ही जिम्मेदार होते हैं. भिक्षुको के भी हाथो में भाग्य रेखा का अभाव दीखता है.
  7. अगर भाग्य रेखा का अंत ह्रदय रेखा पर हो तो इसका अर्थ ये है की जातक जीवन के करीब ६० वर्ष तक अच्छा जीवन जियेगा और उसके बाद थोडा संघर्ष करना होगा.
  8. अगर भाग्य रेखा चन्द्र क्षेत्र से निकले तो इसका अर्थ है की जातक विदेश में जाके खूब उन्नति करेगा.
  9. अगर भाग्य रेखा जीवन रेखा से निकले तो इसका अर्थ है की जातक को परिवार वालो का साथ मिलेगा और ऐसे जातक परिवार के साथ ही पूरा जीवन व्यतीत कर सकते हैं.
  10. किसी भी प्रकार टूट फुट अगर भाग्य रेखा में हो तो इसका अर्थ है की उस समय में जातक के जीवन में उतार चढ़ाव बढ़ेगा. स्वास्थ्य समस्या, आर्थिक समस्या या व्यक्तिगत समस्या परेशान कर सकती है.
  11. अगर ह्रदय रेखा और भाग्य रेखा दोनों ही अच्छी हो तो इसका अर्थ है की जातक का प्रेम जीवन बहुत अच्छा होगा.
अतः हाथो में भाग्य रेखा हमारे जीवन के बहुत कुछ रहस्य को प्रकट कर सकता है.
परन्तु किसी भी निर्णय पर पहुचने से पहले अच्छे ज्योतिष से परामर्श जरुर ले लेना चाहिए क्यूंकी सिर्फ एक ही रेखा को देख के भाविस्यवानी नहीं होती है, अन्य रेखाओं का अध्ययन भी जरुरी होता है.


जानिए भाग्य रेखा को और इसके जीवन में प्रभाव, क्या करे अगर भाग्य साथ न दे, जानिए हाथ देखने के कुछ तरीके.

Dimaag Rog Aur Upchaar

दिमाग के रोग और उपचार

, नींद नहीं आती क्या करे, दिमागी ताकत कैसे बदाये, how to increase mind power, Mind disease and solutions.
dimag rog aur jyotish ke nushkhe
Dimaag Rog Aur Upchaar

1.चक्कर बहुत आते हैं क्या करे?

समाधान:

  • अगर पेट में गड़बड़ी के कारण चक्कर आते है तो आधे गिलास पानी में निम्बू निचोड़कर पिये लाभ होगा. 
  • २५ ग्राम मुनक्का को देशी घी में सेंककर सेंधा नमक मिला के खाने से लाभ होता है. 
  • गर्मियों के चक्कर से आराम हेतु आंवले का शरबत पीना चाहिए इससे बहुत लाभ होता है.

2. दिमागी ताकत को कैसे बढाये ?

समाधान:

  • रात को सोने से पहले 5 बादाम भिगो दे प्रातः काल खाली पेट बादाम को बारीक करके घी में  सेके और मिश्री मिला के खा ले, इसके बाद जल न पियें लाभ होगा. 
  • सुखा धनिया, खस खस और मिश्री को बराबर मात्रा में मिला के भर के रख ले. रोज दो टाइम भोजन के बाद जल से 1 चम्मच लिया करे . इससे चमत्कारी लाभ मिलेगा. 

3.नींद नही आती है क्या करे?

समाधान:

  • रात को सोने से पहले हाथ पैर अच्छी तरह से ठन्डे पानी से धो ले फिर सरसों के तेल से तलवे पर मालिश करे फिर सोयें लाभ होगा.
  • रात को सोने से पहले आँखों में गुलाब जल डालने से भी बहुत लाभ होता है.
  • नहाने के समय सर पर ऊपर से 1 धार से जल डाले थोड़ी देर तक , इससे बहुत से मानसिक रोगों में लाभ होगा.
  • इसी के साथ रोजाना कम से कम ३० मिनट ध्यान करना भी अनेक मानसिक रोगों का रामबाण इलाज है.
  • साथ ही ज्योतिष को अपनी कुंडली दिखवा के सही रत्न और अन्य उपाय प्राप्त करे.



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Siddha Yantron Ke Vibhinn Prakaar | Types of Siddha Yantra

सिद्ध यंत्रों के विभिन्न प्रकार, कब कौन सा यन्त्र प्रयोग करे, types of yantra, when to use which yantra.

पहले के लेखों में हमने देखा है की किस प्रकार से सिद्ध यन्त्र हमारे लिए लाभदायक है. अब हम देखेंगे की कौन कौन से मुख्य यन्त्र हैं और उनसे कैसे सफलता हासिल की जा सकती है.

ये सिद्ध यन्त्र दशकों से जानकारों द्वारा स्तेमाल किये जा रहे हैं . यहाँ पड़कर आप निर्णय कर सकते हैं की कौन से यन्त्र आपके लिए लाभ दायक हो सकते हैं.
kaun sa yantra prayog kare jyotish anusar
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सिद्ध यंत्रो का प्रयोग वास्तु दोष निवारण के लिए किया जा सकता है, ग्रह बाधा हटाने के लिए किया जा सकता है, काले जादू को हटाने के लिए किया जा सकता है.
सिद्ध यंत्रों को स्तेमाल करके देव और देवियों की कृपा भी आकर्षित कर सकते हैं. अतः हम कह सकते हैं कि हर प्रकार की सफलता के लिए और विकास के लिए सिद्ध यन्त्र बहुत लाभदायक सिद्ध होते हैं. इनके रहस्य को समझने का सबसे अच्छा तरीका होता हैं इनको सही समय, सही तारीख और सही दिन में स्थापित करना.

यहाँ पर आपके जानकारी के लिए शक्तिशाली यंत्रो की जानकारी दी जा रही है :

  1. श्री यंत्र : -जैसा की नाम ही बता रहा है कि इसका प्रयोग श्री को आकर्षित करने के लिए किया जाता है मतलब धन, वैभव, लक्ष्मी जी की कृपा आदि . अगर कोई व्यक्ति लगातार इस यन्त्र को स्तापित करके पूजा अर्चना करता है तो ये निश्चित है की धन, वैभव, स्वस्थ्य, सम्पन्नता उसके घर में निवास करेंगी.श्री यन्त्र विभिन्न प्रकार के धातुओं में बनाए जाता हैं जैसे तम्बा, चांदी , सोना, पारद , स्फटिक, भोज पत्र आदि . अच्छे ज्योतिषी से संपर्क करके सिद्ध श्री यन्त्र को हासिल किया जा सकता है.
  2. कालसर्प :ये यन्त्र कालसर्प दोष से निजात दिलाता है. इसी के साथ ये बुरी शक्तियों से भी साधक की रक्षा करता है. कालसर्प योग के कारण जीवन में संघर्ष बहुत बढ जाता है . असफलता के कारण व्यक्ति को डिप्रेशन भी होता है. अतः इनसे बचने के लिए कालसर्प यन्त्र सिद्ध करवाके स्थापित करना चाहिए और रोज उसके सामने पूजा करना चाहिए. इससे साधक को बहुत फायदे होते हैं.
  3. बगलामुखी यन्त्र:अगर कानूनी अड़चने आगे बढने नहीं दे रही हैं, शत्रुओं के कारण धन हानि , मान हानि हो रही है, कोई काम नहीं बन रहे हैं. शत्रु काले जादू का स्तेमाल कर रहा है तो सिद्ध बागला मुखी यन्त्र को स्थापित करके पूजा करना ठीक रहता है. इसको अगर वाहनों में रखा जाए तो बुरी शक्तियों से वहां की रक्षा होती है.
  4. कुबेर यन्त्र:धन के अधिपति देवता है भगवान् कुबेर. अगर आपको कुबेर देवता की कृपा मिल जाए तो समाज लीजिये की धन की कमी आपको आ ही नहीं सकती. दशों दिशाओं से धन वर्षा हो सकती है. धन के देवता कुबेर को प्रसन्न करने के लिए सिद्ध कुबेर यन्त्र के सामने कुबेर साधना करने का विधान है. इससे व्यक्ति धनी होता है, सुखी होता है, भौतिक जीवन के सारे सुख भोग सकता है. कुबेर यन्त्र की स्थापना तिजोरी में, व्यापारिक स्थल में , ऑफिस आदि में करना चाहिए. दीवाली, नवरात्री ग्रहण काल, पुष्य नक्षत्र आदि में इसकी सिद्धी होती है और स्थापित किया जाता है.
  5. वशीकरण यन्त्र:जो लोग प्रेम पाना चाहते है, जो दुसरो को आकर्षित करना चाहते हैं, जो समाज में अपना प्रभाव बढाना चाहते है उनके लिए वशीकरण साधना काफी लाभदायक सिद्ध होती है. अपने मन पसंद साथी के साथ सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए इस यन्त्र की साधना की जाती है.
  6. वास्तु दोष निवारक यन्त्र:अगर आपके जीवन में वास्तु के कारण संकट है और तोडना संभव नहीं है तो ऐसे में वास्तु दोष निवारक यन्त्र आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे घर से बिमारी दूर होती है, गृह क्लेश दूर होता है. सुख, सम्पन्नता का आगमन होता है. इस यन्त्र को घर पर, ऑफिस में, बिल्डिंग में, कमरे में, प्लाट में स्थापित किया जा सकता है . परतु क्रियानो का ध्यान अवश्य रखना चाहिए.
  7. मंगल यन्त्र:इस यन्त्र की स्थापना और पूजा तब करना चाहिए जब मंगल के कारण परेशानियां आ रही हो, मंगल के कारण अगर विवाह में परेशानी आ रही हो, भूमि सम्बन्धी कार्यों में दिक्कत आ रही हो, वैवाहिक जीवन में परेशानी आ रही हो आदि. मंगल यन्त्र की पूजा से मंगल देवता की कृपा को पाया जाता है. 
  8. व्यापार वृद्धि यन्त्र:अगर आप व्यापारी है और अपने कार्य को बढाना चाहते हैं तो ये यन्त्र आपकी इच्छा को पूरी कर सकता है . व्यापार की बाधाओं को हटा करके ये सुख और सम्पन्नता को आपके जीवन में लाने मई सहायक होगा.
  9. महामृत्युंजय यन्त्र:अगर आप काल के देवता की कृपा को पाना चाहते हैं तो इस यन्त्र को स्थापित करके पूजा करे, इससे आपको बहुत लाभ होगा. असमय मृत्यु का भय अगर आपको सता रहा है, बिमारी पीछा नहीं छोड़ रही है, तो इस यन्त्र की शक्ति को अजमाना चाहिए. रोग निवारण में इस यन्त्र का अचूक प्रभाव है. सही मंत्रो के साथ और सही विधि से महामृत्युंजय साधना करना चाहिए.
  10. काम यन्त्र:ये यन्त्र आपके व्यक्तिगत जीवन की अभिलाषाओं को पूरी करने में सक्षम है. जीवन साथी के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने हेतु, शारीरिक कमजोरी को दूर करने हेतु, आतंरिक शक्तियों को बढाने हेतु कामदेव की साधना अत्यंत लाभदायक होती है.
  11. कार्य सिद्धी यन्त्र:यदि आप किसी विशेष कार्य को सिद्ध करना चाहते हैं , अगर आपमें आत्मविश्वास की कमी है , अनजानी बाधाओं से दर लग रहा है तो कार्य सिद्धी यन्त्र का प्रयोग आपके लिए लाभदायक है.
  12. बालगोपाल यन्त्र:संतान सम्बंधित समस्याओं से छुटकारे के लिए सिद्ध बालगोपाल यन्त्र की पूजा बहुत लाभ दायक होती है. इससे संतान होने में सहायता मिलती है , संतान स्वस्थ , सुन्दर और गुणी होती है.
  13. नवग्रह यन्त्र:नौ ग्रहों की कृपा प्राप्त करने हेतु इस यन्त्र की स्थापना की जाती है , ये तब ज्यादा लाभ दायक है जब कुंडली में अधिकतर ग्रह खराब हो और जीवन संतोष प्रद नहीं चल रहा हो.
तो अब आपको बहुत से यंत्रो के बारे में जानकारी मिल गई होगी , उम्मीद है आप इसका लाभ उठा पाएंगे.



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Kuch Prabhaavshaali Totkay Jyotish Mai

कुछ प्रभावशाली टोटके, कुछ आसान टोटके से बनाए जीवन को सुखी, ज्योतिष द्वारा बनाए अपने जीवन को सफल. 
some totke in hindi to remove problems of life, jyotish and totke for success
Kuch Prabhaavshaali Totkay Jyotish Mai
कई बार ऐसा होता है की हम कई समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं अचानक और उस समय हम ये भी समझ नहीं पाते है की क्या करे बचने के लिए. शोध ये बताते हैं की किसी भी समस्या के पीछे कही न कही नकरात्मक उर्जाव का असर होता है. अतः ऐसे समस्याओं से बचने के लिए टोटको का प्रयोग किया जाता है. टोटके से डरने की जरुरत नहीं है. ज्योतिष से जानकारी लेके टोटके करने पर फायदा होता है. श्रद्धा और विश्वास से अगर टोटको को लगातार किया जाए तो निश्चित ही फायदा होता है.

आइये जानते हैं कुछ टोटके समस्याओं से छुटकारे के लिए:

पति के अचानक आये गुस्से से कैसे मुक्ति पायें?

ऐसा देखा गया है की कभी कभी पति को बहुत तेज गुस्सा आ जाता है जिसके कारण घर में कलह का वातावरण उत्पन्न हो जाता है. इस गुस्से को ठंडा करने के लिए जितनी पति की उम्र हो उतने मिर्ची के बीज लेले और उन्हें आग में डाल दे. इससे धीरे धीरे पतिदेव का गुस्सा कम होने लगेगा.

गलतफहमियो से या फिर घृणा से कैसे मुक्ति पाए?

साधारणतः ऐसा देखा गया है की घर में सदास्य एक दुसरे से जलन रखते हैं , घृणा करते हैं और इसके कारण परिवार का वातावरण ख़राब होता है. गलतफहमियां अगर कम न हो तो परिवार में गंभीर समस्याए उत्पन्न हो सकती है. परिवार में शान्ति बनाए रखने के लिए ये टोटका करना चाहिए.
७ गोमती चक्र ले, ७ मोती शंख ले, ७ लघु नारियल ले. सभी को पीले कपड़े में रखे. अब इस पोटली को सभी सदस्यों के ऊपर से 21 बार उतारे और फिर इस पोटली को होलिका में जला दे. इससे घर में शांति का माहोल उत्पन्न होने लगेगा. ये टोटका होलिका दहन की रात्रि को होता है.

किसी गंभीर रोग के डर से कैसे मुक्ति पायें?

अगर किसी बिमारी से परेशान हो और डर गहराता जा रहा हो तो निम्न टोटका फायदेमंद हो सकता है. इस टोटके को अमावस्या, शनिवार या मंगलवार की रात्री को १२ बजे करने से लाभ होता है. इसके लिए एक मिटटी का सकोरा ले, उसमे एक कच्छा अंडा रखे, १ लड्डू, २ सिक्के, रखे और उसपर सिन्दूर छिड़क दे. अब इस सकोरे को बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उतारे और किसी चौराहे पर छोड़ के आ जाएँ. वापस आके हाथ मुंह धो के गूगल की धुप दे. इससे अगर कोई नकारात्मक उर्जा का असर होगा तो ख़त्म होगा, बिमारी से मुक्ति में सहायता मिलेगी.
कुछ प्रभावशाली टोटके, कुछ आसान टोटके से बनाए जीवन को सुखी, ज्योतिष द्वारा बनाए अपने जीवन को सफल.

किसी भी समस्या से मुक्ति के लिए टोटका जानिए?

सुबह ब्रह्म महुरत में उठे और छत पर जाए, दक्षिण की तरफ मुंह करके दोनों हाथो को फैला कर दिव्य उर्जाव से परार्थना करिए की आपको समस्याओं से मुक्ति दे. ४० दिन लगातार प्रयोग करने से काफी अच्छे परिणाम मिलेंगे. पढ़िए घर से दरिद्रता दूर करने के उपाय |

किसी भी कन्या के सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कौन सा टोटका करे?

विदाई के समय कन्या को एकांत कमरे में ले जाए. एक लोटे में जल भरे और उसमे हल्दी का पाउडर डाले और कुछ हल्दी की गांठ डाले. अब उसे कन्या के ऊपर से 21 बारे लोटे को उतारे और किसी पौधे या पेड़ में डाल दे. इस टोटके को करने से कन्या के वैवाहिक जीवन सुखी होता है.

इंटरव्यू में सफलता के लिए क्या करे ?

जब भी इंटरव्यू में जाए तो ये टोटका करे --- एक मुट्ठी काली उरद की दाल ले और चौखट पे खड़े होक दाल को अपने सर पे डाले. किसी को बोले की आपके जाने के १५ मिनट बाद सारे दालो को उठा के बहार कही फेक दे. इससे इंटरव्यू में सफलता के योग बढ़ जायेंगे.

किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्यो की सफलता के लिए क्या करे?

जब भी किसी महत्त्वपूर्ण कार्यो को करने के लिए जाए तो सबसे पहले भगवान् गणेशजी के सूंड की पूजा करके निकले , इससे बाधाओं का नाश होगा और कार्य में सफलता मिलेगी.

Kaise Kare Shukra Ko Majboot | Shukra astrology in Hindi

क्या है शुक्र ग्रह, शुक्र ग्रह का मानव जीवन में प्रभाव, क्या करे की शुक्र मजबूत हो, how to increase the power of Venus or shukra, benefits of shukra or Venus.
shukra grah in hindi jyotish
Shukra astrology in Hindi
  • शुक्र को अंग्रेजी में Venus कहते हैं. ये सौर्य मंडल में सबसे चमकीला ग्रह है.
  • शुक्र एक ऐसा ग्रह है जो की भौतिक जीवन को सुख संपत्ति से भर देता है. शुक्र ग्रह के अच्छा होने पर व्यक्ति को प्रेम संबंधो में भी सफलता मिलती है, वैवाहिक जीवन भी आनंद से गुजरता है और इसी के साथ समाज में भी उसे बहुत सम्मान मिलता है अतः शुक्र का कुंडली में मजबूत और अच्छा होना जरुरी है. पढ़िए सेक्स जीवन को मजबूत करने के उपाय .
  • दूसरी तरफ अगर शुक्र ग्रह खराब हो या कमजोर हो तो व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत जीवन को सुखी करने के लिए बहुत सघर्ष करना होता है. प्रेम संबंधों में भी उसे सफलता नहीं मिलती है, सम्मोहन शक्ति के अभाव में हर कार्य में उसे कुछ ज्यादा मेहनत करना होता है. 
  • इसके अलावा शुक्र वीर्य का करक भी है, गुप्तांगो पर भी इसका प्रभाव रहता है. अगर किसी का शुक्र पीड़ित हो तो ऐसा व्यक्ति किसी न किसी कारण से गुप्त रोगों का शिकार हो जाता है. अतः सावधानी बरतनी चाहिए. 
  • अच्छा शुक्र व्यक्ति को खूब ठाट बाट देता है वही दूसरी और ख़राब शुक्र, नीच का शुक्र, कमजोर शुक्र जीवन में रोग, शोक और शंघर्ष देता है. पढ़िए कैसे करे शुक्र को खुश ज्योतिष अनुसार>>
अब अगर शुक्र कुंडली में कमजोर हो और उसके कारण जीवन में परेशानी आ रही हो तो अच्छा है की किसी अच्छे ज्योतिषी द्वारा परामर्श लिया जाए. 
बहरहाल यहाँ पर मै आपके जानकारी के लिए कुछ तरीके बता रहा हूँ जिससे की शुक्र को मजबूत किया जा सकता है.

जानिये अंक 6 के रहस्य को 

कैसे करे शुक्र को मजबूत :

  1. हीरा धारण करके व्यक्ति वीनस या शुक्र के बल को बड़ा सकता हा. 
  2. चमकीले कपडे धारण करके भी शुक्र को बढाया जा सकता है.
  3. शुक्र के मंत्रो का जप अगर विधि पूर्वक किया जाये तो भी शुक्र की शक्ति को बढाया जा सकता है.
  4. विशेष सिद्ध शुक्र कवच को अगर धारण किया जाए तो भी बहुत लाभ होता है.
  5. ब्रहमचर्य का पालन अगर किया जाये तो निश्चित ही शुक्र बलवान होता है.
  6. कन्याओ का पूजन कर आशीर्वाद लेने पर भी शुक्र का बल मिलता है.
जानिये आपके कुंडली में क्या कह रहा है शुक्र, कैसे प्राप्त करे सफलता ज्योतिष की सहायता

क्या है शुक्र ग्रह, शुक्र ग्रह का मानव जीवन में प्रभाव, क्या करे की शुक्र मजबूत हो, how to increase the power of Venus or shukra, benefits of shukra or Venus.

Gestures and There Meanings | इशारों की भाषा को सीखिये

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साधारणतः हम सभी रोजमर्रा के जीवन में बहुत प्रकार के भाषा का स्तेमाल करते हैं जिनमें से एक होती है इशारों की भाषा, हम बहुत कुछ ऐसा करते हैं जिनके बारे में हमें भी पता नहीं होता की इसका दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. 
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 इशारों की भाषा को सीखिये

आइये जानते हैं कुछ ख़ास शारीरिक प्रतिक्रिआओ का मतलब :

  1. अगर कोई व्यक्ति अपने हाथों को बार बार छिपाता है, कभी पैरों के बीच में, कभी पीछे आदि इसका मतलब है की वो कुछ छिपा रहा है, उससे बात करने पर आपको संतुष्टि नहीं हो सकती है.
  2. अगर कोई बार बार नाखुनो को रगड़ रहा है तो ये उसके आत्मविश्वास की कमी को दिखता है.
  3. अगर आप किसी से बात कर रहे है और वो सर झुका के सुन रहा है इसका मतलब है की वो आपकी बातों को ध्यान से सुन रहा है , ऐसा तब भी होता है जब कोई छोटा हमारी बातों को सुनता है.
  4. अगर बार बार कोई अपने होटों को चाट रहा है तो इसका मतलब है की उसे ठीक नहीं लग रहा है, कोई चिंता है उसके दिमाग में.
  5. अगर कोई बेवजह मुस्कुरा रहा है तो इसका मतलब है की वो चापलूसी कर रहा है, वो आपसे कोई काम निकलना चाहता है. 
  6. अगर कोई बार बार माथा रगड़ रहा है इसका मतलब है की कोई विशेष प्रकार की चिंता उसे सता रही है.
  7. अगर कोई टेड़े खड़े होक मुस्कुरा रहा है तो ये आपके लिए निमंत्रण है ,सामने वाला चाहता है की आप उससे संपर्क करे. 
  8. अगर आँखें बंद करके कोई खड़ा है इसका मतलब उसका दिमाग अभी कहीं और है. 
  9. बार बार इधर उधर देखना भी अस्थिर दिमाग को प्रदर्शित करता है.
इस प्रकार इशारों की भाषा को जानकार आप अपने जीवन को सफल बना सकते हैं.

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Jyotish Lesson 1 In Hindi

||श्री गणेशाय नमः ||ॐ गुरु ॐ ||

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ऐसा कहा जाता है की ज्योतिष वेदों की आँखे है इसी कारन इस विषय का बहुत महत्त्व है. वैदिक ज्योतिष भारतीय संस्कृति का एक मुख्य भाग है. ज्योतिष द्वारा हम हमारे जीवन मे पड़ रहे ग्रहों के प्रभावों को जान सकते हैं, हम अपने जीवन के बारे मे अनेक बातो को जान सकते हैं.
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|| वक्र तुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरुमे देवो सर्व कार्येशु सर्वदा ||
पूरी दुनिया मे ज्योतिष का अपना ही प्रभाव है, सारी दुनिया मे लोग वैदिक ज्योतिष को सीखना चाहते हैं और और बहुत से जिज्ञासु तो दूर देश की यात्रा करके भारत आते हैं इसे सीखने के लिए. ज्योतिष संसार के पाठक गण अब जान पायेंगे ज्योतिष को और ज्यादा क्यूंकि यहाँ पर अब शुरू कर रहे है ज्योतिष सीखने के लिए फ्री पाठ. अलग अलग अध्यायों मे अलग अलग विषयो को शामिल गिया जाएगा.

अगर आपको ज्योतिष मे दिलचस्पी है, अगर आप ज्योतिष सीखना चाहते है, अगर आप वैदिक ज्योतिष को जानना चाहते है तो ये ज्योतिषीय पाठ आपकी मदद कर सकते है.

राशि नक्षत्र और ग्रहों की गणना के द्वारा उनकी स्थिति का अध्ययन करके आने वाले समय का ज्ञान भविष्य का आभास प्राप्त किया जा सकता है| इस प्रकार ज्योतिष एक शुद्ध वैज्ञानिक पद्धति है| संसार के लगभग सभी देशों में इसे स्वीकार किया गया है | इस विद्या के द्वारा किसी भी मनुष्य का भूत भविष्य और वर्तमान जाना जा सकता है |
जन्म कुंडली जन्म के समय की आकाशीय दशा को दर्शाता है और ये भी बताता है की आने वाला समय कैसा होगा | हालांकि ज्योतिष एक जटिल विद्या है परंतु मैंने कोशिश की है कि मेरे ब्लॉग रीडर को आसानी से ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त हो वह भी घर बैठे

वैदिक ज्योतिष क्यों कहते हैं ज्योतिष शास्त्र को ?

चूँकि ज्योतिष की जानकारी वेदों में दी गई है इसीलिए इसे वैदिक ज्योतिष कहा जाता है |ऋग्वेद में ज्योतिष से संबंधित 30 श्लोक हैं। यजुर्वेद में 44 और अथर्ववेद में 162 श्लोक मिलते हैं | हमारे 18 ऋषियों ने ज्योतिषशास्त्र को बढाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । इनके नाम है मरिची, मनु, अंगीरा, पुलस्य, लोमश, चवन, यवन, भृगु, शौनक्य , सूर्य, पितामह, व्यास, वशिष्ठ, अत्रि, पराशर कश्यप, नारद, गर्ग ।

कुछ बातो को हमेशा याद रखना चाहिए :

  1. ज्योतिष सीखने वाले को धैर्य रखना जरुरी है क्यूंकि ज्योतिष के सिद्धांत आसान नहीं होते है अध्ययन के साथ साथ शोध जरुरी है.
  2. इस विषय पर भरोसा होना चाहिए.
  3. उपरी शक्तियों पर भी भरोसा होना चाहिए.
  4. आडम्बर की जरुरत नहीं है.
  5. कोई पाठ समझ मे न आने पर उसे बार बार पढना चाहिए, धीरे धीरे चीजे साफ़ होती है.
  6. जीवन भर सीखते रहिये.
वेदों मे ज्योतिष का बहुत वर्णन प्राप्त होता है और इसे तो वेदों की आँखे कहा जाता है, ज्योतिष हमे शक्ति देता है की हम ग्रहों के प्रभाव को जान सके, जीवन के रहस्यों को समझ सके.
  • क्या आप जानना चाहते है की ज्योतिष कितने भागो मे बंटा है ?
  • क्या आप सिद्धन, होरा और संहिता के बारे मे जानना चाहते हैं ?
  • क्या आप जानना चाहते है की किसी ज्योतिष से कैसे परामर्श लेना चाहते है.
Jyotish Kya Hai Janiye Bhag 1 Mai, क्या है ज्योतिष का महत्त्व

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आज के युग मे ज्योतिशो की एक फ़ौज सी कड़ी हो गई है पुरे विश्व मे परन्तु इसे सीखना इतना भी सरल नहीं है जितना की ये दीखता है. सिर्फ वही ज्योतिष सही मार्ग दिखा सकता है जिसके पास अच्छा अनुभव हो और जिसे इस विषय का गहराई से अनुभव हो. आज के युग मे लोग इसे सिर्फ धन कमाने के लिए सीख रहे हैं और इसिलिये ज्यादा गहराई से नहीं जान पाते हैं. न ही वो खुद इस विद्या का लाभ ले पाते हैं और न ही दुसरे इससे लाभान्वित हो पाते हैं.
इसी कारण लोगो का विश्वास इससे हट रहा है. ज्योतिष एक पवित्र विषय है और अगर इसे सही तरीके से प्रयोग मे लिया जाए तो कोई भी सुख और शांति से जीवन जी सकता है. हमारे जीवन के हर पहलु पर ग्रहों का प्रभाव होता है इसिलिये ज्योतिष के बिना हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं.

आज के तारीख मे एक और अजीब सा दृश्य नजर आ रहा है की आज लोग ज्योतिष से संपर्क काले जादू के लिए करते हैं, वशीकरण प्रयोग के लिए करते हैं, गलत प्रयोगो को करवाने हेतु करते है जो की ज्योतिष का विषय नहीं है, इन सब से समाज मे एक गलत धारणा फ़ैल रही है.

ज्योतिष के सही स्तेमाल को समझना चाहिए तभी इस विषय का सही लाभ उठाया जा सकता है. इस ब्लॉग मे हम ज्योतिष को सही तरीके से समझने का प्रयास करेंगे.

आइये अब जानते हैं कुछ ज्योतिष को:


वैद भारतीय संस्कृति की आत्मा है, हर क्रिया के पीछे एक विज्ञान होता है और इसका वर्णन वेदों मे मिलता है. पूरा ज्योतिष वेदों के नेत्र कहलाते हैं, इसके माध्यम से हम भूत, वर्त्तमान और भविष्य के बारे मे बहुत कुछ जान सकते हैं. ज्योतिष के द्वारा जीवन मे सही निर्णय लेने मे मदद मिलती है.

भारतीय ज्योतिष के ३ भाग है :

  1. सिद्धांत- इसमे ग्रहों, सितारों और गणित का वर्णन है.
  2. संहिता – इसमे सितारों , ग्रहों का धरती पर क्या असर होता है, इसका वर्णन है, इसमे गणित नहीं है.
  3. होरा – इसमे भाविस्यवानी, महुरत, प्रश्न काल आदि का वर्णन मिलता है.
जिनको इन सभी का ज्ञान हो वही पूर्ण ज्योतिष कहलाता है. आज कोई सिद्धांत के जानकार मिलते हैं , कोई संहिता के और कई होरा के जानकार मिलते हैं.

जो लोग ज्योतिष सीखना चाहते हैं उनमे पवित्रता, धैर्य, होना आवश्यक होता है. जो लोग कुटिल होते हैं, हमेशा जल्दी मे रहते हैं, धोखा देने की प्रवृत्ति रखते हैं, उनके लिए ये विषय ठीक नहीं है.

ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है की कलयुग मे लोग धोखेबाजो द्वारा लुट रहे है. अतः ज्योतिष का थोडा ज्ञान होना जरुरी है जिससे की धोखो से बचा जा सके.

हालांकि एक सही ज्योतिष को ढूँढना बहुत मुश्किल है परन्तु फिर भी नामुमकिन नहीं है, कुछ लोग लगातार इस विषय मे कार्य कर रहे हैं.

जहा चाह होती है वहां राह होती है

एक सही ज्योतिष से कैसे मर्दर्शन लेना चाहिए ?

अगर ज्योतिष से मार्गदर्शन लेना ही है तो सबसे पहले उस विषय पर भरोसा होना चाहिए. उसके बाद सही व्यक्ति को ढूँढना चाहिए और फिर उनसे सही मार्गदर्शन हेतु प्रार्थना करना चाहिए. ये भी जरुरी है की मार्गदर्शक को दक्षिणा और भेट देकर उन्हें प्रसन्न किया जाए.

अगले jyotish lesson 2 में हम देखेंगे की --
  1. वैदिक महीनो के बारे में जिसका जिक्र हमे हिन्दू पंचांग में मिलता है |
  2. हम देखेंगे की ९ ग्रह कौन से है और इनकी हेसियत क्या है ?
  3. ग्रहों का सम्बन्ध कौन से तत्त्व से हैं ?
  4. उत्तरायण और दक्षिणायन क्या होते हैं?

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Jyotish lesson in Hindi Intro, Learn vedic astrology in hindi online by one of the best jyotish in India, कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियां ज्योतिष के बारे मे, कैसे मार्गदर्शन ले अच्छे ज्योतिष से.

Magical Power of Shree Yantra | श्री यन्त्र की चमत्कारी शक्ति |

श्री यन्त्र क्या है?, श्री यन्त्र की शक्ति को जानिए, श्री साधना के लिए आसान मंत्र, श्री यन्त्र को पूजने के लिए आसान उपाय, श्री यन्त्र के फायदे, श्री यन्त्र रहस्य, panchopchar easy way, shree yantra details in hindi.

श्री यन्त्र की रचना मानव जाती के लिए एक वरदान है. हमारे भारत के महान ऋषि मुनियों की अद्भुत रचना है श्री यन्त्र. एक सिद्ध श्री यन्त्र अगर किसी जगह स्तापित कर दिया जाए तो वो अपने आसपास के जगह को भी उर्जा से परिपूर्ण कर देता है.
कैसे सिद्ध करे श्री यन्त्र ज्योतिष सलाह
श्री यन्त्र की चमत्कारी शक्ति 
श्री यन्त्र को यंत्रों का रजा कहा जाता है ,इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए ये एक सशक्त माध्यम है. इसी साधना से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति निश्चित ही प्राप्त होती है.
अगर कोई नियम से रोज श्री यन्त्र की पूजा करे तो धन, समपन्नता , मान – सम्मान, ख़ुशी, सुख, शान्ति सब कुछ आदमी के कदम चूमेगी, इसमे कोई शक नहीं है.
श्री यन्त्र के अभिषेक का जल ग्रहण करने पर असाध्य कष्टों से भी मुक्ति संभव है.

श्री यन्त्र के बारे में कुछ विशेष जानकारियाँ पढिये:

  1. इस यन्त्र में सम्पूर्ण ब्रहमांड समाया हुआ है.
  2. इसके अनेक प्रकार है जैसे ताम्बे के श्री यन्त्र, चांदी के श्री यन्त्र, सोने के श्री यन्त्र, सुमेरु श्री यन्त्र, कछाप श्री यन्त्र आदि. 
  3. अगर कहीं पर भी अभिमंत्रित श्री यन्त्र की स्थापना कर दी जाए तो वहां पर सम्पन्नता अवश्य आ जाएगी. 
  4. इसे यंत्रों के राजा होने का ख़िताब मिला है. 
  5. किसी भी प्रकार की मनोकामना को पूरा किया जा सकता है इसकी अराधना से.
  6. ये ऊर्जा का भण्डार है.

कैसे करें श्री यन्त्र की पूजा :

पहले श्री यन्त्र की पंचोपचार पूजा करे फिर निम्न मंत्र का जप करे—
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये
प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मये नमः ”

पंचोपचार पूजा की विधि:

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पहले एक पूजित यन्त्र हासिल करे फिर उसे एक लाल कपडे पर रखे और पूजा शुरू करे-
  1. एक हीना इत्र से भीगा के रुई का फोहा यन्त्र के पास रखे.
  2. फिर लाल पुष्प जैसे गुलभ, कमल आदि अर्पित करे.
  3. गूगल या साम्ब्रानी धुप दे .
  4. दीपक दिखाए .
  5. खीर का नैवेद्य अर्पित करे.
पूजन के बाद महालक्ष्मी का विशेष मंत्र का जप करे ज्यादा से ज्यादा और हो सके तो श्री सूक्त कपाट भी करे. इससे लाभ शीघ्र होगा.

कुछ रहस्यमय तथ्य जानिये :

  1. ब्रहमांड पुराण के हिसाब से श्री यन्त्र में सारे देवी और देवता का निवास होता है.
  2. जहां पर एक उर्जित श्री यन्त्र रखा जाता है वह न की सिर्फ उस जगह को पवित्र करताहै बल्की आस पास की जगह को भी उर्जावान कर देता है.
  3. एक शक्तिशाली यन्त्र घर को बुरी शक्तियों से भी बचाता है.
  4. सफलता के मार्ग खोल देता है.
  5. एक जानकारी के हिसाब से अगर निम्न alloy से श्री यन्त्र को बनाया जाए तो ईस्ट सिद्धी अवश्य होती है- सोना 10%, ताम्बा 12%, चांदी 16 % .
  6. खंडित श्री यन्त्र नहीं रखना चाहिए, टुटा हुआ श्री यन्त्र भी दुर्भाग्य लाता है,
पढिये सम्बंधित लेख:
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Bhartiya Jyotish Aur Mahine Bhag 2

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हम ज्योतिष सीखिए भाग -1 में ये देख चुके है की ज्योतिष के महत्त्व क्या है, इसे वैदिक ज्योतिष क्यों कहते हैं, इसके ३ भाग क्या है आदि |

अब दूसरे पाठ मे हम जानेंगे -
  1. वैदिक महीनो के बारे में जिसका जिक्र हमे हिन्दू पंचांग में मिलता है |
  2. हम देखेंगे की ९ ग्रह कौन से है और इनकी हेसियत क्या है ?
  3. ग्रहों का सम्बन्ध कौन से तत्त्व से हैं ?
  4. उत्तरायण और दक्षिणायन क्या होते हैं?

इसके अलावा अगर आप 9 ग्रहों के बारे मे जानना चाहते हैं तो भी आप यहाँ जान सकते हैं. ग्रहों को कौन सी उपाधि प्राप्त है इसे भी आप इस पाठ मे जानेंगे अर्थात कौन सा ग्रह राजा है, कौन मंत्री है आदि.
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कुंडली को पढने के समय ग्रहों का तत्त्वों से सम्बन्ध भी ध्यान रखना पड़ता है. इसे भी आप यहाँ जान पायेंगे, ५ तत्त्व होते हैं वायु, अग्नि, प्रथ्वी, आकाश और जल, हर ग्रह का सम्बन्ध किसी न किसी तत्त्व से होता है. इसके आधार पर उसका प्रभाव भी होता है.

सूर्य पुरे साल मे १२ राशियों से गुजरता है और इसी के आधार पर उत्तरायण और दक्षिणायन होता है, इसको भी हम जानेंगे इस अध्याय मे. महुरत निकालने मे इनकी जरुरत पड़ती है.

ज्योतिषी सीखिए के अध्याय 2 को पढने के बाद आप जान पायेंगे १२ महीनो के बारे मे, महीनो के वैदिक नाम, ग्रह तत्त्वो का सम्बन्ध, उत्तरायण और दक्षिणायन.

ये एक मजेदार विज्ञान है जिससे जितना जाना जाता है रस्य खुलते जाते हैं.


पिछले पाठ मे हमने देखा ज्योतिष क्या है और इसका महत्त्व क्या है. इस ज्योतिष के पाठ मे हम जानेंगे महीनो के बारे मे और ग्रहों से सम्बंधित कुछ जानकारियां.

चन्द्र मॉस के हिसाब से १२ महीने होते हैं जिसकी गणना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से की जाती है.

You Tube में देखिये 

सूर्य मास के हिसाब से भी १२ महीने होते हैं जिसकी गणना मेष संक्रांति से होती है अर्थात जब सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है उस समय से.

आइये अब जानते है १२ महीनो के नाम :

चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठा, आशाद, श्रवण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन.

आइये अब जानते हैं इन महीनो के वैदिक नाम :

मधु, माधव, शुक्र, शुची, नभ, नमस्य , इश, उर्ज, सह, शस्य, तप तपस्या

आइये अब जानते हैं कुछ ग्रहों के बारे मे:

ज्योतिष के हिसाब से 7 तो मुख्य ग्रह है और 2 छाया ग्रह है, इनके नाम है –
सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू, केतु .

आइये अब जानते हैं की कौन से ग्रह की क्या हेसियत होती है:

  • सूर्य को ग्रहों के रजा के रूप मे मान्यता प्राप्त है.
  • चन्द्र को रानी के रूप मे लिया जाता है.
  • मंगल को सेनापति के रूप मे जानते हैं.
  • बुध को कुमार के रूप मे जानते हैं.
  • गुरु और शुक्र को मंत्री का पद प्राप्त है.
  • शनि को नौकर के रूप मे लिया जाता है.
व्यक्ति का व्यक्तित्त्व इस बात पर निर्भर करता है की जन्म के समय कौन से ग्रह का बल ज्यादा है. उदाहरण के लिए सूर्य और चन्द्र का बल ज्यादा होने पर व्यक्ति के अन्दर राजशाही अंदाज मे जीने की ख्वाहिश होती है. शक्तिशाली शनि व्यक्ति को अच्छा, ईमानदार और शक्तिशाली काम करने वाला बनता है, मंगल व्यक्ति को स्वतंत्र जीवन जीने की शक्ति देता है, अच्छा बुध व्यक्ति को राजकुमार जैसे जीवन दे सकता है.अतः भविष्यवाणी के समय इन सब चीजो को ध्यान मे रखना होता है.

आइये अब जानते हैं की ग्रहों का पांच तत्त्वों से क्या सम्बन्ध है?

  1. सूर्य का सम्बन्ध अग्नि तत्त्व से होता है.
  2. चन्द्र का सम्बन्ध जल से होता है.
  3. मंगल का सम्बन्ध अग्नि से होता है.
  4. बुध का सम्बन्ध प्रथ्वी तत्त्व से होता है.
  5. गुरु का सम्बन्ध आकाश तत्त्व से होता है.
  6. शुक्र का सम्बन्ध जल तत्त्व से होता है.
  7. शनि का सम्बन्ध वायु तत्त्व से होता है.

आइये अब उत्तरायण और दक्षिणायन के बारे मे जाने वैदिक ज्योतिष मे :

हर साल सूर्य १२ राशियों से गुजरता है. सूर्य एक राशि मे करीब १ महीने के लिए रहता है. सूर्य का १२ राशियों मे गुजरने को 2 भागो मे बात सकते है –
  1. जब सूर्य मकर से मिथुन राशी से गुजरता है तो उस समय को उत्तरायण कहते हैं.
  2. जब सूर्य कर्क से धनु राशी तक गुजरता है तो उसे दक्षिणायन कहते हैं.
अब इस jyotish lesson 3 मे हम जानेंगे की-
  1. १२ राशियाँ कौन सी हैं और उनका स्वभाव क्या है, ये हम विस्तार से देखेंगे |
  2. कुंडली मे राशियों के लिए अंक लिखे होते हैं. ज्योतिष उन अंको को देख कर कैसे राशी बता देते हैं.
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वैदिक ज्योतिष मे महीने ज्योतिष सीखिए भाग २, वैदिक ज्योतिष मे १२ महीनो के नाम, ग्रह और तत्त्वों मे सम्बन्ध उत्तरायण और दक्षिणायन को समझे,vedic mahine, 9 grah and there designation as per jyotish, elements related with 9 planets, uttrayan and dakshinayan concept in hindi, jyotish lesson 2.

Jyotish Mai 12 Rashiyo Ko Janiye Bhag 3

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हम jyotish lesson 2 में ये देख चुके है की वैदिक महीनो के बारे में जिसका जिक्र हमे हिन्दू पंचांग में मिलता है , 9 ग्रह कौन से है और इनकी हेसियत क्या है ?, ग्रहों का सम्बन्ध कौन से तत्त्व से हैं ?, उत्तरायण और दक्षिणायन क्या होते हैं? |

अब इस jyotish lesson 3 मे हम जानेंगे की-
  1. १२ राशियाँ कौन सी हैं और उनका स्वभाव क्या है, ये हम विस्तार से देखेंगे |
  2. कुंडली मे राशियों के लिए अंक लिखे होते हैं. ज्योतिष उन अंको को देख कर कैसे राशी बता देते हैं.

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इससे ये भी जान लेते हैं की कौन से भाव मे कौन सी राशि है. उदाहरण के लिए १ अंक मेष राशी को बताता है, ४ अंक कर्क को बताता है, 9 धनु को बताता है, १२ मीन राशी को बताता है आदि. इस पाठ मे आप इनके बारे मे पूर्ण जानकारी पायेंगे.

राशि चक्र मे हर राशी का अपना एक विशेष स्थान है और उसके लिए हम उसके डिग्री का अध्ययन करते हैं. इस पाठ मे हम इसके बारे मे भी पढेंगे.

हर राशी का एक स्वामी होता है जिसके बारे मे जानना भी आवश्यक है अगर कुंडली को पढना है. इससे भी बहुत कुछ पता चल जाता है.

यही नहीं हर राशि का अपना रंग, लिंग और वर्ण भी होता है. इन सभी के बारे मे हम ज्योतिष सीखिए के पाठ ३ मे पढेंगे.

You Tube में देखिये 

हमारा स्वभाव राशि पर निर्भर करता है अतः ज्योतिष राशि को जानकार स्वभाव के बारे मे भी जान जाते हैं. इस पाठ को पढ़कर आप बहुत कुछ इस बारे मे जान जायेंगे.

ज्योतिष मे राशियों का बहुत महत्त्व है क्यूंकि हर व्यक्ति की एक राशी होती है जो की उस व्यक्ति के स्वाभाव को प्रभावित करती है. अतः किसी के राशी को जानकार हम उसके स्वभाव और व्यक्तित्त्व के बारे मे जान सकते हैं.
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आइये जानते है की कैसे जाने किसी के राशी को ?

किसी के राशी को जानने के लिए उसकी कुंडली बनाना जरुरी है, राशी को अंग्रेजी मे zodiac कहते हैं. सबसे पहले ये देखिये की चन्द्रमा कौन से भाव मे बैठा है और वह पे कौन सा अंक लिखा है. हर अंक एक राशी को बताता है. जो अंक चन्द्रमा के साथ होगा वही उस व्यक्ति की राशि होगी. उदाहरण के लिए अगर चन्द्रमा अंक ४ के साथ बैठा हो तो राशी होगी कर्क.

आइये अब जानते है कौन सा अंक कौन से राशी से सम्बन्ध रखता है :

  1. मेष राशी
  2. वृषभ राशि
  3. मिथुन राशी
  4. कर्क राशी
  5. सिंह राशी
  6. कन्या राशी
  7. तुला राशी
  8. वृश्चिक राशी
  9. धनु राशी
  10. मकर राशी
  11. कुम्भ राशी
  12. मीन राशी

आइये अब जानते हैं १२ राशियों के बारे मे विस्तार से :

1-मेष राशी –

  • ये पहली राशी है और १ से 30 डिग्री तक का स्थान राशी चक्र मे इसका होता है. ये भेड़ जैसी दिखती है जिस प्रकार भेड़ लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहता है उसी प्रकार मेष राशी के लोग भी शक्तिशाली होते हैं और उग्रता नजर आ सकते हैं. अगर वातावरण बन जाए तो ये लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे.
  • मेष राशी का स्वभाव बहुत चंचल होता है.
  • मेष राशी का स्वामी ग्रह मंगल है.
  • इससे सम्बंधित रंग लाल है.
  • लिंग है पुरुष
  • इसका निवास स्थान जंगल होता है.
  • मेष राशी से सम्बंधित तत्त्व है अग्नि.
  • वर्ण है क्षत्रिय
  • इसका असर मुख्यतः सर पर होता है और व्यक्ति को निर्भीक, दोस्तों के प्रति इमानदार, गुस्सेल आदि बनता है. इससे व्यक्ति के अन्दर अहंकार भी पैदा होता है. मेष राशी रात को शक्तिशाली होती है.

2. वृषभ राशि :

  • ये वृषभ जैसी दिखती है, राशी चक्र मे इसका स्थान 30 से ६० डिग्री तक होता है.
  • ये राशी स्थिर स्वभाव की होती है और इसका स्वामी शुक्र होता है.
  • इससे सम्बंधित रंग सफ़ेद है और इसका सम्बन्ध दक्षिण दिशा से है.
  • लिंग है स्त्रीलिंग.
  • वृषभ राशी का निवास जल स्थान, घास युक्त मैदान आदि मे होता है.
  • इसका सम्बन्ध पृथ्वी तत्त्व से होता है.
  • इसका असर मुख्यतः चेहरे और जबड़े मे रहता है.
  • वृषभ राशी के कारन व्यक्ति शांत स्वभाव का होता है, थोडा बहुत स्वार्थी भी होता है, बुद्धिमान भी होता है, सांसारिक कार्यो मे कुशल होता है. वृषभ राशी के लोग वृषभ जैसे शक्तिशाली होते हैं काम करने मे और रात्रि को ज्यादा शक्तिशाली होते हैं.

3-मिथुन राशी –

  • राशी चक्र मे मिथुन राशी का स्थान ६० से ९० डिग्री तक होता है. इसका चिन्ह स्त्री और पुरुष के जोड़े जैसा होता है. इसका स्वभाव मिश्रित होता है.
  • मिथुन राशी का स्वामी बुध ग्रह होता है.
  • इससे सम्बंधित रंग हरा होता है.
  • इसका सम्बन्ध पश्चिम दिशा से होता है.
  • लिंग पुरुष होता है.
  • मिथुन राशी का निवास स्थान शयन कक्ष, बगीचा, जुआ खाना अदि मे होता है.
  • इसका सम्बन्ध वायु तत्त्व से होता है.
  • वर्ण शुद्र होता है.
  • इसका प्रभाव मुख्यतः फेफड़ो, गला, बाहों, और स्वशन प्रणाली पर होता है.
  • मिथुन राशी दिन मे शक्तिशाली होता है.
  • ये व्यक्ति को बुद्धिमान और कलाकार बनता है.

4-कर्क राशि –

  • ये चौथी राशी है और राशी चक्र मे इसका स्थान ९० से १२० डिग्री तक है. कर्क राशी का स्वामी चन्द्रमा होता है.
  • इसका स्वभाव गतिशील होता है.
  • इसका सम्बंधित रंग सफ़ेद या गुलाबहि होता है.
  • कर्क राशी की दिशा उत्तर होती है.
  • इसका निवास स्थान तालाब, नदी का किनारा, बालू स्थान अदि होता है.
  • इससे सम्बंधित तत्त्व जल है.
  • वर्ण शुद्र होता है.
  • कर्क राशी का मुख्य प्रभाव पेट, किडनी, ह्रदय, ब्रैस्ट आदि पर होता है.
  • इस राशी के लोग सांसारिक सुख को प्राप्त करने के लिए खूब मेहनत करते हैं, ये शर्मीले भी होते हैं पर बुद्धिमान होते हैं,समय के पाबंद होते हैं, बहार से कठोर दीख सकते हैं परन्तु अन्दर से कोमल स्वभाव के होते हैं.

5- सिंह राशी –

  • ये राशी का चिन्ह शेर जैसा होता है और पांचवी राशी है. राशी चक्र मे इसका स्थान १२० से १५० डिग्री तक होता है. इसका स्वामी ग्रह सूर्य है.
  • ये स्थिर स्वाभाव की राशी है और सम्बंधित रंग पिला है.
  • इसकी दिशा पूर्व है.
  • लिंग पुरुष है.
  • सिंह राशी पहाड़ो, गुफा, जंगल आदि मे निवास करती है.
  • इसका प्रभाव मुख्यतः पेट, पाचन तंत्र, ह्रदय आदि मे होता है.
  • इस राशी के स्वामी स्वस्थ, परोपकारी, घुम्मकड़ स्वाभाव के हो सकते हैं.

6-कन्या राशी –

  • ये छठी राशी है और इसका चिन्ह नाव चलाती हुई लड़की जैसा होता है. राशी चक्र मे इसका स्थान १५० से १८० डिग्री तक है.
  • इसका स्वभाव स्थिर नहीं रहता है और इसका स्वामी ग्रह है बुध.
  • सम्बंधित रंग है हरा.
  • लिंग है स्त्री.
  • कन्या राशी का निवास स्थान है घास युक्त मैदान.
  • इससे सम्बंधित तत्त्व है पृथ्वी.
  • वर्ण है शुद्र.
  • शारीर मे इसका प्रभाव मुख्यतः कमर, अंतड़ियों पर और पेट से निचे के भाग पर होता है.
  • ऐसे लोग स्व-सम्मान का ख्याल रखते हैं और ज्ञान पाने के लिए लालायित रहते हैं अपने आपको बढाने के लिए.
  • ये राशी रात्रि को ताकतवर होती है.

7- तुला राशी –

  • ये सातवी राशी है और इसका चिन्ह हाथ मे तराजू लिए जैसा दीखता है. राशी चक्र मे इसका स्थान १८० से २१० डिग्री तक है. इसका स्वाभाव अस्थिर है. तुला राशी का स्वामी शुक्र ग्रह है. सम्बंधित रंग थोडा कालापन लिए है.
  • सम्बंधित दिशा पश्चिम है.
  • लिंग पुरुष है.
  • इसका निवास स्थान व्यापारिक जगह होती है.
  • तुला राशी का सम्बन्ध वायु तत्त्व से होता है.
  • वर्ण शुद्र है.
  • शारीर मे मुख्यतः ये नाभि के निचे के भाग पर प्रभाव रखता है.
  • शुक्र ग्रह से सम्बन्ध होने के कारण व्यक्ति का रुझान काला की तरफ होता है, चकाचौंध की तरफ होता है.
  • ये राशी दिन मे शक्तिशाली होती है.

8 - वृश्चिक राशी –

  • इसका चिन्ह वृश्चिक जैसा होता है और राशी चक्र मे इसका स्थान आठवां है २१० से २४० डिग्री तक.
  • ये स्थिर राशी है
  • इसका स्वामी ग्रह मंगल है.
  • इससे सम्बंधित रंग सफ़ेद और सुनहरा है.
  • इससे सम्बंधित दिशा उत्तर है.
  • लिंग स्त्री है.
  • इसका निवास स्थान है पथरीला इलाका, गुफा आदि.
  • इससे सम्बंधित तत्त्व है जल.
  • वृश्चिक राशी का सम्बन्ध ब्राह्मण वर्ण से है.
  • शारीर मे इसका प्रभाव मुख्यतः सेक्स अंगो पर रहता है.
  • ये व्यक्ति को जिद्दी, सीधे बात करने वाला, आत्मशक्ति वाला बनाता है.
  • वृश्चिक राशी दिन मे शक्तिशाली होती है.

9-धनु राशी –

  • इस राशी का चिन्ह आधा घोड़ा और आधा आदमी हाथ मे धनुष लिए होता है. ये नवी राशी है और राशी चक्र मे इसका स्थान २४० से २७० डिग्री तक होता है.
  • इसका स्वभाव मिश्रित होता है.
  • इससे सम्बंधित रंग सुनहरा होता है.
  • धनु राशी का स्वामी गुरु होता है
  • दिशा है पूर्व.
  • लिंग है पुरुष.
  • इसका निवास स्थान महल, घुद्शाल आदि.
  • इससे सम्बंधित तत्त्व है अग्नि.
  • धनु राशी का वर्ण है क्षत्रिय.
  • शारीर मे इसका प्रभाव मुख्यतः लीवर/यकृत, धमनियों और नसों मे होता है.
  • ऐसे लोग ताकतवर होते हैं और उनकी नियंत्रण करने की शक्ति भी अच्छी होती है.

10 - मकर राशी –

  • इसका चिन्ह मगरमच्छ का शारीर और हिरन का मुह लिए होता है. ये दसवीं राशी है और राशी चक्र मे इसका स्थान २७० से ३०० डिग्री तक होता है.
  • इसका स्वभाव चंचल और अस्थिर होता है.
  • मकर राशी का स्वभाव चंचल होता है और इसका स्वामी शनि है.
  • लिंग पुरुष है.
  • मकर राशी का निवास स्थान जल से सम्बंधित इलाके होते हैं और जंगल.
  • मकर राशी से सम्बंधित तत्त्व है पृथ्वी
  • वर्ण है वैश्य.
  • शारीर मे इसका प्रभाव मुख्यतः घुटना, हड्डी और जोड़ो पर होता है.
  • ऐसे लोग किसी ख़ास लक्ष्य को रखते हैं, अच्छा शारीर भी होता है और लगातार तरक्की चाहते हैं.
  • मकर राशी रात्रि को शक्तिशाली होती है .

11- कुम्भ राशी –

  • इसका चिन्ह बाँहों मे मटका लिए जैसा है. ये ग्यारहवी राशी है और राशी चक्र मे इसका स्थान ३०० से ३३० डिग्री तक है.
  • कुम्भ राशी का स्वभाव स्थिर रहता है.
  • इसका स्वामी शनि है.
  • रंग है चितकबरा.
  • इस राशी की दिशा है पश्चिम.
  • लिंग है पुरुष.
  • कुम्भ राशी का निवास जल के पास और कुम्हार के यहाँ होता है.
  • इससे सम्बंधित तत्त्व है वायु.
  • वर्ण है शुद्र.
  • इसका प्रभाव मुख्यतः खून/रक्त मे होता है.
  • ऐसे लोग धार्मिक होते हैं, शांत प्रकृति के हो सकते हैं, उत्साहित और शोध करने मे विश्वास रखते हैं.
  • ये राशी दिन मे शक्तिशाली होती है.

12 - मीन राशी –

  • इसका चिन्ह 2 मछलियाँ अपनी पूछ की तरफ देखते हुए है. राशी चक्र मे इसका स्थान बारहवा है और ३३० से ३६० डिग्री तक है.
  • मीन राशी का स्वाभाव मिश्रित होता है.
  • इसका स्वामी गुरु ग्रह है.
  • सम्बंधित रंग मिश्रित है.
  • मीन राशी की दिशा उत्तर है.
  • लिंग है स्त्री.
  • मीन राशी का निवास जल, नदी, तालाब, समुन्दर आदि मे है.
  • सम्बंधित तत्त्व जल है.
  • इसका वर्ण ब्राह्मण है
  • शारीर मे इसका प्रभाव मुख्यतः पाँव पर होता है, कफ पर भी होता है.
  • ऐसे व्यक्ति उदार और अच्छे व्यवहार के होते हैं.
  • मीन राशी रात्रि मे ताकतवर होती है.
तो इस पाठ मे हमने जाना १२ राशियों के बारे मे, उम्मीद करते हैं की इससे बहुत कुछ पाठको को लाभ हुआ होगा. जुड़े रहिये और जानते रहिये ज्योतिष के बारे मे रोज और लगातार.



अगले jyotish lesson4 में हम और जानेंगे
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१२ राशियाँ वैदिक ज्योतिष मे भाग ३, बारा राशियों का स्वाभाव और प्रभाव हिंदी मे ज्योतिष द्वारा,vedic jyotish lesson 3 in hindi, 12 rashiyan aur unke swabhaav in details, how we can check zodiac by seeing he number in horoscope.