मिथुन लग्न: अस्त चंद्रमा के 12 भावों में प्रभाव व उपाय, Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Me Prabhav, Jyotish Updates. मिथुन लग्न में चंद्रमा दूसरे भाव का स्वामी होता है, जो परिवार, वाणी, धन-संपत्ति, मूल्य और भोजन की आदतों का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा अस्त (Combust) हो जाता है (अर्थात सूर्य के बहुत नज़दीक आ जाता है), तब उसकी प्राकृतिक शक्तियाँ कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे भावनात्मक स्थिरता, आर्थिक पक्ष और पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है—यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्र किस भाव में स्थित है। अस्त चंद्रमा मानसिक तनाव बढ़ाता है क्योंकि मिथुन राशि का स्वामी बुध है—जो बुद्धि और विश्लेषण का ग्रह है—जबकि चंद्रमा भावनाओं का प्रतिनिधि है। Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Mai Prabhav aur Upay अस्त चंद्रमा क्या होता है? जब चंद्रमा सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तब उसे अस्त (Combust) कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की शक्ति कम हो जाती है, जिससे: भावनाओं की अभिव्यक्ति कमजोर होती है अधिक सोचने की प्रवृत्ति बढती है आर्थिक अस...
कुंडली में १२ भावो के आधार पर जीवन में क्या बदलाव होंगे मंगल के मेष राशि में आने से जानिए | वैदिक ज्योतिष में मंगल को क्रूर ग्रह माना जाता है और ये दक्षिण दिशा से सम्बन्ध रखता है, इसका सम्बन्ध अग्नि तत्त्व से है और कुंडली में इसके द्वारा भूमि लाभ, पराक्रम, शक्ति, छोटे भाई , साहस, स्वतंत्रता, क्रोध, नेतृत्त्व क्षमता, उत्साह आदि को देखते हैं | 12 Bhavo ke Adhar Par Mangal Ka Fal in hindi 12 भावो के आधार पर मंगल का मेष राशि में आने का फल : अगर कुंडली के पहले भाव में मेष राशि है तो जहाँ आत्म विश्वास बढेगा वहीँ क्रोध में भी ये वृद्धि करेगा जिससे आपको संभल के रहना होगा अन्यथा कई सम्बन्ध ख़राब कर बैठेंगे | इस समय आपके पूरे शारीर में उर्जा बढ़ जायेगी जिससे आप दुसरो की अपेक्षा कुछ ज्यादा अच्छी तरह से कार्यो को कर पायेंगे और इसी कारण आपको दुसरो की जलन के कारण भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है | आप अपने लिए हुए निर्णयों को पूरा करके दिखाएँगे, भावी जीवन के लिए नई योजनायें आप बनायेंगे और उन्हें क्रियान्वित भी करेंगे | अगर कोई आपको चुनौती देगा तो आप उसे स्वीकार करेंगे अतः लड़ाई झगड़े भी बढ़ सकत...