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Jyoitish Sewaye Online || ज्योतिष सेवा ऑनलाइन

Jyotish in Hindi, कुंडली का अध्ययन हिंदी में, ज्योतिष से संपर्क के लिए यहाँ क्लिक करे>> , .
ज्योतिष सेवा ऑनलाइन: एक अच्छा ज्योतिष कुंडली को देखके जातक का मार्गदर्शन कर सकता है. कुंडली मे ग्रह विभिन्न भावों मे बैठे रहते हैं और जातक के जीवन मे प्रभाव उत्पन्न करते हैं. अगर कोई व्यक्ति जीवन मे  समस्या से ग्रस्त है तो इसका मतलब है की उसके जीवन इस समय बुरे ग्रहों का प्रभाव चल रहा है और यदि कोई व्यक्ति सफलता प्राप्त कर रहा है तो इसका मतलब है की इस समय उसके जीवन मे शुभ ग्रहों का प्रभाव है.  विभिन्न ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा मे व्यक्ति अलग अलग प्रकार के प्रभावों से गुजरता है जिसके बारे एक अच्छा ज्योतिष जानकारी दे सकता है.  ग्रहों का असर व्यक्ति के कामकाजी जीवन पर पड़ता है.
ग्रहों का असर व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर पड़ता है.
सितारों का असर व्यक्ति के सामाजिक जीवन पर पड़ता है.
व्यक्ति के पढ़ाई –लिखाई , वैवाहिक जीवन, प्रेम जीवन, स्वास्थ्य आदि पर ग्रह – सितारों का असर पूरा पड़ता है.  आप “www.jyotishsansar.com” माध्यम से पा सकते हैं कुछ ख़ास ज्योतिषीय सेवाए ऑनलाइन :जानिए क्या कहती है आपकी कुंडली आ…
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Sheegra Vivaah Ke Liye Ye Kare

शीघ्र विवाह के लिए टोटके, कैसे दूर करे विवाह में देरी की समस्या को, जानिए शबर मंत्र शादी के लिए, यन्त्र प्रयोग शादी के लिए.  विवाह में देरी उन लोगो के लिए बहुत परेशानी का कारण होता है जो जीवन साथी के साथ अपना जीवन जीना चाहते हैं. कुंडली में मे मौजूद ख़राब ग्रह या किसी अन्य कारणों से कुछ लोगो के विवाह में देरी होती जाती है और वे लोग वैवाहिक सुख से वंचित रहते हैं. 
इस लेख में हम जानेंगे कुछ विशेष टोटके और शबर मंत्र जिनके प्रयोग से शादी में देरी की बाधा को दूर किया जा सकता है.  नोट: किसी भी प्रयोग को करने से पहले अच्छे ज्योतिष को कुंडली भी दिखा देना चाहिए और कुंडली अनुसार उपाय भी कर लेना चाहिए. शीघ्र विवाह हेतु पहला प्रयोग: निचे दिए गए यन्त्र को पहले किसी शुभ महूरत में भोज पत्र पर केसर की स्याही से बना लेना चाहिए और सही तरीके से पूजा करना चाहिए कम से कम 3 दिन. पूजन के बाद दिए गए मंत्र का १००८ जप करना चाहिए. तीसरे दिन पूजन के बाद यन्त्र को ताबीज में डाल के धारण करना चहिये. इसे तब तक पहने जब तक विवाह ना हो जाए. साथ ही मंत्र का जप रोज करना चाहिए.  विवाह के लिए मंत्र : "ॐ कुंडली नमः "…

Rashifal 2019

राशिफल 2019 vedic ज्योतिष के अनुसार, क्या कहते हैं नए साल के सितारे, कैसा रहेगा नया वर्ष, जानिए नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा और पारिवारिक जीवन से जुड़ी भविष्यवाणी, पढ़िए ग्रहों की चाल के बारे में ।

नया साल का मालाब है नई ख्वाहिशे, नए सपने, नई उंचाइयो को छूने के लिए नए प्रयास. आने वाला वर्ष क्या ख़ास लाने वाला है ये जानने की उत्सुकता सभी ज्योतिष प्रेमियों को होती है. हर वर्ष कुछ बड़े बदलाव जीवन में लेके आता है, कुछ लोगो के जीवन में चुनौतियाँ बढ़ जाती है, कुछ लोगो को अपार सफलता मिलती है, कुछ राशी में शनि के प्रभाव् के कारण बहुत उथल पुथल भी होता है. ये सब हम जानेगे इस लेख में.

पढ़िए २०१९ में परिवारिक सुख के बारे में, प्रेम विवाह के बारे में, व्यवसाय के बारे में, विवाह आदि के बारे में. हमे ये भी जानेंगे की 2019 को खुशहाल बनाने के लिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ मीन राशी वालो को क्या करना चाहिए. आइये सबसे पहले वर्ष फल को जानते हैं:इस वर्ष के राजा शनि है.मंत्री सूर्य/रवि है. शनि न्याय के देवता है साथ ही एक क्रूर ग्रह भी है जिसके कारण बहुत ही विचित्र प्रभाव देश…

Best Jyotish Services in Hindi

ज्योतिष संसार के माध्यम से आप पा सकते हैं अपने कुंडली का विश्लेषण, अपने कुंडली में मौजूद ख़राब ग्रहों के बारे में, अपने ताकतवर ग्रहों के बारे में, भाग्यशाली रत्नों के बारे में, ग्रहों के अनुसार सही कैरियर, सरकारी नौकरी, प्रेम विवाह, संतान योग, काले जादू का निवारण, ज्योतिषीय समाधान आदि के बारे में.

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जानिए अपने कुंडली में मौजूद शक्तिशाली ग्रहो के बारे में.जानिए कौन से ग्रह जीवन में समस्या उत्पन्न कर रहे हैं.किन ज्योतिष कारणों से जीवन में असफलता प्राप्त हो रही है?जानिए कौन से रत्न भाग्योदय में सहायक होंगे?कौन सी पूजा आपके लिए सही है.आपके प्रश्नों का उत्तर, कुंडली अनुसार.Pay Only 501/- INR or $11 पाइये कुंडली मिलान विवाह हेतु
कुंडली मिलान के लिए लड़के और लड़की, दोनों की जन्म …

Bhariav Ashtmi Ka Mahattw

भैरव अष्टमी का महत्त्व, उज्जैन में कैसे मानता है काल भैरव अष्टमी, भैरव पूजा से समस्या समाधान.

हिन्दू पंचाग के अनुसार अगहन महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी भैरव अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. मान्यता के अनुसार इस दिन भैरव जी का जन्म हुआ था. उज्जैन में भैरव अष्टमी बहुत ही हर्षोल्लास से मनता है. इस दिन काल भैरव मंदिर और अष्ट भैरव मंदिरों को खूब सजाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना होती है. अर्ध रात्री को बाबा की आरती की जाती है.  साल २०१८ में ३० नवम्बर, शुक्रवार को भैरव अष्टमी मनाया जाएगा.  उज्जैन में कालभैरव अष्टमी उत्सव: स्कन्द पुराण के अवंतिका खंड में उज्जैन में मौजूद अष्ट भैरव का उल्लेख मिलता है और ये भी साफ़ साफ़ बताया गया है की अवंतिका नगरी तंत्र साधना के लिए अति विशिष्ट है. इसी कारण लोग भैरव अष्टमी को भी विशेष तंत्र साधनाएं करते हैं ईच्छा पूर्ति के लिए.  भैरव पूजा से जीवन में मौजूद बहुत सी बाधाएं नष्ट होती है और साथ ही स्वास्थ्य और सम्पन्नता प्राप्त होती है.  चूँकि उज्जैन अष्ट भैरव का स्थान है और यहाँ पर विश्व प्रसिद्द “काल भैरव” मंदिर भी है जहाँ पर बाबा आज भी मदिरा का भोग लगाते हैं. इस…

Kaal Bhairav Ujjain Ki Yatra Ka Rahasya, कालभैरव

Kaal Bhairav Ujjain Ki Yatra Ka Rahasya, कालभैरव कौन हैं, उज्जैन के कालभैरव, क्यों दर्शन करना चाहिए भैरव बाबा के.  भूत प्रेतों और शिव गणों के नियंत्रणकर्ता है बाबा भैरव जो की दयालु है, कृपालु है और भक्तो को नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं. ऐसी भी मान्यता है की कलयुग में सबसे आसान भैरव पूजा होती है. कलयुग में इनको प्रसन्न करना सबसे आसान होता है.

जब व्यास ऋषि सनत्कुमारो से कालभैरव तीर्थ के बारे में प्रश्न करते हैं तो उन्होंने इस रहस्य को उन्हें बताया. सनत्कुमारो ने कहा की कालभैरव तीर्थ एक शक्तिशाली जगह है, एक पवित्र स्थल है, एक जागृत स्थल है जहा भक्तगण अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं. ये तीर्थ स्थली पवित्र शिप्रा नदी के किनारे उज्जैनी में स्थित है.

कोई भी अपने दुःख और दर्द से छुटकारा पा सकता है भगवान् कालभैरव के दर्शन करके. कालभैरव मंदिर शिप्रा नदी के उत्तर दिशा में स्थित है और भक्तो को सभी प्रकार की सांसारिक सुक देने में समर्थ है. इस जगह पूजा करके हम अपने जीवन को सफल कर सकते हैं. कालभैरव पूजा का विशेष समय: हिन्दू पंचांग के हिसाब से अषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष में इनकी पूजा का विशेष समय…

Dev Uthni Gyaras Ka Mahattw || देव उठनी एकादशी महत्तव

Dev Uthni Gyaras Ka Mahattw, देव उठनी एकादशी महत्तव,  क्या करे प्रबोधिनी एकादशी को सफलता के लिए.
एक ऐसा दिन जिसका हिन्दुओ के लिए बहुत अधिक महत्तव है और वो दिन हैं कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारस. इस दिन को प्रबोधिनी एकादशी या फिर देव उठनी ग्यारस भी कहा जाता है. भारत में इस दिन को बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है.
ऐसा माना जाता है की भगवान् विष्णु आशाद शुक्ल पक्ष की ग्यारस को क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं और 4 महीने बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारस को उठते हैं इसी लिए इस दिन को देव उतनी ग्यारस कहा जाता है. जब विष्णुजी सोते है तो उस समय विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं और देव उठनी ग्यारस से विवाह आदि के महूरत फिर से शुरू हो जाते हैं.
प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी विवाह का भी प्रचलन है जो की विवाह के शुरू होने के संकेत है. अलग अलग प्रान्त में अलग अलग तरीके के रीती रिवाज देखने को मिलते हैं. पढ़िए तुलसी पूजा का महत्त्व . आइये जानते है किस प्रकार आसानी से देव उठनी ग्यारस को पूजन कर सकते हैं :इस दिन जल्दी उठके दैनिक कार्यो से मुक्त हो जाना चाहिए.अगर कोई पवित्र नदी के आस प…