Best Jyotish Services in Hindi

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ज्योतिष संसार के माध्यम से आप पा सकते हैं अपने कुंडली का विश्लेषण, अपने कुंडली में मौजूद ख़राब ग्रहों के बारे में, अपने ताकतवर ग्रहों के बारे में, भाग्यशाली रत्नों के बारे में, ग्रहों के अनुसार सही कैरियर, सरकारी नौकरी, प्रेम विवाह, संतान योग, काले जादू का निवारण, ज्योतिषीय समाधान आदि के बारे में.
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पाइये कुंडली विश्लेषण


कुंडली का सटीक विश्लेषण प्राप्त करने के लिए अपना जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान सही –सही भेजे साथ ही अपने प्रश्न भेजे.

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  • जानिए अपने कुंडली में मौजूद शक्तिशाली ग्रहो के बारे में.
  • जानिए कौन से ग्रह जीवन में समस्या उत्पन्न कर रहे हैं.
  • किन ज्योतिष कारणों से जीवन में असफलता प्राप्त हो रही है?
  • जानिए कौन से रत्न भाग्योदय में सहायक होंगे?
  • कौन सी पूजा आपके लिए सही है.
  • आपके प्रश्नों का उत्तर, कुंडली अनुसार.
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पाइये कुंडली मिलान विवाह हेतु


कुंडली मिलान के लिए लड़के और लड़की, दोनों की जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान भेजे साथ ही अपने प्रश्न भेजे
कुंडली मिलान ज्योतिष
जब बात विवाह की हो तो बहुत सोच समझ और जांच पड़ताल के बाद ही कदम उठाना चाहिए अन्यथा पुरे जीवन भर मलाल रह जाता है की पहले अगर सही निर्णय लिया होता तो आज ये दिन नहीं देखना होता.
वैदिक ज्योतिष के माध्यम से हम विवाह के से पहले ये जान सकते हैं की, पूरा जीवन किसी के साथ कैसा बीतेगा. इसके लिए लड़के और लड़की , दोनों की कुंडली देखना होता है.
  • जानिए कितने गुण मिल रहे हैं.
  • जानिए मांगलिक योग के बारे में.
  • जानिए कुंडली नहीं मिलने के कारण
  • वैवाहिक जीवन में समस्याओं का ज्योतिष समाधान.
  • कुंडली अनुसार कौन सी पूजा शुभ रहेगी.
  • पाइये अपने प्रश्नों का उत्तर.

Get The Indepth Analysis of both male and female horoscope for marriage purpose.




प्राप्त करिए काला जादू परिक्षण और समाधान


इसके लिए जन्म तारीख, जन्म समय, जन्म स्थान की सही जानकारियों के साथ ही व्यक्ति का हाल ही का फोटो भी भेजे साथ ही अपने प्रश्न भेजे.
काले जादू का तोड़ ज्योतिष में
कई बार ऐसा होता है की जीवन में अचानक से बुरा ही बुरा होने लगता है, जैसे व्यापर में हानि, स्वास्थ्य समस्या, आकस्मिक मौते, प्रेम सम्बन्ध का टूटना आदि, ऐसा काले जादू के कारण भी हो सकता है. जो नकरातमक दिमाग रखते हैं और ईर्ष्या रखते हैं , वे किसी को गिराने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं. ऐसे में काले जादू का समाधान जरुरी होता है.

  • जानिए कहीं कला जादू तो आपके जीवन को ख़राब नहीं कर रहा है.
  • पाइये कुछ सटीक और शक्तिशाली घरेलु उपाय काले जादू से बचाव के लिए..
  • जानिए कौन सा कवच आपके लिए अच्छा रहेगा.
  • कौन सी पूजा आपके लिए शुभ रहेगी.
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नयूमेरोलोजी/अंक विज्ञान रिपोर्ट प्राप्त करे


इसके लिए आपको अपना पूरा नाम और जन्म तारीख, जन्म महिना और जन्म साल भेजना होगा साथ ही अपने प्रश्न भेजे..
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अंक विद्या का स्तेमाल पश्चिमी देशो में बहुत होता है और इसके माध्यम से बहुत कुछ संभव है, सही अंको का स्तेमाल जीवन में करने से हम कई प्रकार के लाभ उठा सकते हैं, भाग्य जगा सकते हैं, सफलता हासिल कर सकते हैं.
  • अपने भाग्यशाली अंक के बारे में जानिए.
  • भाग्यांक और मूलांक को जानिए.
  • नाम में बदलाव करने के बारे में जानिए.
  • भाग्यशाली रत्न के बारे में जानिए.
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हस्त रेखा रिपोर्ट प्राप्त करे


इसके लिए अपने दोनों हाथो की साफ़ फोटो भेजे अपने प्रश्नों के साथ.
palmist/hasth rekha
जब कुंडली न हो तो ऐसे में हस्त रेखा द्वारा भी भविष्य को देख सकते हैं साथ ही उपाय भी जान सकते हैं. हाथ में बनी लकीरें अलग अलग प्रकार के घटनाओं को दर्शाती है साथ ही हमारे जीवन में पड़ने वाले ग्रहों के असर को भी दर्शाती है. ज्योतिष में हस्त रेखा का भी विशेष स्थान है.अगर आप अपने हाथ द्वारा अपना भाग्य जानना चाहते हैं तो भी ज्योतिष से संपर्क कर सकते हैं.
  • अपने हाथ में मौजूद पर्वतों के बारे में जानिए.
  • जीवन में परेशानियों के कारण जानिए.
  • समस्याओं का ज्योतिष समाधान पाइये..
  • भाग्यशाली रत्न जानिए.
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वास्तु समस्याओं का समाधान पाए


इसके लिए अपने वास्तु का नक्शा और प्रश्न भेजे.
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एक स्वस्थ शारीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है, ऐसे ही एक स्वस्थ वास्तु में ही स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है. अगर हमारे घर, ऑफिस, स्कूल, बैंक, हॉस्पिटल आदि को वास्तु अनुरूप बनाया जाए तो निश्चित ही बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं जीवन में.
  • जानिए वास्तु में कहा समस्या है.
  • जानिए कैसे बिना तोड़ फोड़ के समस्या को दूर कर सकते हैं?
  • कौन से यन्त्र या पूजाए वास्तु दोष निवारण में सहायता करेंगी.
  • कैसे स्वास्थ्य, सम्पनता लाया जा सकता है.
  • बचाएं अपने घर, ऑफिस, हॉस्पिटल आदि को नकारात्मक उर्जाओं से.
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Vastu Consultancy


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  • क्या मेरा घर वास्तु अनुरूप है?
  • क्या मेरा ऑफिस वास्तु के आधार पर बना है ?
  • क्या मंदिर सही दिशा में है ?
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  • वास्तु दोष का समाधान क्या है ?
जानिए अपने वास्तु के बारे में और पाइए सरल समाधान वास्तु समस्याओं का

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Kundli Me Shubh Aur Ashubh Yog In Hindi

कुंडली में शुभ और अशुभ योग, जानिए कुछ शुभ और अशुभ योगो का जीवन पर प्रभाव ज्योतिष द्वारा. ज्योतिष मे योग क्या होते हैं|
ज्योतिष मे रूचि रखने वाले लोगो को योगो मे भी बहुत रूचि होती है. वे जानना चाहते है की कुंडली मे या जन्म पत्रिका मे कौन से योग बन रहे है. कुछ योग शुभ होते हैं और कुछ अशुभ होते हैं. हालांकि किसी भी नतीजे पर पहुचने से पहले कुंडली का अच्छी तरह से विश्लेषण कर लेना चाहिए और सिर्फ एक ही योग पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
janiye jyotish me yogo ke bare me
Jyotish Mai Yog Kya Hote Hai

क्या होते हैं योग ज्योतिष मे ?

योग तब बनते हैं जब १ से अधिक ग्रह कुछ विशेष अवस्था मे कुछ विशेष भावो मे बैठते है कुंडली मे. कुण्डली मे उनकी स्थिति के अनुसार वे जीवन मे प्रभाव उत्पन्न करते हैं. कुछ योग जीवन मे पूरा प्रभाव दिखाते हैं और कुछ कम, ये निर्भर करता है ग्रहों की शक्ति और स्थिति पर.

अगर योग बनाने वाले ग्रह शुभ हो , शक्तिशाली हो तो इसमे शक नहीं की जातक को उसके बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे, अगर ग्रह खराब स्थिति मे हो, शत्रु राशी के हो या नीच के हो तो जातक को इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं.

अगर कोई खराब योग कुंडली मे बन रहा हो और ग्रह शक्तिशाली हो तो जातक को जीवन मे बहुत शंघर्ष दे सकता है. परन्तु ऐसे मे घबराना नहीं चाहिए, अच्छे ज्योतिष से परामर्श लेना चाहिए.
ये याद रखना चाहिए की कुंडली मे अच्छा योग हो तो ज्यादा खुश न हो और बुरा योग होने पर विचलित न हो, क्यूंकि समय कभी एक जैसे नहीं रहता है. बदलाव प्रकृति का नियम है और इसके लिए अपने आपको तैयार रखना चाहिए.

ज्योतिष मे योग क्या होते हैं, वैदिक ज्योतिष मे योग की शक्ति, जानिए योगो के फायदे और शक्ति ज्योतिष से.
jyotish me shubh aur ashubh yog
Kundli Me Shubh Aur Ashubh Yog In Hindi
कुंडली हमारे जीवन का दर्पण है और ज्योतिष कुंडली को पढ़कर हमे मार्गदर्शन कर सकता है की क्या करना चाहिए और क्या नहीं. कुंडली में ग्रह विभिन्न प्रकार से विभिन्न भावों में बैठते हैं जिससे की भिन्न –भिन्न प्रकार के योगो का निर्माण होता है. ये जरुरी नहीं की सभी कुंडली में कोई न कोई योग बने. किसी योग के न होने से शुभ या अशुभ होने का निर्णय नहीं लिया जा सकता है. अतः योगो पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए.
परन्तु यहाँ जानकारी के लिए कुछ शुभ और अशुभ योगो का वर्णन किया जा रहा है. किसी भी निर्णय पर पहुचने से पहले अच्छे ज्योतिष से परामर्श अवश्य ले.

आइये अब जानते है कुछ कुंडली में बनने वाले कुछ शुभ योगो के बारे में –

  1. वज्र योग – यदि सभी शुभ ग्रह लग्न और सप्तम भाव में विराजमान हो या फिर सभी पाप ग्रह चतुर्थ और दशम भाव में विराजमान हो तो वज्र योग का निर्माण कुंडली में होता है. इस योग के प्रभाव से जातक सुखी, शूर-वीर, सुन्दर होता है. ऐसे जातक पुलिस या सेना में भी सफलता पुर्वक काम करते हैं.
  2. यव योग – यदि समस्त पाप ग्रह लग्न और सप्तम भाव में बैठ जाएँ या फिर सभी शुभ ग्रह चतुर्थ और दशम भाव में बैठ जाएँ तो यव योग का निर्माण होता है. ऐसे जातक व्रत, नियम में रहते हैं, सुखी, धनवान, स्थिर बुद्धि के होते हैं. युवा अवस्था में सभी प्रकार के सुख प्राप्त कर लेते हैं.
  3. श्रृंगाटक योग – जब सभी ग्रह प्रथम, पांचवे और नवे भाव में बैठ जाएँ तो ये योग बनता है. ऐसे जातक वीर और कर्मठ होते हैं, सुन्दर पत्नी प्राप्त करते हैं, सरकारी कर्मचारी होते हैं, सेना में भी सफलता प्राप्त करते हैं.
  4. कमल योग – यदि कुंडली में सभी ग्रह प्रथम, चतुर्थ और दसवे स्थान में हो तो कमल योग का निर्माण होता है. ऐसे जातक दीर्घायु, यशस्वी, विजयी, मंत्री या राज्यपाल बनने की शक्ति रखते हैं. कमल योग के कारण जातक अधिकारी जरुर बनता है या फिर बहुत सफल सलाहकार बनते हैं.
  5. युप योग – यदि कुंडली में लग्न से चतुर्थ स्थान तक सभी ग्रह विराजित हो जाए तो युप योग बनता है. ऐसा जातक यज्ञकर्ता, स्त्री सुखी, ज्ञानी, ताकतवर, अनुशाशन में रहने वाला होता है. ऐसा व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता बहुत अच्छी होती है जिसके लिए उसे समाज में जाना भी जाता है.
  6. छत्र योग – यदि कुंडली में सप्तम से लेके लग्न तक सारे ग्रह बैठ जाए तो छत्र योग का निर्माण होता है, ऐसा जातक उच्च पदाधिकारी, भरण-पोषण करने वाला, लोक प्रिय और इमानदार होता है.
  7. मुसल योग – यदि कुंडली में सभी ग्रह स्थिर राशियों में हो तो मुसल योग का निर्माण होता है. ऐसा जातक धनी, ज्ञानी, समझदार, प्रसिद्द और शासन अधिकारी होता है.
  8. नल योग – यदि सभी ग्रह द्विस्वभाव राशियों में विराजित हो तो नल योग का निर्माण होता है. ऐसा जातक कूट निति बनाने में माहिर होता है अतः राजनीती में सफलता प्राप्त करता है.
  9. माला योग – यदि कुंडली में बुध, गुरु और शुक्र चोथे, सातवे, और दसवे स्थान में बैठे हो तो ये योग बनता है. ऐसा व्यक्ति विलासितापूर्ण जीवन यापन करता है. सुख सुविधा के लिए सारी चीजे उसे प्राप्त होती है.
  10. गदा योग – यदि सभी ग्रह प्रथम या चोथे भाव में हो या फिर सातवे या दसवे भाव में हो तो गदा नमक योग बनता है. इस योग के प्रभाव से जातक धनि, ताकतवर, धर्मात्मा और शास्त्रज्ञ, संगीतप्रिय होता है.
  11. पक्षी योग – जब कुंडली के चतुर्थ और दशम स्थान में सभी ग्रह आ जाएँ तो पक्षी योग का निर्माण होता है इस योग के प्रभाव से जातक भ्रमणशील होता है, गुप्त कार्यो में संलग्न रह सकता है, हठी भी होता है.
  12. चक्र योग – यदि लग्न से शुरू होकर प्रथम भाव, तृतीय भाव, पंचम भाव, सप्तम भाव, नवम भाव और एकादश भाव में सभी ग्रह हो तो चक्र योग का निर्माण होता है. ये एक राज योग होता है और जातक को राजा के सामान पद और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है.
  13. पर्वत योग- यदि केंद्र स्थानों में शुभ ग्रह हो , सप्तम और अष्टम भाव खाली हो या फिर इनमे शुभ ग्रह हो तो पर्वत योग बनता है. इसके कारण जातक भाग्यशाली होता है, वक्ता बनता है, लेखक बनता है, तेजस्वी होता है. ये योग भी पद और प्रतिष्ठा प्रदान करता है.
  14. समुद्र योग – जब दुसरे, चोथे, छठे , आठवे, दसवे और बारहवे भाव में सभी ग्रह आ जाएँ तो समुद्र योग बनता है. इससे जातक भोगी, धन –धान्य से भरपूर, लोकप्रिय, वैभवशाली होता है.
  15. केदार योग – अगर कुंडली में किन्ही ४ राशियों में सारे ग्रह हो तो केदार योग का निर्माण होता है. इस योग से जातक कृषि कार्य में सफलता पाता है, वो सुखी, सत्यवक्ता, धनवान होता है.


  16. वीणा योग – ७ राशियों में अगर सारे ग्रह आ जाए तो विणा योग बनता है. इसके कारण जातक कला में रूचि रखता है. गीत, संगीत, नृत्य आदि में रूचि रखता है. राजनीती में भी सफलता प्राप्त करता है.

Amavasya Ke saath shani jayanti ka mahattw

वैदिक ज्योतिष के अनुसार अमावस्या के साथ शनि जयंती का महत्व, इस शुभ दिन क्या करे सुखी जीवन के लिए, ज्योतिषी मार्गदर्शन और भविष्यवाणियां, धन और समृद्धि को आकर्षित करने के लिए क्या करना चाहिए।

भारत में शनि जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है और शनि देव के मंदिर में भगवान शनि के भक्त विशेष प्रार्थना करते हैं। इस लेख में हम देखेंगे कि यह दिन क्यों महत्वपूर्ण हो जाता है जब शनि जयंती अमावस्या के साथ आती है ।
kya kare shani jayanti aur amavasya ke din
Amavasya Ke saath shani jayanti ka mahattw

22 मई, 2020 को शनि जयंती पड़ रही है और इसके साथ ही अमावस्या भी है जिससे इस दिन का महत्व बहुत बढ़ जाता है |
शनि देव न्याय के देवता है और इसलिए सभी को भगवान शनि का भय होता है क्योंकि शनि के गोचर के दौरान वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्व के किये कर्मो का अच्छा और बुरा फल प्राप्त होता है। और इसलिए शनि देव से संबंधित प्रार्थनाएँ और पूजाएँ सभी के लिए विशेष महत्व रखती हैं।
शनि जयंती जब अमावस्या पर पड़ती है तो इस दिन की शक्ति और बढ़ जाती है और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए बहुत ही शक्त दिन की प्राप्ति होती है |
जिन लोगों को कुंडली में ख़राब शनि के कारण जीवन में बहुत अधिक परेशानियों और संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, साढ़े साती और ढैया भी मुसीबतों को बढ़ा रहा है तो इस दिन पूजा कर सकते हैं। यह निश्चित रूप से जीवन को बाधा रहित बनाने में मदद कर सकता है।
पितृ शांति पूजा करने के लिए भी यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है, इससे पूर्वजों के आशीर्वाद को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
You Tube में देखिये 
अगर किसी को कुंडली में ग्रहन दोष, काला जादू, कालसर्प योग है तो अमावस्या के साथ शनि जयंती का दिन प्रार्थना करने के लिए अच्छा होता है।
भक्त इस दिन जीवन को गम्भीर दोषों से मुक्त करने के लिए शिव पूजा भी करते हैं ।
जीवन में समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अनुष्ठान करने के लिए यह सबसे अच्छा दिन है।

अमावस्या के साथ शनि जयंती का महत्व:

Vrishabh Sankranti Ka Jyotish Mahattw

Vrishabh sankranti ka jyotish mahttwa, ज्योतिष के अनुसार वृष संक्रांति का महत्व, ज्योतिषी द्वारा वृषभ संक्रांति की भविष्यवाणी, सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश करने पर क्या होता है।
kya kare vrishabh sankranti ko 2020
Vrishabh Sankranti Ka Jyotish Mahattw

हर संक्रांति हिंदू ज्योतिष परंपरा के अनुसार पुण्य संचय करने के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन दान और प्रार्थना करने के लिए एक पवित्र दिन के रूप में लिया जाता है।

वृषभ संक्रांति क्या है?

  • जब ग्रह सूर्य वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं तो इस अवधि को वृष संक्रांति कहते हैं। ज्योतिष और हिन्दू धर्म के अनुसार 12 संक्रांति हैं और ये सभी दान करने, जरूरतमंदों की मदद करने, प्रार्थना, आध्यात्मिक अभ्यास आदि करने के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं ।
  • हिंदू पंचांग के अनुसार वृषभ संक्रांति ज्येष्ठ महीने में पड़ता है।
  • वृषभ संक्रांति भी मौसम के बदलाव का भी प्रतिनिधित्व करती है।
  • वृषभ का अर्थ है बैल और इसलिए यह माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करना अच्छा होता है और कुछ लोग पुण्य लाभ पाने के लिए इस दिन गाय दान करने का भी सुझाव देते हैं।

सफलता के लिए वृषभ संक्रांति पर क्या करें?

  1. इस दिन सौभाग्य को आकर्षित करने के लिए गाय और बछड़े की मूर्ति खरीदना और दुकान या घर पर स्थापित करना अच्छा होता है।
  2. इस दिन शिव पूजा करने के बाद गायों या गौदान करना अच्छा होता है।
  3. पितृ दोष को कम करने के लिए पितृ तर्पण करना अच्छा होता है।
  4. संक्रांति का समय पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा आदि में पवित्र स्नान करने के लिए बहुत अच्छा है।
  5. इस शुभ दिन पर धन, वस्त्र, भोजन अर्पित करना पुण्य प्राप्त करने के लिए बहुत अच्छा है।
  6. संक्रांति के दिन उपवास भी अच्छा है, धार्मिक कार्यों में समय व्यतीत करें और आध्यात्मिक साधनाएं करके संक्रांति का पूरा लाभ उठाएं।
  7. आप किसी ऐसे व्यक्ति को गाय और बछड़े की मूर्ति भी उपहार में दे सकते हैं जिसके सौभाग्य की आप कामना करते हैं ।
  8. इस दिन श्रद्धालु पुरी के जगन्नाथ मंदिर में विशेष पूजा अर्चना करते हैं।
  9. सभी की भलाई के लिए शिव और वासुदेव की पूजा करें।

2020 के गोचर पंचांग के अनुसार वृषभ संक्रांति भविष्यवाणी:

Sharir Mai Bhagyashali Til

तिल तो अधितर सभी के शारीर में होते हैं, उनमे से कुछ भाग्योदय में सहायक है और कुछ के कारण जातक के जीवन में परेशानियों का पता चलता है| आज इस लेख में हम जानेंगे की कहाँ कहाँ पर तिल भाग्याशाली बानाता है?
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Sharir Mai Bhagyashali Til

होटो पर तिल कब भाग्य चमकता है?

  • यदि ऊपरी होंठ पर तिल मौजूद है तो इसका मतलब है कि वह व्यक्ति हर एक के साथ अच्छा है। ऐसा व्यक्ति विलासी जीवन जीने के लिए लालायित रहता है और जी भी लेता है.
  • यदि तिल निचले होंठ पर मौजूद है, तो यह भोजन में रुचि दिखाता है और यह एक व्यक्ति को कलाकार भी बनाता है। इस प्रकार के व्यक्ति इस भौतिकवादी दुनिया के लिए बने हैं और इस दुनिया का आनंद लेते हैं |

छाती पर तिल कब भाग्यशाली होता है?

  • बाईं ओर का तिल अच्छी दिमागी शक्ति, चातुरता देता है। इस प्रकार के व्यक्ति किसी भी संबंध को बनाए रखना जानते हैं।
  • गाल पर तिल कब भाग्यशाली होता है?
  • दाहिने गाल का तिल जिम्मेदारी, प्यार करने की प्रकृति, सांसारिक चीजों में रुचि, रिश्तेदारों के लिए भावनाओं आदि को दर्शाता है। ऐसे लोग सभी के साथ मिल के चलने की ताकत रखते हैं जो इनको अलग पहचान दिलाती है.

पीठ पर तिल कब भाग्यशाली होता है?

पीठ पर तिल होना नाम, प्रसिद्धि, धन, अग्रणी प्रकृति, अच्छा स्वास्थ्य, साहस, चतुरता को दर्शाता है।

गर्दन पर तिल कब भाग्यशाली होता है?

गर्दन के सामने की तरफ एक तिल मधुर आवाज, कलात्मक प्रकृति, अच्छा वैवाहिक जीवन दर्शाता है।

माथे पर तिल कब भाग्यशाली होता है?

दाहिने माथे में तिल होने के कारण व्यक्ति को नाम, प्रसिद्धि, पैसा मिलता है। ऐसे व्यक्ति भगवान के भक्त भी होते हैं |

जीभ पर तिल कब भाग्यशाली होता है?

जीभ की नोक पर तिल बात करने में विशेषज्ञ, अच्छे भाग्य, अच्छे परिवार के होने को दर्शाता है। यह एक भाग्यशाली व्यक्ति को दर्शाता है

पैरों पर तिल कब भाग्यशाली होता है?

अगर दायें पैर पर तिल हो तो व्यक्ति को अच्छा जीवन साथी, अच्छा पारिवारिक जीवन की प्राप्ति होती है.

नेत्र पर कब भाग्यशाली होता है?

भौंहों के बीच पर तिल होना व्यक्ति को अग्रणी बनाता है। इस प्रकार के व्यक्ति को नाम, प्रसिद्धि, पैसा आसानी से मिल जाता है।

Janam Kundli Horoscope Reading Service

Horoscope Janam Kundli Service in hindi, जन्म पत्रिका का महत्त्व, ज्योतिष में कुंडली क्या काम आती है, जानिए ज्योतिष से अपनी कुंडली का विश्लेषण.

अगर आप अपने भविष्य के बारे में ज्योतिष से जानना चाहते हैं तो जन्म कुंडली की सबसे पहले आवश्यकता पड़ती है. जन्म पत्रिका के आधार पर ही कामकाजी जीवन, वैवाहिक जीवन, प्रेम जीवन, नौकरी, व्यापार आदि के बारे में जाना जाता है. वैदिक ज्योतिष में कुंडली बनाने के लिए जन्म समय, जन्म तारीख और जन्म स्थान की आवश्यकता पड़ती है. www.jyotishsansar.com पर आप १००% वैदिक ज्योतिष(डॉ. ओम प्रकाश) द्वारा कुंडली का विश्लेषण और समाधान पायेंगे.
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ज्योतिष से आप पायेंगे कुंडली में मौजूद अच्छे और बुरे ग्रहों की जानकारी, उनका जीवन पर प्रभाव, समस्याओं का समाधान, भाग्योदय हेतु रत्न की जानकारी, पूजा की जानकारी, दान की जानकारी. ज्योतिष सही भविष्यवाणी के लिए गोचर का अध्ययन भी करते हैं. Horoscope Janam Kundli Service in hindi.

कुंडली या जन्म पत्रिका का विवरण हिंदी और अंग्रेजी में भेजा जाता है मांग के अनुसार. भविष्यवाणी बहुत ही आसान भाषा में लिखा जाता है जिससे कोई भी उसे आसानी से समझ सकता है और कोई शंका होने पर फ़ोन पर भी हल बताया जाता है.

हमारी कुंडली जीवन का आईना होता है अतः जीवन में हमारी कमजोरियो और ताकतों को जानने का एक शशक्त माध्यम है जन्म पत्रिका. Horoscope Janam Kundli Service in hindi

सही भविष्यवाणी जानने के लिए ये जरुरी है की आप सही जन्म समय, जन्म स्थान और जन्म तीख दे अन्यथा समस्या आ सकती है. अच्छे और बेस्ट ज्योतिष से मार्गदर्शन लेके आप पहले से ही जान सकते हैं जीवन में आने वाले चुनौतियों और अवसर के बारे में.

ज्योतिष संसार वेबसाइट के माध्यम से आप बहुत ही आसानी से जन्म पत्रिका का विश्लेषण पा सकते हैं डॉ, ओम प्रकाश से. इसके लिए आपको contact us पेज पर जाके निर्देशों के हिसाब से जानकारी को ईमेल करना होगा. और आपको उसी दिन या फिर अगले दिन तक रिपोर्ट मिल जायेगी. चूँकि वैदिक ज्योतिष के हिसाब से भविष्यवानिया की जाती है अतः सटीक होती है.


ज्योतिष जो रिपोर्ट आपको भेजते हैं उसमें निम्न जानकारियां सम्मिलित होती है – कुंडली की सामान्य जानकारी, ग्रहों का जीवन पर प्रभाव, वर्तमान ग्रह दशाओं का असर, भाग्यशाली रत्न, दान, उचित पूजा, आवश्यकता होने पर मंत्र प्रयोग की जानकारी आदि. अतः आप निश्चित होके ज्योतिष(Dr.Om Prakash) से संपर्क कर सकते हैं.


पाइए ज्योतिष से अपने व्यक्तिगत प्रश्नों का उत्तर, जानिए अपने जीवन के बारे में सितारों के हिसाब से.

आप रोज www.jyotishsansar.com विजिट कर सकते हैं ज्योतिष से सम्बंधित लेखो को पढने के लिए.

विवाह हेतु कुंडली मिलान ज्योतिष सेवा का लाभ ले:

कुंडली मिलान को अष्टकूट मिलान भी कहते हैं जो की भारत में बहुत प्रचलित हैं. इसका प्रयोग अपने लिए सही जीवन साथी चुनने के लिए किया जाता है. आप ज्योतिष से kundli matching service के लिए भी संपर्क कर सकते हैं.
ज्योतिष लड़के और लड़की के कुंडली का अध्ययन बारीकी से करते हैं और सही सलाह देते हैं समस्याओं के समाधान के साथ ताकि विवाह के बाद जीवन सुखपूर्वक बिताया जा सके.


कुछ अक्सर पूछे जाने वाले ज्योतिष से सम्बंधित प्रश्न(FAQ) :

  1. जन्म कुंडली या टेवा या जन्म पत्रिका क्या होती है?
    जन्म पत्रिका जातक के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का विवरण बताता है. इसे नटल चार्ट बर्थ चार्ट या होरोस्कोप भी कहा जाता है अंग्रेजी में. ज्योतिष भविष्यवाणी के लिए इसी का प्रयोग करते हैं. इसके अंतर्गत १२ घर होते हैं जिसमे अलग अलग राशियों में ९ ग्रह विराजित रहते हैं.
  2. क्या ज्योतिष के माध्यम से भविष्य को सही तरीके से जाना जा सकता है?
    ज्योतिष को वेदों को आँखे कहा गया है और दशको से लोग इसका प्रयोग करते हैं जीवन को समझने के लिए ,जीवन को सुखी बनाने के लिए अतः इस विश्वास ना करने का कोई कारण नहीं बनता है. यही नहीं वैदिक ज्योतिष के नियमो का प्रयोग तो अन्य भविष्यवाणियो की पद्धति में भी किया जाता है सही भविष्यकथन के लिए.
  3. क्या आटोमेटिक सॉफ्टवेर द्वारा भविष्यवाणियो पर विश्वास कर सकते हैं?
    इसका जवाब होगा ना, सॉफ्टवेर का स्तेमाल कुंडली बनाने के लिए किया जा सकता है परन्तु भविष्य कथन के लिए बहुत कुछ ध्यान रखना होता है जो की एक अच्छा ज्योतिष ही जानता है और उसके लिएय अनुभव भी जरुरी होता है. अतः हमेशा Horoscope Janam Kundli Service किसी अच्छे ज्योतिष से लीजिये.
  4. लग्न कुंडली सबसे ज्यादा महत्त्व क्यों रखती है?
    लग्न कुंडली सबसे ज्यादा महत्त्व इसीलिए रखता है क्यूंकि इसमें जातक के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति की सटीक जानकारी मौजूद रहती है और इसी का प्रभाव जातक पर जीवन भर रहता है, उसका व्यक्तित्त्व जन्म के समय ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है. अतः भविष्यकथन के लिए ज्यादातर लग्न कुंडली का स्तेमाल किया जाता है. इसके द्वारा लग्न, राशि, ग्रहों की दशा, व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, जीवन में संघर्ष, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन आदि जानकारी आसानी से निकाली जाती है.

ज्योतिष कैसे कुंडली का अध्ययन करता है?

कोई भी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली में मौजूद १२ भावों का अध्ययन करता है, उसमे मौजूद ९ ग्रहों का अध्ययन करता है जो की विभिन्न राशियों के साथ बैठे रहते हैं. कुंडली का पहला घर लग्न कहलाता है, दूसरा भाव लाभ भाव होता है तीसरा पराक्रम भाव होता है और इसी प्रकार अन्य घर अलग अलग विषयो से सम्बंधित रहते हैं. किसी भी विषय को जानने के लिए उससे सम्बंधित भावों और ग्रहों का अध्ययन किया जाता है साथ ही गोचर और दशाओं का अध्ययन किया जाता है. 
डॉ. ओम प्रकाश अलग अलग कुंडलियो का भी अध्ययन करते हैं जिससे सटीक भविष्यवाणी किया जा सके और समस्याओं का समाधान भी सटीक निकले.

आइये जानते हैं की जन्मकुंडली/टेवा/होरोस्कोप दिखने के क्या क्या फायदे हो सकते हैं?

हम सही जन्म समय, जन्म स्थान और जन्म तारीख बता के सही भविष्यवाणी जान के जीवन को सफल बना सकते हैं.
  • ज्योतिष में कुंडली मिलान का प्रयोग करके अपने लिए सही जीवन साथी चुन सकते हैं.
  • हम अपने लिए भाग्यशाली रत्न, अच्छा दिन, शुभ रंग, शुभ अंक जान सकते हैं कुंडली दिख्वाके.
  • हम ये भी जान सकते हैं की कब जीवन में चुनौतियाँ आएँगी और कब आगे बढ़ने लिए अवसर मिलेंगे.
  • हम अपने व्यक्तित्त्व से सम्बंधित कमजोरियों का जान सकते हैं और ताकतों को भी जान सकते हैं. इसी के साथ, आर्थिक जीवन, पारिवारिक जीवन, प्रेम जीवन, विवाह आदि की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
  • अपने अपने जीवन में गोल्डन समय को जान सकते हैं.
  • कुंडली के द्वारा हम अपने जीवन में आने वाले कठिन समय को भी जान सकते हैं.
  • हम ये भी जान सकते हैं की हमे आगे बढ़ने से कौन सा ग्रह रोक रहा हैं.
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Mohini Ekadashi Ka Mahatwa In Hindi

Mohini Ekadashi ka mahatwa in hindi, मोहिनी एकादशी का महत्तव hindi में , कैसे करें आसान उपवास इस दिन, कैसे करे विष्णुजी को प्रसन्न.

एक महत्वपूर्ण दिन जो की पड़ता है वैशाख शुक्ल पक्ष के ग्यारस के दिन वो है “मोहिनी एकादशी”. भगवान् विष्णु के भक्त इस दिन व्रत/उपवास करते हैं भगवान् को प्रसन्न करने के लिए और जीवन को निष्कंटक करने के लिए.
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mohini ekadashi ko kya kare

मोहिनी एकादशी एक पवित्र दिन है जीवन की समस्याओं से बहार आने के लिए, ये रहस्य कृष्ण जी के द्वारा युधिस्ठीर जी को बताया गया था पर उससे भी पहले गुरु वशिष्ठ द्वारा श्री राम को बताया गया था जब वो सीता मैया से बिछड़ कर दुखी थे.

एकादशी के दिन की गई पूजा द्वारा हम दुखों से मुक्ति पा सकते हैं, पापो से मुक्ति पा सकते है, जीवन में आने वाले परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं श्री हरी की कृपा से.

ऐसी मान्यता है की अगर कोई इस दिन उपवास करता है श्रद्धा और विश्वास से तो उसे शांति और सम्पन्नता की प्राप्ति होती है.

अगर कोई पुरे दिन उपवास नहीं कर सकता है तो उसे आधे दिन उपवास करना चाहिए परन्तु इस दिन चावल का प्रयोग कतई नहीं करना चाहिए.

मोहिनी रूप भगवन विष्णु ने लिया था देवताओं को असुरो से बचाने के लिए और असुरों को अमृत पान से रोकने के लिए. वासुदेव सबसे बड़े मायावी है/मायापति हैं. अतः जब कही से भी रास्ते नजर न आये तो विष्णु जी की पूजा से भक्त सफलता प्राप्त कर सकता है.

आइये जानते हैं कैसे करे मोहिनी एकादशी का उपवास आसान तरीके से :

  1. प्रातः जल्दी उठ के दैनिक कार्यो से निवृत्त हो ले
  2. साफ़ कपडे पहन करके आसन पर बैठे विष्णु जी के मूर्ती या फिर फोटो के सामने.
  3. धुप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें.
  4. प्रार्थना करे उनसे की आपके समस्याओं को दूर करें.
  5. पुरे दिन कुछ न खाए और शाम को आरती के बाद फलाहार करे.
  6. पुरे दिन वसुदे के किसी मंत्र का जप करना श्रेष्ठ होगा.
  7. सबसे अच्छा मंत्र है “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ”
  8. अपने क्षमता अनुसार जरुरतमंदो की मदद करे, ब्राह्मण और हरी भक्तो का आशीर्वाद ले.
भारत में एकादशी का दिन महत्तव रखता है और हिन्दू लोग सफलता और सम्पन्नता के लिए इस दिन उपवास करते हैं, ऐसी भी मान्यता है की इस दिन के उपवास से मोक्ष की प्राप्ति होती है देह छोड़ने के पश्चात.



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Suraya grahan Mai Kya kare Jyotish Anusar

ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण का महत्व, सफलता के लिए क्या करें, जानिए विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, surya grahan ke samay graho ki sthiti ।

वर्ष 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून, रविवार को होगा। आम लोगों में ग्रहण को लेके डर होता है और यह सही है कि अगर हम सूर्य ग्रहण के समय में बाहर जाते हैं तो हमें विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य हानी होने की आशंका बढ़ जाती है ।
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Suraya grahan Mai Kya kare Jyotish Anusar
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है और इसलिए सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती हैं।

2020 में सूर्य ग्रहण की तारीख और समय क्या है?

  • इस वर्ष , 21 जून को सूर्य ग्रहण सुबह 10:06 बजे शुरू होगा और दोपहर 1:47 बजे तक रहेगा। स्थानीय समय के अनुसार अलग अलग शहर में समय का थोडा फर्क पड़ सकता है | ये ग्रहण भारत, अफ्रीक, एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा.
  • सूर्यग्रहण का कुल समय लगभग 3 घंटे 41 मिनट है।
  • सूतक 20 जून, शनिवार की रात्रि 10:00 बजे से शुरू होगा ।

आइये जानते हैं की २१ जून को कोंसे योग बन रहे हैं और उसका असर क्या होगा जीवन पर :
जैसा की आप जानते हैं की २१ जून, रविवार को सूर्य ग्रहण होने वाला है परन्तु इसके साथ ही ग्रहों की स्थिति भी बहुत बदली रहेगी जिसके कारण भी परेशानी बढ़ने के संकेत हैं. 

अगर आप कुंडली देखे २१ तारीख को सुबह १० बजे की तो आप देखेंगे की :
surya grahan predictions in hindi
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  1. सूर्य, बुध, चन्द्र और राहू साथ में बैठे है जिसके कारण गोचर में भी सूर्य ग्रहण योग, चन्द्र ग्रहण योग बना हुआ है. 
  2. सूर्य, बुध, चन्द्र, और राहू को मंगल पूर्ण दृष्टि से देख रहा है जो की एक और अशुभ योग बना रहा है. 
  3. इसी के साथ अगर आप देखे तो ग्रहण के समय ६ ग्रह वक्री रहेंगे जो की है बुध, गुरु, शुक्र शनि , राहू और केतु.
  4.  और इसी दिन अमावस्या भी है. 
अतः देखा जाए तो सूर्य ग्रहण के का असर वैश्विक तौर पर और सांसारिक दृष्टि से शुभ नहीं होने वाला है. 

देखिये विडियो सूर्य ग्रहण के समय ग्रहों की स्थिति को जानने के लिए 

परन्तु साधना के लिए एक अति उत्तम योगो का निर्माण कर रहा है. अतः अगर आप सूर्य ग्रहण के समय गुरु मंत्र, इष्ट मंत्र का जप करते हैं तो निश्चित ही अपने बल को बढ़ा पायेंगे और अपने जीवन को सुरक्षित और सफल बना पाएंगे. 

आइए जानते हैं, किन राशियों के लिए यह सूर्य ग्रह अच्छा और बुरा है?

  1. यह सूर्य ग्रहण हिंदू पंचांग के अनुसार मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि पर होने जा रहा है।
  2. तो मिथुन राशि के लोगों के लिए, यह सूर्य ग्रहण अच्छा नहीं है।
  3. मेष, कन्या, सिंह, मकर राशि वालों के लिए शुभ रहेगा ।
  4. वृष, कुंभ, धनु, तुला के लिए, प्रभाव मध्यम होंगे।
  5. मिथुन, कर्क, वृश्चिक, मीन राशि वालों के लिए अशुभ रहेगा। सावधानी बरतना अच्छा है और किसी भी कारण से बाहर नहीं जाना चाहिए।

क्या आप जानते हैं कि सूर्य ग्रहण का समय आध्यात्मिक साधनाओं, तंत्र, मन्त्र, यंत्र सिद्धि के लिए बहुत अच्छा और शक्तिशाली समय होता है?

हम सभी को जीवन की समस्याओं को कम करने और जीवन में समृद्धि को आकर्षित करने का एक बहुत अच्छा अवसर मिल रहा है। हर व्यक्ति को इस महत्त्वपूर्ण समय का स्तेमाल करना चाहिए.

आइये जानते हैं कुछ ख़ास उपाय या टोटके सूर्य ग्रहण के लिए जिनको करके हम अपने जीवन को समृद्ध बना सकते हैं::

  1. यह एक सत्य है कि अगर कोई भी सूर्य ग्रहण के समय किसी भी मंत्र का जाप करता है, तो कोई संदेह नहीं कि मंत्र अपनी शक्ति दिखाता है। अतः व्यक्ति आवश्यकता और इच्छानुसार गुरु मंत्र, या विभिन्न देवताओं से संबंधित किसी भी अन्य मंत्र का जाप कर सकता है।
  2. यदि आप जीवन में वित्तीय समस्या का सामना कर रहे हैं तो महालक्ष्मी अष्टकम या श्री सूक्तम का पाठ ग्रहण के समय जितना हो सके उतना करें। यह निश्चित रूप से महालक्ष्मी के आशीर्वाद को आकर्षित करेगा।
  3. कुंडली में ख़राब ग्रहों की सही चीजों की पेशकश भी जीवन की समस्याओं को कम करने में बहुत मदद करती है। कुंडली में ख़राब ग्रहों के बारे में जानने के लिए ज्योतिषी से परामर्श करना अच्छा है।
  4. अगर कोई काला जादू से पीड़ित है तो ग्रहण के समय महाकाली कवच का पाठ करना अच्छा होता है। इससे बहुत मदद मिलेगी।
  5. यदि आप लंबे समय से कोई साधना कर रहे हैं तो इस बार सूर्य ग्रहण में आप उसे जाग्रत कर सकते हैं ।
  6. यदि कोई जन्म कुंडली में कई ग्रहों से पीड़ित है तो नवग्रह शंती मंत्र का जाप करना अच्छा होता है।
  7. भगवान शिव के भक्त केवल शिव पंचाक्षर मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं-ओम नमः शिवाय
ग्रहण के बाद, यदि पास में कोई बहने वाली नदी है, तो पवित्र स्नान करना और क्षमता के अनुसार चीजों का दान करना अच्छा है।

क्या ना करे सूर्य ग्रहण के समय?

  • प्रेग्नेंट लेडीज को सूर्य ग्रहण के समय बाहर नहीं जाना चाहिए।
  • ग्रहण के समय न कुछ खाएं न पिएं।
  • इस दौरान सोना अच्छा नहीं है और ग्रैहण समय के दौरान यौन संबंध बनाने से भी बचें।
  • ग्रहण की अवधि के दौरान लड़ाई और बहस न करें अन्यथा यह दुर्भाग्य लाएगा।
  • किसी से लड़ाई मत कीजिये और किसी के लिए बुरा मत सोचिये |
जानिए आपके कुंडली क्या कहती है आपके बारे में, कौन से ग्रह परेशानी पैदा कर रहे हैं जीवन में, क्या करे सफलता के लिए ज्योतिष अनुसार, कौन सा रत्न भाग्योदय करेगा.



Surya grahan mai kya kare, kaise kare bhagyoday surya grahan mai, सूर्य ग्रहण में क्या ख़ास करे जीवन को बाधाओं से मुक्त करने के लिए?, किस राशि के लिए शुभ और अशुभ रहेगा जानिए ज्योतिष से.

Rog Mukti Ke Liye Totka In Hindi Jyotish

Rog Mukti Ke Liye Totka In Hindi Jyotish, क्या करे रोग मुक्ति के लिए, कैसे दूर करे रोगों को जीवन से ज्योतिष के माध्यम से.

इसमें कोई शक नहीं की हममे से कोई भी रोग या बीमारी नहीं चाहता है और इससे कोई बच भी नहीं पाता है. किसी ना किसी प्रकार के रोग हमेशा ही जीवन में परेशानी उत्पन्न करते रहते हैं. अगर कोई रोगों से ग्रस्त है तो ये लेख आपकी मदद कर सकता है.
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Rog Mukti Ke Liye Totka In Hindi Jyotish
ऐसे बहुत सी पूजाएँ है, टोटके है, कर्म काण्ड है जिनके द्वारा गंभीर रोगों से मुक्ति में सहायता मिलती है.

आइये जानते हैं कुछ आसान टोटके बिमारी से बचाव के लिए:

  1. अगर कोई लम्बे समय से बिमारी से ग्रस्त है संतोषजनक परिणाम नहीं मिल रहा हो तो गेहू के आटे का एक पेड़ा बनाएं और एक लोटा पानी ले. अब इन दोनों चीजो को बीमार व्यक्ति के ऊपर से २१ बार उतारे, पेड़ा तो गाय को खिला दे और पानी किसी पौधे में डाल दे. ऐसा रविवार से शुरू करके ७ दिन करे और परिणाम देखे.
  2. इलाज के लिए जब भी डॉक्टर के पास जाए तो सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को जाएँ.
  3. ये भी अच्छा रहेगा अगर आप अमृत के चोघडिये में डॉक्टर से सलाह लेने जाएँ.
  4. जब भी दावा ले तो सबसे पहले महामृत्युंजय मंत्र का जप करे थोड़ी देर फिर दावा पे फूंक मारे और फिर उस दावा लो ले. इससे दवा बहुत अच्छा असर करेगी.
  5. अगर कुंडली में ख़राब शनि के कारण रोग परेशान कर रहा हो तो शनिवार को शनि की किसी वास्तु से तुला दान करे जैसे तेल, कोयला, लोहा आदि. इसके अलावा शनि शांति की पूजा के लिए ज्योतिष से संपर्क करे.
  6. ज्योतिष से संपर्क करे और अपनी कुंडली दिखा कर ग्रहों के हिसाब से उपाय करे क्यूंकि ज्योतिष में कुछ स्वास्थ्य सम्बंधित योगो का उल्लेख है जिसके कारण भी जातक को कष्ट उठाना पड़ता है और उसके उपाय उसके हिसाब से करने होते हैं.
  7. रोग मुक्ति के लिए पीपल पर जल चढ़ाएं प्रातः काल और शाम को एक दीपक जालायें सरसों के तेल का और ७ परिक्रमा लेके रोग मुक्ति के लिए प्रार्थना करे. ये टोटका कम से कम ७ दिन जरुर करे, पीपल के टोटके बहुत जल्दी असर दिखाते हैं. .
  8. बीमारी दूर करने के लिए एक और टोटका काफी अच्छा है, इसके लिये काले तिल और जौ का आटा लेके सरसों के तेल से मेल और रोटी बनाएं. इसे रोगी के ऊपर से २१ बार उतार के भेंस को खिला दे.
  9. अगर कुंडली में अशुभ चन्द्रमा के कारण बिमारी तकलीफ दे रहा हो तो रोज सोने के समय एक गिलास पानी अपने सिरहाने रखे और प्रातः काल उसे किसी पेड़ पर डाल दे. ऐसा ४० दिन करे और साथ ही चन्द्र शांति पूजा करवाए ज्योतिष से परामर्श लेके.

Manokaamna Puri Karne Wala Ped, मनोकामना पूरी करने वाला वृक्ष

Manokaamna Puri Karne Wala Ped, मनोकामना पूरी करने वाला वृक्ष, पीपल की पूजा लोग क्यों करते हैं, क्या फायदे हैं पीपल पूजा के, पीपल पूजा से जुड़े टोटके.

एक विश्व प्रसिद्द वृक्ष, एक पवित्र पेड़, एक जादुई पेड़, एक ऐसा वृक्ष जो की सभी के लिए शुभ होता है. इस पेड़ का वैज्ञानिक महत्तव है, अध्यात्मिक महत्तव है, औषधीय महत्तव है, धार्मिक महत्तव है आदि. इसे अंग्रेजी में “सेक्रेड फिग या फिर फिकस रेलिगिओसा ” कहते हैं. ये पेड़ भारत के अलावा भी कई देशो में पाया जाता है जैसे चाइना, बंगाल, नेपाल, मयांमार , पाकिस्तान, श्रीलंका आदि.

Manokaamna Puri Karne Wala Ped
Manokaamna Puri Karne Wala Ped

गौतम बुद्ध ने भी इस पेड़ के निचे साधना की थी इसी कारण उन लोगो के लिए भी ये पेड़ महत्तव रखता है जो लोग बुद्ध का अनुसरण करते हैं. पुरातन समय से ऐसी भी मान्यता है की पीपल वृक्ष में कई प्रकार के सकारात्मक और नकारात्मक उर्जाओं का वास है.

भगवद गीता में भगवान् कृष्ण कहते हैं की “सभी पेड़ो में मैं अश्वथ” हूँ अर्थात पीपल हूँ. पीपल वृक्ष में ऐसी शक्ति है की वो हमारे जीवन को सकारात्मकता से भर सकता है इसी कारण इसके बारे में अलग अलग किताबो में इसके विषय में विभिन्न प्रकार के विवरण मौजूद हैं.

जो लोग लगातार पीपल वृक्ष की पूजा करते हैं उनके जीवन में स्वस्थ्य, सम्पन्नता अनायास ही प्रवेश कर जाता है, यही कारण है की अनेक ज्योतिष भी पीपल पूजा के उपाय देते हैं.

नवग्रह शांति भी पीपल पूजा से संभव है, शनि पीड़ा से भी निजात मिल सकता है पीपल पूजा करके. अगर शनि साड़े साती चल रही हो या फिर धैया चल रहा हो तो पीपल पूजा जरुर करना चाहिए.

आइये जानते हैं कुछ आसान टोटके पीपल के जीवन को सुखी करने के लिए:

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  • शनि अमावस्या को पीपल पेड़ के निचे पश्चिम मुख होके पूजा आराधना करना चाहिए , धुप, दीप, नैवेद्य आदि भेंट करना चाहिए और शनि मंत्र का यथाशक्ति जप करना चाहिए और फिर सफलता के लिए प्रार्थना करना चाहिए. इससे शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है.
  • इसमे कोई शक नहीं की अगर कोई रोज 108 बार पीपल के पेड़ के निचे पाठ करे तो चमत्कारी परिणाम प्राप्त होते हैं.
  • धन के रास्ते खोलने के लिए शुक्रवार के दिन पीपल पूजा करना शुभ होता है.
  • अगर कन्या की कुंडली में विवाह स्थान दूषित हो तो ऐसे में पीपल पेड़ से विवाह का प्रावधान भी मिलता है उसके बाद किसी लड़के से विवाह किया जाता है.
  • अगर कोई हनुमानजी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो 21 पीपल के पत्तो की माला बना के उन पर श्री राम लिख के हनुमानजी को अर्पित करना चाहिए.
  • अगर लगातार धन हानि हो रही हो तो पीपल वृक्ष की पूजा करके 108 परिक्रमा करना चाहिए.
पीपल का वृक्ष अपने आप में एक अद्भुत पेड़ है और जिसकी पूजा कुछ लोग रोज करते हैं और कुछ विशेष महुरतो में करते हैं. ये एक चमत्कार ही है की लोगो की इच्छाओ को ये वृक्ष पूरी करता है. इसीलिए सदियों से लोग इसकी पूजा करते आये हैं. अगर आप भी जीवन में परेशां है तो पीपल पेड़ के प्रयोग कर सकते हैं या फिर ज्योतिष से कुंडली दिखा के अपने लिए सटीक उपाय प्राप्त कर सकते हैं.



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Kin Logo Ko Bimari Ka adhik Khatra Hai

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किन लोगों को बीमारी होने का बड़ा खतरा होता है ?, खुद को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए क्या सावधानियां रखे ।
इन दिनों में पूरी दुनिया एक महामारी से गुजर रही है और हम आकाशीय पिंडों के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकते क्योंकि ज्योतिष के अनुसार ग्रह जीवन को प्रभावित करते ही हैं।
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लेकिन इस लेख में हम इस दुनिया में कोरोना वायरस के कारणों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, इस लेख में हम देखेंगे कि कौन से लोगों को ज्योतिष के अनुसार बीमारियों का बहुत खतरा है और महामारी से बचाने के लिए कौन सी सावधानियां आवश्यक हैं।

इसमें कोई शक नहीं की कुंडली में अधिक ख़राब ग्रहों से जीवन में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वैदिक ज्योतिष में चिकित्सा ज्योतिष के बारे में काफी विवरण मिलता है और स्पष्ट करता है कि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य कैसे खोता है और ज्योतिष शास्त्र से हम कैसे इसे समझ सकते हैं और क्या उपाय कर सकते हैं?

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य हानि गोचर में ग्रहों के परिवर्तन पर भी निर्भर करता है। यदि ख़राब ग्रह गोचर में आ जाते हैं तो उस व्यक्ति के जीवन में रोग की संभावना बढ़ जाती है |

जन्म कुंडली के अध्ययन से ये पता चलता है की गोचर में जब ख़राब या नीच ग्रह आते हैं तो जातक बिमारी से ग्रस्त हो जाता है और उनके निकल जाने से स्वास्थ्य ठीक होने लगता है अतः कोई भी जीवन पर आकाशीय पिंडों के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

ज्योतिषियों द्वारा हमेशा यह सुझाव दिया जाता है कि यदि कोई बीमारी से गुजरता है तो चिकित्सा परामर्श के साथ, सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी से परामर्श करें, जल्दी ठीक होने के लिए । यह भी देखा जाता है कि कभी-कभी दवाएं काम नहीं करती हैं और कारण अज्ञात होते हैं। इस मामले में ज्योतिषी रोगी की मदद करते हैं। तो यह ज्योतिष पर विश्वास करना अंधविश्वास नहीं है। दशकों से विद्वान इस विषय का उपयोग बेहतर जीवन के लिए करते आये हैं।

कुंडली के अनुसार रोग:

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यदि कोई किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित है तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि व्यक्ति की कुंडली में गोचर में बुरे ग्रह आ चुके हैं |
ज्योतिषी आसानी से व्यक्ति के जन्म चार्ट का अध्ययन करके बीमारी के कारणों की भविष्यवाणी कर सकते है। गोचर में ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन भी बीमारियों को उत्पन्न करता है जिसे गोचर कुंडली का अध्ययन करके जाना जा सकता है।



आगे बढ़ने से पहले, आइए 9 ग्रहों से संबंधित अंगों और रोगों को देखें:
  1. ज्योतिष के अनुसार, हृदय, आँखें, रीढ़ की हड्डी, पाचन तंत्र सूर्य से संबंधित हैं। यदि सूर्य जन्म कुंडली में कमजोर है तो बहुत संभव है कि व्यक्ति आंखों की रोशनी की समस्या, माइग्रेन की समस्या, कमजोर हृदय के कारण अस्थिर रक्त परिसंचरण, शरीर के असामान्य तापमान, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली आदि से पीड़ित हो सकता है, इसलिए इस मामले में अच्छा है की ज्योतिषी से परामर्श करके सूर्य की शांति पूजा और कुंडली में सूर्य की स्थिति के अनुसार अन्य उपाय भी किये जाएँ ।
  2. किडनी, पेट, गर्भाशय, मन, आंख, श्वसन अंग चंद्रमा से संबंधित हैं। यदि कुंडली में चंद्रमा ख़राब या दुर्बल हो जाता है तो यह व्यक्ति की नींद, मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है। यह पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है और खांसी और सर्दी की समस्या भी पैदा करता है। महिलाओं को मासिक धर्म विकार का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि चंद्रमा शरीर में तरल पदार्थों से संबंधित है। कुछ को आंखों की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। यह भी देखा जाता है कि चन्द्र से संबंधित रोग प्रतिदिन आकाश में चंद्रमा की स्थिति के अनुसार बढ़ता और घटता है। उदाहरण के लिए, अमावस्या की रात को चंद्रमा पूरी तरह से कमजोर होता है और इसलिए कुंडली में कमजोर चंद्रमा वाले व्यक्ति पूर्णिमा के दिन की तुलना में मन और शरीर में बहुत अधिक कमजोरी का सामना करते हैं अमावस्या को ।
  3. माथे, नाक, मांसपेशियों, जलने और कटने का संबंध मंगल ग्रह से है। यह ग्रह मन और शरीर में ऊर्जा के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए व्यक्ति को शरीर में अस्थिर ऊर्जा का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही सूजन, फ्रैक्चर, रक्त से संबंधित समस्याएं, बुखार, ट्यूमर, दुर्घटना, बवासीर आदि होने की भी संभावना होती है। ज्योतिषी से सलाह लेकर उचित समाधान करना आवश्यक है।
  4. फेफड़े, जीभ, मुंह, हाथ, पाचन तंत्र, तंत्रिकाओं का संबंध बुध ग्रह से होता है। यह ग्रह निर्णय लेने की शक्ति, निति युक्त बात करने के तरीके, सेक्स पावर, मेमोरी, आंत की बीमारी, तंत्रिका तंत्र में समस्या आदि को प्रभावित करता है।
  5. जिगर, रक्त वाहिकाओं, दाहिने कान, जांघ, नितंब, मोटापा का संबंध बृहस्पति से है। कुंडली में समस्याग्रस्त बृहस्पति के कारण, व्यक्ति अस्थमा, मधुमेह, एनीमिया, पीलिया, कमजोर जिगर, पाचन आदि से पीड़ित हो सकता है। यह बहुत महत्वपूर्ण ग्रह है इसलिए जल्द से जल्द उपचारात्मक उपाय करना आवश्यक है क्योंकि यह जीवन के अनेक क्षेत्रो को प्रभावित करता है ।
  6. गाल, त्वचा, गर्दन प्रजनन अंग शुक्र से संबंधित हैं। ख़राब शुक्र ग्रह के कारण, व्यक्ति यौन रोगों, कमजोर प्रजनन अंगों, कमजोर वीर्य, विपरीत लिंग को आकर्षित करने में कमजोर, नपुंसकता आदि से पीड़ित होता है। व्यक्तिगत जीवन और भौतिकतावादी जीवन को सफल बनाने के लिए, आवश्यक है कि ज्योतिष परामर्श द्वारा अपने समाधानों को अपनाया जाए ।
  7. दांत, हड्डियां, जोड़, अस्थमा, फेफड़े शनि ग्रह से संबंधित हैं। दांतों की सड़न, कमजोर हड्डियां, अस्थमा, नपुंसकता, कड़वा स्वभाव, संबंध बनाने में असमर्थता आदि का कारण ख़राब शनि भी हो सकता है | यह ग्रह बहुत कठोर है और व्यक्ति के जीवन को विभिन्न प्रकार से बुरी तरह प्रभावित करता है, साढ़े साती के दौरान, व्यक्ति को बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और इसलिए ज्योतिषी से सलाह लेकर उपायों को अपनाना आवश्यक है।
  8. ज़हरीली बीमारियाँ, साँप के काटने, मतिभ्रम, मनोवैज्ञानिक विकार, व्यसनों, अनिद्रा, का संबंध राहु से है।
  9. हृदय संबंधी विकार, एलर्जी, अज्ञात रोग केतु से संबंधित हैं |

स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में भविष्यवाणियां देने से पहले कुछ बुनियादी नियम ध्यान में रखें:

  1. जन्मकुंडली में 6 वें और 8 वें घर की स्थिति, 12वें भाव, दूसरा भाव और लग्न की स्थिति का विचार करना जरुरी रहता है बारीकी से ।
  2. जन्म कुंडली में ग्रहों के वर्तमान गोचर के साथ-साथ गोचर कुंडली में ग्रहों की चाल का अध्ययन करना चाहिए।
  3. शरीर के विशिष्ट भाग में समस्या के कारणों को समझने के लिए अंग से सम्बंधित ग्रहों का अध्ययन भी आवश्यक है।

ऐसे कई महत्वपूर्ण सवाल हैं जो लोगों के मन में उठते हैं जैसे-

कौन सा ग्रह बीमारियों के लिए जिम्मेदार है?
मुख्य रूप से , 6 और 8 वें घर से संबंधित ग्रह रोगों के लिए जिम्मेदार हैं और इसके बाद कुंडली में मौजूद ख़राब और दुर्बल ग्रह भी स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य के बारे में पूर्वानुमान देने से पहले उचित अध्ययन आवश्यक है।

कौन से ग्रह विचित्र बीमारी या लाइलाज बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं?
इसके लिए राहु, केतु और शनि मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं लेकिन इसके साथ ग्रहों के संयोजन भी जिम्मेदार हैं। केवल एक अनुभवी ज्योतिषी ही गंभीर रोगों के सटीक कारण जान सकते हैं।

कुंडली का कौन सा घर मृत्यु से संबंधित है?
जन्म कुंडली का 8 वां घर जीवन में मृत्यु और स्वास्थ्य के मुद्दों से संबंधित है।

मृत्यु के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है?
इस प्रश्न का कोई विशिष्ट उत्तर नहीं है। लेकिन कुंडली में सबसे अधिक खराब ग्रह का अध्ययन या कुंडली के 8 वें घर से संबंधित ग्रह इस रहस्य को प्रकट कर सकते हैं।

क्या ज्योतिष स्वास्थ्य समस्याओं की भविष्यवाणी कर सकता है?
हां, ज्योतिष स्वास्थ्य के मुद्दों और स्वास्थ्य समस्याओं के समय के बारे में भविष्यवाणी कर सकता है और इसलिए जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए दशकों से इस विद्या का उपयोग किया जा रहा है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किन लोगों को बीमारी का बड़ा खतरा होता है?

  1. जो लोग शनि साढ़े साती से गुजर रहे हैं और साथ ही उनकी कुंडली में ख़राब या दुर्बल शनि हैं, उनमें बीमारी होने का बहुत अधिक खतरा है। इसलिए ध्यान रखें और घर के मंदिर में नियमित रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं,शनि चालीसा का पाठ करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, धनु, मकर राशि के लोगों को इस साल में सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।
  2. कुंडली के छठे और आठवें घर के स्वामी अगर शत्रु राशि में हो तो जातक को बीमारियों से गुजरने का काफी जोखिम होता हैं।
  3. यदि कुंडली के दुसरे घर में कोई भी खराब या दुर्बल ग्रह मौजूद है तो काम करते समय सावधानी बरतें क्योंकि इससे जीवन में बीमारी का खतरा बढ़ जाएगा।
  4. यदि कोई भी बुरा ग्रह गोचर में चल रहा है तो यह यथासंभव सावधानी बरतने का समय है क्योंकि शत्रु ग्रह या दुर्बल ग्रह के पारगमन के दौरान जीवन में बीमारियों का खतरा अधिक होता है।
  5. यदि आपका गण राक्षस है और आप 6, 8 और 12 घरों के साथ केंद्र घरों में अधिक ख़राब ग्रह हैं तो सावधानी बरतें। 

जीवन में बीमारियों से बचने के ज्योतिष उपाय क्या हैं?

यदि आप जानते हैं कि आपका बुरा समय चल रहा है, तो ज्योतिष के सर्वोत्तम उपाय करें और यदि आप अपनी कुंडली में बुरे समय और हानिकारक ग्रहों के बारे में नहीं जानते हैं, तो पढ़ने के लिए ज्योतिषी से परामर्श करें और उसके बाद आप निम्नलिखित उपायों का पालन कर सकते हैं:
  • जातक स्वयं ग्रह शांति करे या फिर ज्योतिष से करवाएं साथ ही रोग निवारण मंत्र का जप भी फायदेमंद होता है।
  • व्यक्ति समस्याओं को कम करने के लिए ज्योतिष द्वारा सुझाए गए कवच का पाठ कर सकता है।
  • जातक आशीर्वाद लेने के लिए चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
  • ग्रहों के दोषों को कम करने के लिए व्यक्ति विशेष ग्रह से संबंधित चीजों का दान भी कर सकता है।
  • भगवान के आशीर्वाद को आकर्षित करने के लिए सिद्ध यंत्र स्थापित करके नियमित रूप से पूजा कर सकता है हैं।
  • सही रत्न पत्थर भी हमारे जीवन को बचाने का एक अच्छा तरीका है।

तो हमारे जीवन को रोगमुक्त बनाने और ज्योतिष शास्त्र का उपयोग करके स्वस्थ जीवन जीने के कई तरीके हैं। यहां मुख्य बात यह है कि सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा ज्योतिषी द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का पालन करे |



ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किन लोगों को बीमारी होने का बड़ा खतरा होता है ?, खुद को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए क्या सावधानियां रखे ।

Akshay Tritiya Ka Mahatw In Hindi

Akshay tritiya ka mahatw in hindi, क्या है अक्षय तृतीय, धार्मिक महत्तव , क्या करे अक्षय तृतीय को, क्या न करे इस पुण्यशाली दिन को, टोटके अक्षय तृतीय के लिए, 2020 मे अक्षय तृतीय क्यों ख़ास है.

अगर आप कोई महत्त्वपूर्ण कार्य का आरंभ करना चाहते हैं, अगर आप पुण्य प्राप्त करने के लिए कोई क्रिया करना चाहते हैं, अगर आप निर्विघ्नता से किसी कार्य को पूर्ण करना चाहते हैं, और अगर आपको मुहुर्त का ज्ञान नहीं है तो कोई बात नहीं है, अक्षय तृतीय का दिन वो शुभ दिन होता है जब कोई भी अच्छा कार्य हम शुरू कर सकते हैं, ये एक स्वयं सिद्ध मुहुर्त है.
akshay tritiya ko kya kare hindi jyotish ke hisab se
Akshay Tritiya Ka Mahatw In Hindi

क्या है अक्षय तृतीय?

इस दिन को “आखा तीज” के रूप में भी जानते हैं. ये दिन भगवान् परशुराम के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है जो की विष्णुजी के छठे अवतार थे. ये वो दिन है जब भगवान् गणेश जी के महाभारत लिखना प्रारंभ किया था. ये दिन है भाग्य को जगाने का , ये दिन है सफलता के लिए क्रियाओं को करने का, ये दिन है देवी शक्तियों के आशीर्वाद लेने का.

अक्षय तृतीय का धार्मिक महत्तव :

  1. ये दिन भवान विष्णु और माता लाक्स्मीजी की पूजा के लिए विशेष दिन है.
  2. ये दिन वैशाख महीने के अमावस्या के बाद आता है.
  3. ऐसी मान्यता है की इस दिन किया हुआ दान का फल कभी ख़त्म नहीं होता
  4. ऐसी भी मान्यता है की त्रेता युग का आरंभ इस दिन से हुआ था.
  5. माता गंगा का आगमन भी पृथ्वी में इसी दिन हुआ था.
  6. कभी न नष्ट होने वाले धन को प्राप्त करने के लिए अक्षय तृतीय के दिन पूजा की जाती है.
  7. अक्षय तृतीय के दिन ही माँ अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था.
  8. इसी दिन युधिष्ठिर को अक्षय पात्र प्राप्त हुआ था जिसके द्वारा वो जरुरत मंदों को भोजन करवाते थे.
  9. इसी दिन सुदामा जी कृष्णा जी से मिले थे.
  10. ऐसी भी मान्यता है की इसी दिन श्री कृष्ण जी ने द्रौपदी का वस्त्र हरण होने से बचाया था.
  11. कनकधारा स्त्रोत्रम की रचना भी अक्ष तृतीय के दिन किया गया था जिसके पाठ से धन देवी को प्रसन्न किया जाता है.

क्या कार्य किये जाते हैं सामान्यतः अक्षय तृतीय को ?

  • इस दिन सोना खरीदना शुभ मन जाता है.
  • इस दिन दान देना शुभ माना जाता है.
  • इस दिन अपने पूर्वजो की उन्नति हेतु भी प्रार्थनाये की जाती है.
  • विष्णुजी और लाक्स्मीजी की पूजा इस दिन शुभ मानी जाती है
  • इस दिन विवाह का भी मुहुर्त होता है.
  • इस दिन लोग नई दूकान, फैक्ट्री, घर आदि का उद्घाटन करना भी पसंद करते हैं.

अक्षय तृतीय के लिए कुछ विशेष टोटके:

Shani Dosh Ke Lakshan in Hindi jyotish

शनि दोष, शनि की दशा, वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि दोष के लक्षण, ज्योतिषी द्वारा उपाय।

ज्योतिष प्रेमियों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रह के बारे में जानने में अत्यधिक रुचि है जो की अपने न्याय और कठोर प्रकृति के लिए जाने जाते है। हाँ ! मैं ज्योतिष में शनि ग्रह के बारे में बात कर रहा हूं।
शनि दोष, शनि की दशा, वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि दोष के लक्षण, ज्योतिषी द्वारा उपाय।
Shani Dosh Ke Lakshan in Hindi jyotish

इस ग्रह से संबंधित लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं:

  • शनि दोष क्या है?
  • ज्योतिष के अनुसार जातक के जीवन में शनि के प्रभाव क्या हैं?
  • मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे जीवन में शनि का प्रभाव है?
  • कैसे मजबूत उपायों का उपयोग करके शनि दोष से छुटकारा पाएं?
  • शनि दशा कब तक चलती है?
  • शनि दशा क्या है?
  • शनि दशा के दौरान क्या होता है?

आइए सबसे पहले जानते हैं कि शनि दोष क्या है?

न्याय के लिए सबसे शक्तिशाली ग्रह शनि है। शनि का प्रभाव जीवन में अवश्यंभावी है और सभी को समय-समय पर महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतरदशा से गुजरना होता है । जहां भी यह कुंडली में बैठता है, उसके हिसाब से व्यक्ति के जीवन को बदल देता है। लोग आमतौर पर शनि देव से डरते हैं क्योंकि शनि दशा के दौरान अच्छे और बुरे कर्मों का फल मिलता है।
यहाँ इस लेख में, हम कुंडली में शनि दोष के बारे में विवरण देखेंगे। यह जातक के जीवन को कैसे प्रभावित करता है, शनि दोष के लक्षण और कई अन्य चीजें।

यहाँ ये भी जानना जरुरी है की शनि का प्रभाव न केवल भारतीय और हिंदुओं के जीवन को प्रभावित करंता है वरन हर इंसान शनि दशा के प्रभाव से गुजरता है, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप हिंदू, अमेरिकी, ब्रिटिश, मुस्लिम, ईसाई, अफ्रीकी आदि हैं | जब ज्योतिषी सही जन्म विवरण के माध्यम से कुंडली बनाते है तो तो सब कुछ सामने आता है।

शनि दोष कुंडली में तब बनता है, जब शनि शत्रु राशि, मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक के साथ मौजूद हो । यह मेष राशि के साथ नीच होता है और जीवन में बहुत परेशान उत्पन्न करता है।

शनि दोष भी तब भी उत्पन्न होता है जब शनि कुंडली में वक्री हो जाता है या जन्म कुंडली में कमजोर होता है। इस ग्रह के गोचर के दौरान शनि के दुष्प्रभाव अधिक देखे जा सकते हैं।

शनि ग्रह के कारण होने वाले कष्ट जन्म कुंडली में शनि दोष की शक्ति पर निर्भर करते हैं। यह भी देखा जाता है कि SHANI SADE SATI के दौरान, जातक जीवन में सबसे शक्तिशाली प्रभावों का सामना करते हैं। यह एक तथ्य है कि पिछले जन्म में पिछले कर्मों के कारण व्यक्ति का भाग्य बनता है और इसलिए यदि किसी भी जातक को बहुत अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि उसने पिछले जन्म में ख़राब कर्म किये, गैर धार्मिक कार्य, बुरे कर्मों को करने में शामिल था जैसे कि दूसरों को परेशान करना, लोगों या अन्य जीवों को चोट पहुँचाना, दूसरों के पैसे छीनने की कोशिश करना, दूसरों के जीवन में बाधाएँ पैदा करना, सामाजिक जीवन, व्यवसाय आदि, दूसरों को धोखा देना आदि।

ज्योतिष के अनुसार जातक के जीवन में शनि दोष का क्या प्रभाव होता है?

भगवान शनि किसी के साथ पक्षपात नहीं करते हैं और इसलिए व्यक्ति को कर्मों के अनुसार समस्याओं का सामना करना पड़ता है या मैं कह सकता हूं कि हर किसी को वह मिलता है जिसका वह हकदार होता है-
  • कुछ जातक को गंभीर स्वास्थ्य हानि जैसे पक्षाघात, अस्थमा, हड्डियों की समस्या और अन्य पुरानी बीमारियों से जूझना होता है शनि दोष के कारण होते हैं।
  • संपत्ति प्राप्त करने में देरी होती है जो एक व्यक्ति को समृद्ध बनाती है।
  • पेशेवर और व्यक्तिगत कार्यों में सफलता पाने में अनजानी बाधाएँ भी शनि दोष के कारण होती हैं।
  • व्यक्ति को पढ़ाई में भी अड़चनें आती हैं और उसे अपने काम का उचित वित्तीय लाभ भी नहीं मिल पाता है जो एक गरीब जीवन जीने के लिए मजबूर करता है।
  • दांपत्य जीवन में असंतुष्टि या जीवनसाथी मिलने में देरी भी शनि दोष के कारण जीवन में एक और मुद्दा है।
  • कुछ दुर्भाग्यपूर्ण लोगों को ख़राब ग्रहों के कारण जीवन में नपुंसकता के मुद्दों का सामना करना पड़ता है।
  • कभी-कभी जातक को नौकरी या व्यापार खोना पड़ता है शनि दशा काल के दौरान होता है, यदि यह ग्रह शत्रु राशि में हो या नीच का हो |
  • स्वास्थ्य के मुद्दों, आजीविका के नुकसान आदि के कारण जीवन में भारी वित्तीय नुकसान के कारण व्यक्ति भी ऋणग्रस्त होता है।
  • कई लोग कानूनी मुद्दों में उलझते हैं और कुछ अदालत द्वारा दी गई सजा के कारण जेल की जिंदगी भी देखते हैं।
  • मैंने कई लोगों को शनि के दशा के दौरान काले जादू के मुद्दों का सामना करते देखा है।
  • निराशा, बीमारी, संघर्ष के कारण व्यक्ति आत्महत्या करने के बारे में भी सोचने लगता है |

शनि दोष के प्रभावी उपाय क्या हैं ज्योतिष में ?

यह जानने के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय है कि यदि शनि ने जीवन को दयनीय बना दिया है तो बुरे प्रभावों से उबरने के लिए क्या करना चाहिए।
  1. ज्योतिषी लोगों को "छाया दान" करने का सुझाव देते हैं, अर्थात् तेल मे चेहरा देखकर सरसों का तेल दान करने की सलाह दी जाती है ।
  2. जीवन में से समस्याओं को हटाने के लिए कम से कम 8 शनिवार व्रत करने का भी सुझाव दिया गया है।
  3. शनिवार को ठीक से पीपल के पेड़ की पूजा करना और जीवन से शनि दोष को कम करने के लिए 8 फेरे लेना भी बहुत अच्छा होता है।
  4. शनिवार के दिन किसी जरूरतमंद ब्राह्मण को काली गाय, भैंस का दान करें | ये भी  शनि पीड़ा से उबरने का एक शक्तिशाली तरीका भी है।
  5. कुंडली से शनि दोष को कम करने के लिए शनि शांति पूजा एक और प्रभावी उपाय है।
  6. कुछ ज्योतिषी नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने का भी सुझाव देते हैं क्योंकि भगवान हनुमान का आशीर्वाद भक्त को ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचाता है।
  7. इसमें नीलम, लोहे की अंगूठी, पत्थर पहनने का भी सुझाव दिया जाता है, लेकिन कुंडली के उचित विवेचन जरुरी है ।
  8. ऐसे लोगों का आशीर्वाद लें, जिनको मदद की ज़रूरत है ।

शनि दोष के प्रभावी उपाय जीवन में सद्भाव, शांति और समृद्धि वापस लाने में बहुत सहायक हैं। इसलिए यदि आप बहुत ज्यादा परेशानी और संघर्ष कर रहे हैं तो ज्योतिष से जरुर सलाह लेना चाहिए |
यह ध्यान में रखना है कि शनि एक आध्यात्मिक ग्रह भी है और इसलिए यह व्यक्ति को एक तपस्वी जीवन और आध्यात्मिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है। यह भी देखा जाता है कि यदि कोई अच्छे कार्यों, प्रार्थनाओं और दूसरों की मदद करने में संलग्न है, तो जीवन में शनि दोष के अत्यधिक प्रभावों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आइए देखें कुंडली के विभिन्न घरों में शनि दोष का प्रभाव:

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ज्योतिष में कुंडली क्या है?

जब कोई भी आत्मा इस ब्रह्मांड में जन्म लेती है तो नियति अपना खेल शुरू कर देती है और सितारों के अनुसार उसका जीवन चलने लगता है हैं। सितारों या ग्रहों की स्थिति जिस चार्ट में देखा जाता है उसे ज्योतिष के अनुसार कुंडली कहा जाता है।
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Kundli Reader

अपनी कुंडली पर चर्चा करें, आपकी कुंडली आपके जीवन के बारे में क्या कहती है, सितारे आपके जीवन को कैसे प्रभावित कर रहे हैं.

कुंडली में 12 घर और 9 ग्रह होते हैं, सभी ग्रह अलग-अलग घरों में मौजूद हैं और जीवन के विशिष्ट खंड के बारे में विशिष्ट बात बताते हैं। सर्वश्रेष्ठ और अनुभवी ज्योतिषी ग्रहों और तारों के रहस्यों को सूक्ष्मता से अध्ययन करने में सक्षम होते हैं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक जातक अपने जीवन में खगोलीय प्रभावों से गुजारता है और यह किसी व्यक्ति की कुंडली का अध्ययन करके जाना जा सकता है और इसीलिए ज्योतिष का उपयोग विद्वानों द्वारा दशकों से किया जा रहा है।

यदि किसी के पास सटीक जन्म विवरण है अर्थात जन्म की तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान है तो जातक की सटीक कुंडली बनाना संभव है।

ज्योतिषी ओम प्रकाश (www.jyotishsansar.com), भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषियों में से एक हैं। वे उज्जैन, महाकाल की नगरी से सम्बन्ध रखते हैं और पूरी दुनिया में ऑनलाइन मार्गदर्शन प्रदान करते है। ऐसे हजारों संतुष्ट लोग हैं जो उनसे लव लाइफ, करियर में सफलता, सामाजिक जीवन, स्वास्थ्य के मुद्दों , व्यावसायिक मुद्दों को हल,काले जादू से छुटकारा पाने आदि के लिए नियमित रूप से उनसे मार्गदर्शन लेते हैं।

ज्योतिषी ओम प्रकाश को प्राचीन वैदिक ज्योतिष का अच्छा ज्ञान है और वे अपने अनुभव का उपयोग भविष्यवाणियाँ देने के लिए करते हैं। कुंडली को पढ़कर, वह जीवन की बाधाओं का पता लगाने में सक्षम है और वह सरल उपाय प्रदान करते है जो कोई भी घर पर आसानी से कर सकता है।


एक व्यक्ति यह जान सकता है:

  • कौन से ग्रह शुभ या अनुकूल हैं और कौन से गृह कुंडली में प्रतिकूल हैं।
  • कुंडली के अलग-अलग घरों में बैठकर सितारे जीवन को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।
  • कौन सी संख्याएं जातक के लिए भाग्यशाली हैं और ग्रह शक्ति को कैसे बढ़ाया जाए।
  • क्या भाग्य को जगाने के लिए नाम बदलने की कोई आवश्यकता है।
  • ज्योतिषी ओम प्रकाश से कुंडली का सूक्ष्म विश्लेषण प्राप्त करें।
  • जानिए कौन से दोष आपको इस भौतिकवादी दुनिया में सफलता प्राप्त करने से रोक रहे हैं।
  • ज्योतिष के माध्यम से जीवन को बेहतर, शक्तिशाली और सफल बनाने के लिए ग्रहों की ऊर्जाओं को संतुलित करने के लिए विशेष उपाय प्राप्त करें।
  • अपने व्यक्तित्व को ऊर्जावान बनाने के सर्वोत्तम मंत्रों के बारे में जानें।
भारत के सबसे अच्छे ज्योतिषी में से कुंडली की भविष्यवाणी प्राप्त करें।

कुंडली किसी भी व्यक्ति पर ग्रहों के प्रभाव को कैसे दर्शाता है?