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भारतीय ज्योतिष की शक्ति | Power of Indian Astrology

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ज्योतिष अपने आप में एक रहस्यमय विषय है | जो इसके बारे में जानते है वो इस विषय का लाभ लेकर जीवन में उंचाइयो को छूते हैं।  ज्योतिष के द्वारा ग्रहों के खेल को समझा जाता है, ज्योतिष के द्वारा ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन में कैसा रहेगा, ये देखा जाता है।
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ज्योतिष को वेदों कि आँखें भी कहा जाता है।  ऐसा कहा गया है "ज्योतिष वेदानां चक्षुः ". ज्योतिष के द्वारा भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में जाना जाता है।  

किसी के जीवन में कब अच्छा समय आयेगा, कब बुरा समय आयेगा, कब भाग्योदय होगा, कब विवाह होगा, क्या करना चाहिए , कब करना चाहिए आदि का ज्ञान बड़ी ही आसानी से पता लगा लिया जाता है।  

ज्योतिष के बारे में गलत फहमी :

Rakshabandhan Mahurat 2015 in Hindi

Rakshabandhan Mahurat 2015 in Hindi, क्या खास बात है २०१५ के रक्षाबंधन में, ग्रहों की दशा जानिए 29 अगस्त २०१५ को., ज्योतिषीय महत्तव रक्षाबंधन का.
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 एक पवित्र त्यौहार है रक्षा बंधन, एक महत्त्वपूर्ण उत्सव है रक्षाबंधन जो की समर्पित है भाई और बहनों को. भाई कहीं भी हो पर रक्षाबंधन के दिन वो जरुर से कोशिश करते हैं की घर पर आये और अपनी प्यारी बहन से राखी बंधवाये और उसे कुछ उपहार दे. 

जो धागा बहन अपने भाई को बांधती है वो कोई साधारण धागा नहीं होता अपितु एक रक्षा कवच की तरह काम करता है जो की व्यक्ति के भाग्वोदय में सहायक होता है. जहाँ बहन भाई की रक्षा के लिए पवित्र धागा बांधती है वही भाई भी बहन की रक्षा करने का वादा करते हैं और विश्वास दिलाते हैं की जीवन भर जब भी जरुरत पड़ेगी तो वो बहन की रक्षा करेंगे. 

आइये जानते हैं की २०१५ के रक्षाबंधन की क्या ख़ास बात है :
29 अगस्त २०१५ को दिन है शनिवार और पूर्णिमा तिथि है. इस दिन ग्रहों की स्थिति काफी अच्छी है जो की इस दिन को ख़ास बनाती है , आइये देखते हैं –
A ) सूर्य अपनी खुद के राशि में विराजित रहेंगे जिससे की दिन शुभ हो जाता है और भाग्योदय करक बनता है.
B ) गुरु भी मित्र राशि को होके विराजमान रहेगा जो की सौभाग्य कारक  होगा.
C ) तीसरा सूर्य और गुरु साथ में बैठे होंगे जिससे की दिन और शुभ और पवित्र होगा और इस दिन के धार्मिक महत्तव को और अधिक बढ़ाएगा.
ये दिन साधको के लिए भी विशेष रहेगा सूर्य और गुरु की शुभता के कारण.
 
आइये अब आपको बताते हैं कुछ ख़ास बाते जिससे की आप इस दिन को और ख़ास बना सकते हैं और परेशानियों को कम कर सकते हैं :
1)    मंगल रक्षाबंधन के दिन नीच का रहेगा जिससे की वो लोग जिनके कुंडली में मंगल ख़राब हो थोडा बहुत परेशानी उठा सकते हैं अतः इस दिन यात्रा को टाले और शिवलिंग का अभिषेक गन्ने के रस से या फिर मीठे पानी से करें मिठैया और कपडे बाटे
2)    जिनके कुंडली में शनि ख़राब है उनको राखी के दिन शिवजी का अभिषेक काले तिल और जल से करना चाहिए. इस दिन शनि भी शत्रु राशि में रहेगा जिससे की क्रोध या दुर्घटना को बढ़ा सकता है, सावधान रहे.
3)    जिनके कुंडली में शुक्र ख़राब हो उनको चाहिए की रक्षाबंधन के दिन किसी माता मंदिर में जाके पूजन करके कपूर का दान करे, और साथ ही बहनों को इतर, कॉस्मेटिक्स का सामान उपहार में दे. 

आइये अब जानते हैं राखी बाँधने के शुभ महूरत :

Janmashtmi Mahattw In Hindi and Jyotish

Janmashtmi Mahattw in hindi, 2015 जन्माष्टमी का क्या महत्तव है, क्या करे सफलता के लिए कृष्णा जन्माष्टमी पर, ज्योतिष और जन्माष्टमी, घर में जन्माष्टमी मनाने का आसान तरीका.
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कृष्ण जन्माष्टमी एक ऐसा उत्सव है जो की सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु संसार के कई देशो में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है. इसका कारण ये है की कृष्ण भक्त पुरे संसार में फैले हुए हैं. 

जन्माष्टमी वह दिन हैं जब कृष्ण जी ने धरती पर जन्म लिया था.

कृष्ण जी को भगवान् विष्णु का अवतार माना जाता है और उनके अवतार लेने की दिव्या घटना अष्टमी की रात्री को घटी थी हिन्दू पंचांग के हिसाब से. अतः तभी से जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाने लगा. इस दिन लोग पूरी रात लोग नाम संकीर्तन , कृष्ण मंत्र का जप आदि किया करते हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव:
इस रात्रि का इन्तेजार भक्त लोग पुरे साल करते हैं, पूरी रात भक्तगण कृष्ण नाम के साथ झूमते हैं , गाते हैं, जगह जगह झांकियां सजाई जाती हैं, लोग घरो में भी झांकियां सजाते हैं और उत्सव मानते हैं. 

झूला लगाया जाता है, उसमे बालगोपाल की मूर्ती रखी जाती है, रात्रि को लोग ह्रदय से बड़े हर्ष और उल्लास के साथ पूजन करते हैं बालगोपाल का.

आइये जानते हैं जन्माष्टमी का ज्योतिषी महत्तव:
हिन्दू ग्रंथो के अनुसार साल में 4 ऐसी रात्रियाँ आती है जिनको की महारात्रि कहा जाता है. ये है- ‘शिव रात्रि ’, ‘होली रात्री’, ‘दिवाली रात्रि’ और ‘जन्माष्टमी रात्रि’.

जन्माष्टमी को ‘मोहरात्रि’ के नाम से भी जाना जाता है. जन्माष्टमी की रात्रि का बहुत महत्तव है और ये रात तंत्र, मंत्र, साधना को सिद्ध करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. इसी कारण तांत्रिक, अघोरी लोग, साधक गण मान्त्रिक इस रात का पुरे वर्ष इन्तेजार करते हैं. 

इस रात्रि को वशीकरण क्रियाओं को भी सिद्ध किया जाता है. 

साधारण लोग भी इस रात का उपयोग दिव्य कृपा को प्राप्त करने के लिए करते हैं और इसके लिए नाम जप और संकीर्तन का सहारा लेते हैं. 

जन्माष्टमी की रात्रि एक दिव्य रात्रि है और पूरा वातावरण कृष्णमय हो जाता है इस दिन और रात को. भगवान् कृष्ण का जन्म धरती पर से पापियों के नाश के लिए हुआ था और उन्होंने ये काम बहुत अच्छी तरह से किया , इसी कारण लोग उनको आज भी पूजते हैं जिससे की उनके जीवन से भी नकारात्मकता का नाश हो. 

दही-हांडी के खेल का महत्तव जन्माष्टमी को :
कृष्ण जन्म के अवसर पर एक विशेष आयोजन होता है और उसे कहते हैं दही-हांडी फोड़ प्रतियोगिता, इसके अंतर्गत एक निश्चित ऊँचाई पर एक हांडी या मटकी में दही भर के लटका दिया जाता है और लोगो को आमंत्रित किया जाता है इसे फोड़ने के लिए , जो फोड़ता है उसे इनाम भी मिलता है. इसको देखने के लिए लोगो की भीड़ लगी रहती है. 

वास्तव में ये प्रतियोगिता कृष्ण जी के नटखट स्वभाव को याद करने के लिए किया जाता है, कृष्ण जी जब छोटे थे तो माखन चुरा के खा लिए करते थे, और गोपियों की मटकी फोड़ दिया करते थे. आज भी लोग उनकी शैतानियों को याद करके खुश होते हैं और विभिन्न आयोजन करते हैं. 

2015 के कृष्ण जन्माष्टमी का महत्तव :

Nag Panchmi Ka Mahattw In Hindi

Nag panchmi ka mahatw in hindi, नाग पंचमी क्या है और क्यों महत्त्वपूर्ण हैं, क्या करे सफलता के लिए नाग पंचमी को ?
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हिन्दू धर्म के अन्दर सांप प्रजाति को भी बहुत माना जाता है और लोगो का ऐसा विश्वास है की सांपो के देवता का आशीर्वाद अगर किसी को मिल जाए तो उसका जीवन धन-धान्य से भरपुर हो जाता है. वैदिक ग्रंथो के अनुसार पंचमी तिथि जो की हर महीने आती है नाग पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है इसी कारण पंचमी को नागो को मारना मना है. 

आइये अब जानते हैं क्या है नाग-पंचमी?
सच्चाई ये है की पंचमी हर महीने 2 बार आती है परन्तु जो पंचमी शरावन महीने में आती है अमवस्या के बाद उसका महत्तव बहुत है और यही दिन नाग-पंचमी के रूप में मनाई जाती है. इसी दिन नाग देवता की पूजा की जाती है जीवन को सुगम बनाने के लिए. 

अगर किसी के कुंडली में कालसर्प योग है या फिर राहू और केतु परेशान कर रहे हो तो भी नागपंचमी के दिन पूजा से लाभ लिया जा सकता है. 

2015 में 19 अगस्त, बुधवार को नाग पंचमी आ रही है जो की बहुत महत्त्वपूर्ण है. 

ज्योतिष के अनुसार २०१५ के नाग पंचमी का महत्तव :
ऐसी मान्यता है की जब पंचमी तिथि बुधवार को पड़े तो इसका महत्तव बहुत बढ़ जाता है, अतः इस बार पंचमी तिथि बुधवार/wednesday को आ रही है और इसी कारण वो लोग जिनके कुंडली में कालसर्प योग है, राहू नीच का है या शत्रु का है या जिनके कुंडली में सर्प दोष है , वे सब पूजाए करवा सकते हैं या फिर कर सकते हैं और इस समय का पूरा लाभ उठा सकते हैं. 
ज्योतिष में महुरतो का विशेष महत्तव है और अगर मुहुर्त मिल जाए तो उसका लाभ उठाना चाहिए. 

आइये अब जानते हैं की भक्तगण नागपंचमी को क्या करते हैं :

Saawan Mahina 2015 Ka Mahattwa In Hindi

Saawan Mahina 2015 Ka Mahattwa, सावन महीने का महत्तव , क्या करे श्रवण में सफलता प्राप्त करने के लिए, ज्योतिष और सावन का महिना.
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इस साल 2015  में श्रावण का महिना एक अगस्त से 29 अगस्त 2015 तक रहेगा. सावन का महिना गुरु पूर्णिमा के ठीक दुसरे दिन से शुरू होगा. इन दिनों श्रवण नक्षत्र का अधिपत्य रहता है और इसी का असर दीखता है, ये नक्षत्र बहुत ही प्रभावशाली होता है और साधना के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण करता है. इसी कारण सावन के महीने का बहुत अधिक महत्त्व माना गया है.
सावन के महीने में शिव पूजा की बहुत मान्यता है क्यूंकि ऐसा माना जाता है की इसी मॉस में समुद्र मंथन हुआ था और उसमे से निकले हलाहल विष को शिवजी ने श्रवण मॉस में पिया था और सभी लोको को बचाया था. इसी कारण लोग श्रावण के महीने में शिव आराधना में लगे रहते है ताकि उनके जीवन में से भी संकट हेट.
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का भी महत्तव होता है, इसके अंतर्गत भक्त लोग पवित्र तीर्थ नदियों से जल भर के शिवलिंग पर चढ़ाते हैं, ये बहुत ही शुभ माना जाता है. 
श्रावण का महिना चातुर्मास के शुरुवात का भी सूचक है और वर्षा के आगमन को भी दिखाता है. 

आइये जानते हैं कौन कौन से उत्सव आ रहे है २०१५ के सावन के महीने में:
सावन का महिना भगवान् की पूजा आराधना और साधना के लिए विशेष फलदाई माना जाता है इसी कारण इस महीने में पड़ने वाले शुभ दिनों का महत्तव भी बढ़ जाता है. इस बार सावन के महीने में निम्न महत्त्वपूर्ण त्यौहार आ रहे हैं –
A) चार तो सोमवार पड़ रहे हैं , इसमे शिव आराधना का विशेष महत्तव है. उज्जैन में सावन सोमवारों को महाकाल की सवारी निकाली जाती है जो की विश्व प्रसिद्ध है , लोग दूर दूर से महाकाल की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रावण सोमवारों को उज्जैन पहुचते हैं. 3, 10 , 17 और 24 अगस्त को ये सोमवार आ रहे हैं. 
B) 3 अगस्त को कृष्ण पक्ष की गणेश चतुर्थी आ रही है, इस दिन उपवास रखके गणेश आराधना की जाती है संकतो को दूर करने के लिए. 
C) मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को है.
D) कामिका एकादशी 10 अगस्त को पड़ रही है. 
E) प्रदोष व्रत का दिन 11 अगस्त को आ रहा है.
F) शिवचतुर्दशी व्रत का दिन 12 अगस्त को है.
G) हरियाली अमावस्या आ रही है 14 अगस्त २०१५ को .
H) सिंधारा डोज 16 अगस्त को मनाया जाएगा.
I) हरियाली तीज 17 अगस्त को मनाया जाएगा.
J) दूर्वा गणपति विनयकी चौथ 18 अगस्त को है, इस दिन भी गणपति की विशेष पूजा होती है दुर्वो से. 
K) नागपंचमी 19 अगस्त को आ रही है.
L) पुत्रदा एकादशी 26 अगस्त २०१५ को है.
M) रक्षाबंधन और पूर्णिमा 29 अगस्त को मनाया जाएगा.
अतः बहुत ही महत्त्वपूर्ण त्यौहार इस सावन के महीने में आ रहे है जिनमे की भक्तगन जीवन को सफल बनाने के लिए पूजा आराधना कर सकते हैं. 

अच्छे ज्योतिष से कुंडली दिखा के भी अपने लिए क्या उचित है, जानना चाहिए. 

आइये अब जानते हैं क्या फायदे हो सकते हैं श्रवण महीने में पूजा अनुष्ठान करने के :