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भारतीय ज्योतिष की शक्ति | Power of Indian Astrology

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ज्योतिष अपने आप में एक रहस्यमय विषय है | जो इसके बारे में जानते है वो इस विषय का लाभ लेकर जीवन में उंचाइयो को छूते हैं।  ज्योतिष के द्वारा ग्रहों के खेल को समझा जाता है, ज्योतिष के द्वारा ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन में कैसा रहेगा, ये देखा जाता है।
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ज्योतिष को वेदों कि आँखें भी कहा जाता है।  ऐसा कहा गया है "ज्योतिष वेदानां चक्षुः ". ज्योतिष के द्वारा भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में जाना जाता है।  

किसी के जीवन में कब अच्छा समय आयेगा, कब बुरा समय आयेगा, कब भाग्योदय होगा, कब विवाह होगा, क्या करना चाहिए , कब करना चाहिए आदि का ज्ञान बड़ी ही आसानी से पता लगा लिया जाता है।  

ज्योतिष के बारे में गलत फहमी :

Guru Poornima Importance In Hindi

Guru Poornima Importance In Hindi, गुरु पूर्णिमा का महत्तव हिन्दी में, क्या करे गुरु पूर्णिमा को.
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हम सभी जानते हैं की हर साल भारत में गुरु पूर्णिमा बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है परन्तु इसका महत्तव बहुत ही कम लोग जानते हैं, आइये जानते हैं कुछ ख़ास बाते गुरु पूर्णिमा के ऊपर.

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्व रः ।
गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः ॥

हमे ये श्लोक पढाया जाता है शुरू से ही , इसका मतलब है “गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है , गुरु ही महेश्वर है और गुरु ही साक्षात् भगवान् है इसीलिए गुरुदेव को नमस्कार है ”.

गुरु के बिना संसार की कल्पना भी संभव नहीं है, कई अध्यात्मिक साधको से मिलके ये पता चलता है की गुरु मिलने के बाद ही उनको वास्तव में जीवन का रहस्य समझ में आया, गुरु मिलने के बाद ही उनको उनके जन्म का कारण समझ आया, गुरु मिलने के बाद ही उनको उनके शक्ति का परिचय मिला. 

हमलोगों ने भगवान् को तो नहीं देखा परन्तु हम लोगो को जो शिक्षा देते हैं उनको हम जरुर जानते हैं इसी कारण हमे अपने गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए. 

गुरु पूर्णिमा वास्तव में मनाया जाता है “व्यास ऋषि” के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने संसार को ये बताया था की वास्तव में गुरु का महत्तव क्या है और उनकी शक्ति क्या होती है. इसी कारण गुरु पूर्णिमा को “व्यास पूर्णिमा ” के नाम से भी जाना जाता है. उनके ही प्रेरणा से अषाढ़ मास की पूर्णिमा को समस्त गुरुजनों के पूजन के लिए मनाया जाने लगा.

इस दिन चन्द्रमा पुरे वर्ष भर में सबसे ज्यादा चमकता है और सबको अपनी शीतलता का अनुभव देता है. ये चातुर्मास के शुरू होने का संकेत भी देता है, ये साधना के लिए उपयुक्त वातावरण के निर्माण होने का संकेत भी देता है. 

व्यास ऋषि ने कई ग्रन्थ लिखे है जिनमे से महाभारत के बारे में सभी जानते हैं. उनके द्वारा लिखे ग्रंथो को पढने से जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है.

अगर गुरु न हो तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, अगर गुरु न हो तो हमे पढ़ायेगा कौन और हमे सिखाएगा कौन. इसीलिए गुरु का सम्मान जरुरु करना चाहिए. 

शिष्य सफलता तभी प्राप्त करंता है जब कोई गुरु उस पर खुश हो जाए जैसे की अर्जुन अपने गुरु की कृपा से विश्व के सबसे अच्छे तीरंदाज बने, स्वामी विवेकानंदा अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के आशीर्वाद से पुरे विश्व में प्रसिद्ध हुए. 

गुरु का अर्थ होता है वो व्यक्ति जो की किसी को अन्धकार से बहार निकालने के रास्ता दिखाए, गुरु का अर्थ है ऐसे कोई जो हमे सिखाये क्या अच्छा है और क्या बुरा, कैसे हमे जीवन जीना चाहिए, क्या करना चाहिए और कैसे. 
क्या करना चाहिए गुरु पूर्णिमा को?

Saawan Mahina 2015 Ka Mahattwa In Hindi

Saawan Mahina 2015 Ka Mahattwa, सावन महीने का महत्तव , क्या करे श्रवण में सफलता प्राप्त करने के लिए, ज्योतिष और सावन का महिना.
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इस साल 2015  में श्रावण का महिना एक अगस्त से 29 अगस्त 2015 तक रहेगा. सावन का महिना गुरु पूर्णिमा के ठीक दुसरे दिन से शुरू होगा. इन दिनों श्रवण नक्षत्र का अधिपत्य रहता है और इसी का असर दीखता है, ये नक्षत्र बहुत ही प्रभावशाली होता है और साधना के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण करता है. इसी कारण सावन के महीने का बहुत अधिक महत्त्व माना गया है.
सावन के महीने में शिव पूजा की बहुत मान्यता है क्यूंकि ऐसा माना जाता है की इसी मॉस में समुद्र मंथन हुआ था और उसमे से निकले हलाहल विष को शिवजी ने श्रवण मॉस में पिया था और सभी लोको को बचाया था. इसी कारण लोग श्रावण के महीने में शिव आराधना में लगे रहते है ताकि उनके जीवन में से भी संकट हेट.
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का भी महत्तव होता है, इसके अंतर्गत भक्त लोग पवित्र तीर्थ नदियों से जल भर के शिवलिंग पर चढ़ाते हैं, ये बहुत ही शुभ माना जाता है. 
श्रावण का महिना चातुर्मास के शुरुवात का भी सूचक है और वर्षा के आगमन को भी दिखाता है. 

आइये जानते हैं कौन कौन से उत्सव आ रहे है २०१५ के सावन के महीने में:
सावन का महिना भगवान् की पूजा आराधना और साधना के लिए विशेष फलदाई माना जाता है इसी कारण इस महीने में पड़ने वाले शुभ दिनों का महत्तव भी बढ़ जाता है. इस बार सावन के महीने में निम्न महत्त्वपूर्ण त्यौहार आ रहे हैं –
A) चार तो सोमवार पड़ रहे हैं , इसमे शिव आराधना का विशेष महत्तव है. उज्जैन में सावन सोमवारों को महाकाल की सवारी निकाली जाती है जो की विश्व प्रसिद्ध है , लोग दूर दूर से महाकाल की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रावण सोमवारों को उज्जैन पहुचते हैं. 3, 10 , 17 और 24 अगस्त को ये सोमवार आ रहे हैं. 
B) 3 अगस्त को कृष्ण पक्ष की गणेश चतुर्थी आ रही है, इस दिन उपवास रखके गणेश आराधना की जाती है संकतो को दूर करने के लिए. 
C) मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को है.
D) कामिका एकादशी 10 अगस्त को पड़ रही है. 
E) प्रदोष व्रत का दिन 11 अगस्त को आ रहा है.
F) शिवचतुर्दशी व्रत का दिन 12 अगस्त को है.
G) हरियाली अमावस्या आ रही है 14 अगस्त २०१५ को .
H) सिंधारा डोज 16 अगस्त को मनाया जाएगा.
I) हरियाली तीज 17 अगस्त को मनाया जाएगा.
J) दूर्वा गणपति विनयकी चौथ 18 अगस्त को है, इस दिन भी गणपति की विशेष पूजा होती है दुर्वो से. 
K) नागपंचमी 19 अगस्त को आ रही है.
L) पुत्रदा एकादशी 26 अगस्त २०१५ को है.
M) रक्षाबंधन और पूर्णिमा 29 अगस्त को मनाया जाएगा.
अतः बहुत ही महत्त्वपूर्ण त्यौहार इस सावन के महीने में आ रहे है जिनमे की भक्तगन जीवन को सफल बनाने के लिए पूजा आराधना कर सकते हैं. 

अच्छे ज्योतिष से कुंडली दिखा के भी अपने लिए क्या उचित है, जानना चाहिए. 

आइये अब जानते हैं क्या फायदे हो सकते हैं श्रवण महीने में पूजा अनुष्ठान करने के :

Jyotish Dwara Kam Kare Jokhim Ko

Jyotish Dwara Kam Kare Jokhim Ko, ज्योतिष के द्वारा जोखिम को कम कर सकते हैं, जीवन में मौजूद जोखिम, ज्योतिष कैसे मदद करता है परेशानियों को कम करने में?
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अगर कोई पूछे की “क्या ऐसा कोई गणित है जिसके द्वारा जीवन के रहस्यों को जाना जा सके ” तो ये कहने में कोई झिझक नहीं है की एक ऐसा विषय है भारत में जिसके के द्वारा जीवन के रहस्यों को जानने में मदद मिलती है और वो है “वैदिक ज्योतिष” .ये भारत के महान संतों द्वारा प्रदान किया गया एक अनुपम उपहार है जो की दशको से स्तेमाल होता रहा है विद्वानों द्वारा.

वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत ग्रहों को और उनकी स्थितियों को पढ़ा जाता है, ग्रहों के एक दुसरे से संबंधो को देखा जाता है, उन समयों को जाना जाता है जो की अच्छे है या बुरे हैं. 

ज्योतिष कुंडली का अध्ययन करके ये जानते हैं की जीवन में मौजूद समस्याओं का कारण क्या है, किसी भी कार्य को करने में जोखिम कितना हो सकता है और जोखिमो को कम करने के क्या तरीके हो सकते हैं. 

ये एक कड़वा सच है की भाग्य हमारे द्वारा किये कार्यो द्वारा ही बनता है, हमारे वर्तमान जीवन का कारण है हमारे भूतकाल में किये गए कार्य और हमारे भविष्य के लिए जिम्मेदार होंगे हमारे वर्तमान के कार्य. अगर हम आज अच्छा कार्य कर रहे है तो इसमे कोई शक नहीं की भविष्य अच्छा होगा ही. 

परन्तु ये सब इतना आसान नहीं है, क्यूंकि हम ये नहीं जानते हैं की हमने भूतकाल में क्या किया है, अतः जब समस्याए आती है तो हम ये सब खोजना चाहते हैं की इसका कारण क्या है और इससे कैसे निजात पा सकते हैं. और इसी में ज्योतिष हमारी मदद करता है. 

कैसे कम करे ज्योतिष द्वारा जीवन से जोखिम को ?

Shiv Panchakshari Mantra Sadhna in Hindi

Shiv Panchakshari Mantra Sadhna in Hindi, क्या है शिव पंचाक्षरी मंत्र, जानिए शिव पंचाक्षरी मंत्र का महत्तव, किस विधि से जपे शिव मंत्र.
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अगर आप भक्त है शिवजी के , अगर आप शिवजी के मूल मंत्र का जप करते हैं, अगर आप शिव कृपा प्राप्त करने के इच्छुक है , अगर आप शिवजी के पंचाक्षरी मंत्र को जपने की विधि जानना चाहते हैं तो ये लेख आपको जानकारी देगा.

जीवन को सफल बनाने के लिए एक बहुत ही अच्छा तरीका है और वो है मंत्र साधना, मंत्र तो अनेक है परन्तु भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र की महीमा अपरम्पार है, इसका जप कोई भी कभी भी बिना संकोच के कर सकता है. 
भगवान् शिव जीवन और मृत्यु के भी अधिपति है अतः उनके मंत्र का जप बड़े बिमारियों से भी हमारी रक्षा करता है इसमे कोई शक नहीं.

जीवन की कई समस्याओं का समाधान है शिव पंचाक्षरी मंत्र का जप. 
सिद्ध शिव पंचाक्षरी यन्त्र या फिर शिवलिंग की स्थापना के बाद अगर मंत्र अनुष्ठान किया जाए तो शीघ्र ही असर मालुम होते हैं. 
अगर आप शांति और सुख की खोज में है तो अपनी इच्छाओ को पूरी करने के लिए शिव मंत्र एक अच्छा माध्यम हो सकता है. 

क्या है शिव पंचाक्षरी मंत्र ?
इस मंत्र में पांच अक्षर होते हैं इसीलिए इसे पंचाक्षरी मंत्र कहा जाता है ये 5 अक्षर है “नमः शिवाय”, इसके पहले ॐ लगा देने से पूरा मंत्र बनता है “ॐ नमः शिवाय”.
यही है शिव कृपा प्राप्त करने का महा मंत्र, यही है दुःख निवृत्ति का सरल उपाय.

आइये जानते हैं कैसे जपा जाए शिव पंचाक्षरी मंत्र को :