17 अक्टूबर से सूर्य-शनि का षडाष्टक योग: 12 राशियों पर प्रभाव 17 अक्टूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही सूर्य और शनि के बीच षडाष्टक संबंध बनेगा। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, पिता, नेतृत्व, प्रशासन और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन, देरी, जिम्मेदारियों और संघर्ष से जुड़े हैं। सूर्य और शनि के बीच 6-8 का संबंध होने पर इसे षडाष्टक योग कहा जाता है, जिसे सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में अहंकार और अनुशासन के बीच टकराव, कार्यक्षेत्र में दबाव, वरिष्ठों से मतभेद, पारिवारिक जिम्मेदारियों में वृद्धि और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से परेशानी हो सकती है। हालांकि, सावधानी, संयम और सही कर्म से इस समय को सकारात्मक दिशा भी दी जा सकती है। Surya Aur Shani Ke Beech SHADASHTAK YOG आइये जानते हैं 12 राशियों पर क्या प्रभाव होगा सूर्य और शनि के बीच षडाष्टक योग के कारण: ♈ मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय रिश्तों, साझेदारी और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की परीक्षा ले सकता है। जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ किसी बात को ...
यक्षिणी कौन हैं ?, क्या लाभ है यक्षिणी सिद्ध करने के, कौन सी Yakshini देती है धन लाभ, विभिन्न यक्षिनियो के मंत्र | यक्षिणी को यक्षी, पालि:, यक्खिनी या यक्खी भी कहा जाता है | ये रहस्यमयी शक्तियों की स्वामीनी होती है और इनका वर्णन हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में भी मिलता है | जिस प्रकार गंधर्व, राक्षस,देवी, देवता होते हैं वैसे ही यक्शिनियाँ भी होती है | इनका वास पेड़ो में माना जाता है | इन्हें भगवान शिव के सेवक माना जाता है। इनके राजा यक्षराज कुबेर हैं, जो धन के स्वामी हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, यक्ष-यक्षिणीयों के पास रहस्यमयी ताकते होती है। Yakshini Kaun Hote Hain प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ यक्षिणी बहुत ही अच्छी होती है और जो उनकी पूजा करता है उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है | कुछ महत्त्वपूर्ण वृक्ष है जिनके निचे यक्षिणी साधना की जाती है जैसे अशोक का वृक्ष, केले का पेड़, बेर का पेड़, बबूल का पेड़ आदि | ऐसी भी मान्यता है की यक्षिणी साधना शीघ्र फल देती है अतः कुछ लोग जीवन में सफलता के लिए यक्षिणी साधना करते हैं | आइये जानते हैं प्रमुख यक्षिनियोके नाम ...