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Showing posts with the label ekadashi ka mahattw in hindi jyotish

Latest Astrology Updates in Hindi

Shukra Ka Gochar Tula Rashi Mai Kab Hoga

Shukra Ka Gochar Tula Rashi Mai Kab Hoga,  शुक्र का तुला राशि में गोचर September 2026, Shukra gochar, jyotish updates, rashifal. Shukra Ka Gochar Tula Rashi Mai: शुक्र ग्रह जीवन में बहुत महत्व रखता है और इसका गोचर जीवन में बड़े बदलाव लाता है। शुक्र ग्रह भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, रोमांस, सौंदर्य, ग्लैमर आदि से संबंधित है और इसलिए हर कोई शानदार जीवन जीने के लिए शुक्र की शक्ति को बढ़ाना चाहता है। 2 September को दोपहर लगभग 1:40 बजे शुक्र तुला राशि में प्रवेश करेंगे जो कि इसकी अपनी राशि है और इसलिए यह सभी के लिए मजबूत और सहायक बन जायेंगे । इस गोचर से मालव्य नाम का राजयोग बनेगा. तो इस ज्योतिष लेख में हम 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभावों को देखेंगे। Shukra Ka Gochar Tula Rashi Mai Shukra Ka Gochar Tula Rashi Mai Kab Hoga आइये जानते हैं 12 राशियों पर शुक्र के गोचर का क्या प्रभाव होगा ? मेष राशि मेष राशि वालों के लिए शुक्र का तुला राशि में गोचर विशेष रूप से विवाह, साझेदारी और व्यक्तिगत संबंधों के क्षेत्र को प्रभावित करेगा, क्योंकि तुला आपकी कुंडली का सप्तम भाव बनता ह...

Putrada Ekadashi Vrat Ka Jyotish Mahattw

🌼 23 अगस्त 2026 – पुत्रदा एकादशी का महत्त्व और पूजन विधि 🌼 पुत्रदा एकादशी , जो इस वर्ष 23 अगस्त 2026, Ravivar को आ रही है, हिन्दू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी मानी जाती है। यह एकादशी विशेष रूप से संतान की प्राप्ति, संतान की उन्नति, तथा पारिवारिक सुख-शांति के लिए की जाती है। इस एकादशी का नाम ही इसके उद्देश्य को दर्शाता है – 'पुत्रदा' , अर्थात ‘पुत्र देने वाली’। विशेष रूप से वे दंपत्ति जो संतान सुख से वंचित हैं या संतान की दीर्घायु, बुद्धिमत्ता एवं उन्नति के लिए चिंतित रहते हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जो भी दंपत्ति स्वस्थ संतान चाहते हैं, उन्हें इस दिन विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए। हिन्दुओं की मान्यता है कि श्राद्ध कर्म पुत्र द्वारा ही किया जाता है, परन्तु आज के समय में बेटियां भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। Putrada Ekadashi Vrat Ka Jyotish Mahattw 🌙 पुत्रदा एकादशी 2026 तिथि व समय एकादशी तिथि प्रारंभ:  23 अगस्त 2026, 2:02 AM एकादशी तिथि समाप्त:  24 अगस्त 2026, 04:19 PM व्रत तिथि:  23 अगस्...

Kamika Ekadashi se dur hoti hai pareshani

Kamika ekadashi Kab Hai 2026,  कामिका एकादशी का महत्त्व, क्या करें इस दिन, कैसे करे पूजा, कामिका एकादशी व्रत कथा | Kamika Ekadashi 2026: श्रावण महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जानते हैं और ये बहुत अधिक महत्त्व रखता है |  2026 में कामिका एकादशी 9 August Ravivar को है | एकादशी तिथि 8 August को दोपहर में लगभग 2:01 बजे से शुरू होगी और 9 August को दिन में लगभग 11:05 तक रहेगी | पारण 10 अगस्त को किया जायेगा. Kamika Ekadashi se dur hoti hai pareshani आइये जानते हैं kamika ekadashi के व्रत करने से क्या फायदे होते हैं : इस दिन जो लोग भगवन विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं, उपवास रखते हैं उन्हें गंगा स्नान से भी ज्यादा पुण्य फल की प्राप्ति होती है | जो लोग गौ दान नहीं कर सकते हैं अगर वो इस व्रत को करें तो उन्हें गौदान का फल प्राप्त होता है | कामिका एकादशी को भगवन विष्णु की पूजा करने से पितृ भी प्रसन्न होते हैं | इस दिन उपवास करने से नाग देवता भी खुश होते हैं |  Kamika Ekadashi 2026 कुंडली में मौजूद अनेक दोषों की शांति सिर्फ कामिका एकादशी के व्रत और पूजन करने ...

Dev Shayani Ekadashi Ki Mahima in Hindi

Dev Shayani Ekadashi kab hai 2026 में , पद्मा एकादशी , हरी शयनी एकादशी किसको कहते है, क्या करे देव शयनी एकादशी को सफलता के लिए, जानिए ग्रहों की स्थिति . Devshayani Ekadashi 2026: अषाढ़ शुक्ल पक्ष का ग्यारहवां दिन बहुत ख़ास होता है भारत मे विशेषतः क्यूंकि मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान् विष्णु क्षीर सागर मे सोने के लिए चले जाते हैं. अलग अलग प्रान्तों मे अषाढ़ मास के ग्यारस को अलग लग नामो से जाना जाता है जैसे पद्मा एकादशी, प्रथमा एकादशी, हरी शयनी एकादशी आदि.   Dev Shayani Ekadashi Ki Mahima in Hindi इस पुरे दिन और रात भक्त गण भगवान् विष्णु की पूजा और आराधना मे लगे रहते हैं. इसी दिन चातुर्मास की शुरुआत भी होती है अर्थात इस दिन से ४ महीने तक साधू संत विशेष पूजा आराधना करते हैं और कहीं जाते आते भी नहीं है. वर्ष  2026  मे हरी शयनी एकादशी 25 जुलाई को है|  एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:14 बजे एकादशी तिथि का समापन: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026 को सुबह 05:39 से 08:22 बजे के बीच  मान्यता के अनुसार पद्मा एकादश...

Yogini Ekadashi Ka Mahattw In Hindi

Yogini Ekadashi Kab hai, योगिनी एकादशी 2026, क्या फायदा होगा योगिनी एकादशी व्रत से, क्या करे सफलता के लिए, yogini ekadashi ki katha. हिन्दू पंचांग के हिसाब से जब अषाढ़ महीने की कृष्ण पक्ष का ग्यारहवां दिन आता है तब एक महत्त्वपूर्ण उपवास लोग करते हैं जिसको की योगिनी एकादशी के उपवास के नाम से जाना जाता है. इस उपवास को करने से लोग पापों और बीमारियों से मुक्ति पाते हैं. 2026 में 11 July को Yogini Ekadashi का व्रत रखना शुभ रहेगा    और व्रत का पारण 12 तारीख को प्रातः 5:32 से 8:18 के बीच करना शुभ रहेगा  Yogini Ekadashi Ka Mahattw In Hindi एकादशी को ग्यारस के नाम से भी जानते हैं और ये दिन भगवान् विष्णु के पूजा को समर्पित होता है. इस दिन पीपल पूजा भी विशेष फलदाई होती है.  जब हम बात करते हैं योगिनी एकादशी की तो बताना चाहेंगे की ये दिन बहुत ही पुण्यशाली, पवित्र और शक्तिशाली है, हिन्दू पौराणिक कथाओं से पता चलता है की योगिनी एकादशी के व्रत को करके एक यक्ष को कोढ़ रोग से मुक्ति मिली थी फिर वो पूरी जिन्दगी अच्छी तरह से रहा. इसी कारण योगिनी एकादशी का महत्तव बहुत माना जात...

Nirjala Ekadashi kab hai jyotish anusar

कब है निर्जला एकादशी 2026, date of nirjala ekadashi, निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें?, nirjal ekadashi ke upay, When is nirjala ekadashi?. हिंदू परंपरा के अनुसार सबसे शुभ उपवासों में से एक निर्जला एकादशी का दिन है यानी बिना पानी पिए उपवास करने का दिन। निर्जला एकादशी को पांडव या भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष में 11 वें दिन आता है। साल में 24 एकादशी आती है परन्तु nirjal ekadashi  सबसे शक्तिशाली एकादशी व्रत माना जाता है अनुष्ठान करके पुण्य प्राप्त करने के लिए | 2026 में 25 June को है निर्जला एकादशी व्रत | एकादशी तिथि शुरू होगी 24 तारीख को शाम में लगभग 6:12 बजे और   एकादशी तिथि समाप्त होगी 25 जून को रात्री में लगभग 8:09 बजे | पारण का समय रहेगा 26 जून को प्रातः 5:30 से 7:44 तक  Nirjala Ekadashi kab hai jyotish anusar ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत सभी 24 एकादशी का फल दे सकता है इसलिए यह बहुत ही पवित्र और शक्तिशाली है। भीम अर्थात पांडव पुत्रों में से एक ने निर्जला एकादशी का व्रत करने के...

Papmochni Ekadashi Kab Hai

Papmochni Ekadashi Kab Hai 2026, पापमोचनी एकादशी की कथा, क्या फायदे हैं एकादशी व्रत के. पाप मोचनी एकादशी 15 मार्च रविवार को है — सफलता के लिए क्या करें? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में पाप मोचनी एकादशी का महत्व अत्यंत विशेष बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि तथा सफलता की प्राप्ति होती है। साल 2026 में पाप मोचनी एकादशी 15 मार्च रविवार के दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। Papmochni Ekadashi Kab Hai एकादशी तिथि प्रारंभ होगी 14 मार्च को सुबह लगभग 8:13 बजे एकादशी तिथि समाप्त होगी 15 मार्च को सुबह लगभग 9:18 बजे एकादशी का पारण १६ तारीख को सुबह 6:30 से 8:45 के बीच कर सकते हैं पाप मोचनी एकादशी का महत्व शास्त्रों में कहा गया है कि पाप मोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात ...

Amalki Ekadashi kabhai - Vrat Puja Vidhi aur Katha

Amalki Ekadashi kab hai - Vrat Puja Vidhi aur Kathaआमलकी एकादशी 2026: व्रत, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व., Eakdashi Update. Amalki Ekadashi 2026 : फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में आमलकी एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी । यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और आंवला वृक्ष के पूजन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है, और आमलकी एकादशी का महत्व तो और भी अधिक बताया गया है क्योंकि यह आध्यात्मिक शुद्धि, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है। एकादशी तिथि २६ फ़रवरी को रात्री में लगभग 12:33 पे शुरू होगी और एकादशी तिथि 27 फ़रवरी को रात्री में लगभग 10:32 तक रहेगी. पारण २८ तारीख को प्रातः 7 बजे से 10:44 के बीच करना शुभ रहेगा. Amalki Ekadashi kabhai - Vrat Puja Vidhi aur Katha  आमलकी एकादशी का उल्लेख पुराणों में विशेष रूप से मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन आंवला वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। आंवला को आयुर्वेद में अमृत के समान माना गया है और धार्मिक दृष्टि स...

Vijaya Ekadashi Kab Hai

Vijaya Ekadashi Kab Hai 2026, विजया एकादशी कब है – 12 या 13 फरवरी 2026? सही तारीख, व्रत विधि और महत्व, viajaya Ekadashi ki katha. Vijaya Ekadashi 2026 : हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली विजया एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। 2026 में विजया एकादशी को लेकर कई लोगों के मन में कन्फ्यूजन है कि यह 12 फरवरी को है या 13 फरवरी को? Vijaya Ekadashi Kab Hai  📅 विजया एकादशी 2026 की सही तिथि पंचांग के अनुसार: एकादशी तिथि शुरू: 12 फरवरी 2026, दिन में 12:22 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दिन 02:25 बजे 👉 उदयातिथि के अनुसार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को रखा जाएगा। 🕉️ विजया एकादशी का महत्व:  Vijaya Ekadashi 2026 विजया एकादशी को करने से अनेक लाभ होते हैं जैसे इस व्रत को करने से हर कार्य में विजय मिलती है शत्रुओं पर जीत प्राप्त होती है जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं पापों का नाश होता है कहा जाता है कि लंका पर विजय से पहले भगवान श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत किया था। 🙏 विजया एकादशी व्रत विधि (सरल त...

Shattila Ekadashi Ka Jyotish Mahattw

षट्तिला  एकादशी   कब है,  Shattila Ekadashi का ज्योतिष महत्त्व, kya kare sattila ekadashi ko safalta ke liye, शट्तिला एकादशी vrat kaise kare. Shattila Ekadashi: षट्तिला  एकादशी  हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र व्रत तिथि है। यह  माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी  को मनाई जाती है और खासकर तिल के छह प्रकार के उपयोग के कारण इसे  षट्तिला  नाम से जाना जाता है।  इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है। Shattila Ekadashi Kab hai 📅 षट्तिला एकादशी 2026 — तारीख और तिथि वर्ष 2026 में षट्तिला एकादशी बुधवार, 14 जनवरी 2026 को है। हिंदू पंचांग के अनुसार: एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 जनवरी 2026, दोपहर लगभग 3:19 बजे से एकादशी तिथि समाप्त: 14 जनवरी 2026, शाम लगभग 5:53 बजे   Shattila Ekadashi व्रत का मुख्य दिन/उदया तिथि: 14 जनवरी 2026 (बुधवार) पारण (व्रत खोलने का शुभ समय): 15 जनवरी 2026, प्रातः लगभग 7:15 बजे से 9:21 बजे तक  Shat tila Ekadashi Ka Mahattw: षट्तिला एकादशी को भगवान विष्णु की विशेष कृपा का दिन माना जाता है। यह व्र...

Utpanna Ekadashi Ka Mahattwa

Utpanna ekadashi kab hai 2025, उत्पन्ना एकादशी का महत्व, भगवान विष्णु के 10 अवतार, कैसे आसानी से करे एकादशी की पूजा | उत्पन्ना एकादशी सबसे शुभ दिनों में से एक है जब भगवान विष्णु के भक्त जीवन को बाधाओं से मुक्त करने और मोक्ष पाने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। भारतीय शास्त्र कहते हैं कि एकादशी का व्रत और प्रार्थना लोगों को पापों से मुक्त करता है और भगवान विष्णु के आशीर्वाद को आकर्षित करने में सक्षम है। भारत में विभिन्न मंदिर हैं जहां भक्त अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए अलग-अलग तरीकों से भगवान विष्णु के अवतार की पूजा करते हैं। utpanna ekadashi ka mahattw in hindi भगवान वासुदेव के 10 अवतारों की पूजा लोगों को स्वास्थ्य, धन, भौतिक लाभ और मोक्ष प्राप्त करने में मदद करती है। इसलिए समृद्ध जीवन जीने के लिए, एकादशी के दिन पूजा करना अच्छा होता है।  हम इस लेख में वासुदेव के 10 अवतारों के बारे में भी जानेंगे। 2025 में, उत्पन्ना एकादशी 15 November शनिवार को है। एकादशी तिथि शुरू होगी १५ नवम्बर को 12:51 AM. एकादशी तिथि समाप्त होगी १६ नवम्बर रात्री में 2:37 AM पारण कर सकते हैं १६ तारीख को ...

Dev Uthni Gyaras Ka Mahattw || देव उठनी एकादशी महत्तव

Dev Uthni Gyaras Kab hai 2025, देव उठनी एकादशी महत्तव,  क्या करे प्रबोधिनी एकादशी को सफलता के लिए, ekadashi update. Devuthni gyaras 2025:  इस साल देवउठनी ग्यारस २ नवम्बर रविवार को है | एकादशी तिथि 1 नवम्बर को दिन में लगभग 9:13 बजे शुरू होगी और 2 तारीख को प्रातः में लगभग 7:31 बजे तक रहेगी | चूँकि द्वादशी युक्त एकादशी करने का विधान है इसीलिए एकादशी का व्रत 2 तारीख को किया जायेगा. इस व्रत का पारण 3 तारीख को प्रातः लगभग 6:43 के बाद किया जाएगा. एक ऐसा दिन जिसका हिन्दुओ के लिए बहुत अधिक महत्तव है और वो दिन हैं कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारस. इस दिन को प्रबोधिनी एकादशी या फिर देव उठनी ग्यारस भी कहा जाता है. भारत में इस दिन को बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. dev uthni ekadashi in jyotish ऐसा माना जाता है की भगवान् विष्णु आशाद शुक्ल पक्ष की ग्यारस को क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं और 4 महीने बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारस को उठते हैं इसी लिए इस दिन को देव उठनी ग्यारस कहा जाता है. जब विष्णुजी सोते है तो उस समय विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित हो जाते ...