Skip to main content

Latest Astrology Updates in Hindi

shukra ka gochar kumbh raashi me kab hoga

Shukra ka gochar kumbh raashi me kab hoga 2026 , किन राशि वालो की किस्मत बदलेगी, जानिए राशिफल , jyotish sansar, jyotish updates. Shukra Gochar Kumbh Rashi Mai 2026:  6 Februay को शुक्र मकर राशी से निकल के कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे जो की शुक्र की मित्र राशि है | यहाँ पर पहले से ही बुध और राहू मौजूद हैं जिसके कारण 3 ग्रहों की युति होगी.  Shukra Gochar Kumbh Rashi Mai 2026 : नए साल में शुक्र ग्रह का ये दूसरा गोचर होगा | शुक्र ग्रह विलासिता, प्रेम, रोमांस, ऐशो आराम, ग्लेमर की दुनिया, सुन्दरता, काम, वासना आदि से जुड़ा हुआ है जिसके कारण shukr का गोचर लोगो के जीवन में बहुत बदलाव लाता है |  shshukra ka gochar kumbh raashi me kab hoga  आइये जानते हैं शुक्र कब और कितने बजे कुम्भ राशि में गोचर करेंगे ? ज्योतिष गणना के अनुसार, शुक्र 6 फ़रवरी को रात्रि में लगभग 12:52 AM पर कुंभ राशि में गोचर करेंगे और 2 मार्च तक इसी राशि में रहेंगे | इसके बाद शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करेंगे | आइये जानते हैं क्या बदलाव होगा शुक्र के कुम्भ राशि में गोचर का ? मेष राश...

Aja ekadashi kab hai | अजा एकादशी कब है

Aja ekadashi kab hai, अजा एकादशी कब है| August  Ekadashi| Gyaras ki sahi tarikh 18  ya 19, पारण का समय, पारण का मंत्र, gyaras puja mantra, कथा.

"अजा एकादशी" भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आती है। 2025 में Aja Ekadashi मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को है. इस दिन गोचर कुंडली में गजलक्ष्मी, कलात्मक योग और गज केसरी योग भी बना रहेगा.

Aja ekadashi kab hai, अजा एकादशी कब है| August  Ekadashi| Gyaras ki sahi tarikh 18  ya 19, पारण का समय, पारण का मंत्र, gyaras puja mantra, कथा.
Aja ekadashi kab hai | अजा एकादशी कब है


हिन्दू पंचांग के अनुसार, एकादशी का समय

  • अजा एकादशी तिथि प्रारंभ : 18 अगस्त 2025 की शाम को लगभग 5:24 बजे
  • अजा एकादशी तिथि समाप्त : 19 अगस्त 2025 दोपहर को लगभग 3:33 बजे

तो उदय तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत १९ तारीख को को किया जायेगा।

पारण २० अगस्त को किया जाएगा।

धार्मिक महत्व

अजा एकादशी व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत, कथा श्रवण और भक्तिभाव से किए गए पूजन से व्रती के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

📖 अजा एकादशी व्रतकथा

एक समय महर्षि पुलस्त्यजी ने युधिष्ठिर महाराज से कहा –
“राजन! भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी आती है, उसे ‘अजा एकादशी’ कहते हैं। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सब पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

हे धर्मराज! अब आप इसकी कथा सुनिए—

🌸 कथा आरंभ

प्राचीन समय में सत्यप्रिय हरिश्चंद्र नामक एक महान प्रतापी राजा राज्य करते थे। वे सत्य और धर्म के पालन में अद्वितीय थे।
लेकिन एक बार महर्षि विश्वामित्र की प्रेरणा से उन्हें अपना राज्य, रानी और पुत्र तक त्यागना पड़ा।
राजा निर्धन होकर एक चांडाल के यहाँ दास बनकर श्मशान में कार्य करने लगे। वहाँ उन्हें अपने प्रिय पुत्र को भी अपने ही हाथों से जलाना पड़ा।

🌸 ऋषि गौतम का उपदेश

जब राजा हरिश्चंद्र अत्यंत दुःख और कष्ट में जीवन व्यतीत कर रहे थे, तब महर्षि गौतम वहाँ आए। उन्होंने राजा को धर्म पर स्थिर देखकर कहा—
“राजन! तुम्हारे दुःखों का कारण तुम्हारे पूर्वजन्म के पाप हैं। यदि तुम भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करो, तो तुम्हारे सब पाप नष्ट हो जाएँगे और तुम्हें समस्त सुख प्राप्त होगा।”

🌸 व्रत का प्रभाव

गौतम मुनि के उपदेश अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने श्रद्धापूर्वक अजा एकादशी का व्रत किया।
उसके प्रभाव से उनके समस्त पाप नष्ट हो गए।
उनकी खोई हुई रानी और मृत पुत्र भी पुनः जीवित हो उठे।
राजा का राज्य उन्हें वापस मिल गया और वे पुनः सुखपूर्वक राज्य करने लगे।

🌸 फलश्रुति (फल)

हे युधिष्ठिर! जो व्यक्ति अजा एकादशी का व्रत करता है, उसे वह फल प्राप्त होता है जो अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है।
इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त करता है।

🙏 अजा एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा/चित्र के सामने दीप जलाएँ।
  • तुलसी पत्र, फूल, धूप, दीप, पंचामृत और फल अर्पित करें।
  • दिनभर निर्जल व्रत या फलाहार के साथ उपवास करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, गीता या विष्णु कथा का पाठ करें।
  • रात में जागरण करके भजन-कीर्तन करें।
  • दूसरे दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर दान करें।
  • पारण करते समय इस मंत्र का प्रयोग करें —
    “ॐ अन्नं भगवान् विष्णुः। अन्नं ब्रह्मस्वरूपं ममोपवितव्रतपरिपूर्ण्यर्थं ब्राह्मणेभ्यो दत्तं तदनु आहारं करिष्ये।”
    👉 अर्थात – “यह अन्न स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप है। इसे ब्राह्मणों को अर्पित करने के बाद मैं व्रत का समापन करके भोजन ग्रहण करूँगा।”

📿 अजा एकादशी व्रत मंत्र

पूजा करते समय इन मन्त्रों का उच्चारण कर सकते हैं :

  • ॐ वासुदेवाय नमः
  • ॐ विष्णवे नमः
  • ॐ नारायणाय नमः

🌟 अजा एकादशी का महत्व

  • इस व्रत से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं।
  • व्रती को मोक्ष की प्राप्ति और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।
  • जीवन में सत्य, धर्म और सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।
  • यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हों।

विशेष ध्यान

  • व्रत के दिन तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा) वर्जित है।
  • तुलसी पत्र का सेवन और अर्पण अति शुभ माना जाता है।

🙏 निष्कर्ष

इस प्रकार अजा एकादशी का व्रत जीवन में सत्य, धर्म, मोक्ष और पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

Aja ekadashi kab hai, अजा एकादशी कब है| August  Ekadashi| Gyaras ki sahi tarikh 18  ya 19, पारण का समय, पारण का मंत्र, gyaras puja mantra, एकादशी कथा.

Comments

Popular posts from this blog

Kuldevi Strotram Lyrics

Kuldevi Strotram Lyrics, कुलदेवी स्त्रोत्रम पाठ के फायदे, कुलदेवी का आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें, कुलदेवी को प्रसन्न करने का शक्तिशाली उपाय, Hindi Meanings of Lyrics | हिन्दुओं में कुलदेवी या कुलदेवता किसी भी परिवार के मुख्य देवी या देवता के रूप में पूजे जाते हैं और ये उस परिवार के मुख्य रक्षक भी होते हैं | किसी भी विशेष कार्य को करने से पहले कुलदेवी या कुलदेवता को पूजने की मान्यता है |  आज के समय में बहुत से परिवारों को उनके कुलदेवी या कुलदेवता का पता नहीं होता है अतः ऐसे में चिंता की बात नहीं है| कुलदेवी स्त्रोत्रम का पाठ करके और सुनके हम अपने कुलदेवी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं |  Kuldevi Strotram Lyrics सुनिए YouTube में कुलदेवी स्त्रोत्रम  Lyrics of Kuldevi Strotram:  ॐ नमस्ते श्री  शिवाय  कुलाराध्या कुलेश्वरी।   कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1   वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।   वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।2   आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।   विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम्...

Mahakal Kawacham || महाकाल कवच

महाकाल कवच के बोल, महाकाल कवचम के क्या फायदे हैं। Mahakal Kavacham || Mahakaal Kavach || महाकाल कवच || इस लेख में अति गोपनीय, दुर्लभ, शक्तिशाली कवच के बारे में बता रहे हैं जिसे की विश्वमंगल कवच भी कहते हैं। कवच शब्द का शाब्दिक अर्थ है सुरक्षा करने वाला | जिस प्रकार एक योद्धा युद्ध में जाने से पहले ढाल या कवच धारण करता है, उसी प्रकार रोज हमारे जीवन में नकारात्मक्क शक्तियों से सुरक्षा के लिए महाकाल कवच ढाल बना देता है | जब भी कवच का पाठ किया जाता है तो देविक शक्ति दिन भर हमारी रक्षा करती है |  कवच के पाठ करने वाले को अनैतिक कार्यो से बचना चाहिए, मांसाहार नहीं करना चाहिए, किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करना चाहिए | Mahakal Kavach का विवरण रुद्रयामल तंत्र में दिया गया है और ये अमोघ रक्षा कवच है | Mahakal Kawacham || महाकाल कवच  किसी भी प्रकार के रोग, शोक, परेशानी आदि से छुटकारा दिला सकता है महाकाल कवच का पाठ | इस शक्तिशाली कवच के पाठ से हम बुरी शक्तीयो से बच सकते हैं, भूत बाधा, प्रेत बाधा आदि से बच सकते हैं | बच्चे, बूढ़े, जवान सभी के लिए ये एक बहुत ही फायदेमंद है | बाबा महाकाल ...

Bank Account kab khole jyotish anusar

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बैंक खाता कब खोलें, बैंक खाता खोलने के लिए सबसे अच्छा दिन चुनकर सौभाग्य कैसे बढ़ाएं,  when to open bank account as per astrology ,  ज्योतिष के अनुसार बैंक खाता खोलने का शुभ दिन, नक्षत्र और समय, ज्योतिष के अनुसार बचत कैसे बढ़ाएं? बैंक खाता खोलने का निर्णय एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय है और इसलिए इसे खोलने के लिए सबसे अच्छा दिन, सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र, सर्वश्रेष्ठ महुरत चुनना अच्छा होता है । शुभ समय पर खोला गया बैंक खाता व्यक्ति को आसानी से संपन्न बना देता है |  बिना प्रयास के सफलता नहीं मिलती है अतः अगर हमे सफल होना है ,धनाढ्य बनना है, अमीर बनना है तो हमे सभी तरफ से प्रयास करना होगा, हमे स्मार्ट तरीके से काम करना होगा |  प्रत्येक व्यवसाय या कार्य में बैंक खाता आवश्यक है। चाहे आप एक कर्मचारी या उद्यमी हों चाहे आप एक व्यवसायी हों या एक गैर-कामकाजी व्यक्ति, बैंक खाता आमतौर पर हर एक के पास होता है। बैंक खाता हर एक के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हम इस पर अपनी बचत रखते हैं, यह इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक लेनदेन बैंक खाते के माध्यम...