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Latest Astrology Updates in Hindi

Dhumawati Jayanti Ke Upaay

Dhumavati Jayanti 2024, जानिए कौन है धूमावती माता, कैसे होती है इनकी पूजा, dhumawati mata ka mantra kaun sa hai,  Dhumawati Jayanti Ke Upaay. Dhumavati Jayanti 2024:  10 महाविद्याओं में से एक हैं माँ धूमावती और ये भगवती का उग्र रूप हैं | इनकी पूजा से बड़े बड़े उपद्रव शांत हो जाते हैं, जीवन में से रोग, शोक, शत्रु बाधा का नाश होता है | माना जाता है कि धूमावती की पूजा से अलौकिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं जिससे मुसीबतों से सुरक्षा मिलती हैं, भौतिक और अध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं| इनकी पूजा अधिकतर एकल व्यक्ति, विधवाएँ, तपस्वी और तांत्रिक करते हैं |  Dhumawati Jayanti Ke Upaay  Dhumavati Jayanti Kab aati hai ? हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माँ धूमावती जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार , मां धूमावती धुएं से प्रकट हुई थीं और ये माता का विधवा रूप भी कहलाती है इसीलिए सुहागिन महिलाएं मां धूमावती का पूजन नहीं करती हैं, बस दूर से दर्शन करती हैं और आशीर्वाद लेती है | Read in english about Importance of Dhumawati jayanti 2024   Dhumava

Astavakra Kaun Hain

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the.  अष्टावक्र एक ऐसे ज्ञानी पुरुष थे जिनका नाम आध्यात्मिक जगत में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है | आमतौर पर अष्टावक्र के जीवन के बारे में तीन कथाएं प्रचलित हैं जिनसे पता चलता है कि वह ज्ञानियों में शिरोमणि है| इन्हें गर्भ में ही आत्मज्ञान हो गया था | Astavakra Kaun Hain आइये जानते हैं 3 अद्भुत घटनाएं जो ashtavakra जी की महानता को प्रमाणित करते हैं : 1.पहली कथा - जब यह गर्भ में थे उस समय उनके पिता एक दिन वेद पाठ कर रहे थे तो इन्होंने गर्भ से ही अपने पिता को टोक दिया कि रुको यह सब बकवास है शास्त्रों में ज्ञान कहाँ,  ज्ञान तो स्वयं के भीतर है सत्य शास्त्रों में नहीं स्वयं में है शास्त्र तो शब्दों का संग्रह मात्र है यह सुनते ही उनके पिता श्री को अहंकार जाग उठा वे आत्मज्ञानी तो थे नहीं शास्त्रों के मात्र ज्ञाता थे और जिन्हें शास्त्रों का ज्ञान होता है उनमें इस जानकारी का अहंकार होता है इसी अहंकार के कारण व आत्म ज्ञान से वंचित रहते हैं |उन्हीं का वह पुत्र उन्हें उपदेश दे रहा है जो अ

Narak Chaturdashi ki katha in hindi

दिवाली से एक दिन पहले नरक चौदस क्यों मनाते हैं, नरक चौदस की कहानी, जानिए Narak Chaudas Ki katha | Diwali पर देखा जाए तो 5 पर्व एक साथ आते हैं पहला धनतेरस, दूसरा नरक चौदस, तीसरा दिवाली, चौथा गोवर्धन पूजा और पांचवा है भाईदोज |  इस लेख में हम जानेंगे की दिवाली के एक दिन पहले नरक चौदस क्यों मनाई जाती है, क्या मान्यता है इसके पीछे | Narak Chaturdashi ki katha in hindi Narak chaudas katha : ऐसी मान्यता है की नरक चतुर्दशी को दीप दान करने से अकाल मृत्यु से बचाव होता है और पापो से मुक्ति मिलती है साथ ही सौभाग्य की प्राप्ति होती है |  Narak chaudas को छोटी दीपावली भी कहा जाता है और इस दिन शाम को यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है |  Read Narak chaturdashi story in english आइये जानते हैं पौराणिक कथायें और मान्यताएं नरक चौदस को लेके : पहली मान्यता ये है की कार्तिक मास के चौदस को श्री कृष्ण से नरकासुर नाम के अत्याचारी और दुराचारी असुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था।  Narak chaudas को लेके दूसरी मान्यता ये है की प्राचीन