सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Hindi Jyotish Website

Hindi astrology services || jyotish website in hindi|| Kundli reading || Birth Chart Calculation || Pitru Dosha Remedies || Love Life Reading || Solution of Health Issues in jyotish || Career Reading || Kalsarp Dosha Analysis and remedies || Grahan Dosha solutions || black magic analysis and solutions || Best Gems Stone Suggestions || Kala Jadu|| Rashifal || Predictions || Best astrologer || vedic jyotish || Online jyotish || Phone jyotish ||Janm Kundli || Dainik Rashifal || Saptahik Rashifal || love rashifal

Astavakra Kaun Hain

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the. 

अष्टावक्र एक ऐसे ज्ञानी पुरुष थे जिनका नाम आध्यात्मिक जगत में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है | आमतौर पर अष्टावक्र के जीवन के बारे में तीन कथाएं प्रचलित हैं जिनसे पता चलता है कि वह ज्ञानियों में शिरोमणि है| इन्हें गर्भ में ही आत्मज्ञान हो गया था |

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the.
Astavakra Kaun Hain

आइये जानते हैं 3 अद्भुत घटनाएं जो ashtavakra जी की महानता को प्रमाणित करते हैं :

1.पहली कथा -

जब यह गर्भ में थे उस समय उनके पिता एक दिन वेद पाठ कर रहे थे तो इन्होंने गर्भ से ही अपने पिता को टोक दिया कि रुको यह सब बकवास है शास्त्रों में ज्ञान कहाँ,  ज्ञान तो स्वयं के भीतर है सत्य शास्त्रों में नहीं स्वयं में है शास्त्र तो शब्दों का संग्रह मात्र है यह सुनते ही उनके पिता श्री को अहंकार जाग उठा वे आत्मज्ञानी तो थे नहीं शास्त्रों के मात्र ज्ञाता थे और जिन्हें शास्त्रों का ज्ञान होता है उनमें इस जानकारी का अहंकार होता है इसी अहंकार के कारण व आत्म ज्ञान से वंचित रहते हैं |उन्हीं का वह पुत्र उन्हें उपदेश दे रहा है जो अभी पैदा भी नहीं हुआ, उसी समय उन्होंने उसे शाप दे दिया कि जब तू पैदा होगा तो 8 जगह से टेढ़ा मेढ़ा होगा और ऐसा ही हुआ इसीलिए उनका नाम पड़ा अष्टावक्र|

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the. 



2.अष्टावक्र जी के संबंध में एक दूसरी कथा :

जब यह 12 वर्ष के थे तब राजा जनक ने बड़े-बड़े विद्वानों को बुलाकर एक सभा का आयोजन किया जिसमें तत्वज्ञान पर शास्त्रार्थ रखा गया था इसमें यह भी घोषणा की गई थी कि जो इसमें जीतेगा उसे सोना मढ़ी सींगों वाली सौ गाय दी जाएंगी | अष्टावक्र के पिता भी शास्त्रार्थ में सम्मिलित हुए शास्त्रार्थ आरंभ हुआ और वह लंबे समय तक चलता रहा तत्वज्ञान पर चर्चा चलती रही | शाम को अष्टावक्र जी को खबर मिली कि उनके पिता एक पंडित से हार रहे हैं यह सुनकर अष्टावक्र भी सभा में पहुंच गए सभा पंडितों की थी उनमें आत्मज्ञानी तो कोई था नहीं अष्टावक्र जब अपने शरीर से चलते हुए सभा में पहुंचे तो उनका रूप देखकर सभी सभासद हंस पड़े थोड़ी देर रुकने के बाद अष्टावक्र भी उन सभासदों को देखकर जोर-जोर से हंसने लगे उनकी हंसी देखकर राजा जनक ने पूछा कि यह विद्वान क्यों हंस रहे हैं यह तो मुझे समझ में आ गया तुम क्यों हंस रहे हो यह बात मेरी समझ में नहीं आई इस पर अष्टावक्र ने कहा कि मैं इसलिए हंसा कि इन चर्मकारों की सभा में आज सत्य का निर्णय हो रहा है और यह चर्मकार यहां क्या कर रहे हैं |

चर्मकारों शब्द सुनते ही सारी सभा में सन्नाटा छा गया | इससे पहले कि यह सभासद अपना रोष प्रकट करते राजा जनक ने स्थिति को संभालते हुए पूछा कि तुम्हारा मतलब क्या है यह मैं नहीं समझ पाया बहुत सीधी सी बात है कि चर्मकार चमड़ी का ही पारखी होता है वह ज्ञान को क्या समझे | ज्ञानी ज्ञान को देखता है चमड़ी को नहीं | इनको मेरा शरीर ही दिखाई देता है जिसे देख कर हंस रहे हैं | अतः ये ज्ञानी नहीं हो सकते चर्मकार ही हो सकते हैं |  हे राजन ! ज्ञानवान को आत्म दृष्टि रहती है वह आत्मा को ही देखता है और अज्ञानी को चर्म दृष्टि रहती है | इन वचनों को सुनकर राजा प्रभावित हुए उनके चरणों में साष्टांग दंडवत किया उन्हें ज्ञान का उपदेश देने हेतु महल में आमंत्रित किया | जब अष्टावक्र जी वहां पहुंचे तो राजा जनक उनके चरणों में बैठे और शिष्य-भाव से अपनी जिज्ञासाओं को इस 12 वर्ष के बालक अष्टावक्र से समाधान कराया वही शंका समाधान जनक-अष्टावक्र संवाद अष्टावक्र गीता के रूप में प्रचलित है|

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the. 

3.अष्टावक्र जी के संबंध में एक तीसरी कथा :

राजा जनक ने आत्मज्ञान संबंधी अनेक शास्त्रों का अध्ययन किया था एक शास्त्र में लिखा था कि आत्मज्ञान बहुत ही सरल है इसके लिए कुछ करना नहीं पड़ता घोड़े पर चढ़ने के लिए उसकी रकाब में एक पांव रखने के बाद दूसरे रकाब में पांव रखने में जितना समय लगता है उससे भी कम समय में आत्मज्ञान संभव है | राजा जनक मुमुक्षु थे वह इसकी सत्यता को परखना चाहते थे इसके लिए उन्होंने देश के बड़े-बड़े विद्वानों को कहा कि या तो इस कथन को सत्य प्रमाणित कीजिए अन्यथा इस पंक्ति को शास्त्र से हटा दीजिए | वह सभी विद्वान तो पंडित ही थे जिन्हें शास्त्रों का पुस्तकीय ज्ञान मात्र था | वे शास्त्रार्थ करने में तो प्रवीण है किंतु स्वयं आत्मज्ञानी नहीं होने से ज्ञान प्राप्ति के इस रहस्य को सत्य प्रमाणित करने में असमर्थ थे  जिससे सब ने मना कर दिया इस बात को सुनकर राजा जनक ने उन सब को जेल में डाल दिया | जब अष्टावक्र ने यह समाचार सुना तो वे स्वयं राजा जनक के पास गए एवं उनकी इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि जनक ऐसा संभव है शास्त्रों में जो लिखा है वह पूर्ण सत्य है मैं प्रमाणित करता हूं तुम इन सभी विद्वानों को पहले जेल से मुक्त करो और घोड़ा तैयार करवा कर मेरे साथ चलो राजा जनक ने सभी विद्वानों को मुक्त करवा दिया और अपना घोड़ा तैयार करवाया अष्टावक्र राजा जनक को लेकर शहर से दूर एकांत स्थान पर गए जहां घोड़ा रुकवा कर जनक ने अपना एक पाव घोड़े के एक रकाब में रख दिया तब अष्टावक्र ने उनसे पूछा कि अब बता तू ने शास्त्रों में क्या पढ़ा राजा जनक ने वही बात दोहराई अष्टावक्र ने कहा यह तो सत्य है किंतु इसके आगे तूने क्या पढ़ा जनक ने कहा कि इसके लिए पात्रता होनी चाहिए |इस पर अष्टावक्र ने कहा की क्या ये शर्त तुमने पूरी कर ली है ? जब तूने ये शर्त ही पूरी नहीं की तो आत्म ज्ञान कैसे संभव है | राजा जनक में आत्मज्ञान की उत्कट इच्छा थी वह हर कीमत पर इसे प्राप्त करना चाहते थे और जब ऐसा सद्गुरु उन्हें मिल गया तो वे इस अवसर को खोना भी नहीं चाहते थे राजा जनक में तीव्र बुद्धि व प्रतिभा थी, रहस्य को समझने की क्षमता थी | शास्त्रों के ज्ञाता होने के कारण वे जानते थे कि पात्रता के लिए आवश्यक है अहंकार से मुक्ति, पूर्ण समर्पण, शरीर व मन के भावों से मुक्ति, शास्त्र ज्ञान से मुक्ति| राजा जनक ने अष्टावक्र के सामने उस समय समर्पण कर दिया और कहा कि यह शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार सब कुछ मैं आपको समर्पित करता हूं आप इसका जैसा चाहे उपयोग करें समर्पण भाव आते ही अहंकार खो गया जनक शून्य हो गए, स्थूल से संबंध छूट गया | अष्टावक्र जी ने पात्रता देखकर अपना संपूर्ण ज्ञान पात्र में उड़ेल दिया |

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the. 

पात्र खाली था वह भर गया इस स्थिति में अष्टावक्र ने जनक के अंतः करण को छू लिया और जनक को घोड़े के दूसरे रकाब में पांव रखने के पूर्व ही आत्म बोध हो गया | घटना एक क्षण में घट गई वह उसी समय ध्यानस्त होकर समाधि में पहुंच गए| घोड़े के दूसरे रकाब में पांव रखने की सुधि ना रही | अष्टावक्र पास ही बैठ गए इसी प्रकार 3 दिन व्यतीत हो राज्य में हो हल्ला हो गया राज्य में अव्यवस्था होती देखकर मंत्री गण राजा को ढूंढने निकले तो देखा जंगल में राजा घोड़े के 1 रकाब में पांव रखके खड़े हैं अष्टावक्र जी भी समीप ही बैठे हैं दोनों शांत है एक मंत्री ने राजा से कहा महाराज 3 दिन हो गए राज्य की व्यवस्था करने में परेशानी हो रही है अब आप राजधानी चलिए इस पर जनक ने मंत्री से कहा कौन चलेगा,  ना यह शरीर मेरा है ना मन, मैं तो गुरु को समर्पित कर चुका हूं अब जैसा गुरु जी का आदेश होगा वैसा ही मैं करूंगा अष्टावक्र समझ गए कि इसे ज्ञान लाभ हो चुका है आत्मबोध हो चुका है केवल एक ही झटके में सारे बंधनों से मुक्त हो चुका है | अष्टावक्र जी ने राजा जनक को फिर से राज्य कार्य चलाने का आदेश दिया|

आगे के लेखों में हम अष्टावक्र गीता के अलग-अलग अध्याय को जानेंगे समझेंगे जो कि हमें एक नई दृष्टि प्रदान करेगा इस संसार के प्रति जो लोग जिज्ञासु हैं उन लोगों के लिए अष्टावक्र गीता वरदान से कम नहीं है तो आगे के लेखों को पढ़ने के लिए जुड़े रहिए हमसे |

अष्टावक्र कौन थे, जानिए उनसे जुडी 3 कथाएं, जानिए अष्टावक्र गीता की रचना कैसे हुई, Ashtavakra kaun the.

टिप्पणियाँ

Follow on Facebook For Regular Updates

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Tantroktam Devi suktam Ke Fayde aur lyrics

तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम्‌ ॥ Tantroktam Devi Suktam ,  Meaning of Tantroktam Devi Suktam Lyrics in Hindi. देवी सूक्त का पाठ रोज करने से मिलती है महाशक्ति की कृपा | माँ दुर्गा जो की आदि शक्ति हैं और हर प्रकार की मनोकामना पूरी करने में सक्षम हैं | देवी सूक्तं के पाठ से माता को प्रसन्न किया जा सकता है | इसमें हम प्रार्थना करते हैं की विश्व की हर वास्तु में जगदम्बा आप ही हैं इसीलिए आपको बारम्बार प्रणाम है| नवरात्री में विशेष रूप से इसका पाठ जरुर करना चाहिए | Tantroktam Devi suktam  Ke Fayde aur lyrics आइये जानते हैं क्या फायदे होते हैं दुर्गा शप्तशती तंत्रोक्त देवी सूक्तं के पाठ से : इसके पाठ से भय का नाश होता है | जीवन में स्वास्थ्य  और सम्पन्नता आती है | बुरी शक्तियों से माँ रक्षा करती हैं, काले जादू का नाश होता है | कमजोर को शक्ति प्राप्त होती है | जो लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं उनके आय के स्त्रोत खुलते हैं | जो लोग शांति की तलाश में हैं उन्हें माता की कृपा से शांति मिलती है | जो ज्ञान मार्गी है उन्हें सत्य के दर्शन होते हैं | जो बुद्धि चाहते हैं उन्हें मिलता है | भगवती की क

om kleem kaamdevay namah mantra ke fayde in hindi

कामदेव मंत्र ओम क्लीं कामदेवाय नमः के फायदे,  प्रेम और आकर्षण के लिए मंत्र, शक्तिशाली प्रेम मंत्र, प्रेम विवाह के लिए सबसे अच्छा मंत्र, सफल रोमांटिक जीवन के लिए मंत्र, lyrics of kamdev mantra। कामदेव प्रेम, स्नेह, मोहक शक्ति, आकर्षण शक्ति, रोमांस के देवता हैं। उसकी प्रेयसी रति है। उनके पास एक शक्तिशाली प्रेम अस्त्र है जिसे कामदेव अस्त्र के नाम से जाना जाता है जो फूल का तीर है। प्रेम के बिना जीवन बेकार है और इसलिए कामदेव सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका आशीर्वाद जीवन को प्यार और रोमांस से भरा बना देता है। om kleem kaamdevay namah mantra ke fayde in hindi कामदेव मंत्र का प्रयोग कौन कर सकता है ? अगर किसी को लगता है कि वह जीवन में प्रेम से वंचित है तो कामदेव का आह्वान करें। यदि कोई एक तरफा प्रेम से गुजर रहा है और दूसरे के हृदय में प्रेम की भावना उत्पन्न करना चाहता है तो इस शक्तिशाली कामदेव मंत्र से कामदेव का आह्वान करें। अगर शादी के कुछ सालों बाद पति-पत्नी के बीच प्यार और रोमांस कम हो रहा है तो इस प्रेम मंत्र का प्रयोग जीवन को फिर से गर्म करने के लिए करें। यदि शारीरिक कमजोरी

Navratri Vashikaran नवरात्री वशीकरण

, Navratri Vashikaran नवरात्री वशीकरण, कैसे करे नवरात्री में वशीकरण साधना, कैसे बढाए अपनी सम्मोहन शक्ति वशीकरण मंत्रो द्वारा नवरात्री में. नवरात्री अर्थात साधना के लिए उपयुक्त 9 रातें जिनका इन्तेजार हर साधक पुरे वर्ष भर करते हैं. इन रात्रियों में सकरात्मक शक्तियां भक्तो का कल्याण करने के लिए तत्पर रहती हैं. देखा जाए तो पितृ पक्ष से लेके दिवाली तक का पूरा समय ही साधना के लिए उपयुक्त होता है और ऐसे में हमे कोई भी क्षण व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए.  ये लेख उन लोगो के लिए है जो की अपनी सम्मोहन शक्ति को बढ़ाना चाहते हैं जो वशीकरण की शक्ति को देखना चाहते हैं और एक स्वस्थ और संपन्न जीवन व्यतीत करना चाहते हैं. navratri me vashikaran kaise kare नवरात्री में हालांकि किसी भी प्रकार की साधना सफल हो सकती है परन्तु वशीकरण साधना का अपना एक अलग ही महत्तव है. इसके अंतर्गत किसी विशेष शक्ति को अपनी और आकर्षित करने के लिए साधना की जाती है, अपने अन्दर की शक्तियों को जगाने के लिए साधना की जाती है, अपना सकारात्मक प्रभाव और सकारात्मक और को बढ़ाने के लिए साधना की जाती है. आकर्षण शक्ति का होना अपने आप