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Nirjala Ekadashi kab hai jyotish anusar

कब है निर्जला एकादशी 2026, date of nirjala ekadashi, निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें?, nirjal ekadashi ke upay, When is nirjala ekadashi?. हिंदू परंपरा के अनुसार सबसे शुभ उपवासों में से एक निर्जला एकादशी का दिन है यानी बिना पानी पिए उपवास करने का दिन। निर्जला एकादशी को पांडव या भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष में 11 वें दिन आता है। साल में 24 एकादशी आती है परन्तु nirjal ekadashi  सबसे शक्तिशाली एकादशी व्रत माना जाता है अनुष्ठान करके पुण्य प्राप्त करने के लिए | 2026 में 25 June को है निर्जला एकादशी व्रत | एकादशी तिथि शुरू होगी 24 तारीख को शाम में लगभग 6:12 बजे और   एकादशी तिथि समाप्त होगी 25 जून को रात्री में लगभग 8:09 बजे | पारण का समय रहेगा 26 जून को प्रातः 5:30 से 7:44 तक  Nirjala Ekadashi kab hai jyotish anusar ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत सभी 24 एकादशी का फल दे सकता है इसलिए यह बहुत ही पवित्र और शक्तिशाली है। भीम अर्थात पांडव पुत्रों में से एक ने निर्जला एकादशी का व्रत करने के...

Nirjala Ekadashi kab hai jyotish anusar

कब है निर्जला एकादशी 2026, date of nirjala ekadashi, निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें?, nirjal ekadashi ke upay, When is nirjala ekadashi?.

हिंदू परंपरा के अनुसार सबसे शुभ उपवासों में से एक निर्जला एकादशी का दिन है यानी बिना पानी पिए उपवास करने का दिन।

निर्जला एकादशी को पांडव या भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष में 11 वें दिन आता है।

साल में 24 एकादशी आती है परन्तु nirjal ekadashi  सबसे शक्तिशाली एकादशी व्रत माना जाता है अनुष्ठान करके पुण्य प्राप्त करने के लिए |

2026 में 25 June को है निर्जला एकादशी व्रत |

एकादशी तिथि शुरू होगी 24 तारीख को शाम में लगभग 6:12 बजे और  

एकादशी तिथि समाप्त होगी 25 जून को रात्री में लगभग 8:09 बजे |

पारण का समय रहेगा 26 जून को प्रातः 5:30 से 7:44 तक 

कब है निर्जला एकादशी 2026, date of nirjala ekadashi, निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें?, nirjal ekadashi ke upay, When is nirjala ekadashi?.
Nirjala Ekadashi kab hai jyotish anusar

ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत सभी 24 एकादशी का फल दे सकता है इसलिए यह बहुत ही पवित्र और शक्तिशाली है।

भीम अर्थात पांडव पुत्रों में से एक ने निर्जला एकादशी का व्रत करने के बाद सभी 24 एकादशी का पुण्य प्राप्त किया है।

कैसे किया जाता है निर्जला-एकादशी का व्रत?

यह व्रत बिना भोजन और पानी के 24 घंटे किया जाता है और इसलिए यह बेहद कठिन है। यह शुभ दिन अत्यधिक गर्मी के दिनों में आता है और इसलिए यह व्रत बहुत कठिन होता है।

भगवान विष्णुजी की पूजा एकादशी में की जाती है और इसलिए भक्त विष्णु पूजा जैसे पंचोपचार पूजा, विष्णुजी की मूर्ति का अभिषेक, दिन-रात भगवान के मंत्र का जाप करते हैं।

दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बने  पंचामृत का उपयोग किया जाता है विष्णुजी का अभिषेक करने के लिए ।

2026 में निर्जला एकादशी 25 जून को है। जो व्यक्ति इस व्रत को करता है वह पानी के महत्व और शक्ति को जानता है और इस तरह भविष्य में पानी बर्बाद नहीं करने के लिए तैयार हो जाता है।

इस व्रत को करने के बाद ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र, धन दान करने और आशीर्वाद लेने की सलाह दी जाती है।

निर्जला एकादशी का यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा को आकर्षित करता है और भौतिकवादी और आध्यात्मिक इच्छाओं को पूरा करने में मदद करता है।

जानिए धन प्राप्ति के लिए 10 आसान प्रयोग 

निर्जला एकादशी व्रत कैसे करें?

  1. सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और दैनिक दिनचर्या से मुक्त हों।
  2. साफ़ कपड़े पहनकर भगवान विष्णुजी की मूर्ति या फोटो के सामने बैठ जाएं।
  3. भगवान विष्णु जी की कृपा पाने के लिए व्रत रखने का संकल्प लें।
  4. पंचामृत से करें भगवान का अभिषेक।
  5. अब पंचोपचार पूजा करें यानी धूप, दीप, नवैद्य, वस्त्र, दक्षिणा अर्पित करें।
  6. भगवान विष्णु के किसी भी मन्त्र या विष्णु सहस्त्रनाम  का जाप करें।  Suniye Vishnu Strotram 
  7. स्वस्थ और समृद्ध जीवन के लिए प्रार्थना करें।
  8. अगले दिन यानि द्वादशी तिथि को किसी भी ब्राह्मण को अन्न, धन, वस्त्र दान करें और आशीर्वाद लें और फिर जल और भोजन ग्रहण करें।

तो यह 24 घंटे का उपवास है और अत्यंत कठिन है।

यह सलाह दी जाती है कि किसी भी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति द्वारा इस उपवास को नहीं करना चाहिए।

निर्जला एकादशी की कथा :

एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व पूछा। तब श्रीकृष्ण ने वेदव्यास जी से इसका वर्णन करने को कहा।

व्यासजी ने बताया कि सभी एकादशियों पर उपवास करना चाहिए। यह सुनकर भीमसेन ने कहा कि उनकी भूख बहुत अधिक है और वे वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख सकते। उन्होंने ऐसा एक व्रत बताने की प्रार्थना की जिससे सभी एकादशियों का फल मिल जाए।

तब व्यासजी ने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक अन्न और जल दोनों का त्याग करना चाहिए (केवल आचमन की अनुमति है)। द्वादशी के दिन स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए, ब्राह्मणों को जल, अन्न, वस्त्र, गौ आदि का दान देना चाहिए और फिर भोजन करना चाहिए।

व्यासजी ने बताया कि:

  • इस एक व्रत का फल वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर माना गया है।
  • इसके प्रभाव से बड़े-बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
  • व्रती को यमदूत नहीं, बल्कि विष्णुदूत भगवान विष्णु के धाम ले जाते हैं।
  • श्रद्धा से उपवास, पूजा, दान और रात्रि-जागरण करने वाला स्वयं तथा अपनी अनेक पीढ़ियों का कल्याण करता है।
  • इस व्रत की कथा सुनने या सुनाने से भी महान पुण्य प्राप्त होता है।

व्यासजी की बात सुनकर भीमसेन ने निर्जला एकादशी का व्रत करना आरम्भ किया, इसलिए इसे भीमसेनी या पाण्डव निर्जला एकादशी भी कहा जाता है।

मुख्य संदेश: जो व्यक्ति सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर सकता, वह श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है।

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आइये जानते हैं Nirjala ekadashi व्रत करने के लाभ क्या हैं ?

  1. इस उपवास को करने से पापो का क्षय होता है |
  2. शरीर छोड़ने के पश्चात विष्णु लोक की प्राप्ति होती है |
  3. ये उपवास अध्यात्मिक और भौतिक सुखो को दिलाता है |
  4. दुर्भाय्गा को दूर करता है |
  5. जीवन में सुख, शांति और सम्पन्नता आती है |
  6. गंभीर रोगों से छुटकारा मिलता है |
Aap Sabhi Ko Nirjal ekadashi ki bahut bahut shubhkamnaayen. Om Namo Bhagwate Vasudevay.

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