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9 Graho Ka Jivan Sathi Par Kya Asar Hota Hai Jyotish Anusar Janiye

विवाह कब होगा, किस दिशा में होगा, जीवन साथी कैसा होगा, जानिए ज्योतिष के माध्यम से, कुंडली से कैसे पता चलता है विवाह शादी के बारे में  , 9 graho ka jivan saathi par asar, vivah kab hota hai, life partner kaisa hoga jyotish anusar. 

कहते हैं शादी का लड्डू जो खाए वो पछताए और जो ना खाए वो भी पछताए , परन्तु अधिकतर लोग शादी का लड्डू खाना ही चाहते हैं |

विवाह का सपना जीवन में हर कोई देखता है और एक मन पसंद साथी की चाहत भी सभी को होती है | सभी की पसंद अलग अलग होती है और इसीलिए सभी के लिए कोई ना कोई साथी इस संसार में हैं | 

9 Graho Ka Jivan Sathi Par Kya Asar Hota Hai Jyotish Anusar Janiye
9 Graho Ka Jivan Sathi Par Kya Asar Hota Hai Jyotish Anusar Janiye

वैदिक ज्योतिष में हम कुंडली के अध्ययन से ये पता कर सकते हैं की व्यक्ति की शादी कब हो सकती है , किस दिशा में हो सकती है, जीवन साथी कैसा होगा, उनकी प्रकृति कैसी होगी, क्या विवाह के बाद भाग्योदय होगा आदि |

आइये जानते हैं की कैसे पता लगता है विवाह के बारे में ज्योतिष द्वारा:

जन्म पत्रिका के सातवें भाव का अध्ययन बहुत ही महत्त्व रखता है जब जीवन साथी के बारे में जानना हो, इस भाव में बैठे राशि से इस भाव में बैठे ग्रह से, इस भाव पर जिन ग्रहों की दृष्टि होती है उनके अध्ययन से ये पता चलता है की जातक का जीवन साथी कैसा होगा, विवाह कब होगा, वैवाहिक जीवन कैसा होगा, पति-पत्नी का सम्बन्ध कैसा होगा आदि |


प्रेम विवाह या अरेंज मैरिज:

हम ये भी जान सकते हैं की प्रेम विवाह हो सकता है या अरेंग मैरिज हो सकता है | क्या प्रेम विवाह सफल होगा|

विवाह में देरी क्यों होती है, जानिए ज्योतिष अनुसार ?

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका विवाह बिलकुल समय पर हो जाता है, ,मन पसंद साथी से हो जाता है,  परन्तु कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कितना भी प्रयास कर ले , जीवन साथी नहीं मिलता और मिलता भी है तो दोनों खुश नहीं रह पाते | कुछ लोगो को बहुत देर से काफी परेशानी के बाद कोई साथ मिलता है |

कुंडली को देखके ये भी पता किया जा सकता है की विवाह में देरी के क्या करण है जैसे :

  1. कई बार मंगल दोष/कुज दोष के कारण भी जातक का विवाह समय पर नहीं हो पाता या फिर विवाह होने के बाद दोनों सुखमय जीवन व्यतीत नहीं कर पाते हैं |
  2. कई बार सप्तम भाव में ग्रहण दोष बनता है जिसके कारण विवाह में देरी या फिर बेमेल शादी के कारण जीवन भर परेशानी बनी रहती है |
  3. कई बार विवाह स्थान और सुख स्थान में पितृ दोष बनने के कारण जातक का विवाह नहीं हो पाता |
  4. कई बार ये भी देखा गया है की प्रेम और व्यक्तिगत जीवन का कारक ग्रह शुक्र के ख़राब होने के कारण भी जातक को वैवाहिक ख़ुशी से वंचित रहना पड़ता है |
  5. कालसर्प योग के कारण भी विवाह में काफी परेशानियाँ जातक को भोगना पड़ता है | 

आप भी जान सकते हैं आपके वैवाहिक जीवन के बारे में अपने कुंडली दिखवा के  :

  • विवाह के लिए अनुकूल समय कब है |
  • जीवन साथी कैसा होगा |
  • विवाह के बाद क्या पति पत्नी में प्रेम रहेगा |
  • कहीं मंगल दोष तो आपके प्रेम जीवन और वैवाहिक जीवन को बर्बाद नहीं कर रहा है |
  • कहीं किसी ग्रहण दोष के कारण तो जीवन में खुशियों से वंचित नहीं रहना पड़ रहा है | 
  • कहीं कालसर्प योग तो आपके बनते कामो को बिगड़ नहीं रहा है | 

आइये अब जानते हैं की कैसे 9 ग्रह हमारे वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते हैं ?

हमारे कुंडली में 9 ग्रह हमारे अपने ही भाग्य को बताते हैं | प्रत्येक ग्रह में विशेष गुण होते हैं और वो जन्म कुंडली में जहाँ पर भी बैठता है उसके आधार पर जातक के जीवन को प्रभावित करता है | 



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आइये जानते हैं सूर्य ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर सूर्य ग्रह का सकारात्मक प्रभाव जातक के सप्तम भाव पर रहेगा तो जातक के जीवन साथी में नेतृत्त्व क्षमता रहेगा, गजब की आत्म शक्ति रहेगी, उन्हें दबना पसंद नहीं होगा, कुछ कर गुजरने का उत्साह होगा, आत्म विश्वास होगा  |

अगर ख़राब सूर्य का प्रभाव जातक के सप्तम भाव में होगा तो जीवन साथी कड़वा बोलने वाला होगा, आलस्य के कारण बदनामी के योग बनेंगे, जिम्मेदारी लेने से कतरायेगा, आत्मशक्ति की कमी होगी उसमे, अपनी गलतियों को छुपाने के लिए आपपे हावी होने की कोशिश करेंगे | ऐसे में तलाक तक की नौबत आ सकती है |

आइये जानते हैं चन्द्र ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर शुभ चन्द्र का प्रभाव जातक के विवाह स्थान पर रहेगा तो जीवन साथी सुन्दर होगा, रचनात्मक होगा, भावनात्मक साथ देने वाला होगा, गृहस्ती को अच्छी तरह से सँभालने वाला होगा, उनकी याददाश्त भी अच्छी होगी, मन को मोह् लेने की क्षमता उनमे होगी, पालन- पोषण करने की क्षमता उनमे अच्छी होगी,  दिमागी संतुलन अच्छा होगा जिससे किसी भी स्थिति को सँभालने में माहिर होंगे | 

अगर अशुभ चंद्रमा का प्रभाव विवाह स्थान में होगा तो जीवन साथी में धैर्य कम होगा, मानसिक अस्थिरता रहेगी, निर्णय लेने में कमजोर होगा, सुन्दर होगा परन्तु भावनात्मक रूप से जुड़ने में कमजोर रहेगा जिसका सीधा असर पति-पत्नी के रिश्तो पर पड़ेगा |

आइये जानते हैं मंगल ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर शुभ मंगल का प्रभाव विवाह स्थान पर पड़ेगा तो जातक का जीवन साथी ताकतवर होगा, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्साहित रहेगा, अपने साथी को संतुष्ट करने की शक्ति उसमे होगी, गृहस्ती के कार्यो में आगे बढ़के साथ देगा| ऐसे लोग जीवन में किसी भी स्थिति में साथ नहीं छोड़ेंगे, नए कार्यो को करने के लिए अपने साथी को प्रेरित भी करेंगे |

अशुभ मंगल का प्रभाव अगर विवाह स्थान पर हुआ तो जातक का जीवन साथी कटु बोलने वाला हो सकता है, क्रोधी हो सकता है, स्वार्थी भी हो सकता है, रोगी भी हो सकता है, अपने मर्जी से जीने वाला हो सकता है , नशे का आदि भी हो सकता है और तलाक तक की नौबत आ जाती है |

आइये जानते हैं बुध ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

शुभ बुध का प्रभाव अगर कुंडली के विवाह स्थान पर पड़े तो जातक का जीवन साथी बुद्धिमान होता है, निति बनाने में माहिर होता है, अपना काम निकालने में माहिर होता है, बातचीत और लेखन कला में भी माहिर होता है, समय के हिसाब से अपने आपको बदलना भी उन्हें खूब आता है, ऐसे लोग ये भी जानते हैं की जीवन में बैलेंस कैसे बनाना है, अपने साथी के हर जरुरत का ध्यान रखते हैं  |

अगर अशुभ बुध का प्रभाव कुंडली के विवाह स्थान पर पड़े तो जातक का जीवन साथी अपने गलत निर्णयों से सम्बन्ध में खटास लाता है, स्वार्थी होता है अर्थात उन्हें सिर्फ अपने काम से काम होता है, गलत तरीके से धन कमाने के बारे में सोचता है, अपनी गलत आदतों के कारण पारिवारिक विवादों को जन्म देता रहता है, भाषा शैली भी अच्छी नहीं होती |

आइये जानते हैं गुरु ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर शुभ गुरु का प्रभाव जातक के कुंडली के विवाह स्थान पर पड़े तो जीवन साथी भाग्शाली होता है, धनवान होता है, जीवन में लगातार उन्नति करने वाला होता है और उनके साथ सबकी उन्नति होती रहती है, शुभ गुरु के प्रभाव से जीवन साथी सकारात्मक सोच का होता है, बड़ी सोच का होता है, जीवन जीने के लिए नए नये तरीके खोजता है, उन्हें दबाना आसान नहीं होता , गृहस्थ जीवन की हर चुनौती का सामना करने में मदद करता है |

अगर अशुभ गुरु का प्रभाव कुंडली के विवाह स्थान में पड़े तो जातक का जीवन साथी अपने ज्ञान के अहंकार में ही जीवन बिता देता है, जीवन में संघर्ष बहुत होता है, नकारात्मक सोच के कारण खुद और दुसरो को भी परेशां करता है, वास्तविकता से अपने आपको दूर रखता है | ऐसे में वैवाहिक जीवन में दोनों को बहुत समझौते करना पड़ते हैं | 

आइये जानते हैं शुक्र ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर कुंडली के विवाह भाव पे शुभ शुक्र का प्रभाव हो तो जातक का जीवन साथी मन मोहने वाला होता है, आकर्षक होता है, जीवन में किसी भी परिस्थिति को सँभालने की शक्ति रखता है, रोमांटिक होता है, हर पल को यादगार बनाने में साथ देता है, काम काज में भी साथ देता है, सुख सुविधाओं के साथ जीवन यापन करने में साथ देता है, रचनात्मक दिमाग रखता है |

अगर कुंडली के विवाह भाव पे अशुभ शुक्र का प्रभाव हो तो जातक का जीवन साथी सुन्दर होते हुए भी जीवन का मजा नहीं ले पाता, अपने अपेक्षाओं के कारण विवाद में उलझ जाता है, मिलन सार नहीं होता है |

आइये जानते हैं शनि ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर जातक के कुंडली में विवाह भाव पर शुभ शनि का प्रभाव पड़े तो जीवन साथी कर्मठ रहता है, हमेशा साथ देने वाला होता है, सही निर्णय से जीवन को सुखी करता है, वफादार होता है|

अगर जातक के कुंडली में विवाह स्थान पर अशुभ शनि का प्रभाव हो तो जीवन साथी क्लेश करने वाला होता है, आलसी होता है, अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत नहीं रहता है, अपने आपको हमेशा कमजोर महसूस करता है, हमेशा निर्भर रहने की सोचता है, परिवार के रहस्यों को भी पचा नहीं पाता, जीवन में खूब समझौते करता है |

आइये जानते हैं राहु ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर शुभ राहू का प्रभाव कुंडली में विवाह स्थान पर हो तो जातक का जीवन साथी उत्साही होता है, उसमे उर्जा खूब होती है, कार्यो को करने में कुशल होता है, खोजी होता है, कुछ अलग हट के कामो को करने वाला होता है, रहस्यमई होता है |

अगर अशुभ राहु का प्रभाव विवाह स्थान पर पड़े तो जीवन साथी गुस्सेल होता है, अपने आप में खोया रह सकता है, समय समय पर उनका व्यवहार बदलता रहता है, चिंतित रहता है, नशे का आदि भी हो सकता है, अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करता, उत्तेजना में आके कई बार गलत निर्णय ले लेता है |

आइये जानते हैं केतु ग्रह के प्रभाव से जीवन साथी कैसा होगा ?

अगर कुंडली के विवाह स्थान में शुभ केतु का प्रभाव हो तो जातक का जीवन साथी धार्मिक होता है, जीवन के वास्तविक उद्देश्य के प्रति जागरूक रहता है, व्यक्तित्त्व भी कुछ हटके होता है, रहस्यमई भी होता है, वास्तविक दुनिया में रहना पसंद करता है, जिम्मेदार होता है |

अगर कुंडली के विवाह स्थान पर अशुभ केतु का प्रभाव हो तो जातक का जीवन साथी रीती रिवाजो को ज्यादा मानने वाला हो सकता है, अंध विश्वासी हो सकता है, गलत लोगो के सगत में रहके नुक्सान उठाता है, नकारात्मक सोच के कारण भी अपना जीवन बर्बाद करता है, जिम्मेदारी लेने से कतराता है | 

आइये अब जानते हैं की अगर विवाह स्थान या सुख स्थान दूषित हो तो ऐसे में किन उपायों से मदद मिलती है :

ज्योतिष अनुसार जब हम कुंडली में ख़राब ग्रहों के कारण वैवाहिक जीवन को बर्बाद होते हुए देखते हैं तो ऐसे में हम कुछ उपायों को करके वैवाहिक जीवन के परेशानियों को कम कर सकते हैं जैसे :

  1. ख़राब ग्रह से सम्बंधित शांति पूजा कर सकते हैं या करवा सकते हैं |
  2. अगर बुरी नजर के कारण विवाह सुख में बाधा आ रही हो तो कवच धारण कर सकते हैं, उतारे कर सकते हैं |
  3. किसी देवी या देवत की रोज आराधना कर सकते हैं |
  4. सही रत्न अगर पति और पत्नी धारण करे तो उससे भी बुरे ग्रहों का प्रभाव कम होता जाता है |
  5. किसी विशेष मंत्र का जप भी कारगर होता है जो की सब के लिए अलग अलग होता है |
  6. कई बार कुल देवी और कुल देवत की पूजा से भी विशेष लाभ होता है |
  7. वास्तु में बदलाव करके भी वैवाहिक जीवन के कष्टों को कम किया जा सकता है |

अगर ज्योतिष द्वारा प्रदत्त उपायों को सही तरीके से किया जाए तो निम्न लाभ देखने को मिलते हैं :

  • जीवन में स्वास्थ्य, सम्पन्नता और समृद्धि आती है |
  • मान शांत होता है, विचारों में स्पष्टता आती है जिससे सही निर्णय लेने की क्षमता मिलती है |
  • ऋण-मुक्ति के रास्ते खुलते हैं |
  • जीवन में कुछ करने की प्रेरणा मिलती है | 
  • सौभाग्य और कार्यो में सफलता प्राप्त होता है |
  • भौतिक सुख सुविधाओं को भोगने के रास्ते खुलते हैं |
  • रिश्ते मजबूत होते हैं |
  • बिमारी से मुक्ति मिलती है | 

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