Rishi Panchmi Ka Mahattwa In Hindi

ऋषि पंचमी का महत्त्व हिंदी में , क्या करे ऋषि पंचमी को, ऋषि पंचमी की कहानी, कर्मकांड ऋषि पंचमी से जुड़े, सप्त ऋषियों के नाम.
भाद्रपद के महीने में गणेश चतुर्थी के दुसरे दिन ऋषि पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है भारत में. ये दिन भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन मनाया जाता है. ये दिन बहुत महत्त्वा रखता है क्यूंकि इस दिन सप्त ऋषयो की पूजा होती है जिनके नाम है – कश्यप, अत्री, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम , जमदग्नि और वशिष्ठ. ऐसी मान्यता है की इनकी पूजा से रजस्वला दोष से मुक्ति मिल सकती है.

rishi panchmi ko kya kare
Rishi Panchmi Ka Mahattwa In Hindi
ऋषि पंचमी का दिन महिलाओं के लिए ख़ास महत्त्व रखता है , इस दिन महिलायें व्रत रखती है , पूजाएँ करती है ताकि रजस्वला दोष से मुक्ति मिले. रजस्वला होने पर जाने अनजाने बहुत सी भूल हो जाती है और हिन्दू संस्कृति में इससे मुक्ति का मार्ग भी है और वो है ऋषि पंचमी के दिन सही तरीके से पूजा पाठ करना जिससे पापो से मुक्ति मिलती है.
क्या आप जानते हैं की ऋषि पंचमी से २ दिन पहले हरतालिका तीज मनाया जाता है?

आइये जानते हैं की क्या करना चाहिए ऋषि पंचमी को ?

ये दिन पवित्रता का दिन है , पापो से मुक्ति पाने का दिन है अतः प्रातः काल जल्दी उठ के क्रियाये शुरू की जाती है. इस दिन अपामार्ग का प्रयोग होता है शारीर को शुद्ध करने के लिए.
महिलायें अपामार्ग/आंधीझाड़ा का प्रयोग करके दांत माजते हैं और नहाते भी हैं. अपामार्ग के १०८ डंडियों को सर पर रखके १०८ लौटे जल से नहाया जाता है. जो नदियों के पास रहते हैं वो नदी में १०८ दुबकी लगते हैं. पुरे दिन उपवास किया जाता है और अन्न नहीं खाया जाता है. सिर्फ मोरधन का ही भोजन खाया जाता है.
स्नान के बाद सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है और उनसे सम्बंधित कहानी पढ़ी जाती है. सातो ऋषियों के नाम है कश्यप, अत्री, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम , जमदग्नि और वशिष्ठ. महिलायें उनसे अपने गलती के लिए क्षमा मांगती है.
क्या आप जानते हैं की ऋषि पंचमी के १ दिन पहले गणेश उत्सव प्रारंभ होता है ?

आइये जानते हैं की कौन कर सकता है ऋषि पंचमी की पूजा?

सही मायने में ये पूजा सभी कर सकते हैं क्यूंकि हर कोई जाने अनजाने रजस्वला होने के दौरान करता ही है. और दूसरा उपवास और पूजा से तन और मन दोनों ही शुद्ध होते हैं.
आइये अब जाने हैं सप्त ऋषियों के आसान मंत्र:
  1. ॐ काश्यपाय नमः
  2. ॐ अत्रये नमः
  3. ॐ भरद्वाजाये नमः
  4. ॐ विश्वमित्राये नमः
  5. ॐ गौतमाये नमः
  6. ॐ जमद्ग्न्ये नमः
  7. ॐ वशिष्ठाये नमः
अगर कोई श्रद्धा और भक्ति से ऋषि पंचमी की पूजा करता है तो इसमें कोई शक नहीं की व्यक्ति पाप मुक्त हो के सफल जीवन जी सकता है.

ऋषि पंचमी का महत्त्व हिंदी में , क्या करे ऋषि पंचमी को, ऋषि पंचमी की कहानी, कर्मकांड ऋषि पंचमी से जुड़े, सप्त ऋषियों के नाम.

Hartalika Teej Ka Mahattwa In Hindi

हरतालिका तीज का त्यौहार, तीज पूजा का असान तरीका, क्या फायदे है हरतालिका तीज का , हरतालिका व्रत और कथा, क्या करे मनोकामना पूर्ण करने के लिए हरतालिका तीज को. 

भारत में भाद्रपद महीने के तृतीय तिथि को एक और महत्त्वपूर्ण त्यौहार मनाया जाता है जिसे हरतालिका तीज कहते है. ये त्यौहार कुंवारी और शादीसुदा महिलाए दोनों के लिए महत्त्व रखता है. कुंवारी कन्याएं और शादी सुदा महिलायें इस त्यौहार को बहुत ही उत्साह से मनाती है. 

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Hartalika Teej Ka Mahattwa In Hindi
ऐसी मान्यता है की इस पूजा को करने से परिवार में सुख और सम्पन्नता आती है, शादी शुदा महिलाए अपने पति की लम्बी उम्र के लिए ये पूजा करती है. कुंवारी कन्या मनपसंद पति के लिए ये पूजा करती है. इस पूजा में देवी पार्वती के साथ शिवजी की पूजा होती है.

हरतालिका तीज का व्रत बहुत कठिन होता है क्यूंकि इस दिन जल और अन्न दोनों ही मना रहता है, इस दिन धैर्य और शक्ति की परीक्षा होती है. जो महिलायें और कन्याएं ये उपवास करती है वो महान है और शक्तिशाली है. पूरी रात महिलायें और कन्याएं पूजा पाठ में ही समय बिताती है, मंत्र जप करती है, भजन करती है, कहानी सुनती है. पति भी अपनी पत्नी की सहायता करते हैं पूजा की तैयारी में.

क्या आप जानते हैं की हरतालिका के बाद गणेश चतुर्थी आती है.

कुछ राज्यों में लोग शिव और पार्वती जी की शोभायात्रा भी निकलते हैं , भक्त गण भजन कीर्तन करते, नाचते-गाते चलते हैं. धार्मिक नगरियों जैसे उज्जैन, महेश्वर, ओम्कारेश्वर, आदि में तो वातावरण ही बदल जाता है, हर तरफ शिव मंत्रो और भजन सुनाई देते हैं.

काफी उत्साह नजर आता है भक्तो में इस पूजा को लेके, बाजार में नै रौनक आ जाती है. 

आइये जानते हैं तीज पूजा कैसे की जाती है :


माँ पार्वती जो की महिलाओं और कन्याओं के लिए एक आदर्श है क्यूंकि उन्होंने बरसो तक तपस्या करके भागवान शिव को पाया. उन्होंने ये बता दिया की तपस्या द्वारा कुछ भी पाया जा सकता है.

क्या आप जानते हैं की हरतालिका के १ दिन बाद ऋषि पंचमी आती है?

इसी कारण भक्त भी पूजा पाठ द्वारा मनोकामना पूर्ण करना चाहते हैं. पूरी रात्रि को महिलाए और कन्याएं मंदिर में एकत्रित होती हैं या फिर किसी एक जगह एकत्रित होते हैं, विशेष व्यवस्थाएं की जाती है पूजा के लिए और कुछ कुछ अंतराल में पूजाएँ की जाती है. तीज की कथा भी ब्रहम द्वारा या फिर किसी भक्त के द्वारा पढ़ी जाती है और सब सुनते हैं. पूरी रात दीप दान किया जाता है. फूल, फल, भोग द्वारा माताजी और शिवजी की कृपा प्रपात करने के लिए चढ़ाएं जाते हैं.

एक और महत्त्वपूर्ण बात ये है की इस रात्रि शिवलिंग मिटटी से बनाए जाते हैं और और सुबह उन्हें पूजन के बाद विसर्जित कर दिया जाता है. 

आइये जानते हैं हरतालिका तीज पूजा के फायदे:





अतः इस पूजा को करके सुखी और अच्छा जीवन जिया जा सकता है.
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Ratna Chikitsa In Hindi For Successful Life

क्या है रत्न चिकित्सा, कैसे करे रत्न चिकित्सा, क्या फायदे हो सकते है रत्न चिकित्सा के, कैसे प्राप्त करे अच्छे रत्न, ध्यान रखने योग्य बाते.
रत्न चिकित्सा भारत के अन्दर अत्यंत प्राचीनकाल से चला आ रहा है जिसके अंतर्गत दिव्य रत्नों का प्रयोग करके रोगी को ठीक किया जाता है. 
ज्योतिष के अंतर्गत रत्नों का प्रयोग बहुत होता है ग्रहों को मजबूत करने के लिए, कई दोषों को दूर करने के लिए gems stones का स्तेमाल साधारणतः होता ही है. 
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रत्नों को हम उसके रंग के आधार पर पहचानते है साधारणतः और तकनिकी रूप से उसे जांचने के लिए डेंसिटी टेस्ट भी किया जाता है, आज अनेक प्रकार के ऐसे इलेक्ट्रॉनिक औजार बन गए है जिनके इस्तेमाल से रत्नों को पहचाना जा सकता है. इसीलिए बड़ी कंपनीज तो सर्टिफाइड रत्न भी प्रदान करते हैं. 
हालांकि सर्टिफाइड रत्न एक आम आदमी के जेब की सीमा से बहार ही होते है, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है. 
ऐसे में उपरत्नों का इस्तेमाल लाभदायक रहता है. 

ज्योतिष और रोग :

ज्योतिष के अंतर्गत रोगों का उपचार भी किया जाता है ग्रहों को समझकर क्यूंकि ज्योतिष का ये मानना है की जो भी कुछ घटना घटित होती है उसके पीछे ग्रहों का प्रभाव पूरा होता है अतः रोगी का इलाज जितना डॉक्टर के द्वारा किया जाता है उतना ही ज्योतिष के द्वारा भी किया जाना चाहिए. 
अगर डॉक्टर और ज्योतिष दोनों की सलाह से इलाज किया जाए तो निश्चित ही रोगी बहुत जल्दी स्वस्थ होता नजर आता है इसमे कोई शक नहीं है परन्तु रोगी को अपने सलाहकार पर पूरा भरोसा होना चाहिए. श्रद्धा और विश्वास के अभाव में कोई इलाज असरकारक नहीं रहती.
अगर बिमारी समझ नहीं आ अहि है, अगर दवाइयां असर नहीं कर रही है तो ऐसे में ज्योतिष का जानकार व्यक्ति मददगार साबित हो सकता है. 
ऐसे कई किस्से सामने आये है जिनमे डॉक्टर्स बिमारी का पता नहीं लगा पा रहे थे परन्तु सिर्फ एक पूजा करने के बाद जब दुबारा जांच किया गया तो बिमारी का पता चल गया, कई लोग जिन के ऊपर दवाइयां असर नहीं कर रही थी उन्होंने कुछ पूजाए और दान की तो दवाईया का असर होने लगा. 
अतः हम किसी भी प्रकार से ज्योतिष के महत्व को नकार नहीं सकते हैं. 

रत्नों का प्रयोग करने से पहले क्या ध्यान रखे :

  • रत्न खंडित न हो इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए. 
  • रत्न चिकित्सा में सम्बंधित रत्न के साथ सम्बंधित धातु ही होना चाहिए, इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए. 
  • रत्नों को शुभ महूरत में ही धारण करना चाहिए.
  • रत्नों को धारण करने के लिए पेंडेंट या अंगूठी बनाई जा सकती है. कुछ विशेष दशाओं में या पूजाओ में यन्त्र में नग लगाके पूजा की जाती है. 
  • रत्नों को प्रयोग करने से पहले शुद्ध किया जाना किया जाना चाहिए, पूजा की जानी चाहिए.
  • किसी अच्छे साधू, ब्राह्मण के हाथो अगर लेके इसे धारण किया जाये तो भी बहुत शुभ परिणाम प्राप्त हुए है. 

आइये अब जानते है ग्रहों से सम्बंधित रत्न :

  1. सूर्य का रत्न है माणिक्य.
  2. चन्द्रमा का रत्न है मोती
  3. मंगल का रत्न है मूंगा
  4. बुध का रत्न है पन्ना
  5. गुरु का रत्न है पुखराज
  6. शुक्र का रत्न है हीरा
  7. शनि का रत्न है नीलम
  8. राहू का रत्न है गोमेद
  9. केतु का रत्न है लहसुनिया
इनके अलावा सभी के उपरत्न भी उपलब्ध है , जिनको भी रत्न चिकित्सा लेना हो वो अपने जेब के हिसाब से रत्न खरीद सकते है सलाह ले के. 
सही रत्न व्यक्ति को उर्जावान बनाते है, निरोगी बनाते है, धनवान बनाते है, संपन्न बनाते है.
रत्नों द्वारा आप बना सकते है अपने जीवन को समृद्ध , सुखी और शक्तिशाली.



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Kaise Paaye Hanuman Puja Dwara Safaltaa

कैसे पायें हनुमान पूजा से सफलता, कैसे प्रसन्न करे हनुमानजी को, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय. 
पुरे ब्रह्माण्ड में जो राम भक्त के रूप में जाने जाते हैं, जो परम शक्तिशाली है, जो भक्तो के भक्त है, जो परम प्रतापी, परम बलशाली, परम भक्त है वो हमेशा भक्तो के कल्याण हेतु आतुर रहते हैं. हनुमान जी की पूजा से बहुत आसानी से भक्तगण भय से बाख जाते हैं, उनकी कृपा से बल, बुद्धि और विद्या से हम परिपूर्ण हो सकते हैं. 
हनुमान जी द्वारा कैसे कष्ट दूर करे ज्योतिष में
Kaise Paaye Hanuman Puja Dwara Safaltaa

आज के इस कलयुग में हनुमानजी एक ऐसे देवता है जो साक्षात मौजूद है ऐसी मान्यता है और लोगो के अनुभव भी है. अतः उनकी पूजा अराधना से तुरंत फल की प्राप्ति होती है इसमे कोई शक नहीं है. 
चलिए देखते हैं की कैसे हम महाबलशाली की कृपा प्राप्त कर सकते हैं आसानी से परन्तु उससे पहले जानते हैं की क्या क्या सावधानी रखना चाहिए हनुमान पूजा करने के दौरान.
  1. इस पूजा में या इनके कोई भी टोटका को करने में पवित्रता का धयान जरुर रखना चाहिए. 
  2. ब्रह्मचर्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. 
  3. इनकी पूजा में रोट का भोग लगाया जाता है , लड्डू और चूरमा भी इनको पसंद है.
  4. गूगल की धुप जरुर देना चाहिए. 
  5. और पूजा से पहले श्री राम का ध्यान और आवाहन भी करना उचित होता है. 
  6. भक्ति से की गई साधना अवश्य सफल होती है. 
  7. आसन के बिना कोई भी पूजा न करे. 

आइये देखते है की कैसे आसानी से हम हनुमानजी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं :

  • हनुमान चालीसा का पाठ अगर रोज किया जाए विधिवत तो निश्चय ही सफलता प्राप्त होती है. 
  • बजरंग बाण का पाठ आवश्यक होने पर ही करना ठीक रहता है.
  • इसी प्रकार हनुमान अष्टक के साथ हनुमान चालीसा का पाठ बहुत ही अच्छा मन जाता है.
  • बहुत अधिक कष्ट होने पर हनुमान जी के मंदिर में दीपक जला के फिर उनकी 108 परिक्रमा करने पर शीघ्र ही शुभ फल की प्राप्ति संभव है.
  • शनि की अधिक पीड़ा होने पर शनिवार को हनुमानजी को चोला चढ़ा के १०० बार हनुमान चालीसा का पाठ बहुत बड़े विध्नो से भी छुटकारा दिला देता है. 
  • हनुमान जी के मंदिर मई सुन्दर काण्ड का पाठ करना भी बहुत शुभ मन जाता है .
  • जहां पर नित्य हनुमानजी की पूजा अराधना होती है वह पर कभी भी कोई अशुभता प्रवेश नहीं करती है , इसमे कोई संशय नहीं है. 
  • अगर नकारात्मक उर्जा बहुत परेशान कर रही हो तो उस समय उतारा करके सिद्ध हनुमान कवच  धारण करना बहुत लाभदायक होता है. 
  • पीपल के पत्तो की माला बनाकर अगर हनुमानजी को अर्पित किया जाए तो भी मनोकामनाए शीघ्र सिद्ध होती है. 
हनुमानजी पर किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव नहीं होता है अतः उनकी कृपा से कोई भी भक्त अपनी रक्षा कर सकता है.
जो स्वयं ज्ञान के भण्डार है , जिनमे विश्व की तमाम शक्तियां समाहित है, जो भक्तो के भक्त है, जो महाबली है, जो भक्तो का उद्धार करने के लिए तत्पर रहते है उन श्री राम की कृपा सबको प्राप्त हो


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Angarak Yog Ke Prabhav Vibhinn Kundli Ke Vibhinn Bhavo Me

अंगारक योग का प्रभाव कुंडली के विभिन्न भावो में, कैसे निजात पाए अंगारक योग के दुष्प्रभाव से, angarak yoga ka samadhan in hindi jyotish.
kundli me angarak hone se kya hota hai
angark yog in hindi jyotish

अंगारक योग ज्योतिष के अंतर्गत एक समस्या उत्पन्न करने वाला योग है जो की जिसके कुंडली में होता है उसके जीवन में विपरीत प्रभाव उत्पन्न करता. जितनी जल्दी हो सके इसके परिहार के लिए कदम उठाना चाहिए अन्यथा कामकाजी और व्यक्तिगत जीवन दोनों ही प्रभावित होता है.
ज्योतिष संसार के इस लेख में हम जानेंगे की अलग कुंडली के अलग अलग भावो में अंगारक योग क्या प्रभाव उत्पन्न करता है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में मौजूद १२ भाव अलग अलग विषयो से जुड़े है इसी कारण किसी भी योग का प्रभाव में अलग अलग होता है. कुछ लोग दुर्घटना का शिकार होते हैं, कुछ लोगो को स्वास्थ्य हानी होती है, कुछ लोगो को आर्थिक तंगी का सामना करना होता है, कुछ लोगो को प्रेम में परेशानी आती है कुछ लोगो को संबंधो में समस्याओं का सामना करना होता है आदि.

आइये जानते हैं की अंगारक योग का प्रभाव कुछ विशेष भावो के हिसाब से क्या हो सकता है जीवन में :

  1. अगर कुंडली के पहले भाव में अंगारक योग बने तो क्या होगा – कुंडली में पहला भाव दिमाग से सम्बन्ध रखता है, संबंधो से सम्बन्ध रखता है, निर्णय लेने की क्षमता से सम्बन्ध रखता है, शान्ति से सम्बन्ध रखता है आदि. अतः अगर इस घर में अंगारक योग का निर्माण हो तो जातक को गुस्सेल बना सकता है साथ ही अनावश्यक भय दे सकता है. अस्थिरता के कारण जीवन हमेशा उलझा हुआ सा महसूस हो सकता है. व्यवहार में उत्तेजना के कारण भी समस्या उत्पन्न होती है.
  2. अगर कुंडली के चौथे भाव में अंगारक योग बने तो क्या होगा – कुंडली का चौथा भाव खुशी से सम्बन्ध रखता है , माता से सम्बन्ध रखता है. अतः अगर अंगारक योग कुंडली के चौथे भाव में बने तो जातक के जीवन में खुशी पाने में हमेशा बाधा उत्पन्न होती रहती है, माता के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है या फिर माता से सम्बन्ध ख़राब हो सकते है.
  3. अगर कुंडली के सातवे भाव में अंगारक योग बने तो क्या होगा – कुंडली का सातवां भाव विवाह, दोस्ती, साझेदारी आदि से सम्बन्ध रखता है अतः अगर इस भाव में अंगारक योग का निर्माण हो तो विवाह में देरी हो सकती है, विवाह के बाद तलाक हो सकता है, साझेदारी के काम में परेशानी उत्पन्न हो सकती है, वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण हो सकता है.
  4. अगर कुंडली के दसवे भाव में अंगारक योग बने तो क्या होगा – कुंडली का दसवां घर काम काज से सम्बन्ध रखता है अतः जातक को स्थिर काम काज के साधन मिलने में समस्या आती है. कुछ जातको को सही माहोल नहीं मिल पता, मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता, व्यापार में भी घाटा हो सकता है.
  5. क्या होगा जब राहू और मंगल कुंडली के दुसरे भाव में बैठे? वैदिक ज्योतिष के हिसाब से दूसरा भाव लाभ भाव है, यहाँ से ससुराल का भी देखा जाता है, आँख से भी सम्बंधित है. अतः यहाँ पर अंगारक योग बन्ने पर जातक का सम्बन्ध ससुराल से ख़राब हो सकता है, कई प्रकार से धन हानि हो सकती है, अनचाहे खर्चे परेशां कर सकते हैं, आँखों से सम्बंधित रोग हो सकते हैं, स्थिर आय स्त्रोत में समस्या आ सकती है.
  6. क्या होगा जब कुंडली के पांचवे भाव में अंगारक योग बनेगा?ये भाव पढ़ाई से सम्बन्ध रखता है, संतान से सम्बंधित है, भाग्य से सम्बन्ध रखता है अतः जातक को इन सb विषयों से सम्बंधित परेशानी हो सकती है.
इसी प्रकार जब राहू और मंगल जातक की कुंडली में तीसरे भाव में बैठे तब व्यक्ति को अपनी शक्ति का पूरा स्तेमाल करने से रोक देता है.
छठे भाव में अगर अंगारक योग बने तो जातक को छुपे शत्रुओ से परेशानी हो सकती है और स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी भी हो सकती है.
अगर कुंडली का आठवां भाव राहू और मंगल से ग्रस्त हो तो जातक की अकाल मृत्यु हो सकती है, कोई गंभीर बिमारी लग सकती है, कोई दुर्घटना हो सकती है.
अंगारक योग अगर कुंडली के नवें भाव में बने तो जातक को दुर्भाग्य के कारण बहुत परेशानी हो सकती है. दसवें भाव में ये योग जातक को स्थिर कर्म करने से रोकता है.

अतः अलग अलग भावो में अंगारक योग के अलग अलग प्रभाव हो सकता हैं. अतः ये जरुरी है की समस्याओं को कम करने के लिए सही कदम उठाया जाए.

उचित समाधान के लिए ज्योतिष से संपर्क करना चाहिए.
दिखाए अपनी कुंडली ज्योतिष को और पाए उचित और आसान समाधान समस्याओं का

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Janmashtmi Mahattw In Hindi and Jyotish

Janmashtmi Mahattw in hindi, 2019 जन्माष्टमी का क्या महत्तव है, क्या करे सफलता के लिए कृष्णा जन्माष्टमी पर, ज्योतिष और जन्माष्टमी, घर में जन्माष्टमी मनाने का आसान तरीका.
Janmashtmi Mahattw In Hindi and Jyotish
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कृष्ण जन्माष्टमी एक ऐसा उत्सव है जो की सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु संसार के कई देशो में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है. इसका कारण ये है की कृष्ण भक्त पुरे संसार में फैले हुए हैं.
जन्माष्टमी वह दिन हैं जब कृष्ण जी ने धरती पर जन्म लिया था.
कृष्ण जी को भगवान् विष्णु का अवतार माना जाता है और उनके अवतार लेने की दिव्या घटना अष्टमी की रात्री को घटी थी हिन्दू पंचांग के हिसाब से. अतः तभी से जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाने लगा. इस दिन लोग पूरी रात लोग नाम संकीर्तन , कृष्ण मंत्र का जप आदि किया करते हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव:

इस रात्रि का इन्तेजार भक्त लोग पुरे साल करते हैं, पूरी रात भक्तगण कृष्ण नाम के साथ झूमते हैं , गाते हैं, जगह जगह झांकियां सजाई जाती हैं, लोग घरो में भी झांकियां सजाते हैं और उत्सव मानते हैं.
झूला लगाया जाता है, उसमे बालगोपाल की मूर्ती रखी जाती है, रात्रि को लोग ह्रदय से बड़े हर्ष और उल्लास के साथ पूजन करते हैं बालगोपाल का.

आइये जानते हैं जन्माष्टमी का ज्योतिषी महत्तव:

हिन्दू ग्रंथो के अनुसार साल में 4 ऐसी रात्रियाँ आती है जिनको की महारात्रि कहा जाता है. ये है- ‘शिव रात्रि ’, ‘होली रात्री’, ‘दिवाली रात्रि’ और ‘जन्माष्टमी रात्रि’.
जन्माष्टमी को ‘मोहरात्रि’ के नाम से भी जाना जाता है. जन्माष्टमी की रात्रि का बहुत महत्तव है और ये रात तंत्र, मंत्र, साधना को सिद्ध करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. इसी कारण तांत्रिक, अघोरी लोग, साधक गण मान्त्रिक इस रात का पुरे वर्ष इन्तेजार करते हैं.
इस रात्रि को वशीकरण क्रियाओं को भी सिद्ध किया जाता है. 
साधारण लोग भी इस रात का उपयोग दिव्य कृपा को प्राप्त करने के लिए करते हैं और इसके लिए नाम जप और संकीर्तन का सहारा लेते हैं.
जन्माष्टमी की रात्रि एक दिव्य रात्रि है और पूरा वातावरण कृष्णमय हो जाता है इस दिन और रात को. भगवान् कृष्ण का जन्म धरती पर से पापियों के नाश के लिए हुआ था और उन्होंने ये काम बहुत अच्छी तरह से किया , इसी कारण लोग उनको आज भी पूजते हैं जिससे की उनके जीवन से भी नकारात्मकता का नाश हो. 

दही-हांडी के खेल का महत्तव जन्माष्टमी को :

कृष्ण जन्म के अवसर पर एक विशेष आयोजन होता है और उसे कहते हैं दही-हांडी फोड़ प्रतियोगिता, इसके अंतर्गत एक निश्चित ऊँचाई पर एक हांडी या मटकी में दही भर के लटका दिया जाता है और लोगो को आमंत्रित किया जाता है इसे फोड़ने के लिए , जो फोड़ता है उसे इनाम भी मिलता है. इसको देखने के लिए लोगो की भीड़ लगी रहती है. 
वास्तव में ये प्रतियोगिता कृष्ण जी के नटखट स्वभाव को याद करने के लिए किया जाता है, कृष्ण जी जब छोटे थे तो माखन चुरा के खा लिए करते थे, और गोपियों की मटकी फोड़ दिया करते थे. आज भी लोग उनकी शैतानियों को याद करके खुश होते हैं और विभिन्न आयोजन करते हैं.

2019 के कृष्ण जन्माष्टमी का महत्तव :

इस साल जन्माष्टमी 23 August 2019 को आ रही है, दिन है Shukrawaar और इसी कारण इसका महत्तव और भी बढ़ जाता है. 

जो लोग अध्यात्मिक साधना करना चाहते हैं उनके लिए ये दिन श्रेष्ठ है, जो तंत्र मंत्र साधना करना चाहते हैं या अन्य कोई साधना करना चाहते हैं उनके लिए भी ये दिन शुभ है.
इस समय सूर्य, मंगल और गुरु अपने मित्र राशि में रहेंगे जिससे समय शुभ रहेगा.
जन्माष्टमी को पूजा अर्चना करके विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती है.

घर में जन्माष्टमी उत्सव मनाने का आसान तरीका :

  1. घर में किसी जगह को साफ़ करे और पवित्र जल छिड़क कर जगह को शुद्ध भी करे.
  2. वहाँ पर झुला लगाएं, बाल गोपाल जी की मूर्ति या फोटो लगाए और अपनी क्षमता के अनुसार आकर्षक सजाये.
  3. वहाँ पर पंचामृत, कपडे, भोग, धुप , दीप, शंक, फूल आदि
  4. ठीक अर्ध रात्रि में बाल गोपाल की पूजा करे, इसके लिए उनका अभिषेक करे, उन्हें नए वस्त्र पहनाये फिर उनका पूजन कर भोग अर्पित करे , आरती करे और जीतना हो सके कृष्ण मंत्र जपे. फिर स्वास्थ्य और सम्पन्नता के लिए प्रार्थना करे.
  5. फिर प्रसाद बांटे घर के लोगो में, पड़ोसियों में, भक्तो में.
इस प्रकार से कोई भी बहुत आसान तरीके से घर में भी पूजन कर सकते हैं बल गोपाल का.
जन्माष्टमी की पूजा से स्वास्थ्य और सम्पन्नता प्राप्त किया जा सकता है.
जन्माष्टमी की पूजा से काले जादू के असर को भी ख़त्म किया जा सकता है.
बुरी नजर की समस्या से भी निजात पाई जा सकती है.
अतः इस पवित्र और शक्तिशाली रात्री का स्तेमाल करे और बनाए अपने जीवन को धन्य.
जय श्री कृष्णा

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Shatru Se Suraksha Ke Liye Vastu Samadhan

Shatru Se Suraksha Ke Liye Vastu Samadhan, शत्रुओ के प्रकार और वास्तु समाधान, कैसे करे वास्तु की सुरक्षा शत्रुओ से.
शत्रुओ की समस्या एक गंभीर मसला है आज के इस इलेक्ट्रॉनिक युग में भी. अगर शत्रु शक्तिशाली है तो ये चिंता का विषय होता है. इससे जीवन में बहुत परेशानियां आ सकती है. शत्रु के कारण जीवन नरक जैसा महसूस होने लगता है. एक डर हमेशा दिमाग में छाया रहता है. इसके कारण स्वास्थ्य पर भी ख़राब असर होता है.

vastu samadhan shatru se bachne ke liye
Shatru Se Suraksha Ke Liye Vastu Samadhan
अगर बिना किसी कारण के शत्रु बढ़ रहे हो जीवन में, अगर बिना किसी कारण के जीवन में संघर्ष बढ़ रहे है, वाद विवाद बढ़ रहे है तो जल्द ही सही कदम उठा लेने चाहिए.
कभी कभी वास्तु में समस्या के कारण भी जीवन में शत्रु बढ़ने लगते हैं, अतः इस लेख में हम जानेंगे वास्तु के समस्याओं के बारे में और ये की कैसे बचाएं शत्रुओ से.
आइये जानते हैं शत्रुओ के प्रकार के बारे मे:
  1. शत्रु का पहला प्रकार में हम किसी व्यक्ति विशेष को ले सकते हैं जो की हमे नुक्सान पहुचाना चाहता हो.
  2. दुसरे प्रकार में हम नकारात्मक उर्जाव को लेंगे जो की वास्तु के गलत तरीके से बनाने के कारण उत्पन्न होते हैं.
  3. तीसरे प्रकार में शारीर के अन्दर मौजूद रोगाणुओं को लेंगे जिनसे की शारीर में रोग उत्पन्न होते हैं.
  4. चोथे प्रकार में हम लेंगे काले जादू को , इसका स्तेमाल विरोधी कई बार करते हैं नुक्सान पहुचाने के लिए.
इसके अलावा भी और भी कई प्रकार के शत्रु हो सकते हैं जिनसे हमे नुक्सान हो सकता है. परन्तु इस लेख में हम सिर्फ वास्तु समस्या के बारे में जानेंगे.


आइये जानते हैं कुछ वास्तु समस्या जिनके कारण शत्रु से परेशानी बढ़ सकती है :

  • अगर वास्तु के दक्षिण- पश्चिम कोने में कोई समस्या हो तो ये पक्का मान लीजिये की पितृ दोष बढेगा, छुपे शत्रुओ से खतरा बढेगा अतः ये जरुरी है की इस कोने के दोष को कम किया जाए.
  • अगर वास्तु के दक्षिण-पूर्व कोने में कोई दोष हो तो ऊर्जा को प्रभावित करता है. ये कोना आग्नेय कोण कहलाता है, ये कोना है उर्जा का. अतः इस कोने में दोष होने के कारण स्वास्थ्य की हानि होती है, घर के सदस्यों में उर्जा की कमी मिल सकती है. इस कोने में दोष होने के कारण घर के महिलाओं के स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा असर होता है.
  • अगर वास्तु के उत्तर-पूर्व कोने में कोई रुकावट हो तो इससे सकारात्मक उर्जा की रोक होती है और इसके कारण ये संभव है की आपको सालता के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़े.
  • अगर वास्तु की उत्तर-पश्चिम दिशा में कोई समस्या हो तो व्यक्ति को बचत करने में समस्या हो सकती है.
  • अगर वास्तु में घुसने का मुख्य द्वार गलत दिशा में हो तो इससे भी शत्रु बल बढ़ता है.
  • अगर आप कोई कारखाना चला रहे हैं तो मशीनों को भी सही दिशा में लगाना चाहिए अन्यथा इससे भी समस्या उत्पन्न हो सकती है.
  • दक्षिण पश्चिम दिशा में समस्या हो तो कानूनी अडचने परेशान कर सकती है .

आइये अब जानते हैं की कैसे बचाएं अपने आप को वास्तु दोषों से और शत्रुओ से :

किसी भी प्रकार के वास्तु समाधान को जानने के लिए सबसे पहले हमे वास्तु में मौजूद दोषों का पता लगा लेना चाहिए. हर समस्या के लिए अलग समाधान होता है जो की सही ज्योतिष या वास्तु विद बता सकते हैं.
  1. अगर वास्तु में कोई नकारात्मक उर्जा हो तो सही उतारा करने की जरुरत होती है.
  2. उतारे के बाद सही सिद्ध यन्त्र को लगा दिया जाता है जिससे नकारात्मक उर्जाव से वास्तु की सुरक्षा होती है.
  3. किसी कोने में वास्तु दोष हो तो वहां पर बनावट में बदलाव करके या फिर यन्त्र को लगा के बदलाव किया जा सकता है.
  4. वास्तु में समय समय पर विशेष यज्ञ करके भी दोषों को दूर रखा जा सकता है.
अगर आप को भी कोई वास्तु समस्या हो तो आप ज्योतिष और वास्तु विद से समाधान प्राप्त कर सकते हैं.



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Tarpan Kya Hota Hai

Tarpan kya hota hai, जानिए हिंदी में तर्पण के बारे में, कैसे मुक्ति पायें पितृ दोष से, कैसे पायें सफलता जीवन में, कैसे पायें पितरो से आशीर्वाद.
ऐसा देखा जाता है की कुंडली में पितृ दोष होने के कारण लोग बहुत परेशान रहते हैं, जीवन में हर कदम पर परेशानी आती रहती है. व्यक्तिगत जीवन और काम-काजी जीवन में हद से जयादा परेशानी आती है. और कितनी भी कोशिश करे , परेशानी ख़त्म नहीं हो पाती है. पितृ दोष को अगर सही तरीके से समझ जाएँ तो इससे मुक्ति पाई जा सकती है, इस लेख में पितृ दोष से मुक्ति के लिए एक विशेष प्रयोग की जानकारी दी जा रही है जिसे तर्पण कहते हैं.
tarpan kya hai aur kyu karte hain in hindi
Tarpan Kya Hota Hai

जब भी कोई व्यक्ति शारीर का त्याग करता है तो उसकी मुक्ति के लिए कुछ विशेष पूजाओ का जिक्र हमारे ग्रंथो में किया गया है , इन क्रियाओं को करने से आत्मा क्षण भंगुर संसार के मोह को त्याग कर मुक्ति हो जाती है और इसका पुण्य क्रिया करने वाले को मिलता है.

ऐसी मान्यता है की अगर मृत्यु के पश्चात कर्मो को ठीक ढंग से नहीं किया जाता है तो आत्मा मुक्त नहीं होती है और इधर उधर भटकती रहती है. इससे पितृ दोष, प्रेत दोष आदि की उत्पत्ति होती है और ज्योतिष में इसे कुंडली को पढके जाना जाता है.

अतः आत्माओं की मुक्ति हेतु कुछ न कुछ क्रियाये करती रहनी चाहिए. इससे न केवल दिवंगत आत्मा मुक्त होती साथ ही हमारा जीवन भी निष्कंटक हो सकता है.
ऐसी बहुत सी पूजाए होती है परन्तु इस लेख में हम सिर्फ “तर्पण प्रयोग” को समझेंगे.

क्या होता है तर्पण?

भारत विश्व का अध्यात्मिक गुरु रहा है और यहाँ के ऋषि मुनियों ने ये बता दिया था की पूर्वजो का असर भी हमारे जीवन में पूरा होता है. उन्ही के कारण हम हैं अतः ये हमारी जिम्मेदारी है की हम उनके लिए भी कुछ करे जिससे वो मुक्त हो सके, उनकी गति उच्च हो सके और हमे आशीर्वाद दे.

तर्पण वास्तव में एक कर्म काण्ड है जिसके प्रभाव से आत्मा को शांति मिलती है. चूँकि वो सूक्ष्म शारीर में मौजूद होते हैं, हम उन्हें प्रत्यक्ष नहीं देख सकते हैं अतः कोई प्रत्यक्ष वास्तु उनको सुखी नहीं कर सकता है.
परन्तु एक अच्छा और पवित्र वातावरण , उर्जित वातावरण उन्हें मुक्त कर सकता है , उन्हें शांति दे सकता है, उन्हें उच्च गति दे सकता है.

तर्पण के अंतर्गत मंत्रो के साथ पवित्र जल का प्रयोग छोड़ा जाता है जिससे की वातावरण भी पवित्र और उर्जित होता है. इसके द्वारा आत्माओं को ख़ुशी मिलती है और वो शांत होती है. वे तर्पण करने वाले को आशीर्वाद देते हैं और बाधाओं को भी हर लेते हैं और व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है.

आइये अब जानते हैं की तर्पण का प्रयोग किनके लिए किया जा सकता है?

  • हम तर्पण कर सकते हैं अपने पूर्वजो की मुक्ति और उच्च गति के लिए.
  • हम तर्पण कर सकते हैं उनके लिए जो हमारे बहुत करीब थे और शारीर छोड़ चुके हैं.
  • हम तर्पण कर सकते हैं रिश्तेदारों के लिए जो अब नहीं हैं.
  • हम तर्पण कर सकते हैं उनके लिए भी जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमसे जुड़े थे.
  • हम तर्पण कर सकते हैं उनके लिए जो अपने बुरे कर्मो के कारण भी मुक्त नहीं हो पा रहे हैं.
  • हम तर्पण कर सकते हैं गुरुओ के लिए जिन्होंने हमे ज्ञान दिया.
  • तर्पण द्वारा आत्माओं से आशीर्वाद प्राप्त करके जीवन को सुखी किया जा सकता है.

आइये अब जानते हैं तर्पण के लिए पात्रता :

तर्पण कोई भी कर सकता है परन्तु अगर कुछ नियमो का सख्ती से पालन किया जाए तो सफलता जरुर मिलती है.
  1. तर्पण प्रयोग काल में शाकाहार होना चाहिए.
  2. किसी भी प्रकार के शराब या नशे का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
  3. ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
  4. मंत्रो का सही उच्चारण करना चाहिए.

आइये अब जानते हैं की तर्पण में किन चीजो का स्तेमाल होता है?

साधारणतः जल, गंगाजल, दूध, जऊ, चन्दन, कुशा , काले तिल, पुष्प  आदि का प्रयोग होता है. प्रयोग की विविधता के आधार पर वस्तुओ में अंतर हो सकता है. 

आइये जानते हैं तर्पण कितने प्रकार के हो सकते हैं?

तर्पण को ६ भागो में बांटा जा सकता है -
  1. देव तर्पण
  2. ऋषि तर्पण 
  3. दिव्य मानव तर्पण
  4. दिव्या पितृ तर्पण
  5. यम तर्पण
  6. मनुष्य पितृ तर्पण
अगर इन ६ प्रकार के तर्पनो को सही तरीके से किया जाए तो निश्चित ही आत्माओं से आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है.
अगर आप खुद नहीं कर पाते हैं तो किसी पंडित के मार्गदर्शन में करे.

आइये अब जानते हैं की तर्पण के लिए उपयुक्त समय कौन सा होता है?


तर्पण का प्रयोग हम पितरो से आशीर्वाद पाने के लिए करते हैं अतः हर महीने की चौदस और अमावस्या को इसका प्रयोग करना शुभ होता है.
इसके अलावा महालय या पितृ पक्ष का समय जो साल में १६ दिनों के लिए आता है बहुत उपयुक्त है. इन १६ दिनों में रोज हम तर्पण प्रयोग कर सकते हैं.
तो तर्पण करे और पाइए पितृ दोष से मुक्ति.
कैसे करे तर्पण?
किसी भी प्रकार के ज्योतिष परामर्श के लिए आप संपर्क कर सकते हैं –


Tarpan kya hota hai, जानिए हिंदी में तर्पण के बारे में, कैसे मुक्ति पायें पितृ दोष से,What is tarpanam? कैसे पायें सफलता जीवन में, कैसे पायें पितरो से आशीर्वाद.

Love Life Aur Jyotish

प्रेम क्या है, ज्योतिष द्वारा प्रेम समस्याओं का समाधान, किन बातो का ध्यान रखा जाता है प्रेमियों के कुंडली को देखने के समय.
jyotish dwara love life ka samadhan
Love Life Aur Jyotish

क्या है प्रेम?

प्रेम एक अहसास है जिसका वर्नान शब्दों में करना संभव नहीं हो पाता है, एक दिव्य अहसास है किसी ख़ास के लिए. जब हमे प्रेम होता है तो इसमे कोई शक नहीं की जीवन पूर्ण रूप से बदल जाता है. परन्तु ऐसे भी बहुत से लोग है जो की प्रेम की भावना को सामने वाले को कभी बता ही नहीं पाते हैं. इसका मुख्य कारण ग्रहों में कमजोरी भी हो सकता है.
ऐसे में ज्योतिष जातक की मदद कर सकता है.
  • प्रेम जाती, धर्म, धन नहीं देखता, प्रेम तो हो जाता है अपने आप. प्रेम दो आत्माओं के बीच एक ख़ास प्रकार का सम्बन्ध होता है, प्रेमीयो को कुछ ऐसे अहसास होते है जो की दुसरो के लिए संभव नहीं, इसका वर्णन करना असंभव है.
  • प्रेम होने का कोई विशेष समय नहीं होता, इसका कोई विशेष उम्र नहीं होती, इसका कोई विशेष कारण भी नहीं होता है.
  • परन्तु कभी कभी गलतफहमी के कारण भी ब्रेकअप हो जाते हैं, कुछ लोग लम्बे समय तक प्रेम सम्बन्ध नहीं निभा पाते हैं, इसका कारण ख़राब ग्रह हो सकते हैं कुंडली में. ऐसे में ज्योतिष ही जातक की मदद कर सकता है कुंडली को पूरी तरह से देखने के बाद.
जब प्रेम होता है तो लड़का और लड़की एक दुसरे के साथ जीवन जीने के लिए सपना देखने लगते हैं परन्तु कुछ प्रेमी दुर्भाग्यवश पूरा जीवन साथ में  नहीं रह पाते हैं. ऐसे में ज्योतिष मदद कर सकता है कुंडली में ग्रहों की स्थिति को जान के.
प्रेम समस्याओं का समाधान के लिए कुंडली को विशेष तरीके से देखना होता है. ज्योतिष कुंडली को अच्छी तरह से देखने के बाद सही राय दे सकते हैं.

प्रेमीयो को कब ज्योतिष से संपर्क करना चाहिए:

  • अगर प्रेम जीवन में अनचाहा घटनाएं उत्पन्न होने लग जाएँ अचानक से तो ज्योतिष से मार्गदर्शन लेना चाहिए.
  • अगर किसी नकारात्मक ऊर्जा के कारण प्रेम जीवन ख़राब हो रहा हो तो ज्योतिष से तुरंत संपर्क करना चाहिए.
  • अगर प्रेमियों के बीच न चाहते हुए भी लड़ाई झगड़े होने लग जाएँ तो बिना कारण के तो ज्योतिष से संपर्क करना चाहिए.
ज्योतिष प्रेमियों के कुंडली को देखते हैं फिर समाधान निकालते हैं.
अतः घबराने की जरुरत नहीं है अगर आपके प्रेम जीवन में समस्या उत्पन्न हो रही है.
अभी ज्योतिष से संपर्क करे.

प्रेमियों के कुंडली देखने के दौरान ज्योतिष निम्न विषयो को देखते हैं -

  • लव लाइफ में किन ग्रहों के कारण परेशानी उत्पन्न हो रही है.
  • लव लाइफ में किस प्रकार के परेशानी उत्पन्न हो सकती है.
  • प्रेम विवाह के बाद किस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है.
  •  प्रेम विवाह में किस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है.
बहुत से प्रेमी आज ज्योतिष की सलाह लेके सुखी और संपन्न जीवन साथ में बिता रहे हैं.
प्रेमी लोग साधारणतः २ प्रकार की समस्या का सामना करते हैं –
प्रेम विवाह से पहले समयायें
प्रेम विवाह के बाद समस्याएं.
अतः कुंडली पढने के समय ज्योतिष इन दोनों विषयों को ध्यान में रखते हैं.

आइये और जानते हैं की किन बातो का ध्यान ज्योतिष को रखना चाहिए प्रेमियों की कुंडली को देखने के समय:

  1. प्रमियो की कुंडली एक दुसरे से मेल खा रही है की नहीं.
  2. दोनों के ग्रहों में मिलन हो रहा है की नहीं.
  3. दोनों की कुंडली में शक्तिशाली ग्रह कौन से है.
  4. प्रेमियों की कुंडली में कमजोर ग्रह कौन से हैं.
  5. कौन से ग्रह कुंडली में ख़राब है और प्रेम जीवन को बर्बाद कर रहे हैं.
  6. भाग्य शाली तारीख दोनों के लिए, भाग्यशाली रंग, जिससे प्रेम बढे.


समस्या का पता लगाने के बाद ज्योतिष समाधान भी निकालते है.
अतः ज्योतिष से परामर्श ले और अपने प्रेम जीवन को सुखी और सफल बनाएं.

प्रेम क्या है, प्रेम ज्योतिष द्वारा प्रेम समस्याओं का समाधान, किन बातो का ध्यान रखा जाता है प्रेमियों के कुंडली को देखने के समय.

Akasmik Dhan Prapti Yoga Jyotish Mai

Akasmik Dhan Prapti Yoga Jyotish Mai, कुंडली में कुछ योग जो बनाते हैं धनवान, जानिए कौन से ग्रह बनायेंगे करोड़पति. 
धन की आवश्यकता सभी को होती है और इसके लिए हम सभी मेहनत करते रहते हैं, परन्तु भाग्य से भी कभी कभी आकस्मिक धन प्राप्ति संभव है जिसे ज्योतिष के माध्यम से जाना जा सकता है. हमने ऐसा बहुत सुना है और देखा भी होगा की किसी को चलते चलते सोना मिला, किसी को लाटरी खुल गई, किसी को किसी ने उपहार स्वरुप संपत्ति दे दी या किसी को खुदाई करते हुए गड़ा धन प्राप्त हुआ, आदि | ये तभी होता है जब कुंडली में आकस्मिक धन प्राप्ति योग हो. 
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Akasmik Dhan Prapti Yoga Jyotish Mai
कुंडली या जन्म पत्रिका में ग्रह विभिन्न भावो में बैठते हैं अलग अलग राशियों के साथ और विभिन्न प्रकार के योगो का निर्माण करते हैं. कुछ योग आकस्मिक धन प्राप्ति करवाने में सहायता करते हैं.

आइये जानते हैं की आकस्मिक धन प्राप्ति में क्या क्या आ सकता है?

अगर भाग्य में अचानक से धन लाभ या संपत्ति लाभ हो तो जातक को गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है, लोटरी लग सकती है, स्कालरशिप मिल सकती है, कोई वसीयत नाम कर सकता है, कोई भेंट में संपत्ति या धन दे सकता है आदि.

आइये जानते हैं की अचानक से धनवान बनाने वाले योग कैसे बनते हैं कुंडली में?

  1. यदि लग्न का स्वामी कुंडली के नवम भाव में हो और नवे घर का स्वामी लग्न में हो तो जातक को धनवान बनने से कोई नहीं रोक सकता है. पढ़िए राजयोग ज्योतिष में>> 
  2. यदि लाभ भाव, पंचम भाव, आय भाव और नवम भाव के स्वामी मजबूत स्थिति में हो कुंडली में तो इसमें कोई शक नहीं की जातक को आकस्मिक धन लाभ करवाता है.ऐसे में जातक करोड़पति भी आसानी से बन जाता है.
  3. यदि लग्न में सिंह राशि का सूर्य बैठा हो और गुरु उसे पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो तो भी अचानक से धन लाभ करवाता है.
  4. यदि वृश्चिक राशी का मंगल जन्मपत्रिका के पहले घर में बैठा हो और उसकी दृष्टि चन्द्रमा और गुरु पर हो तो भी धन-संपत्ति दिलवाता है.
  5. यदि शनि कुंडली के पहले भाव में मकर राशि के साथ बैठ जाए और उस पर बुध व शुक्र की दृष्टि हो तो भी जातक को धन लाभ करवाता है.
  6. इसी प्रकार यदि लग्न में कुम्भ राशि के साथ शनि , बुध और शुक्र की युति हो जाए तो भी जातक को धनवान बना देता है. पढिये गजकेसरी योग के बारे में >>
  7. वृषभ राशि या फिर तुला राशि के साथ अगर शनि, शुक्र और बुध की युति हो तो भी जातक को धनवान बनाता है.
  8. मिथुन लग्न की जन्म पत्रिका हो और वही पर चन्द्रमा और गुरु साथ में बैठे तो भी जातक को धनवान बना देता है.
  9. इसी प्रकार कन्या लग्न की कुंडली हो और गुरु और चन्द्रमा साथ में बैठ जाए तो भी जातक को धनवान बना देता है.
  10. यदि लग्नेश और नवमेश कुंडली के केंद्र भाव में बैठ जाए तो जातक को खूब धन दिलवाता है.
  11. यदि जन्म-पत्रिका में लग्न का स्वामी, पंचम भाव का स्वामी और ग्यारहवे भाव का स्वामी उच्च के हो तो भी जातक को खूब और अकस्मात् धन दिलवाता है.
  12. लग्न में उच्च का गुरु और लाभेश और धनेश का उच्च को होना आकस्मिक धन प्रदान करवाता है.
  13. कुंडली के दूसरे भाव में गुरु स्थित हो और उस पर शनि की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक को हमेशा ही धन लाभ करवाता है | इसी प्रकार अगर दुसरे भाव में शनि बैठा हो और उस पर बुध की दृष्टि हो तो भी जातक लगातार धन लाभ करता रहता है.
  14. यदि पत्रिका में दुसरे घर का स्वामी बृहस्पति हो और वो मंगल के साथ बैठ जाए तो भी जातक को संपत्ति लाभ करवाता है.
  15. यदि कुंडली के केंद्र भावों में उच्च के ग्रह बैठे हो तो जातक को वैभवशाली जीवन जीने से कोई नहीं रोक सकता है.
  16. पंचम घर में यदि स्व राशि का गुरु विराजमान हो और ग्यारहवे भाव में चन्द्रमा के साथ बुध बैठा हो तो जातक को खूब धन देता है.
  17. यदि कुंडली के दसवे भाव का स्वामी वही बैठा हो तो जातक को ऐसा रोजगार देता है की वो उत्तरोत्तर तरक्की करता हुआ धन कमाता रहता है.
  18. लाटरी खुलने के योग तब बनते हैं जब पंचम, एकादश या नवम भाव में राहु या केतु शुभ के होक बैठे हो और उच्च अंशो में.
  19. कुंडली के अष्टम भाव में यदि धन भाव का स्वामी हो तो जातक को जीवन में दबा हुआ, गुप्त धन, वसीहत से धन प्राप्त कराता हैं ।


ऊपर हमने कुछ धन प्राप्ति के योग देखे ज्योतिष के अनुसार, इसके अलावा भी बहुत से योग रहते हैं जो धन प्रदान करवाते हैं.

कलयुग में धन क्षमता ही सफलता का एक मानक है जिसके पास जितना धन है वो उतना सफल माना जाता है और इसी कारण सभी इसी को प्राप्त करने के पीछे भागते रहते हैं.

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में दुसरा भाव धन भाव या फिर लाभ भाव कहलाता है, चोथा भाव सुख से जुड़ा है, पंचम भाव से उत्पादक क्षमता का पता चलता है, नवा भाव भाग्य को दर्शाता है, ग्यारहवे भाव से आय के बारे में पता चलता है, और दसवे भाव से कर्म के बारे में पता चलता है. अतः जब धन के बारे में जानना हो तो इनका विशेष अध्ययन किया जाता है.

अगर कुंडली में धन प्राप्ति योग ना दिखे तो भी घबराने की आवश्यकता नहीं है कुछ पूजाओ से लगातार मेहनत करके, ईष्ट कृपा से भी धनवान बनना संभव है.

Akasmik Dhan Prapti Yoga Jyotish Mai, कुंडली में कुछ योग जो बनाते हैं धनवान, जानिए कौन से ग्रह बनायेंगे करोड़पति.

Rakshabandhan Mahurat in Hindi

Rakshabandhan Mahurat 2019 in Hindi, क्या खास बात है 2019 के रक्षाबंधन में, ग्रहों की दशा जानिए ७  अगस्त 2019 को., ज्योतिषीय महत्तव रक्षाबंधन का.
2019 raksha bandhan mahurat in hindi jyotish
रक्षा बंधन महूरत २०१९ 
 एक पवित्र त्यौहार है रक्षा बंधन, एक महत्त्वपूर्ण उत्सव है रक्षाबंधन जो की समर्पित है भाई और बहनों को. भाई कहीं भी हो पर रक्षाबंधन के दिन वो जरुर से कोशिश करते हैं की घर पर आये और अपनी प्यारी बहन से राखी बंधवाये और उसे कुछ उपहार दे. 

जो धागा बहन अपने भाई को बांधती है वो कोई साधारण धागा नहीं होता अपितु एक रक्षा कवच की तरह काम करता है जो की व्यक्ति के भाग्वोदय में सहायक होता है. जहाँ बहन भाई की रक्षा के लिए पवित्र धागा बांधती है वही भाई भी बहन की रक्षा करने का वादा करते हैं और विश्वास दिलाते हैं की जीवन भर जब भी जरुरत पड़ेगी तो वो बहन की रक्षा करेंगे. 

आइये जानते हैं की 2019 के रक्षाबंधन की क्या ख़ास बात है :

15 अगस्त 2019 को दिन है रविवार और पूर्णिमा तिथि है. इस दिन ग्रहों की स्थिति अच्छी और ख़राब दोनों बन रहा है, आइये देखते हैं –
  • चन्द्रमा स्व राशी का रहेगा जो की इस त्यौहार को बल देगा.
  • गुरु अपने मित्र राशि में रहेगा जिससे इस दिन की शुभता बढ़ेगी.
  • बुध भी स्व राशि का रहेगा, रक्षाबंधन को जो की और अच्छा रहेगा. 
  • मंगल नीच का रहेगा.
  • शुक्र शत्रु राशि का रहेगा.

आइये अब आपको बताते हैं कुछ ख़ास बाते जिससे की आप इस दिन को और ख़ास बना सकते हैं और परेशानियों को कम कर सकते हैं :

  1. मंगल ग्रह गोचर में नीच का रहेगा अतः जिनके कुंडली में मंगल नीच का है उन्हें हनुमानजी को राखी बांध के उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए. 
  2. शुक्र गोचर में अशुभ रहेगा जिसके लिए किसी माता मंदिर में कपूर का दान करे, कन्याओं को उपहार दे, बहनों को उपहार दे. 

आइये अब जानते हैं राखी बाँधने के शुभ महूरत :

  1. शुभ महुरत सुबह ६:०० से ७:३०
  2. चर महुरत सुबह १०:३० से १२:०० तक.
  3. लाभ महुरत सुबह १२:०० से १:3० बजे दोपहर तक.
  4. अमृत महुरत दोपहर को १:३० से 3:०० तक 
  5. शुभ महुरत शाम को ४:३० से ६:०० तक
  6. अमृत महुरत शाम को ६:०० से ७:३० तक 
चोघडिया के हिसाब से इन समय मे राखी बाँधी जा सकती है.

कौन से रंग की राखी कौन से जातको के लिए शुभ रहेगी?

Raksha Bandhan 2019 में बहन अपने भाई के हाथ में निम्न रंगों के धागे का स्तेमाल करके शुभता को बढ़ा सकते हैं.
  1. मेष राशि के जातकों की कलाई पर लाल रंग की राखी बांधना शुभ होता है। इससे भाई के जीवन में उत्साह और उर्जा बनी रहती है। साथ ही केसरिया और पीले रंग की राखी भी आप अपने भाई को बांध सकती हैं। 
  2. वृषभ राशि वालों के लिए सफेद या चांदी रंग की राखी शुभ है।
  3. मिथुन राशि के जातक के लिए हरी या चंदन से बनी राखियां शुभ होती है।
  4. कर्क वालो के लिए सफेद रेशमी धागे की या मोतियों से बनी राखी शुभ है।
  5. सिंह राशी वालो के लिए पीला या सुनहरा रंग की राखी बांधनी चाहिए शुभ होती है।
  6. कन्या राशि के जातकों के लिए सफेद रेशमी या हरे रंग की राखी शुभ है। 
  7. तुला वालो के लिए सफेद या क्रीम रंग की राखी बांधे। यह शुभ होता है।
  8. वृश्चिक राशि के जातक के लिए गुलाबी, लाल या चमकीली राखी शुभ मानी जाती है।
  9. धनु राशी वालो के लिए रेशमी रंग की राखी बांधें। पीली रंग की राखी भी इनके लिए शुभ होती है।
  10. मकर वाले जातको के हाथ में नीले या गहरे नीले रंग की राखी बांधना शुभ होता है।
  11. कुंभ राशि के लोगो को भी गहरे नीले रंग की राखी बाँध सकते हैं.
  12. मीन– इन्हें पीले रंग की राखी बांधे।
jyotishsansar.com की तरफ से सभी को शुभकामनाये.

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Rakshabandhan aur Hindi Jyotish

रक्षा बंधन और हिंदी ज्योतिष, क्या महत्त्व है रक्षा बंधन का, क्या करे सुख और सम्पन्नता के लिए रक्षा बंधन को ज्योतिष समाधान.
rakshabandhan kyu manaate hai hindi jyotish anusar
rakshabandhan ka mahttw

रक्षा बंधन और ज्योतिष:

रक्षाबंधन जिसे राखी के नाम से भी जानते हैं भारत में मनाया जाता है. ये भाई और बहनों का त्यौहार है और हर बहन इस त्यौहार का इन्तेजार करती है हर साल. राखी के दिन बहन अपने भाई को सुन्दर सा धागा बांधती है जो की उसके प्रेम का प्रतिक है, इससे वो ये भी कहती है की जीवन भर रक्षा करना और प्रेम बनाए रखना. दशको से भारत में ये त्यौहार मानता आ रहा है. राखी का त्यौहार श्रावण मॉस के पूर्णिमा को मानाया जाता है हिन्दू पंचांग के अनुसार. 
नोट: राखी कभी भी भद्रा काल में नहीं बांधना चाहिए, इस काल की जानकारी अखबारों और टीवी चैनल पर बताया जाता है समय आने पर. 
ज्योतिष के हिसाब से श्रावण महीने की पूर्णिमा बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है. अगर इस दिन कोई दान करे, पूजा पाठ करे तो भाग्योदय होता है. इसीलिए भी ये दिन काफी उत्साह से मानाया जाता है. 
इस दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधती है और भाई अपनी प्यारी बहन को उपहार देता है और दोनों ही एक दुसरे के अच्छे जीवन की कामना करते हैं. 
ज्योतिष के हिसाब से देखे तो उपहार देने से पहले अगर ज्योतिष से भी परामर्श लिया जाए तो ये भी भाग्योदय में बहुत सहायता करता है. कुंडली में ग्रहों को देखते हुए अगर उपहार दिया जाए तो भी दोनों को बहुत लाभ होता है.

इस बात को एक उदाहरण से देखते हैं:
अगर भाई के कुंडली में चंद्रमा या शुक्र खराब हो तो ऐसे में चांदी की राखी नहीं प्रयोग करना चाहिए. इसी प्रकार अगर बहन की कुंडली में कोई ग्रह खराब हो तो उससे सम्बंधित उपहार देने से बचना चाहिए. अतः ऐसे में ज्योतिष ही बता सकता है की क्या उपहार दोनों के लिए भाग्योदय में सहायता कर सकता है.

आइये देखते हैं कुछ ऐसे उपहार जो की भाग्योदय में सहायता कर सकते हैं और हमेशा काम भी आते हैं:

  • सोने की चैन
  • चांदी की चैन
  • रुद्राक्ष से बने गहने
  • ज्योतिष द्वारा बनाए गए पेंडेंट 
  • भाग्योदय में सहायक कड़े 
  • आप मछली घर भी दे सकते हैं.
  • विशेष रंग के कपड़े भी दे सकते हैं.
  • कुछ लोग एक दुसरे को भाग्योदय हेतु यन्त्र भी दे सकते हैं. 
  • पारद शिवलिंग या फिर पारद श्री यन्त्र उपहार में दे सकते हैं. 
  • इस दिन आप घर  में रुद्राभिषेक का अनुष्ठान भी करवा सकते हैं पुरे परिवार के सम्पन्नता के लिए. 

क्या करे रक्षा बंधन को सफलता के लिए?

Swapn Aur Jyotish| सपनो के अर्थ

Swapn Aur Jyotish, सपनो के अर्थ, कैसे जाने सपने अच्छे हैं या बुरे, ज्योतिष द्वारा स्वप्न फल जाने, स्वप्न विज्ञान.
janiye sapno ke arth , kya kahte hain sapne
Swapn Aur Jyotish| सपनो के अर्थ
सोना किसे पसंद नहीं होता, एक अच्छी नींद शारीर को उर्जा से भर देती है और दुसरे दिन हम अच्छी तरह से काम कर सकते हैं. जब हम सोते हैं तो हमे बहुत से दृष्टांत होते हैं जिसे हम सपने कहते हैं. रोज हर कोई ना ना प्रकार के सपने देखते हैं. ज्योतिष सपनो को देखकर भी संभावित घटनाओं के बारे में जाना जाता है. परन्तु ये इतना भी आसान नहीं होता है क्यूंकि बहुत से सपने तो हम उठते ही भूल जाते हैं.
कुछ सपने भाग्योदय का संकेत देते हैं और कुछ संकटों का संकेत देते हैं.
इस लेख में हम जानेंगे किस प्रकार से सपने क्या अर्थ बताते हैं.

आइये जानते हैं कुछ शुभ सपनो के बारे में :

  1. सूर्य का सपने में दिखना ये बताता है की जल्दी ही किसी संत या फिर अध्यात्मिक व्यक्ति से मुलाकात होने वाली है और आशीर्वाद प्राप्त होने वाला है.
  2. अगर स्वप्न में बादल नजर आये तो खुश होना चाहिए क्यूंकि ये व्यापार में वृद्धि के संकेत है.
  3. अगर सपने में घोड़े की सवारी करते देखे तो भी ये तरक्की के संकेत हैं.
  4. अगर कोई अपने आपको कांच में देखे सपने में तो ये किसी से प्रेम होने का संकेत देता है.
  5. स्वप्न में बारिश को देखना ये दर्शाता है की धान, गेहू आदि सस्ते हो सकते हैं.
  6. अगर स्वप्न में बाल कटते हुए देखे तो ये किसी प्रकार के ऋण से मुक्त होने के संकेत है.
  7. स्वप्न में मल मूत्र का दिखना कही से धन आने के संकेत देता है.
  8. सपने में सफ़ेद बाल देखना आयु वृद्धि के संकेत देता है.
  9. किसी पहाड़ पर चड़ना तरक्की होने के संकेत है.
  10. अगर को विष्ठा खाते हुए सपने में देखे तो इसका मतलब है की उसे कही से खजाना मिलने वाला है.
  11. फूल का दिखना प्रेमी या प्रेमिका से मिलने का संकेत है.
  12. हाथी का स्वप्न में देखने का अर्थ है ख़ुशी और किसी करीबी महिला मित्र से मुलाकात.
  13. पानी या जल का दिखना व्यापार में लाभ के संकेत देता है.
  14. अगर आप स्वप्न में पान खाते हुए नजर आये तो आपको जल्द ही सुन्दर स्त्री से मुलाकात होने के संकेत हैं.
  15. पानी में डूबते हुए देखने का मतलब है की आप कुछ शुभ कार्य करने वाले हैं.
  16. हरी सब्जियों का दिखना बताता है की आपको ख़ुशी मिलने वाली है.
  17. स्वप्न में झंडे का दिखना किसी धार्मिक कार्यो में व्यस्त होने का संकेत देती हैं.
  18. किसी मृत को देखना किसी प्रकार के बिमारी से मुक्ति दर्शाता है.
  19. आभूषण का दिखना बताता है की कोई इच्छा शीघ्र ही पूरी होने वाली है.
  20. किसी भी महिला से मिलने का मतलब होता है की आय में वृद्धि होगी.
  21. जुआ खेलते अगर स्वप्न में देखे तो इसका मतलब है की व्यापार में वृद्धि होगी.
  22. अगर चन्द्रमा के दर्शन हो सपने में तो इसका अर्थ है की समाज में सम्मान मिलेगा.
  23. अगर आप अपने आपको किसी नदी में तैरते देखे तो इसका अर्थ है की आप किसी समस्या से मुक्त होंगे.

आइये अब जानते हैं कुछ बुरे सपनो के बारे में जो की किसी प्रकार के अनहोनी को दर्शाते हैं :

Swapn Aur Jyotish, सपनो के अर्थ, कैसे जाने सपने अच्छे हैं या बुरे, ज्योतिष द्वारा स्वप्न फल जाने, स्वप्न विज्ञान.
  1. अगर कोई अपने आपको किसी ऊँची जगह से गिरते हुए देखे तो इसका अर्थ है की किसी प्रकार की समस्या आने वाली है.
  2. सपने में जुलूस का देखना किसी प्रकार के दुःख का संकेत है.
  3. अपने आपको हँसते हुए देखना भी दुःख का संकेत है.
  4. अगर स्वप्न में जहाज दिखे तो इसका मतलब है की आप किसी लम्बी यात्रा पर जाने वाले हैं.
  5. अगर स्वप्न में बुरे चेहरे, डरावने चेहरे नजर आये तो इसका मतलब है किसी नकारत्मक ऊर्जा का असर है आप पर.
  6. सर्प दंश का दिखना पितृ दोष का संकेत है.
  7. किसी प्रकार की दुर्घटना का दिखना भी समस्याओं का संकेत है.
  8. सपने में खून का दिखना भी समस्याओं का संकेत हैं.
अतः सपनो का अपना रहस्य होता है, इनको हम नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं, स्वप्नों को जानकार भी बहुत कुछ जीवन के बारे में जाना जा सकता है.
अगर कोई अशुभ स्वप्न नजर आये तो इसमे घबराने की जरुरत नहीं है , किसी जानकार ज्योतिष से परामर्श लेना चाहिए और जीवन को सुखी करना चाहिए.


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Swapn Me Uttar Paane Ke liye Mantra

कैसे पायें स्वप्न में प्रश्नों का उत्तर, स्वप्न सिद्धि का मंत्र, दुर्गा जी का स्वप्न सिद्धि हेतु मंत्र.

सपने तो हम सभी रोज देखते हैं, ये हमारे जीवन का एक भाग है. बिना सपनो के नींद की कल्पना नहीं की जा सकती है. ये बात अलग है की कुछ लोगो को सपने याद रहते हैं और कुछ लोगो को सपने याद नहीं रहते हैं. शुभ सपनो को देखने से व्यक्ति को बड़ा अच्छा लगता है परन्तु किसी डरावने सपने को देखके मन में भय और अस्थिरता का भाव उदित हो जाता है.
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स्वप्नों पर हमारा कोई अधिकार नहीं होता है परन्तु विज्ञान के अनुसार हमारे सूक्ष्म मन में जो विषय रहते हैं वही सपनो में नजर आते हैं. 
भारतीय शाश्त्रो में कई प्रकार के विद्याओं के गूढ़ विद्याओं की जानकारी दी गई है जिनमे से एक विद्या है स्वप्न में अपने प्रश्नों का उत्तर पाने की साधना. दुर्गा शप्तशती में इस मंत्र का उल्लेख मिलता है. 
ये मंत्र माँ दुर्गा का एक शक्तिशाली मंत्र है और  जो पूर्ण भक्ति भाव से इसका जप करता है उसे स्वप्न में माँ की कृपा से मार्ग दर्शन प्राप्त होता है. 
मंत्र का प्रयोग करने से पहले इसे नवरात्री, दिवाली की रात्रि, ग्रहण के समय में जप लेना चाहिए. 

आइये जानते हैं स्वप्न सिद्धि मंत्र प्रयोग के लिए किन बातो का ध्यान रखना चाहिए:

  • रात्रि 10 बजे बाद इस मंत्र को जपना चाहिए. 
  • जप से पहले माँ दुर्गा के आगे घी का दीपक जलाना चाहिए. 
  • माँ को गूगल की धुप भी दिखाए साधना काल में.
  • जप के लिए रुद्राक्ष की माला शुभ रहती है.
  • साधना से पहले माँ से प्रार्थना करे की आपको आपके प्रश्नों का उत्तर सपने में दें.
  • मंत्र जप हमेशा किसी ऊनी आसन पर बैठ कर ही करे.
  • प्रयोग शुरू करने से पहले किसी सिद्ध महूरत में इस मंत्र को कम से कम १००८ बार जप लेना चाहिए.
  • साधना से पहले नहा के अपने शारीर को भी शुद्ध कर लेना चाहिए और पूरी तन्मयता से जप करना चाहिए. 
  • सोने के समय इस मंत्र का जप करते हुए सोये और अपने प्रश्न को भी मन में रखे, माता से मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना करते रहे. 

आइये अब जानते है स्वप्न सिद्धि के मंत्र को :


“दुर्गे देवी नमस्तुभ्यं सर्व कामार्थ साधिके |
मम सिद्धिंसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय ||”
यही है वो शक्तिशाली चमत्कारी मंत्र जिसका जप माता से मार्गदर्शन के लिए किया जाता है. 
तो आप भी महा शक्ति से अपने प्रश्नों का जवाब जानने के लिए इस स्वप्न सिद्धि मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं.
दिखाइए अपनी कुंडली ज्योतिष को और जनिए आपके सफलता के उपाय



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84 Mahadev Mandir Ke Naam In Ujjain In Hindi

उज्जैन मंदिरों का शहर है इसिलिये अध्यात्मिक और धार्मिक महत्त्व रखता है विश्व मे. इस महाकाल की नगरी मे ८४ महादेवो के मंदिर भी मौजूद है और विशेष समय जैसे पंचक्रोशी और श्रवण महीने मे भक्तगण इन मंदिरों मे पूजा अर्चना करते हैं अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए.

इस लेख मे उज्जैन के ८४ महादेवो के मंदिरों की जानकारी दी जा रही है जो निश्चित ही भक्तो और जिज्ञासुओं के लिए महत्त्व रखती है. 
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84 Mahadev Mandir Ke Naam In Ujjain In Hindi

आइये जानते हैं उज्जैन के ८४ महादेवो के मंदिरों के नाम हिंदी मे :

  1. श्री अगस्तेश्वर महादेव मंदिर - संतोषी माता मंदिर के प्रांगण मे.
  2. श्री गुहेश्वर महादेव मंदिर- राम घाट मे धर्मराज जी के मंदिर मे के पास.
  3. श्री ढून्देश्वर महादेव - राम घाट मे.
  4. श्री अनादी कल्पेश्वर महादेव- जूना महाकाल मंदिर के पास
  5. श्री दम्रुकेश्वर महादेव -राम सीढ़ियों के पास , रामघाट पे
  6. श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर मंदिर -धुंधेश्वर महादेव के ऊपर, रामघाट पर.
  7. श्री त्रिविश्तेश्वर महादेव - महाकाल सभा मंडप के पास.
  8. श्री कपालेश्वर महादेव बड़े पुल के घाटी पर.
  9. श्री स्वर्न्द्वार्पलेश्वर मंदिर- गढ़ापुलिया के पास.
  10. श्री कर्कोतेश्वर महादेव - हरसिद्धि मंदिर के प्रांगण मे
  11. श्री सिद्धेश्वर महादेव -सिद्धनाथ घाट के पास.
  12. श्री लोक्पलेश्वर महादेव कार्तिक चौक पर.
  13. श्री मनकामेश्वर महादेव - गन्धर्वा घाट पर
  14. श्री कुतुम्बेश्वर महादेव श्री गोवर्धन नाथजी की हवेली के आगे.
  15. श्री इन्द्युम्नेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन - मोदीजी की गली मे
  16. श्री इशानेश्वर महादेव -इन्द्युम्नेश्वर से पहले.
  17. श्री अप्सरेश्वर महादेव -सुगंधी की गली, पत्नी बाजार मे.
  18. श्री कल्कलेश्वर महादेव - इशानेश्वर महादेव के आगे.
  19. श्री नागचंद्रेश्वर महादेव- नागनाथ की गली, पत्नी बाजार
  20. श्री प्रतिहरेश्वर महादेव - नागचंद्रेश्वर मंदिर परिश्र मे.
  21. श्री कुटेश्वर महादेव उज्जैन - उदासीन अखाड़े के पास.
  22. श्री कर्कोतेश्वर महादेव - पोरवाल धर्म शाला के पास.
  23. श्री मेघ्नादेश्वर महादेव -नरसिंह मंदिर के पीछे , छोटा सराफा.
  24. श्री महालायेश्वर महादेव - सिद्धेश्वर महादेव के पीछे बाएँ गली मे.
  25. श्री मुक्तेश्वर महादेव-सिद्धेश्वर महादेव के पीछे दाएँ गली मे.
  26. श्री सोमेश्वर महादेव - बड़े पूल के पास.
  27. श्री अंकेश्वर महादेव - इंदिरानगर मे पानी की टंकी के पास.
  28. श्री जतेश्वर महादेव -मकोदियाम मे.
  29. श्री रामेश्वर महादेव - सती दरवाजे के पास गली मे.
  30. श्री च्यवानेश्वर महादेव - इंदिरा नगर मे ईद गाह के पास.
  31. श्री खंडेश्वर महादेव - खिलचीपुर गाँव मे टीले पर.
  32. श्री पटेश्वर महादेव - आर डी गर्दी के रस्ते पे पुलिया से पहले.
  33. श्री आनंदेश्वर महादेव चक्रतीर्थ के गेट के पास.
  34. श्री कन्थदेश्वर महादेव - भैरवगढ़ गाँव मे.
  35. श्री इन्द्रेश्वर महादेव - बड़े पूल के ठीक ऊपर बाए तरफ .
  36. श्री मर्कंदेश्वर महादेव - विष्णु सागर मे राम-लक्ष्मण मंदिर के पास
  37. श्री शिवेश्वर महादेव - राम लक्ष्मण मंदिर की सीढि पर
  38. श्री कुसुमेश्वर महादेव उज्जैन- द्वारकाधीश मंदिर की सीढि के निचे
  39. श्री अव्रुरेश्वर महादेव - राम लक्ष्मण मंदिर के सामने
  40. श्री कुंडेश्वर महादेव - अन्क्पात चौराहे से आगे बैठक जी के परिसर मे.
  41. श्री लुम्पेश्वर महादेव - भैरवगढ़ मे पुलिस लाइन के अन्दर.
  42. श्री गंगेश्वर महादेव - मंगलनाथ चौक मे नदी के किनारे
  43. श्री अंगारेश्वर महादेव - कामद गाँव, मंगलनाथ मंदिर के पीछे
  44. श्री उत्तरारेश्वर महादेव , श्री गंगेश्वर महादेव के आगे, मंगलनाथ चौक
  45. श्री त्रिलोच्नेश्वर महदेव - लाल बाई -फूल बाई मंदिर के पास.
  46. श्री वीरेश्वर महादेव - सत्यनारायण मंदिर के पास , ढाबा रोड
  47. श्री नुपूरेश्वर मंदिर - डाबरीपीठा मे
  48. श्री अभयेश्वर महादेव - नदी मार्ग पर.
  49. श्री प्रठुकेश्वर महादेव - केदारेश्वर मंदिर के पास.
  50. श्री स्थावरेश्वर महादेव - शनि मंदिर के अन्दर , नई पेठ
  51. श्री सुलेश्वर महादेव - कर्कोतेश्वर मंदिर के पास.
  52. श्री ओंकारेश्वर महादेव - कमरी मार्ग मे.
  53. श्री विश्वेश्वर महादेव - ओंकारेश्वर महादेव के पास गली मे
  54. श्री नीलकंठेश्वर महादेव - पिप्लिनाका चौराहा
  55. श्री सिंहेश्वर महादेव - गणपती मंदिर के आगे, गढ़कालिका
  56. श्री रेवान्तेश्वर महादेव -खाती मंदीर के पास , कार्तिक चौक के पास.
  57. श्री घंटेश्वर महादेव - कार्तिक चौक तिराहे पर
  58. श्री प्रयागेश्वर महादेव - ऋण मुक्तेश्वर मंदिर से पहले
  59. श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर- गोपाल मंदिर के पीछे गली मे.
  60. श्री मातान्गेश्वर महादेव - टंकी के पास , गोपाल मंदिर सब्जी मंडी के पास
  61. श्री सौभाग्येश्वर महादेव -पत्नी बाजार मे
  62. श्री रुपेश्वर महादेव - नाथजी के हवेली के पास , सिंहपूरी
  63. श्री धनुसहस्त्रेश्वर महादेव , तिलकेश्वर मंदिर के पास 
  64. श्री पशुपतेश्वर महादेव मंदिर - चक्रतीर्थ के पास
  65. श्री ब्रह्मेश्वर महादेव - पोरवाल धर्मशाला के पास गली मे
  66. श्री जल्पेश्वर महादेव - बड़े पूल से गाँधी उद्यान के पास
  67. श्री केदारेश्वर महादेव - राम बाग मार्ग पर पुलिया के पास
  68. श्री पिसाच मुक्तेश्वर महादेव - रामघाट पर
  69. श्री संगमेश्वर महादेव - श्री अगस्तेश्वर महादेव मंदिर के बाजू मे
  70. श्री दुर्घतेश्वर महादेव मंदिर- श्री मंकम्नेश्वर महादेव के पास
  71. श्री प्रयागेश्वर महादेव -श्री लोक्पलेश्वर महादेव के पास
  72. श्री चंद्रदित्येश्वर महादेव -शंकराचार्य मूर्ती के पास , महाकाल मे
  73. श्री कर्भारेश्वर महादेव - कालभैरव मंदिर के सामने
  74. राजस्थ्लेश्वर महादेव - आनंदभैरव की गली मे , भाग्सिपुरा
  75. श्री बदेलेश्वर महादेव - सिद्धवट के पास
  76. श्री अरुनेश्वर महादेव - रामघाट मे धर्म राज के मंदिर के पास
  77. श्री पुष्पदंतेश्वर महादेव कार्तिक चौक के तिराहे पर.
  78. श्री अभीमुक्तेश्वर महादेव
  79. श्री हनुमंतेश्वर महादेव - गढ़कालिका क्षेत्र
  80. श्री स्वप्नेश्वर महादेव - महाकाल मंदिर परिसर मे.
  81. श्री पिंगलेश्वर महादेव - पिंगलेश्वर गाँव मे, श्री सिंथेटिक फैक्ट्री के पास.
  82. श्री कयावरोहानेश्वर महादेव - करोहन गावं मे
  83. श्री बिल्केश्वर महादेव - ग्राम अम्बोदिया मे
  84. श्री दुर्दारेश्वर महादेव - जैथल गाँव


ऐसी मान्यता है की इन ८४ महादेवो के पूजन से नवग्रह शांति होती है, जातक पापो से मुक्त होता है और सुखी जीवन जीता है.

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Sheegra Vivaah Ke Liye Ye Kare

शीघ्र विवाह के लिए टोटके, कैसे दूर करे विवाह में देरी की समस्या को, जानिए शबर मंत्र शादी के लिए, यन्त्र प्रयोग शादी के लिए. 
विवाह में देरी उन लोगो के लिए बहुत परेशानी का कारण होता है जो जीवन साथी के साथ अपना जीवन जीना चाहते हैं. कुंडली में मे मौजूद ख़राब ग्रह या किसी अन्य कारणों से कुछ लोगो के विवाह में देरी होती जाती है और वे लोग वैवाहिक सुख से वंचित रहते हैं. 
sheeghr vivah ke liye upay in hindi
Sheegra Vivaah Ke Liye Ye Kare
इस लेख में हम जानेंगे कुछ विशेष टोटके और शबर मंत्र जिनके प्रयोग से शादी में देरी की बाधा को दूर किया जा सकता है.
नोट: किसी भी प्रयोग को करने से पहले अच्छे ज्योतिष को कुंडली भी दिखा देना चाहिए और कुंडली अनुसार उपाय भी कर लेना चाहिए.

शीघ्र विवाह हेतु पहला प्रयोग:

निचे दिए गए यन्त्र को पहले किसी शुभ महूरत में भोज पत्र पर केसर की स्याही से बना लेना चाहिए और सही तरीके से पूजा करना चाहिए कम से कम 3 दिन. पूजन के बाद दिए गए मंत्र का १००८ जप करना चाहिए. तीसरे दिन पूजन के बाद यन्त्र को ताबीज में डाल के धारण करना चहिये. इसे तब तक पहने जब तक विवाह ना हो जाए. साथ ही मंत्र का जप रोज करना चाहिए. 
shaadi ke liye yantra prayog
yantra for marriage

विवाह के लिए मंत्र :

"ॐ कुंडली नमः "

शीघ्र विवाह हेतु दूसरा प्रयोग:

दूसरा प्रयोग शाबर मंत्र का है , ये मंत्र नाथ सम्प्रदाय द्वारा प्रयोग किया जाता है. रोज इस मंत्र का १०८ बार जप करके विवाह हेतु प्रार्थना किया जाना चाहिए. पढ़िए दूसरा विवाह योग और ज्योतिष.

जीवन साथी पाने हेतु शबर मंत्र निम्न है:

"मखनो हाथी जर्द अम्बारी
उस पर बैठी कमाल खां की सवारी
कमाल खां कमाल खां मुगल पठान
बैठे चबूतरे पढ़े कुरान
हजार काम दुनिया का करे
ए काम मेरा कर
न करे तो तीन लाख तेंतीस हजार वीर पैगम्बरों की दुहाई |"

मान्त्रिक प्रयोग में सफलता प्राप्त करने हेतु विश्वास और नियमित अभ्यास जरुरी है. अगर देविक शक्तियों पर विश्वास ना हो तो प्रयोग भी नहीं करना चाहिए.



अगर आप विवाह में देरी के कारण परेशान है तो ज्योतिष से संपर्क करे.
  • पाइये बेहतर वैवाहिक जीवन हेतु ज्योतिष सलाह.
  • ग्रहों का जीवन पर क्या असर है ये जानने के लिए अभी सलाह ले सकते हैं astrologer से.
  • कुछ विशेष प्रयोगों को करके आप शीघ्र विवाह कर सकते हैं.
  • अगर आपको अच्छे प्रस्ताव नहीं मिल रहे हैं या फिर आपकी मीटिंग या डेटिंग काम नहीं कर पा रही है तो भी आप अपनी कुंडली दिखवा के उपाय कर सकते हैं.
  • विवाह हेतु गुण मिलान के लिए भी संपर्क कर सकते हैं ज्योतिष से.
  • अपने प्रेम विवाह समस्या का समाधान भी आप पा सकते हैं.
शीघ्र विवाह के लिए टोटके, कन्या विवाह के लिए ज्योतिष समाधान, कैसे दूर करे विवाह में देरी की समस्या को, जानिए शबर मंत्र शादी के लिए, यन्त्र प्रयोग शादी के लिए.

Nagchandreshwar Mandir Saal Me Ek Baar Hi Kyu Khulta Hia ?

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उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर : क्यों खुलता है सिर्फ साल में एक दिन?

इस सवाल का जवाब हर भक्त जानना चाहता है, बहुतो को तो मालूम है पर अधिकतर लोगो को इसकी जानकारी नहीं है. 
हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का,जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है।
पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं।

आइये जानते है की क्या है पौराणिक मान्यता नागचंद्रेश्वर मंदिर को लेके ?

सर्पराज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया।
लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन खुलने वाले इस मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।
यह मंदिर काफी प्राचीन है। माना जाता है कि परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के लगभग इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद सिं‍धिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। उस समय इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार हुआ था। सभी की यही मनोकामना रहती है कि नागराज पर विराजे शिवशंभु की उन्हें एक झलक मिल जाए। लगभग दो लाख से ज्यादा भक्त एक ही दिन में नागदेव के दर्शन करते हैं।
नागपंचमी पर वर्ष में एक बार होने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए रात 12 बजे मंदिर के पट खुलते है और दूसरे दिन रात 12 बजे मंदिर में आरती होक पट पुनः बंद कर दिए जाते हैं.

नागचंद्रेश्वर मंदिर की पूजा और व्यवस्था महानिर्वाणी अखाड़े के संन्यासियों द्वारा की जाती है।

नागपंचमी को उज्जैन के कलेक्टर भी नागचंद्रेश्वर मंदिर में पूजन करते हैं .  यह सरकारी पूजा होती है । यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। रात्रि को 8 बजे श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति द्वारा पूजन होता है ।

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Naagpanchmi Ko Safalta Ke Liye Kya Kare

नागपंचमी की शक्ति, क्या करे नाग पंचमी को, क्या न करे नाग पंचमी को, कौन सी पूजाएँ लाभदायक हो सकती है नागपंचमी को.
nagpanchmi ko kaun si puja kare
Naagpanchmi Ko Safalta Ke Liye Kya Kare

एक महत्त्वपूर्ण दिन है नागपंचमी -

अगर आपके कुंडली में कालसर्प दोष है, अगर आपके कुंडली में पितृ दोष है, अगर आपके कुंडली में प्रेत दोष है, अगर आपके कुंडली में सर्प दोष है, अगर आप राहू के नकारात्मक प्रभाव से परेशान हैं तो नागपंचमी के दिन आप कर सकते हैं इन दोषों का परिहार.

आइये देखे किस प्रकार के अनुष्ठान हो सकते हैं नागपंचमी को -

  • कालसर्प दोष निवारण प्रयोग
  • पितृ दोष निवारण प्रयोग
  • प्रेत दोष दोष निवारण प्रयोग
  • विवाह दोष निवारण प्रयोग
  • राहू दोष निवारण पूजा
  • शिव एवं नाग देवता की कृपा प्राप्त करने हेतु पूजा

क्या करना चाहिए नागपंचमी को उज्जवल भविष्य के लिए -

  1. नागपंचमी को पंचामृत से आप नाग देवता का अभिषेक कर सकते हैं अपनी मनोकामना के साथ.
  2. आप भोलेनाथ का अभिषेक कर सकते है पंचामृत से नागपंचमी को.
  3. चन्दन का इत्र आप नाग देवता और भोलेनाथ को अर्पित करे.
  4. दूध में मिश्री घोलके आप नाग देवता को अर्पित करे.

क्या नहीं करना चाहिए नागपंचमी को ?

  • नागपंचमी को किसी नाग या सर्प को ना पकडे 
  • किसी नाग या सर्प को कुछ न पिलाये न खिलाये नागपंचमी को 
  • जो सांप लेके आपके पास आते हैं मांगने उनको कुछ न दे.
नोट :हो सके तो जो सांप पकड़ कर लाते हैं आपके पास मांगने के लिए उनसे उन्हें मुक्त करा के किसी जंगल में छुडवा दे

आप ज्योतिष से क्या पा सकते है ?

  1. आप सिद्ध काल सर्प यन्त्र मंगवा सकते हैं घर में स्थापित करने के लिए.
  2. आप अपने दोष निवारण हेतु पूजा करवा सकते हैं .
  3. आप सिद्ध कालसर्प पेंडेंट या ताबीज मंगवा सकते है अपनी सुरक्षा हेतु.
  4. पितृ दोष, प्रेत दोष एवं अन्य दोष निवारण हेतु कवच मंगवा सकते है.
  5. विवाह समस्या का समाधान हेतु अनुष्ठान करवा सकते है

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Nag Panchmi Ka Mahattw In Hindi

Nag panchmi ka mahatw in hindi, नाग पंचमी क्या है और क्यों महत्त्वपूर्ण हैं, क्या करे सफलता के लिए नाग पंचमी को ?
हिन्दू धर्म के अन्दर सांप प्रजाति को भी बहुत माना जाता है और लोगो का ऐसा विश्वास है की सांपो के देवता का आशीर्वाद अगर किसी को मिल जाए तो उसका जीवन धन-धान्य से भरपुर हो जाता है. वैदिक ग्रंथो के अनुसार पंचमी तिथि जो की हर महीने आती है नाग पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है इसी कारण पंचमी को नागो को मारना मना है.
nag panchmi kyu bahut mahttw rakhta hai
Nag Panchmi Ka Mahattw In Hindi

आइये अब जानते हैं क्या है नाग-पंचमी?

सच्चाई ये है की पंचमी हर महीने 2 बार आती है परन्तु जो पंचमी शरावन महीने में आती है अमवस्या के बाद उसका महत्तव बहुत है और यही दिन नाग-पंचमी के रूप में मनाई जाती है. इसी दिन नाग देवता की पूजा की जाती है जीवन को सुगम बनाने के लिए.
अगर किसी के कुंडली में कालसर्प योग है या फिर राहू और केतु परेशान कर रहे हो तो भी नागपंचमी के दिन पूजा से लाभ लिया जा सकता है.
2019 में 5 अगस्त, सोमवार  को नाग पंचमी आ रही है जो की बहुत महत्त्वपूर्ण है. 

ज्योतिष के अनुसार २०१९ के नाग पंचमी का महत्तव :

इस बार नाग पंचमी सोमवार को आ रही है और ज्योतिष के अनुसार सोमवार शिवजी का दिन है और साथ ही ये सोमार श्रावण महीने का है अतः पूजा के लिए अति उत्तम महुरत बनता है.
इसी के साथ चन्द्रमा अपने स्व राशि में रहेगा और गुरु भी मित्र का रहेगा गोचर कुंडली में जिसके कारण मनोकामना पूरी करने हेतु उत्तम महूरत का निर्माण होगा.

जिनके कुंडली मे सर्प दोष, नाग दोष, कालसर्प दोष आदि है उनको नागपंचमी को विशेष पूजा अर्चना करना चाहिए. जिनके कुंडली मे ग्रहों की स्थिति ठीक नहीं है ऐसे मे नाग देवता का आशीर्वाद लाभ दे सकता है.

आइये अब जानते हैं की भक्तगण नागपंचमी को क्या करते हैं :

  1. इस दिन लोग उपवास रखते हैं और पूरा दिन नाग देवता और शिव पूजा में व्यतित करते हैं.
  2. इस दिन कढाई नहीं चढ़ाई जाती अतः लोग उबला भोजन ही करते हैं.
  3. इस दिन जमीन खोदना भी मना रहता है जिससे की किसी नाग प्रजाति को नुक्सान न हो.
  4. लोग इस दिन सांपो की बाम्बी की भी पूजा करते हैं.
  5. लोग शिव और नाग देवता के मंदिर में जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं.

आईये जानते हैं कुछ आसान तरीके नाग पंचमी के लिए:

  1. इस दिन नव नाग स्त्रोत का पाठ उचित होता है.
  2. नाग मंदिर में दूध से या फिर पंचामृत से अभिषेक लाभ देता है. 
  3. जिनके कुंडली में कालसर्प योग है वे लोग कालसर्प यन्त्र सिद्ध करवा के घर में स्थापित कर सकते हैं.
  4. सर्प की अंगूठी बनवाके इस दिन पूजा करके धारण करने से बहुत लाभ होता है.
  5. शिव पूजा भी नागपंचमी को विशेष फलदाई होती है.
नाग पूजा द्वारा आप अपने व्यक्तिगत जीवन को अच्छा कर सकते हैं.
नाग पूजा द्वारा आप अपने काम-काज के क्षेत्र को सुगम बना सकते हैं.
नाग पूजा से आप अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं.
अतः नाग पंचमी को नाग पूजा करे और जीवन को धन्य बनाए, सफलता के रास्ते खोले.


jyotishsansar.com की और से सभी को नागपंचमी की शुभकामनाये.

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