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Navdurgao ki Shakti | नवदुर्गा

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माता कि अराधना हमेशा से ही समस्त कामनाओं को पूरी करने का एक सशक्त माध्याम रहा है। देवी भक्त के लिए इस दुनिया में कोई भी वस्तु अप्राप्य नहीं रहता है। धर्म , अर्थ, काम, मोक्ष कि प्राप्ति बड़ी ही आसानी से हो जाती है नवरात्री में महाशक्ति की आराधना से। अगर देवी कि कृपा प्राप्त हो जाए तो व्यक्ति को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।
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Navdurgao ki Shakti | नवदुर्गा

आइये समझते हैं कौन हैं माँ दुर्गा :

ये हैं शक्ति कि देवी और साथ ही शिव का अंश भी हैं।  कहते है शिव शक्ति के बिना शव हैं, अतः इसी कारण संसार में  शक्ति अराधना को आवशयक माना गया है।  
मुख्य रूप से माता दुर्गा के तीन रूप हैं :
  1. महालक्ष्मी
  2. माँ सरस्वती सरस्वती
  3. माँ काली
इन तीनो रूपों से ही इनके 9 रूपों का प्रकटीकरण हुआ है जिन्हें हम नवदुर्गा के नाम से जानते है।  

माँ दुर्गा के 9 रूप निम्नलिखित हैं :

  1. शैलपुत्री
  2. ब्रह्मचारीणी
  3. चंद्रघंटा
  4. कुष्मांडा
  5. स्कंदमाता
  6. कात्यायनी
  7. कालरात्री
  8. महागौरी
  9. सिद्धिदात्री

आइये जानते हैं कुछ मत्त्वपूर्ण तथ्य माँ दुर्गा के 9 रूपों के बारे में :

1. शैलपुत्री :

ये माता का पहला रूप है और इनके पिता होने का गौरव शैलराज हिमालय को है। इन्ही के आधार पर इनका नाम शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। ये अपने दायें हाथ में  त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का फूल रखती हैं और बैल कि सवारी करती है |
ये माता सती के नाम से भी पूजी जाती हैं। शारीर में इनका स्थान मूलाधार चक्र है। ध्यान के दौरान योगी मूलाधार चक्र में इनके दिव्य रूप का दर्शन कर सकते हैं।

2. ब्रह्मचारीणी :

यहाँ ब्रह्म्चारिणी से मतलब तपस्विनी से है . वह हमेशा साधना में रत रहती हैं. उनके दायें हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमादल सुशोभित रहता है.
हमारे शारीर में स्वाधिस्थान चक्र में उनका स्थान है. नवरात्री के दुसरे दिन ब्रह्मचारिणी माता की पूजा होती है.

3. चंद्रघंटा :

नवरात्री के तीसरे दिन दुर्गा जी के तीसरे रूप माता चंद्रघंटा की अराधना की जाती है. ये माता का बहुत ही शक्तिशाली रूप है. सोने के सामान इनका तेज है और हमेशा ही ये नकारात्मक उर्जाओं का दमन करने के लिए तत्पर रहती हैं.
हमारे शारीर में मनिपुरक चक्र में योगी जन इनका दर्शन ध्यान में करते हैं .
दुष्ट शक्तियां इनके घंटे की आवाज से भयभीत हो जाते हैं.

4. कुष्मांडा :

ये माता का चौथा रूप है और सूर्य के सामान इनका तेज है. अपने भक्तों को ये सब कुछ देने में समर्थ हैं सफल जीवन जीने के लिए. इनको अष्टभुजा के नाम से भी पूजा जाता है. इनके हाथो में क्रमशः कमंडल,धनुष, बाण, कमल, कलश , चक्र और गदा शोभायमान रहता है.
इनकी कृपा से भक्त भौतिक और अध्यात्मिक दोनों ही क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं .
शारीर में ह्रदय चक्र में इनका ध्यान किया जाता है.

5. स्कंदमाता :

शारीर में इनका स्थान विशुद्ध चक्र है और नवरात्री के पांचवे दिन इनकी पूजा की जाती है. इनकी कृपा से भक्त को वाक् सिद्धी की प्राप्ति हो जाती है. अपने विद्वता के कारण साधक पूरी दुनिया में प्रसिद्द हो सकता है.

6. कात्यायनी:

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हमारे शारीर में आज्ञा चक्र में इनका स्थान है और ये शेर की सवारी करती हैं . इनकी पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति बहुत ही आसानी से हो जाती है. साधक दिव्या दृष्टि भी प्राप्त कर लेता है.

7. कालरात्रि:

माता दुर्गा के सातवे दिव्या रूप का नाम है कालरात्रि जो की हमेशा ही दुष्टों का संहार करने के लिए तत्पर रहती है. इनका रंग अँधेरी रात के सामान काला है और इनकी 3 आँखे है साथ ही ये गधे की सवारी करती हैं.

योगीजन ध्यान में सहस्त्रधार चक्र में इनके दर्शन कर आनंदित होते हैं. ये अपने भक्त की परेशानियों को हर के सफलता के नए रास्ते खोल देती हैं.

8. महागौरी:

इनका वर्ण गौरा है और ये बैल की सवारी करती हैं. इनका रूप हमेशा ही 8 वर्ष की कन्या का बना रहता है. भक्त इनकी साधना कर अति दुर्लभ सिद्धियों को हासिल करते हैं.

9. सिद्धिदात्री :

इनके नाम से पता चलता है की ये भक्तो को सिद्धियाँ प्रदान करती हैं. रहस्यमयी अष्ट सिद्धियाँ जैसे अणिमा, लघिमा , महिमा, गरिमा, प्राप्ति, इशित्वा, वाशित्वा, प्राकाम्य इनकी कृपा से बड़ी आसानी से साधक प्राप्त कर सकता है.

याद रखिये नवरात्री देवी पूजा के लिए सर्वश्रेष्ट समय है और इस समय का इस्तेमाल जरुर करना चाहिए अगर हम एक सफल जीवन जीना चाहते हैं.



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