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March Amavasya Ka 12 Rashiyo Par Prabhav

मार्च 2026 का मीन राशि में अमावस्या: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 12 राशियों पर प्रभाव मार्च 2026 में मीन राशि में होने वाली अमावस्या वैदिक ज्योतिष के अनुसार अत्यंत आध्यात्मिक और भावनात्मक ऊर्जा लेकर आती है। मीन राशि जल तत्व की राशि है और यह अंतर्ज्ञान, करुणा, कल्पना तथा आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़ी होती है। जब अमावस्या इस रहस्यमयी राशि में होती है, तो यह एक नए चक्र की शुरुआत का संकेत देती है जो आत्मचिंतन, भावनात्मक उपचार और नए संकल्पों के लिए अनुकूल समय बनाती है। यह चंद्र चरण हमें अपने भीतर झांकने, पुरानी भावनाओं को छोड़ने और रचनात्मकता तथा आध्यात्मिक विकास को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इस अमावस्या का प्रभाव प्रत्येक राशि पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। March Amavasya Ka 12 Rashiyo Par Prabhav अमावस्या का 12 राशियों पर क्या प्रभाव होगा ? मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह अमावस्या बारहवें भाव को सक्रिय करती है, जो आध्यात्मिकता, अवचेतन मन और पुराने अध्यायों के समापन से जुड़ा होता है। इस समय आप अपने जीवन की गति को थोड़ा धीमा करना चाहेंगे और एकांत में समय बिताने की इ...

Shakambhari Navratri , शाकम्भरी नवरात्री

Shakambhari Navratri Ka Mahattw Hindi Mai, क्या है शाकम्भरी नवरात्री, क्या करे सफलता के लिए.

माता शाकम्भरी शक्ति का ही रूप है और इन्ही की पूजा के लिए विशेष दिन है “शाकम्भरी नवरात्री ’. भक्तगण इन दिनों अपनी मनोकामना सिद्धि हेतु माता की आराधना करते हैं.

शाकम्भरी नवरात्री गुप्त नवरात्रियो में से एक है इसीलिए ज्यादा विख्यात नहीं है साधारण लोगो में परन्तु तांत्रिक और साधक गण इससे परिचित हैं और इस समय का पुरे साल इन्तेजार करते हैं. तंत्र, मंत्र के साधक और अध्यात्म की बढ़ने के उत्सुक लोग भी इन दिनों का इन्तेजार करते हैं.
shakambhari navratri aur jyotish
shakambhari navratri

शाकम्भरी नवरात्री को “बाणशंकरी नवरात्री” भी कहते हैं. मान्यता के अनुसार माता शाकम्भरी का सम्बन्ध हरी सब्जियों, पत्ते, फल आदि से है. इनका अवतरण भूखों को भोजन देने के लिए हुआ था.

अतः ऐसा विश्वास है की इनकी पूजा से घर मैं भोजन की कमी नहीं रहती है.
शाकम्भरी गुप्त नवरात्री का समय कब होता है?
शाकम्भरी नवरात्री हर साल पौष महीने के अष्टमी पर शुरू होता है और पूर्णिमा को ख़त्म होता है. ये नवरात्री मात्र ८ दिनों के लिए होती है. आखरी दिन को शाकम्भरी पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है.

आइये जानते हैं शाकम्भरी पूर्णिमा का महत्त्व :

जैसे की हमने जाना की इनका सम्बन्ध भोजन से है अतः इनकी पूजा से अन्न-धन की कमी नहीं रहती है. स्वस्थ जीवन के लिए अच्छा भोजन जरुरी होता है और ये प्राप्त होता है माता की पूजा से.

हालांकि सिर्फ इसी के लिए इनकी पूजा नही होती है, माता की आराधना से तांत्रिक और साधक गण शक्तियां भी प्राप्त करते हैं जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए.
शाकम्भरी नवरात्री मुख्यतः दक्षिण भारत, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान मे प्रचलित है. दक्षिण भारत मे “बानदा अष्टमी” बहुत प्रचलित है और देवी मंदिरों मे विशेष पूजा – आराधना होती है.
इस समय तांत्रिक विशेष आराधना करते हैं, अध्यात्म में आगे बढ़ने के इच्छुक लोग भी साधना करते हैं. जो लोग देवी से आशीर्वाद चाहते हैं और शक्ति प्राप्त करना चाहते हैं, वो नवरात्री मे साधना करते हैं. 

आइये जानते हैं की शाकम्भरी देवी के मुख्या मंदिर कहा हैं :

 Shakambhari Navratri Ka Mahattw Hindi Mai, क्या है शाकम्भरी नवरात्री, क्या करे सफलता के लिए.

पहला तो राजस्थान मे अरावली पहाडियों मैं सकराय माताजी के नाम से प्रसिद्द है, ये सीकर जिले मे है.
दूसरा शाकम्भर मंदिर राजस्थान के ही साम्भर जिले मे है.
तीसरा सहारनपुर, उत्तरप्रदेश मे मौजूद है जो की शाकम्भरी तीर्थ के नाम से प्रसिद्द है.


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