Mangal Ka Shatbhisha Nakshatra Mai Pravesh Ka Fal, Jyotish Updates, Mangal Gochar, Mangal kab badlenge nakshatra. Mangal Shatbhisha Nakshatra Mai : वैदिक ज्योतिष के अनुसार 3 मार्च से 20 मार्च तक मंगल (मंगल ग्रह) शतभिषा नक्षत्र में रहेंगे । शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु है और अभी राहु और मंगल की युति कुंभ राशि में स्थित है। यह नक्षत्र रहस्य, तकनीक, अनुसंधान, विद्रोह, अचानक घटनाओं और “गुप्त रोगों के उपचार” से जुड़ा है। मंगल यहाँ ऊर्जा, आक्रामकता, साहस और त्वरित निर्णय की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। यह समय छिपी हुई समस्याओं को उजागर कर सुधार की दिशा में ले जा सकता है, लेकिन साथ ही अचानक विवाद और अस्थिरता भी ला सकता है। Mangal Ka Shatbhisha Nakshatra Mai Pravesh Ka Fal समग्र वैश्विक प्रभाव तकनीकी क्षेत्र में अचानक बड़े परिवर्तन संभव है. साइबर हमलों और डेटा लीक की संभावना बढ़ जायेगी. राजनीतिक बदलाव और जनआंदोलन भी देखने को मिलेंगे. शेयर बाजार में अस्थिरता देखने को मिलेगा. वैज्ञानिक और चिकित्सा अनुसंधान में नई खोजें संभव है. 12 राशियों पर क्या प्रभाव होगा Mangal Ke Shatbhi...
⭐ Dusra Vivah Aur Jyotish – दूसरा विवाह और ज्योतिष
Dusra Vivah Aur Jyotish, दूसरा विवाह और ज्योतिष, दुसरे विवाह की जरुरत, कुंडली के हिसाब से दुसरे विवाह के योग, और रुकावटों को कैसे हटाएं ज्योतिष उपायों द्वारा जानें।
Dusra Vivah Aur Jyotish
दूसरा विवाह क्यों होता है आवश्यक?
दूसरा विवाह सुनने में आसान लगता है, पर वास्तविकता में कई समझौते और परिस्थितियों से गुजरना होता है। कभी सामाजिक, कभी मानसिक, और कई बार शारीरिक और पारिवारिक जरूरतें इंसान को दूसरा विवाह करने को मजबूर कर देती हैं।
कब होता है दूसरा विवाह जरुरी?
- लंबे जीवन के लिए साथी की आवश्यकता – अकेलापन जीवन को कठिन बना देता है। इसलिए दूसरा विवाह जीवन में संतुलन लाने का माध्यम बन सकता है।
- बेमेल या असफल पहला विवाह – जब पहले विवाह में तालमेल न बने और रिश्ता टूट जाए, तब दूसरा विवाह समाधान बनता है।
- तलाक – तलाक के बाद एक नई शुरुआत के लिए दूसरा विवाह जरूरी हो सकता है।
- सहारा और जिम्मेदारी बाँटने के लिए – अकेले बच्चों या परिवार की जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो सकता है।
- भावनात्मक संतुष्टि न मिलना – अगर पहला जीवनसाथी अपेक्षाओं पर खरा न उतरे तो भी व्यक्ति दूसरा विवाह सोच सकता है।
दूसरा विवाह भी क्यों टूट जाता है?
- कुंडली मिलान न होना
- जल्दबाजी में विवाह करना
- सच छुपाना – आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, बच्चों की जानकारी
- नशा और घरेलू हिंसा
- शारीरिक समस्या (सेक्सुअल इनकंपैटिबिलिटी)
- पहली शादी से बच्चों का विरोध
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कुंडली में कैसे जानें दुसरे विवाह के योग?
- सप्तम भाव का कमजोर होना लेकिन शुभ दृष्टि होना
- लग्न, द्वितीय, सप्तम और नवम भाव की विस्तृत जांच
- शुक्र और सुख भाव का मजबूत होना
- विवाह भाव का स्वामी द्विस्वभाव राशि में होना
- राहु या शनि का विवाह भाव में प्रभाव
- भाग्य भाव और विवाह भाव के स्वामी का परस्पर स्थान परिवर्तन
- द्वितीय भाव (परिवार) की स्थिति का महत्व
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कैसे बनाएं दुसरे विवाह को सफल?
- शुभ ग्रहों की शांति हेतु पूजा, रत्न, उपाय
- कल सर्प दोष, पितृ दोष आदि की शांति
- कुंभ विवाह, घट विवाह जैसे उपाय
- विवाह बाधा दूर करने हेतु विशेष अनुष्ठान
- सही मार्गदर्शन के लिए अनुभवी ज्योतिष से परामर्श आवश्यक
दूसरा विवाह अगर सही दिशा में और ज्योतिष सलाह से किया जाए, तो यह जीवन को सुखमय और संतुलित बना सकता है।
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