Mesh Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama ka 12 Bhavon Me Prabhav, मेष लग्न कुंडली में अस्त (Combust) चंद्रमा का 12 भावों में प्रभाव, Ast Chandrama Ke upay. मेष लग्न: एक परिचय वैदिक ज्योतिष में मेष लग्न का स्वामी मंगल (Mars) होता है, जो एक अग्नि प्रधान और ऊर्जावान ग्रह है। इस लग्न वाले जातक सामान्यतः: साहसी, ऊर्जावान और कर्मशील होते हैं प्रतिस्पर्धी और स्पष्टवादी होते हैं निर्णय जल्दी लेते हैं, कभी-कभी आवेग में भी स्वभाव से स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं Mesh Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama ka 12 Bhavon Me Prabhav मेष लग्न कुंडली में अस्त (Combust) चंद्रमा का 12 भावों में प्रभाव मेष लग्न में चंद्रमा 4थे भाव का स्वामी होता है, जो माता, घर, मानसिक शांति, भावनाओं, और संपत्ति का कारक है। जब चंद्रमा सूर्य के निकट आकर अस्त (Combust / अस्तगत / अस्तांगत) हो जाता है, तब इसके कारकत्व कमजोर होने लगते हैं—भावनाएँ दबती हैं, मानसिक शांति कम होती है, माता का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है, और घरेलू सुख घट सकता है। Watch Details On YouTube आइये जानते हैं मेष लग्न के कुंड...
Vivah Mai Deri Ke Karan In Hindi | विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण और समाधान | शीघ्र विवाह के उपाय
Image: विवाह में देरी के संभावित कारण
मानव जीवन सामाजिक होता है और एक उपयुक्त जीवनसाथी की आवश्यकता हर किसी को होती है। परंतु कई बार विवाह में देरी हो जाती है, जिससे मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक तनाव उत्पन्न होता है। इस लेख में हम जानेंगे —
- विवाह में देरी के सामाजिक और ज्योतिषीय कारण
- कुंडली में विवाह में बाधा के योग
- शीघ्र विवाह के सरल उपाय
विवाह में देरी के सामान्य कारण
- अत्यधिक अपेक्षाएं और उच्च आदर्श
- परिवार का समर्थन न होना
- दूसरों के नकारात्मक अनुभवों से प्रभावित होना
- प्रेम में असफलता
- उचित प्रयास के बावजूद साथी न मिलना
- आर्थिक अस्थिरता या नौकरी की कमी
- अत्यधिक शिक्षित होने के कारण उपयुक्त जीवनसाथी न मिलना
- कुंडली में अशुभ योग या दोष
ज्योतिष के अनुसार विवाह में देरी के कारण
विवाह योग मुख्य रूप से सप्तम भाव से देखा जाता है। यदि सप्तम भाव, उसका स्वामी, शुक्र या गुरु पीड़ित हो तो विवाह में बाधा उत्पन्न होती है। अन्य कारण:
- सप्तम भाव में पाप ग्रहों का प्रभाव
- चतुर्थ भाव में बुरे ग्रहों की स्थिति (सुख में कमी)
- शुक्र या गुरु की स्थिति कमजोर होना
- मंगल दोष (मांगलिक दोष)
- शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव
इन स्थितियों में किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
शीघ्र विवाह के लिए ज्योतिषीय उपाय
- मांगलिक दोष हो तो मंगल शांति पूजा करें
- गुरु या शुक्र के दोष हो तो संबंधित ग्रह की शांति कराएं
- शनि की दशा या साढ़ेसाती हो तो शनि पूजन करें
- शिव परिवार की आराधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है
कुछ सरल उपाय जो सभी कर सकते हैं:
- शिव परिवार के समक्ष दीपक जलाकर प्रार्थना करें
- राधा-कृष्ण की पूजा करें और विवाह हेतु प्रार्थना करें
- नवविवाहित जोड़ों से आशीर्वाद लें
- कन्याओं को भोजन कराएं और श्रृंगार सामग्री भेंट करें
- माँ दुर्गा के मंदिर में नारियल अर्पित करें और प्रसाद बांटें
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