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Shiv Panchakshari Mantra Sadhna in Hindi

Shiv Panchakshari Mantra Sadhna in Hindi, क्या है शिव पंचाक्षरी मंत्र, जानिए शिव पंचाक्षरी मंत्र का महत्तव, किस विधि से जपे शिव मंत्र, FREE Download Shiv panchakshari sadhna.
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shiv panchakshari mantra sadhna in hindi

अगर आप भक्त है शिवजी के , अगर आप शिवजी के मूल मंत्र का जप करते हैं, अगर आप शिव कृपा प्राप्त करने के इच्छुक है , अगर आप शिवजी के पंचाक्षरी मंत्र को जपने की विधि जानना चाहते हैं तो ये लेख आपको जानकारी देगा.

जीवन को सफल बनाने के लिए एक बहुत ही अच्छा तरीका है और वो है मंत्र साधना, मंत्र तो अनेक है परन्तु भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र की महीमा अपरम्पार है, इसका जप कोई भी कभी भी बिना संकोच के कर सकता है. 
भगवान् शिव जीवन और मृत्यु के भी अधिपति है अतः उनके मंत्र का जप बड़े बिमारियों से भी हमारी रक्षा करता है इसमे कोई शक नहीं.

जीवन की कई समस्याओं का समाधान है शिव पंचाक्षरी मंत्र का जप. 
सिद्ध शिव पंचाक्षरी यन्त्र या फिर शिवलिंग की स्थापना के बाद अगर मंत्र अनुष्ठान किया जाए तो शीघ्र ही असर मालुम होते हैं. 
अगर आप शांति और सुख की खोज में है तो अपनी इच्छाओ को पूरी करने के लिए शिव मंत्र एक अच्छा माध्यम हो सकता है. 

क्या है शिव पंचाक्षरी मंत्र ?
इस मंत्र में पांच अक्षर होते हैं इसीलिए इसे पंचाक्षरी मंत्र कहा जाता है ये 5 अक्षर है “नमः शिवाय”, इसके पहले ॐ लगा देने से पूरा मंत्र बनता है “ॐ नमः शिवाय”.
यही है शिव कृपा प्राप्त करने का महा मंत्र, यही है दुःख निवृत्ति का सरल उपाय.

आइये जानते हैं कैसे जपा जाए शिव पंचाक्षरी मंत्र को :

1. सबसे पहले साफ़ और पवित्र आसन को बिछाए और बैठ जाए सुखासन में.
2. अब आप शिवलिंग या यन्त्र की पंचोपचार पूजा कर सकते हैं. 
3. इसके बाद विनियोग, अंगन्यास, करण्यास, ऋषि न्यास का पाठ करके मंत्र साधना शुरू कर सकते हैं. 
A ) आइये करते हैं शिवपंचाक्षरी मंत्र का विनियोग –
इसके अंतर्गत हम संकल्प लेते हैं की हम जप क्यों कर रहे हैं.
“ॐ अस्य श्री शिवपंचाक्षरी मंत्रस्य वामदेव ऋषिः , पंक्तिश्छन्दः शिवो देवता,  मं बीजम् यं शक्तिः वां कीलकम सदाशिव कृपा प्रसदोपब्धिपूर्वकर्मखिलपुरुषार्थसिद्धये जपे विनियोगः ”
B) आइये अब करते हैं अंगन्यास :
इसको करते समय अंगो को स्पर्श करना होता है.
“ॐ ॐ हृदयाय नमः,
ॐ नं शिरसे स्वाहा,
ॐ मं शिखाये वषट,
ॐ वां नेत्रत्रयाय वौषट,
ॐ यं अस्त्राय फट,
इति हृदयादिषडंगन्यासः “

C) आइये अब करते हैं कर न्यास :
इसको करते समय सम्बंधित अंगुली को चुना चाहिए.
“ॐ ॐ अन्गुष्ठाभ्याम नमः,
ॐ नं तर्जिनिभ्याम नमः,
ॐ मं मध्यमाभ्याम नमः ,
ॐ शिम अनामिकाभ्याम नमः,
ॐ वां कनिष्ठ्काभ्याम नमः,
ॐ यं करतलकरपृष्ठाभ्याम नमः “

D) अब करते है ऋषि न्यास :
“ॐ वामदेवर्षये नमः शिरसि ,
पंक्तिश्छन्दसे नमः मुखे, 
शिव देवताये नमः हृदये,
मं बीजाय नमः गुह्ये ,
यं शक्तये नमः पादयो,
वां कीलकाय नमः नाभो ,
विनियोगाय नमः सर्वांगे “

4. अब इसके बाद आप मंत्र जप शुरू कर सकते हैं. यथा शक्ति रोज सुबह शाम असं पर बैठकर जप करे और दिनभर जब भी समय मिले मन में भी जपते रहे. 

मंत्र जपते समय ऐसा सोचे की भगवान् शिव की कृपा आपके जीवन को सफल बना रही है, सारी परेशानिया ख़त्म हो रही है, आप स्वस्थ और संपन्न हो रहे है. 

शिव की कृपा से बिगड़ते काम बनते है, 
शिव की कृपा से जीवन सफल हो जाता है अतः शिव पूजा करके जीवन को सफल बनाए. 

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