Saptahik Rashifal Aur Panchang, 8 से 14 फ़रवरी 2026 तक की भविष्यवाणियां| प्रेम जीवन की भविष्यवाणी, आने वाले सप्ताह में किस राशि के जातकों को लाभ मिलेगा, आने वाले सप्ताह के महत्वपूर्ण दिन और राशिफल, जानें आने वाले सप्ताह में कितने सर्वार्थ सिद्धि योग मिलेंगे। Saptahik Rashifal : ज्योतिष में चंद्रमा के गोचर पर आधारित साप्ताहिक भविष्यवाणियाँ महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि चंद्रमा हमारी भावनाओं, सहज प्रवृत्तियों और दैनिक मनोदशाओं को नियंत्रित करता है। सबसे तेज़ गति से चलने वाला खगोलीय पिंड होने के नाते, यह लगभग हर 2.25 दिनों में राशि बदलता है, जिससे साप्ताहिक आधार पर हमारी भावनाओं, प्रतिक्रियाओं और दूसरों के साथ जुड़ाव पर असर पड़ता है। विभिन्न राशियों में चंद्रमा के गोचर और अन्य ग्रहों पर इसके प्रभावों पर नज़र रखकर, ज्योतिषी सप्ताह के दौरान भावनात्मक रुझानों, विकास के अवसरों और संभावित चुनौतियों के बारे में जानकारी प्रदान कर सकते हैं। ये भविष्यवाणियाँ व्यक्तियों को अपनी गतिविधियों को ब्रह्मांडीय लय के साथ संरेखित करने में मदद करती हैं—संचार, निर्णय लेने, आत्म-देखभाल या आत्मनिरीक्षण के लि...
Mangla Gauri Puja Kya Hai, क्यों करे मंगला गौरी पूजा, क्या फायदे हैं मंगला गौरी पूजा के, मंगला गौरी व्रत महिमा.
श्रवण महीने के हर मंगलवार को एक विशेष पूजा का दिन होता है जब कुंवारी कन्याये अपनी मनोकामनाए पूर्ण करने के लिए पूजन कर सकती है. ये दिन होता है माँ मंगला गौरी को पूजने का जो की वास्तव में माँ पार्वती ही हैं.
शिवजी के महीने में हर मंगलवार माँ पार्वती की पूजा के लिए होता है और जिन कन्याओं को विवाह में समस्या आ रही है या जो अच्छा वर चाहती है वो श्रवण मंगलवार को मंगला गौरी की पूजन करती है.
माँ पार्वती शिवजी की अर्धांगिनी है और अपने भक्तो की मनोकामना को पूरा करने के लिए सदेव तत्पर रहती है इसी कारण प्राचीनकाल से कन्याये माँ गौरी की पूजा करती आ रही है.
कैसे किया जाता है माँ मंगला गौरी की पूजा :
इस पवित्र और शक्तिशाली दिन को कन्याये जल्दी उठकर अपने दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होके माँ गौरी की मूर्थी या फोटो के आगे संकल्प लेती है की वो किस मनोकामना के लिए ये पूजा या व्रत कर रही है.
माँ गौरी की पंचोपचार पूजन किया जाता है और उनको फूल, फल, दीप, नैवेद्य, आदि भेंट किया जाता है. देश के कुछ भागो में महिलाए भी इस व्रत को अपने विवाहित जीवन के समस्याओं को दूर करने के लिए करती है. इस पूजन से जीवन में सम्पन्नता भी आती है.
Mangla Gauri Puja Kya Hai, क्यों करे मंगला गौरी पूजा, क्या फायदे हैं मंगला गौरी पूजा के, मंगला गौरी व्रत महिमा.
श्रवण महीने के हर मंगलवार को एक विशेष पूजा का दिन होता है जब कुंवारी कन्याये अपनी मनोकामनाए पूर्ण करने के लिए पूजन कर सकती है. ये दिन होता है माँ मंगला गौरी को पूजने का जो की वास्तव में माँ पार्वती ही हैं.
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| Mangla Gauri Puja Kya Hai |
शिवजी के महीने में हर मंगलवार माँ पार्वती की पूजा के लिए होता है और जिन कन्याओं को विवाह में समस्या आ रही है या जो अच्छा वर चाहती है वो श्रवण मंगलवार को मंगला गौरी की पूजन करती है.
माँ पार्वती शिवजी की अर्धांगिनी है और अपने भक्तो की मनोकामना को पूरा करने के लिए सदेव तत्पर रहती है इसी कारण प्राचीनकाल से कन्याये माँ गौरी की पूजा करती आ रही है.
कैसे किया जाता है माँ मंगला गौरी की पूजा :
इस पवित्र और शक्तिशाली दिन को कन्याये जल्दी उठकर अपने दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होके माँ गौरी की मूर्थी या फोटो के आगे संकल्प लेती है की वो किस मनोकामना के लिए ये पूजा या व्रत कर रही है.
माँ गौरी की पंचोपचार पूजन किया जाता है और उनको फूल, फल, दीप, नैवेद्य, आदि भेंट किया जाता है. देश के कुछ भागो में महिलाए भी इस व्रत को अपने विवाहित जीवन के समस्याओं को दूर करने के लिए करती है. इस पूजन से जीवन में सम्पन्नता भी आती है.
इस साल 2018 में मंगला गौरी व्रत के दिन निम्न है –
31 july, 7 august, 14 अगस्त 2018, 21 अगस्त
क्या फायदे हैं मंगला गौरी पूजन के ?
Mangla Gauri Puja Kya Hai, क्यों करे मंगला गौरी पूजा, क्या फायदे हैं मंगला गौरी पूजा के, मंगला गौरी व्रत महिमा.
- कन्याएं विवाह में आने वाले बाधाओं को दूर कर सकती हैं.
- इस पूजन से विवाहित जीवन के परेशानियों को भी दूर किया जा सकता है.
- इस पूजन से अच्छा स्वस्थ्य प्राप्त होता है.
- सफलता के रास्ते खुलते हैं.
- मांगलिक दोष का समाधान भी संभव है माँ गौरी की कृपा से.
अतः सावन के शुभ महीने का पूरा लाभ उठाये और मन से करिये माँ मंगला गौरी की पूजा और पाए मनपसंद जीवन साथी.
सुखी और संपन्न जीवन जी लीजिये माँ की कृपा से.
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