गर्भरक्षाम्बिका स्तोत्रम् माता श्री गर्भरक्षाम्बिका की स्तुति और प्रार्थना का एक श्रद्धापूर्ण स्तोत्र है। इसमें देवी को गर्भस्थ शिशु की रक्षिका, मातृस्वरूपा, कल्याणदायिनी और जगन्माता के रूप में स्मरण किया गया है। परंपरा में इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से गर्भवती माताओं और उनके परिवारों द्वारा माता की कृपा, संरक्षण और मंगल की भावना से किया जाता है।
इस स्तोत्र में भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वे गर्भस्थ शिशु की रक्षा करें, माता को शक्ति एवं शांति प्रदान करें और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें। स्तोत्र में देवी के करुणामयी, सुंदर और मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया गया है।
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| GarbhRakshaAmbika Strotram Lyrics |
वापीतटे वामभागे वामदेवस्य देवस्य देवी स्थिता त्वम् ।
मान्या वरेण्या वदान्या पाहि गर्भस्थजन्तून् तथा भक्तलोकान् ।
श्रीमाधवी-काननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तं स्तुवन्तम् ॥ १॥
श्रीगर्भरक्षापुरे या दिव्यसौन्दर्य-युक्ता सुमाङ्गल्यगात्री ।
धात्री जनित्री जनानां दिव्यरूपां दयार्द्रां मनोज्ञां भजे त्वाम् ।
श्रीमाधवी-काननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तं स्तुवन्तम् ॥ २॥
आषाढमासे सुपुण्ये शुक्रवारे सुगन्धेन गन्धेन लिप्ता ।
दिव्याम्बराकल्पवेषा वाजपेयादि-यागस्थ-भक्तैः सुदृष्टा ।
श्रीमाधवी-काननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तं स्तुवन्तम् ॥ ३॥
कल्याणदात्रीं नमस्ये वेदिकाख्य-स्त्रिया गर्भरक्षाकरीं त्वाम् ।
बालैस्सदा सेविताङ्घ्रिं गर्भरक्षार्थमारादुपेतैरुपेताम् ।
श्रीमाधवी-काननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तं स्तुवन्तम् ॥ ४॥
ब्रह्मोत्सवे विप्रवीथ्यां वाद्यघोषेण तुष्टां रथे सन्निविष्टाम् ।
सर्वार्थदात्रीं भजेऽहं देववृन्दैरपीड्यां जगन्मातरं त्वाम् ।
श्रीमाधवी-काननस्थे गर्भरक्षाम्बिके पाहि भक्तं स्तुवन्तम् ॥ ५॥
एतत् कृतं स्तोत्ररत्नं दीक्षितानन्तरामेण देव्याः सुतुष्ट्यै ।
नित्यं पठेद्यस्तु भक्त्या पुत्रपौत्रादि-भाग्यं भवेत्तस्य नित्यम् ॥ ६॥
गर्भरक्षाम्बिका-स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
हे श्रीमाधवी-कानन में विराजमान माता गर्भरक्षाम्बिके! आपकी स्तुति करने वाले भक्त की रक्षा कीजिए।
हे देवी! आप पवित्र सरोवर के तट पर भगवान वामदेव के बाईं ओर विराजमान हैं। आप पूजनीय, श्रेष्ठ और उदार हैं। गर्भ में स्थित जीवों की तथा सभी भक्तजनों की रक्षा कीजिए। हे श्रीमाधवी-कानन में निवास करने वाली गर्भरक्षाम्बिका माता! आपकी स्तुति करने वाले भक्त की रक्षा कीजिए।
श्री गर्भरक्षापुर में दिव्य सौन्दर्य से युक्त और अत्यंत मंगलमयी स्वरूप वाली माता! आप समस्त प्राणियों की धात्री (पालन-पोषण करने वाली) और जननी हैं। आपके दिव्य, सुंदर और करुणा से भरे मनोहर रूप की मैं भक्ति करता/करती हूँ। हे श्रीमाधवी-कानन में निवास करने वाली गर्भरक्षाम्बिका माता! आपकी स्तुति करने वाले भक्त की रक्षा कीजिए।
पवित्र आषाढ़ मास के शुक्रवार के दिन आप सुगंधित द्रव्यों से अभिषिक्त और सुगंधित होकर, दिव्य वस्त्र एवं आभूषण धारण किए हुए विराजमान रहती हैं। वाजपेय आदि यज्ञ करने वाले भक्त आपका दिव्य दर्शन करते हैं। हे श्रीमाधवी-कानन में निवास करने वाली गर्भरक्षाम्बिका माता! आपकी स्तुति करने वाले भक्त की रक्षा कीजिए।
मैं उस कल्याण प्रदान करने वाली देवी को प्रणाम करता/करती हूँ, जो वेदिका नामक स्त्री के गर्भ की रक्षा करने वाली हैं। छोटे-छोटे बालक भी सदा आपके चरणों की सेवा करते हैं और जो लोग गर्भरक्षा की कामना से आपके पास आते हैं, आप उनके समीप उपस्थित रहती हैं। हे श्रीमाधवी-कानन में निवास करने वाली गर्भरक्षाम्बिका माता! आपकी स्तुति करने वाले भक्त की रक्षा कीजिए।
ब्रह्मोत्सव के समय ब्राह्मणों की गलियों में वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि से प्रसन्न होकर आप रथ में विराजमान होती हैं। मैं उस जगन्माता की भक्ति करता/करती हूँ, जो सभी प्रकार की मनोकामनाएँ और आवश्यक फल प्रदान करती हैं तथा देवताओं द्वारा भी पूजित हैं। हे श्रीमाधवी-कानन में निवास करने वाली गर्भरक्षाम्बिका माता! आपकी स्तुति करने वाले भक्त की रक्षा कीजिए।
यह श्रेष्ठ स्तोत्र भगवान्/ब्रह्मश्री अनन्तराम दीक्षित ने देवी की अत्यंत प्रसन्नता के लिए रचा है। जो व्यक्ति इसे प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति से पढ़ता है, उसे निरंतर पुत्र-पौत्र आदि का सौभाग्य प्राप्त होता है।

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