🌺 Radhakrutam ShriGanesh Stotram 🌺
राधाकृतं गणेश स्तोत्रम्
“राधाकृतम् श्रीगणेश स्तोत्रम्” Radha जी द्वारा रचित है,इसका पाठ अत्यंत आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह स्तोत्र Ganesha जी को समर्पित है, जो विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता माने जाते हैं। इस स्तोत्र का श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से जीवन के कष्ट, बाधाएँ और मानसिक अशांति दूर होती हैं तथा कार्यों में सफलता और शुभता प्राप्त होती है। इसमें निष्काम भक्ति, प्रेम और पूर्ण समर्पण की भावना प्रकट होती है। इसका नियमित पाठ मन को शुद्ध करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह स्तोत्र पापों का क्षय करता है, संकटों से रक्षा करता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, इसके मधुर और लयबद्ध उच्चारण से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आंतरिक संतुलन भी प्राप्त होता है।
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| Radhakrutam Shri Ganesh Stotram राधाकृतं गणेश स्तोत्रम् |
📿 राधाकृतं गणेश स्तोत्रम्
अथ ध्यानं
गजवक्त्रं वह्निवर्णमेकदन्तमनन्तकम् ॥ १ ॥
सिद्धानां योगिनामेव ज्ञानिनां च गुरोर्गुरुम् ।
ध्यातं मुनीन्द्रैर्दैवेन्द्रैर्ब्रह्मेशशेषसंज्ञकैः ॥ २ ॥
सिद्धेन्द्रैर्मुनिभिः सद्धिर्भगवन्तं सनातनम् ।
ब्रह्मस्वरुपं परमं मङ्गलं मङ्गलालयम् ॥ ३ ॥
सर्वविघ्नहरं शान्तं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
भवाब्धिमायापोतेन कर्णधारं च कर्मिणाम् ॥ ४ ॥
शरणागतदिनार्तपरित्राणपरायणम् ।
ध्यायेद् ध्यानात्मकं साध्वं भक्तेशं भक्तवत्सलम् ॥ ५ ॥
इति ध्यानम्
अथ स्तोत्रम्
विघ्ननिघ्नकरं शान्तं पुष्टं कान्तमनन्तकम् ॥ १ ॥
सुरासुरेन्द्रैः सिद्धेन्द्रैः स्तुतं स्तौमि परात्परम् ।
सुरपद्मदिनेशं च गणेशं मङ्गलायनम् ॥ २ ॥
इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोकहरं परम् ।
यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वविघ्नात् प्रमुच्यते ॥ ३ ॥
॥ इति श्रीब्रह्मविवर्ते श्रीकृष्णजन्मखंडे श्रीराधाकृतम् गणेशस्तोत्रम् संपूर्णम् ॥
🌼 राधाकृतं गणेश स्तोत्रम् Ka Hindi Arth 🌼
🔸 ध्यान
जो छोटे कद वाले, बड़े पेट वाले, स्थूल शरीर वाले हैं, ब्रह्मतेज से प्रकाशित हैं;
जिनका मुख हाथी के समान है, अग्नि के समान वर्ण है, एकदंत हैं और अनन्त स्वरूप हैं।
(2)
जो सिद्धों, योगियों और ज्ञानियों के भी गुरु के गुरु हैं;
जिनका ध्यान मुनियों, देवराजों तथा ब्रह्मा, शिव और शेष आदि ने किया है।
(3)
जिनकी स्तुति सिद्धराज, मुनि और सज्जन करते हैं;
जो सनातन भगवान हैं, ब्रह्मस्वरूप, परम मंगलमय और मंगल के धाम हैं।
(4)
जो सभी विघ्नों का नाश करने वाले, शांत स्वभाव वाले और सभी प्रकार की संपत्तियों के दाता हैं;
जो संसाररूपी सागर से पार लगाने के लिए माया-रूपी नाव के कर्णधार (नाविक) हैं।
(5)
जो शरण में आए हुए दीन-दुखियों के रक्षक हैं;
ऐसे ध्यानस्वरूप, साधुजन के ईश्वर और भक्तों पर स्नेह रखने वाले भगवान का ध्यान करना चाहिए।
(इति ध्यानम्)
🔸 स्तोत्र
जो परम धाम, परम ब्रह्म, परमेश्वर और सर्वोच्च ईश्वर हैं;
जो विघ्नों का नाश करने वाले, शांत, पुष्ट, सुंदर और अनन्त हैं।
(2)
जिनकी स्तुति देवताओं के राजा, असुरों के राजा और सिद्धों के राजा करते हैं;
ऐसे देवताओं के सूर्य के समान प्रकाशमान, मंगल के धाम गणेशजी की मैं स्तुति करता हूँ।
(3)
यह स्तोत्र अत्यंत पुण्य देने वाला और विघ्न तथा शोक का नाश करने वाला है।
जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर इसका पाठ करता है, वह सभी विघ्नों से मुक्त हो जाता है।
इस प्रकार श्रीब्रह्मविवर्त पुराण के श्रीकृष्णजन्मखंड में वर्णित श्रीराधा द्वारा रचित गणेश स्तोत्र पूर्ण हुआ।

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