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Papmochni Ekadashi Kab Hai

Papmochni Ekadashi Kab Hai 2026, पापमोचनी एकादशी की कथा, क्या फायदे हैं एकादशी व्रत के. पाप मोचनी एकादशी 15 मार्च रविवार को है — सफलता के लिए क्या करें? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में पाप मोचनी एकादशी का महत्व अत्यंत विशेष बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि तथा सफलता की प्राप्ति होती है। साल 2026 में पाप मोचनी एकादशी 15 मार्च रविवार के दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। Papmochni Ekadashi Kab Hai एकादशी तिथि प्रारंभ होगी 14 मार्च को सुबह लगभग 8:13 बजे एकादशी तिथि समाप्त होगी 15 मार्च को सुबह लगभग 9:18 बजे एकादशी का पारण १६ तारीख को सुबह 6:30 से 8:45 के बीच कर सकते हैं पाप मोचनी एकादशी का महत्व शास्त्रों में कहा गया है कि पाप मोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात ...

Vivah Bandhan Dosh ka Samadhan

Vivah Bandhan Dosh ka Samadhan, विवाह बंधन दोष के उपाय, शादी में देरी के कारण और शीघ्र विवाह के लिए समाधान

कई बार व्यक्ति के पास अच्छी शिक्षा, नौकरी, धन और व्यक्तित्व होने के बावजूद विवाह नहीं हो पाता। न तो योग्य जीवनसाथी मिल पाता है और न ही रिश्ते बनते हैं। ऐसी स्थिति में Vivah Bandhan Dosh या अन्य ग्रह दोष मुख्य कारण हो सकते हैं।

माता-पिता और रिश्तेदार योग्य वर या वधु की तलाश में भटकते हैं, लेकिन बार-बार रिश्ते टूट जाते हैं। कभी कुंडली मेल नहीं खाती, कभी परिवार नहीं जमता और कभी विचारों का मेल न होने से विवाह अटक जाता है।

✅ विवाह में देरी या बाधा के मुख्य ज्योतिषीय कारण:

  1. सप्तम भाव (विवाह स्थान) में अशुभ ग्रहों की दृष्टि या स्थिति।
  2. विवाह के स्वामी का निर्बल या पीड़ित होना।
  3. पितृ दोष या ग्रहण दोष का प्रभाव।
  4. नवमांश कुंडली में सुख व विवाह भाव में दोष।
  5. श्रापित योग या शनि-केतु का प्रभाव।

🪔 Vivah Bandhan Dosh ke Jyotish Upay (विवाह बंधन दोष दूर करने के उपाय):

🔹 पहला उपाय: गौरी पूजन व मंत्र जप

शिव-पार्वती का पंचोपचार पूजन करें और नीचे दिए गए मंत्र की एक माला श्रद्धा से जपें:

मंत्र:
हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्॥

अर्थ: हे माँ गौरी! जिस प्रकार आप भगवान शंकर की प्रिय हैं, उसी प्रकार मुझे भी एक सुयोग्य, प्रिय और दुर्लभ पति प्रदान करें।

यह मंत्र रामचरितमानस से लिया गया है और शीघ्र विवाह हेतु अत्यंत प्रभावशाली है।

🔹 दूसरा उपाय: बृहस्पति व्रत व दान

गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा करें, बृहस्पति व्रत कथा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

दान सामग्री: पीला वस्त्र (सवा मीटर), चना दाल (1250 ग्राम), स्वर्ण (1 ग्राम), खड़ी हल्दी, जोड़ा जनेऊ, धार्मिक पुस्तक।

इन सामग्रियों को मंदिर या ब्राह्मण को गुरुवार को दान करें।

🔹 तीसरा उपाय: माँ कात्यायनी की साधना

21 दिनों तक माँ कात्यायनी की पूजा करें और उनका विशेष मंत्र जप करें। यह उपाय विशेषकर कन्याओं के शीघ्र विवाह हेतु प्रभावशाली माना जाता है।


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