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Durga Ashtmi Ka Mahattw

दुर्गा अष्टमी का महत्त्व, पढ़िए महा-अष्टमी से सम्बंधित प्रथाएं, क्या करे बेहतर जीवन के लिए. 

नवरात्री का आठवां दिन बहुत महत्त्व रखता है भक्तो के लिए. ये दिन महा-अष्टमी या फिर दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग विशेष प्रकार की पूजा पाठ करते हैं कुलदेवी, माँ काली, दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए.

अष्टमी तिथि 12 अक्टूबर, मंगलवार को रात 9:49 बजे शुरू होगी और 13, बुधवार को रात 8:10 बजे तक रहेगी.
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Durga Ashtmi Ka Mahattw

अगर कोई नवरात्री के ७ दिनों में पूजा पाठ नहीं कर पाते हैं तो सिर्फ अष्टमी की पूजा से भी लाभ ले सकते हैं. 

महाष्टमी से सम्बंधित कई पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती है –
  • कुछ के अनुसार इस दिन माँ काली का अवतरण हुआ था. 
  • कुछ भरोसा करते है की इस दिन माता जी ने महिसासुर राक्षस का वध किया था. 
ज्योतिष के अनुसार तो हर माह की अष्टमी तिथि बहुत महत्त्व रखती है क्यूंकि ये तिथि का सम्बन्ध महा-शक्ति से है,  ये दिन कुलदेवी पूजा , दुर्गा पूजा के लिए श्रेष्ठ होता है. इसी कारण नवरात्री की अष्टमी विशेष महत्त्व रखती है. ये समय वैसे भी साधना के लिए बहुत शुभ होता है. 

साधारणतः लोग हर माह आने वाले अष्टमी के प्रति सजग नहीं रहते हैं इसी लिए नवदुर्गाओ के समय की अष्टमी को पूजा पाठ करके माता के आशीर्वाद लेते हैं. 

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आइये जानते हैं की किस प्राकार की क्रियाएं की जाती है दुर्गा-अष्टमी को?

  • कुछ जगहों में इस दिन हथियारों की पूजाएँ होती है. इसी दिन माता ने महिसासुर राक्षस का वध किया था अतः लोग शस्त्र पूजा करके अपने आपको तैयार करते हैं अपने शत्रुओ को दबाने के लिए.
  • भक्त अपने कुलदेवी की पूजा करते हैं अष्टमी को.
  • ऐसा माना जाता है की माँ काली का अवतरण हुआ था अतः लोग काली-पूजा करके उनके जन्मदिन मनाते हैं.
  • भक्त इस दिन ९ साल से कम उम्र की कन्याओं का पूजन भी करते हैं माता स्वरुप मानके,
  • कुछ लोग माता के ८ स्वरूपों का पूजन करते हैं महा-अष्टमी को जो की है शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यानी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री. पढ़िए नवरात्री के अचूक प्रयोग.

आइए जानते हैं महा-अष्टमी के दिन यानी 13 अक्टूबर 2021, बुधवार को ग्रहों की स्थिति:

  1. दुर्गा-अष्टमी के दिन 3 ग्रह उच्च के होंगे और ये बुध, राहु और केतु हैं जो एक अच्छा संकेत है और सभी को इच्छाओं को पूरा करने के लिए अनुष्ठान करने में मदद करता है।
  2. शनि शुभ होगा जो इस दिन साधना करने के लिए फिर से एक अच्छा संकेत है।
  3. सूर्य और बुध एक साथ बैठकर बुधादित्य योग बनाएंगे जो एक राज योग है और सभी के लिए फिर से बहुत अच्छा है।
  4. गोचर कुंडली में गुरु नीच का होगा और कुछ बाधाएं पैदा करेगा।
  5. मंगल अशुभ होगा और इस दिन कुछ अवांछित गतिविधियों जैसे संघर्ष, दुर्घटना आदि का निर्माण करेगा।
लेकिन कुल मिलाकर 4 ग्रह साथ देंगे और 1 राज योग भी सभी को मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा करने में मदद करेगा।

आइए जानते हैं महाष्टमी के दिन पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त:

  1. लाभ मुहूर्त: सुबह 6 से 7:30 बजे और शाम 4:30 से शाम 6:00 बजे तक
  2. अमृत मुहूर्त: सुबह 7:30 बजे से सुबह 9:00 बजे तक
  3. शुभ मुहूर्त: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक
  4. चार मुहूर्त: दोपहर ३:०० से शाम ४:३० बजे तक

आइये जानते हैं कुछ और महत्त्वपूर्ण बाते दुर्गा-अष्टमी को लेके:

  1. कुछ लोग अष्टमी की पूजा सुबह करते हैं, कुछ लोग दोपहर को करते हैं और कुछ लोग शाम को करते हैं. सबकी मान्यता अलग अलग है. 
  2. कुछ परिवारों में ये पूजा बहुत ही गोपनीय रूप से की जाती है और कोई भी बाहर का व्यक्ति इस पूजा को नहीं देख सकता है. 
  3. कुछ परिवारों में इस पूजा में लडकियों को शामिल नहीं किया जाता है. 
  4. कुछ लोग माता को मदिरा भी चढाते हैं. 
  5. कुछ परिवारों में ऐसा रिवाज है की महाभोग को सिर्फ परिवार के सदस्य ही खाते है.
अतः अलग अलग जगहों में अलग अलग प्रथाएं है, लोग विभिन्न प्रकार से माता को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं और माता भक्तो की मनोकामना पूर्ण करती है. पढ़िए नवरात्री में कैसे करे काला जादू से बचाव.

क्या करे दुर्गा-अष्टमी को सफलता के लिए?



1. इस दिन कन्याओं का माता स्वरुप मानके पूजन करना चाहिए. उन्हें भोजन करके, खीर खिला के दक्षिणा और उनका मनपसंद उपहार देना चाहिए.




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