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Guru Poornima Importance In Hindi

Guru purnima kab hai 2026,  Guru Poornima Importance In Hindi, गुरु पूर्णिमा का महत्तव हिन्दी में, क्या करे गुरु पूर्णिमा को. Guru Purnima 2026:  गुरु पूर्णिमा एक हिंदू त्योहार है  और इस दिन हम शिक्षक और आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान करते हैं |  यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़  महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। "गुरु" शब्द संस्कृत के शब्द "गु" से आया है जिसका अर्थ है "अंधकार" और "रु" का अर्थ है "दूर करना।" इसलिए गुरु वह होता है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करते है और हमें सत्य का प्रकाश देखने में मदद करते है। हिंदू धर्म में, गुरु पूर्णिमा हमारे सभी जीवित और ब्र्हम्लीन गुरुओं का सम्मान करने का समय है। हम उनके मार्गदर्शन और शिक्षाओं के लिए अपना आभार व्यक्त करते हैं, और उनके निरंतर आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं। गुरु पूर्णिमा पर, लोग आमतौर पर अपने गुरुओं से मिलते हैं, उनका पूजन करते हैं, उन्हें उपहार देते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं |  यह उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने हमें बढ़ने और सीखने में मदद की...

Swasthya Se Sambandhit Jyotishiya Yog

अच्छे स्वास्थ्य का महत्त्व, कुछ ज्योतिषीय योग जो की बिमारी का कारण हो सकते हैं, जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग और ज्योतिष, अलसर- घाव से सम्बंधित योग, गुप्त रोग और ज्योतिष, मनो रोग के ज्योतिषीय कारण. 
kundli me bimari ke yog in hindi
Swasthya Se Sambandhit Jyotishiya Yog

स्वास्थ्य का जीवन मे सबसे अधिक महत्त्व है, इस क्षणभंगुर जीवन को सफलता पूर्वक जीने के लिए जरुरी है की स्वास्थ्य अच्छा रहे. ज्योतिष के माध्यम से भी हम स्वास्थ्य के बारे मे बहुत कुछ जान सकते हैं. विभिन्न ग्रहों का हमपर अलग अलग असर होता है, ग्रहों की उर्जा हमारे जीवन पर असर डालती है. बीमारी एक ऐसा श्राप है जो होता तो एक को है पर पूरा परिवार प्रभावित होता है. 

ये भी सच है की अगर व्यक्ति खान पान मे समन्वय रखे तो भी बहुत सारी बिमारियों से बचा भी जा सकता है. इसी के साथ अगर कुछ ज्योतिषीय उपाय कर लिए जाए, कुंडली मे मौजूद ख़राब ग्रहों के प्रभावों को कम करने के लिए तो बहुत हद तक परेशानियों को कम किया जा सकता है. 

बीमारी के कारण को जानने के लिए कुंडली के छठे भाव को देखा जाता है, आठवे भाव को देखा जाता है. त्रिक भावों (6, ८, १२ )मे ख़राब ग्रहों की मौजूदगी भी स्वास्थय सम्बंधित परेशानियों की तरफ इशारा करती है. 

आइये जानते है कुछ ज्योतिषीय नियम की कैसे बीमारियों को जाना जाता है :

  • अगर ११वे भाव का स्वामी कमजोर होक छठे भाव मे बैठ जाए तो  जातक बीमार रहता है. 
  • अगर शनि पापी ग्रह के साथ बैठा हो ५वे, ९वे, या १२वे भाव मे तो स्वस्थ्य सम्बंधित परेशानियां देता है. 
  • अगर आठवे भाव का स्वामी किसी भी त्रिक स्थान मे बैठा हो तो भी बीमारी देता है. 
  • अगर लग्न का स्वामी कमजोर हो, शनि और मंगल साथ मे आठवे भाव मे बैठे हो साथ ही सूर्य बारहवे भाव मे बैठ जाए तो भी बीमारियों को आकर्षित करता है. 
  • अगर ग्यारहवे भाव का स्वामी छठे भाव मे बैठ जाए तो भी हेल्थ समस्या देता है. 
आइये अब जानते हैं की घाव / अल्सर आदि से सम्बंधित ज्योतिषीय योग:

  1. अगर छठे भाव का स्वामी चन्द्र के साथ लग्न मे या फिर आठवे भाव मे बैठ जाए तो मूंह मे या फिर तालू मे घाव हो सकता है. 
  2. अगर छठे भाव का स्वामी मंगल, सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र, शनि , रहू, केतु के साथ आठवे भाव मे बैठ जाए तो धीरे धीरे गले, माथा, आँखों के आस पास, पेट, पाँव और मूंह पर घाव दे सकता है. 

आइये अब जानते हैं जनेन्द्रिय सम्बंधित बीमारियों के ज्योतिषीय कारण :

  1. अगर सूर्य लग्न मे हो और मंगल सातवे घर मे हो तो जातक मूत्र सम्बंधित रोग या फिर सुगर से ग्रस्त हो सकता है. 
  2. अगर मंगल दसवे घर मे हो, शनि साथ मे हो या फिर मंगल शनि द्वारा दृष्ट हो तो भी जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग दे सकता है. 
  3. अगर सूर्य, शुक्र, शनि पांचवे घर मे बैठे तो भी ऐसे रोग हो सकते है. 
  4. अगर शुक्र नीच का हो या फिर शत्रु का हो या फिर पापी ग्रहों के साथ बैठा हो तो वीर्य सम्बंधित रोग हो सकता है. 
  5. अगर चन्द्रमा, मंगल और शनि छठे, आठवे और बारहवे भाव मे बैठे हो तो भी जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग हो सकते हैं. 
  6. अगर छठे और सातवे भाव मे बहुत से पापी ग्रह हो तो भी रोग दे सकता है. 
आइये कुछ और योग गुप्त रोग से सम्बंधित देखते हैं:

अच्छे स्वास्थ्य का महत्त्व, कुछ ज्योतिषीय योग जो की बिमारी का कारण हो सकते हैं, जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग और ज्योतिष, अलसर- घाव से सम्बंधित योग, गुप्त रोग और ज्योतिष, मनो रोग के ज्योतिषीय कारण. 


  • जब छठे भाव का स्वामी , बुध, मंगल साथ मे बैठे हो कही भी या फिर सातवे भाव मे तो गुप्त रोग दे सकता है. 
  • जब आठवे भाव मे पापी ग्रह बैठ जाए या फिर पापी ग्रह से दृष्ट हो तो भी गुप्त रोग हो सकता है. 
  • अगर लग्न मे वृषभ या कन्या हो और इसका स्वामी बुध के साथ हो और सिंह राशी का मंगल चौथे या बारहवे भाव मे बैठे तो लिंग सम्बंधित समस्या हो सकता है. 
आइये अब जानते है कुछ मनो रोग से सम्बंधित ज्योतिषीय योग:
आज के तनाव भरे जीवन मे मनो रोग भी बहुत तेजी से बढ़ रहे है. ज्योतिष द्वारा मानसिक समस्याओं को भी जाना जा सकता है, मिर्गी, हिस्टीरिया आदि भी मनो रोग मे आते हैं.

  1. जब चन्द्रमा राहू के साथ युति करता है तो भी मनो रोग दे सकता है.
  2. अगर आठवे भाव मे बहुत से पापी ग्रह हो और शुक्र , चन्द्रमा के साथ किसी भी केंद्र स्थान मे तो भी मनोरोग दे सकता है. 
  3. अगर राहू लग्न मे हो, चन्द्रमा छठे भाव मे हो, साथ ही सूर्य, चन्द्रमा, मंगल साथ मे आठवे भाव मे हो तो भी मन सम्बंधित रोग दे सकता है.
  4. जब शनि और मंगल छठे या आठवे भाव मे हो तो भी मनोरोग हो सकता है. 
अगर आप भी किसी रोग से परेशान हो और ज्योतिषीय कारन जानना चाहते हो तो ज्योतिष से संपर्क कर सकते है. 


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