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Latest Astrology Updates in Hindi

Janm Kundli Mai LAXMI NARAYAN yoga Kaise Banta hai ? 12 Bhavo Mai Kya Prbhav Hoga

लक्ष्मी नारायण योग कैसे बनता है जन्म कुंडली में? 12 भावों में लक्ष्मी नारायण योग का क्या प्रभाव होता है? लक्ष्मी नारायण योग वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण योग माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब बुध और शुक्र कुंडली में विशेष शुभ संबंध बनाते हैं, तो लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण हो सकता है। इस योग को धन, सुख-सुविधा, बुद्धि, व्यापार, कला और जीवन में अच्छे अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि किसी भी योग का फल केवल उसके बनने से तय नहीं होता। ग्रहों की राशि, भाव, स्थिति, दृष्टि, बल और महादशा-अंतर्दशा जैसे कई कारक इसके परिणामों को प्रभावित करते हैं। लक्ष्मी नारायण योग कैसे बनता है जन्म कुंडली में लक्ष्मी नारायण योग क्या होता है? ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना, व्यापार और संचार का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र धन, सुख-सुविधा, कला, सौंदर्य, प्रेम और भौतिक समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। जब जन्म कुंडली में बुध और शुक्र का शुभ संबंध बनता है, तो इसे लक्ष्मी नारायण योग कहा जा सकता है। यह संबंध युति, परस्पर दृष्टि या कुछ विशेष ज्योतिषीय परिस्थितियों के माध्...

Pitar Dosh Ka Smadhan In Hindi

पितृ दोष का समाधान ज्योतिष द्वारा हिंदी में, कैसे बनता है पितृ दोष, कैसे कम करे पितृ दोष के प्रभाव को, जानिए कुछ आसान तरीके पितर दोष को कम करने के.  वैदिक ज्योतिष में कुंडली के अन्दर पाए जाने वाले दोषों में से पितर दोष भी एक महत्त्वपूर्ण दोष है जिसके कारण जीवन में बहुत सारी समस्याएं पैदा हो जाती है. पितृ का मतलब है हमारे पूर्वज अतः इस दोष का मुख्य कारण पितृ होते हैं. Pitar Dosh Ka Smadhan In Hindi आइये जानते हैं की पितृ दोष से सम्बंधित मान्यताएं : पितृ का मतलब होता है हमारे पूर्वज जो अब दुनिया में नहीं है. मान्यता के अनुसार अगर हमारे पूर्वज संतुष्ट नहीं है तो हमे पितृ दोष का सामना करना होता है. अगर सही तरीके से उपाय नहीं किये जाए तो ये दोष पीढ़ी दर पीढ़ी परेशान करता रहता है. कुछ विद्वानों का मानना ये भी है की अगर कोई आत्मा इच्छाओ से मुक्त नहीं हो पाती है तो वो अपने वंश से अपेक्षा रखते हैं और वो पूरी नहीं होने पर समस्याएं पैदा करते हैं. ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक माना जाता है अतः अगर कुंडली में सूर्य ख़राब हो तो पितृ दोष बनता है. कुछ लोग तो राहू को भी...

Kaise Kare Tarpan In Hindi

कैसे करे तर्पण,  किस मन्त्र से करे प्रयोग, जानिए कैसे करे घर में तर्पण आसानी से पितरो की कृपा प्राप्त करने के लिए.  तर्पण मंत्र और विधि: इससे पहले के लेख में हमने जाना की  तर्पण क्या होता है?  , तर्पण का महत्त्व, तर्पण के प्रकार आदि. इस लेख में हम जानेंगे की तर्पण के लिए कौन से मंत्रो का प्रयोग करना चाहिए. इन मंत्रो का प्रयोग करके कोई भी अपने घर पर भी तर्पण प्रयोग कर सकते हैं और पितरो की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.  tarpan kaise kare पहला कदम: सबसे पहले यम देवता का ध्यान करते हुए दक्षिण दिशा में चावल के ढेर पर दीपक प्रज्वलित करना चाहिए क्यूंकि वो मृत्यु के देवता है.  नोट: किसी भी आवाहन मंत्र का प्रयोग करने से पहले हाथ में थोडा चावल के दाने रखना चाहिए और आवाहन के बाद दीपक पर छोड़ देना चाहिए.  यम देवता के नाम से दीप दान के समय निम्न आवाहन मंत्र का जप करना चाहिए – “ॐ यमाय नमः | आवाहयामी, स्थापयामी, ध्यायामी | ततो नमस्कार करोमि.” इसके बाद कुछ समय तक यम मंत्र का जप करे “ॐ यमाय नमः ” दूसरा कदम: अब एक काले तिल के ढेरी पर पितरो के ...

Hanuman Kawach Ke laabh

पंचमुखी हनुमान कवच के फायदे || Panchmukhi Hanuman Kavac, Panchmukhi Hanuman Kavach lyrics, श्री हनुमान कवच का पाठ कैसे करे ?| यह एक अत्यंत शक्तिशाली कवच है जो व्यक्ति को हर प्रकार के बुरे प्रभाव से बचाने में समर्थ है जैसे काले जादू से बचाएगा, नजर दोष से बचाएगा,ग्रहों के अशुभ प्रभाव से सुरक्षा देगा, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा देगा| इसी के साथ इस कवच के पाठ करने वाले में साहस उत्पन्न होता है, जपकर्ता निडर बनता है, उसमे निर्णायक शक्ति पैदा होती है, बुद्धि का विकास होता है आदि | हनुमानजी अमर है इसीलिए कलयुग में उनकी अराधना बहुत ही जल्दी फलदाई होती है | वे महाबली है, महा दयालु है, शत्रु हन्ता है | उनके कवच का पाठ व्यक्ति की हर प्रकार से रक्षा करता है |  Hanuman Kawach Ke laabh पंचमुखी हनुमान कवच के पाठ के लाभ क्या है ? पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करने से पढने वाले के आस पास एक कवच का निर्माण हो जाता है हनुमान जी की कृपा से और कोई भी नकारात्मकता उसे छु भी नहीं पाती है |  हर प्रकार के रोग, शोक, ग्रह दोष, भय से भगवान् रक्षा करते हैं |  पंचमुखी हनुमान की आराधना करने से साधक ...

Pishach Mochan kund Varanasi Ka Rahasya

Pishach Mochan kund kaha hai, क्या विशेषता है इस कुंड की, Pishach Mochan Yatra kab hoti hai,  पिशाच मोचनी यात्रा की जानकारी, भटकती आत्माओं के मोक्ष मिलने का स्थान | Pishach Mochan Kund :  काशी को मोक्ष नगरी की उपाधि प्राप्त है और इसी नगरी में एक रहस्यमई कुंड है जिसे " पिशाच मोचन कुंड " के नाम से जाना जाता है |  यहाँ पर पितृ पक्ष में १६ दिन विशेष रूप से तर्पण और श्राद्ध कर्म होते हैं पितरो की मुक्ति के लिए | ऐसी मान्यता है की यहाँ पर किसी भी अतृप्त आत्मा को मुक्ति मिल सकती है |  Pishach Mochan kund Varanasi Ka Rahasya आइये जानते हैं इसका पूरा पता : तो ये जगह वाराणसी में कामायनी रोड पर लोहामंडी में चेतगंज में स्थित है |  आइये जानते हैं पिशाच मोचन कुंड के बारे में ख़ास बाते : यहाँ पर एक प्राचीन पीपल का पेड़ है जिसमे मान्यता के अनुसार अतृत्प आत्माओं को छोड़ा जाता है मुक्ति के लिए |  यहाँ पर त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है जिससे प्रेत योनी से किसी भी आत्मा को मुक्ति मिलती है | पितृ ऋण से मुक्ति  के लिए यहाँ पर कर्मकांड होते  हैं |  यहाँ पर काला,...

Pitru Moksh Amvasya Ko Kya Kare Totkay

पितृ मोक्ष अमावस्या को क्या करे पितरो की प्रसन्नता के लिए, जानिए कुछ आसान टोटके पितृ कृपा के लिए, कैसे दूर करे दुर्भाग्य, सर्व पितृ अमावस्या के लिए टोटके. श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन होता है सर्व पितृ अमावस्या, ये दिन बहुत महत्त्व रखता है भारतीय ज्योतिष के हिसाब से. इस दिन बहुत बड़ी पूजाए होती है अपने जीवन को सुखी करने के लिए. हिन्दुओ में पितरो को बहुत सम्मान दिया जाता है क्यूंकि उनके कारण ही हम आज इस धरती पर है. Pitru Moksh Amvasya Ko Kya Kare Totkay श्राद्ध पक्ष वो समय होता है जब हम अपने पूर्वजो के लिए पूजा, पाठ, दान आदि करते हैं ताकि उनकी उच्च गति हो और वो हमे आशीर्वाद दे सुखी जीवन के लिए. पितृ पक्ष में हर तिथि को अलग अलग श्राद्ध लोग करते हैं परन्तु अगर किसी को अपने किसी पूर्वज की तिथि का ज्ञान न हो तो वो सर्व पितृ अमावस्या को उनका श्राद्ध कर सकता है. इस अमावस्या को पितरो के निमित्त तर्पण करने से पितरो की कृपा की प्राप्ति होती है. जो लोग पितृ मोक्ष अमावस्या को अपने पूर्वजो के निमित्त भोजन, निकालते हैं, तर्पण करते हैं, दान देते हैं जरुरतमंदो को, उनके जीवन में...

Mangal Ka Kark Rashi Mai Gochar Ka Rashifal

Mangal Ka Kark Rashi Mai Gochar September 2026 , मंगल प्रवेश करेंगे कर्क राशि में, जानिए राशिफल,  Mars Transit in Cancer 2026 predictions in hindi  |  साहस, उर्जा और शक्ति का ग्रह मंगल जब अपनी राशि परिवर्तन करते हैं तो बड़े परिवर्तन नजर आते हैं मौसम में और लोगो के जीवन में |  18 September 2026 को शाम में लगभग 5:02 PM पे मंगल ग्रह मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे और नीच के हो जायेंगे, ये स्थिति १२ नवम्बर तक बनी रहेगी, अतः बहुत से लोगो को बहुत ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होगी |  खास बात यह है कि इस दौरान गुरु भी कर्क राशि में मौजूद रहेंगे और कर्क में गुरु को उच्च का माना जाता है। ऐसे में मंगल और गुरु की युति को ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरु की मजबूत स्थिति मंगल की कमजोर स्थिति को कुछ हद तक संभाल सकती है और इससे नीचभंग जैसी स्थिति बनने की संभावना मानी जाती है।  Mangal ka gochar kark rashi mai April 2026 मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी है अतः इनके ऊपर भी प्रभाव आसानी से देखा जा सकता है मंगल के गोचर का |  Mangal ...

Shraadh Se Sambandhit Kuch Tathya In Hindi

श्राद्ध से सम्बंधित कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य, तर्पण में उपयोग होने वाले वस्तुए, गोत्र का महत्तव , पितरो को प्रसन्न करने का सही समय, तर्पण के लिए 7 मुख्य स्थल. श्राद्ध अर्थात पितृ पक्ष या फिर महालया जो की 16 दिनों का विशेष समय होता है जब पितृ गण अपने परिवार को आशीर्वाद देने आते हैं. अतः इस समय कोई भी व्यक्ति बहुत आसानी से अपने जीवन को निष्कंटक कर सकता है और उन्नति के रस्ते खोल सकता है. Shraadh Se Sambandhit Kuch Tathya In Hindi भारत के ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से आत्माओं के अस्तित्तव को दिखाया है और पूरी दुनिया आज आत्माओं के अस्तित्व को मानती है. अतः हम पितृ पक्ष को एक अंधविश्वास नहीं मान सकते हैं. ये भी सत्य है की हम अगर है तो वो सिर्फ हमारे पितरो के कारण और हमे ये भूलना नहीं चाहिए. भारत में तो हर मुख्य कार्य से पहले पितरो को पूजने का भी नियम है. उनके आशीर्वाद के बिना कोई कार्य संभव नहीं है. श्राद्ध एक ऐसा समय है जब हम पितरो के लिए अपनी कृतज्ञता दिखा सकते हैं. ये वो समय है जब हम उनके प्रेम और कृपा के लिए उनका धन्यवाद कर सकते हैं उनके उन्नति के लिए प्रार्थना करके. ...