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Jyoitish Sewaye Online || ज्योतिष सेवा ऑनलाइन

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ज्योतिष सेवा ऑनलाइन: एक अच्छा ज्योतिष कुंडली को देखके जातक का मार्गदर्शन कर सकता है. कुंडली मे ग्रह विभिन्न भावों मे बैठे रहते हैं और जातक के जीवन मे प्रभाव उत्पन्न करते हैं. अगर कोई व्यक्ति जीवन मे  समस्या से ग्रस्त है तो इसका मतलब है की उसके जीवन इस समय बुरे ग्रहों का प्रभाव चल रहा है और यदि कोई व्यक्ति सफलता प्राप्त कर रहा है तो इसका मतलब है की इस समय उसके जीवन मे शुभ ग्रहों का प्रभाव है.  विभिन्न ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा मे व्यक्ति अलग अलग प्रकार के प्रभावों से गुजरता है जिसके बारे एक अच्छा ज्योतिष जानकारी दे सकता है.  ग्रहों का असर व्यक्ति के कामकाजी जीवन पर पड़ता है.
ग्रहों का असर व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर पड़ता है.
सितारों का असर व्यक्ति के सामाजिक जीवन पर पड़ता है.
व्यक्ति के पढ़ाई –लिखाई , वैवाहिक जीवन, प्रेम जीवन, स्वास्थ्य आदि पर ग्रह – सितारों का असर पूरा पड़ता है.  आप “www.jyotishsansar.com” माध्यम से पा सकते हैं कुछ ख़ास ज्योतिषीय सेवाए ऑनलाइन :जानिए क्या कहती है आपकी कुंडली आ…

Kaise Kare Tarpan In Hindi

कैसे करे तर्पण,  किस मन्त्र से करे प्रयोग, जानिए कैसे करे घर में तर्पण आसानी से पितरो की कृपा प्राप्त करने के लिए. 

तर्पण मंत्र और विधि:

इससे पहले के लेख में हमने जाना की तर्पण क्या होता है? , तर्पण का महत्त्व, तर्पण के प्रकार आदि. इस लेख में हम जानेंगे की तर्पण के लिए कौन से मंत्रो का प्रयोग करना चाहिए. इन मंत्रो का प्रयोग करके कोई भी अपने घर पर भी तर्पण प्रयोग कर सकते हैं और पितरो की कृपा प्राप्त कर सकते हैं. 
कैसे करे तर्पण
tarpan karne hetu vidhi aur mantra

पहला कदम:

सबसे पहले यम देवता का ध्यान करते हुए दक्षिण दिशा में चावल के ढेर पर दीपक प्रज्वलित करना चाहिए क्यूंकि वो मृत्यु के देवता है. 
नोट: किसी भी आवाहन मंत्र का प्रयोग करने से पहले हाथ में थोडा चावल के दाने रखना चाहिए और आवाहन के बाद दीपक पर छोड़ देना चाहिए. 
यम देवता के नाम से दीप दान के समय निम्न आवाहन मंत्र का जप करना चाहिए –
“ॐ यमाय नमः | आवाहयामी, स्थापयामी, ध्यायामी | ततो नमस्कार करोमि.”
इसके बाद कुछ समय तक यम मंत्र का जप करे “ॐ यमाय नमः ”

दूसरा कदम:

अब एक काले तिल के ढेरी पर पितरो के नाम से दीपक जलाए और निम्न आवाहन मंत्र का जप करे.
“ॐ पितृभ्यो नमः | अवाह्यामी , स्थाप्यामी, ध्यायामी |”

आइये जानते हैं की तर्पण के लिए जल कैसे बनाए:

तर्पण के लिए गंगा जल ले, उसमे थोडा काला तिल डाले, चन्दन पावडर डाले, कपूर डाले, दूध डाले, चावल के दाने डाले, फूल डाले और मिला दे.
अब हम तर्पण के लिए तैयार है.

आइये अब जानते हैं तर्पण मंत्र :

तर्पण शुरू करने से पहले अपने दोनों अनामिका ऊँगली में कुशा का छल्ला बना के धारण करे या फिर सोने की रिंग पहने. 

देव तर्पण :
देव तर्पण के लिए उँगलियों के अग्र भाग से जल छोड़ा जाता है मंत्रो को पढ़ते हुए.
देव आवाहन मंत्र:
ॐ आगछन्तु महाभागा, विश्वेदेवा महाबलाः |
ये तर्पनेsत्र विहिताः , सावधाना भवन्तु ते ||
ॐ ब्रह्मादयो देवाः आगछन्तु गृहनन्तु एतान जलान्जलीन |
ॐ विष्णुस्तृप्यताम |
ॐ रुद्रस्तृप्यताम |
ॐ प्रजापतिस्तृप्यताम |
ॐ देवास्तृप्यताम |
ॐ छान्दांसी तृप्यन्ताम |
ॐ वेदासतृप्यन्ताम |
ॐ ऋषयसतृप्यन्ताम |
ॐ पुरानाचार्यासतृप्यन्ताम |
ॐ गन्धर्वासतृप्यन्ताम |
ॐ इत्रचार्यासतृप्यन्ताम |
ॐ संवत्सरः सावयवस्तृप्यताम |
ॐ देवसतृप्यन्ताम |
ॐ अप्सरसतृप्यन्ताम |
ॐ देवानुगासतृप्यन्ताम |
ॐ नागासतृप्यन्ताम |
ॐ सागरासतृप्यन्ताम
ॐ पर्वतासतृप्यन्ताम |
ॐ मनुष्यासतृप्यन्ताम |
ॐ सरितासतृप्यन्ताम |
ॐ रक्षांसी तृप्यन्ताम |
ॐ यक्शासतृप्यन्ताम |
ॐ पिशाचासतृप्यन्ताम |
ॐ सुपर्नासतृप्यन्ताम |
ॐ भूतानि तृप्यन्ताम |
ॐ पशवसतृप्यन्ताम |
ॐ वनस्पतयसतृप्यन्ताम |
ॐ ओशाधायासतृप्यन्ताम |
ॐ भूतग्रामः चतुर्विधसतृप्यन्ताम |

ऋषि तर्पण मंत्र:

ऋषि आवाहन मंत्र-
ॐ मरिच्यादी दशऋषयः आगछन्तु गृहनन्तु एतान्जलान्जलीन |
ॐ मरिचिसतृप्यताम |
ॐ अत्रिसतृप्यताम |
ॐ अंगीराह तृप्यताम |
ॐ पुलस्त्यसतृप्यताम |
ॐ पुल्हसतृप्यताम |
ॐ क्रतुसतृप्यताम |
ॐ वसिष्ठसतृप्यताम |
ॐ प्रचेतासतृप्यताम |
ॐ भ्रिगुसतृप्यताम |
ॐ नरदसतृप्यताम |

दिव्य मनुष्य तर्पण:

इस तर्पण को करने के लिए कनिष्ठिका ऊँगली के जड़ से जल छोड़ना चाहिए मंत्रो को पढ़ते हुए. उत्तर दिशा की और मुख करके करे.
ॐ सनाकादयः सप्तऋषयः आगछन्तु गृहनन्तु एतान जलान्जलीन |
ॐ सनकसतृप्यताम |
ॐ सनन्दनसतृप्यताम |
ॐ सनातानसतृप्यताम |
ॐ कपिलसतृप्यताम |
ॐ आसुरिसतृप्यताम |
ॐ पञ्चशिखसतृप्यताम |

दिव्य पितृ तर्पण :
दक्षिण दिशा की और मूह करके ये तर्पण करे और अंगूठे का प्रयोग करे जल छोड़ने के लिए.
ॐ कव्यवाडादयो दिव्य पितरः आगछन्तु गृहनन्तु एतान जलान्जलीन|
 ॐ कव्यवाडनलसतृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |
ॐ सोमसतृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |
ॐ यमसतृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |
ॐ अर्यमा तृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |
ॐ अग्निश्वाताः पितरसतृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |
ॐ सोमपाः पितरसतृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |
ॐ बर्हिशदः पितरसतृप्यताम, इदं सतिलं जलं तस्मये स्वधा नमः | |

यम तर्पण:

ॐ यमादिचतुर्दशदेवाः आगछन्तु गृहनन्तु एतान जलान्जलीन |
ॐ यमाय नमः |
ॐ धर्मराजाय नमः |
ॐ मृत्यवे नमः |
ॐ अन्तकाय नमः |
ॐ वैवस्वताय नमः |
ॐ कालाय नमः |
ॐ भूतक्षयाय  नमः |
ॐ औदुम्बराय नमः |
ॐ दध्नाय नमः |
ॐ नीलाय नमः |
ॐ परमेष्ठिने नमः |
ॐ वृकोदराय नमः |
ॐ चित्राय नमः |
ॐ चित्रगुप्ताय नमः |

इस प्रकार तरपान करने के बाद अपने पितरो के उन्नति और उच्चगति के लिए प्रार्थना करे और अपने जीवन को सफल बनाए.

सभी लोग अपने पितरो की कृपा प्राप्त करे |
ॐ पितृभ्यो नमः |

कैसे करे तर्पण, तर्पण करने से सम्बंधित मंत्र, जानिए कैसे करे घर में तर्पण आसानी से पितरो की कृपा प्राप्त करने के लिए. 

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