Skip to main content

Shraadh Se Sambandhit Kuch Tathya In Hindi

श्राद्ध से सम्बंधित कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य, तर्पण में उपयोग होने वाले वस्तुए, गोत्र का महत्तव , पितरो को प्रसन्न करने का सही समय, तर्पण के लिए 7 मुख्य स्थल.

श्राद्ध अर्थात पितृ पक्ष या फिर महालया जो की 16 दिनों का विशेष समय होता है जब पितृ गण अपने परिवार को आशीर्वाद देने आते हैं. अतः इस समय कोई भी व्यक्ति बहुत आसानी से अपने जीवन को निष्कंटक कर सकता है और उन्नति के रस्ते खोल सकता है.
shraadh aur jyotish
Shraadh Se Sambandhit Kuch Tathya In Hindi

भारत के ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से आत्माओं के अस्तित्तव को दिखाया है और पूरी दुनिया आज आत्माओं के अस्तित्व को मानती है. अतः हम पितृ पक्ष को एक अंधविश्वास नहीं मान सकते हैं. ये भी सत्य है की हम अगर है तो वो सिर्फ हमारे पितरो के कारण और हमे ये भूलना नहीं चाहिए. भारत में तो हर मुख्य कार्य से पहले पितरो को पूजने का भी नियम है. उनके आशीर्वाद के बिना कोई कार्य संभव नहीं है.

श्राद्ध एक ऐसा समय है जब हम पितरो के लिए अपनी कृतज्ञता दिखा सकते हैं. ये वो समय है जब हम उनके प्रेम और कृपा के लिए उनका धन्यवाद कर सकते हैं उनके उन्नति के लिए प्रार्थना करके.

पूजा में गोत्र का महत्तव:

किसी भी पूजा को करने पर नाम के साथ गोत्र का उच्चारण किया जाता है जो की हमारे कुल को बताता है और हमारे कुल से जुड़े आदि ऋषि के बारे में बताता है. अतः पूजा से पहले हम अपने आदि ऋषि और पुरे कुल को याद करते हैं, उस परंपरा को याद करते हैं जिनसे हम जुड़े हैं.

Watch video:

श्राद्ध से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

श्राद्ध का एक रहस्य ये भी है की जो व्यक्ति अपने पूर्वजो के लिए अनुष्ठान करते हैं वो न केवल अपने पितरो को संतुष्ट करते हैं बल्कि दुसरे आत्माओं को भी प्रसन्न करते हैं. क्यूंकि मंत्र शक्ति और अनुष्ठानो से जो ऊर्जा का निर्माण होता है वो सभी के लिए कल्याणकारी होता है. अतः अपने द्वारा किये गए अनुष्ठानो को साधारण न समझे. कोई भी अनुष्ठान जो की सकारात्मक रूप से किया जाए तो वो जीवनी शक्ति को बढ़ाती है और सफलता के रास्ते खोलती है सभी के लिए.

कौन सा समय पितरो की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है:

हांलाकि पुरे साल अमावस्या में पितरो की पूजा होती है परन्तु ये जो 16 दिन है महालया के ये पितृ कृपा प्राप्त करने के सर्वश्रेष्ठ दिन हैं. ये समय भाद्रपद पूर्णिमा को शुरू होता है और आश्विन माह के अमावस्या तक चलता है हिन्दू पंचाग के अनुसार. इस समय सूर्य कन्या राशि से गुजरता है.
इन सोलह दिनों में कोई भी व्यक्ति अपने पितरो की कृपा के लिए प्रयोग कर सकता है.

पितरो की दिशा:

पितरो की पूजा के लिए नैऋत्य कोण शुभ माना जाता है अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा, ये दिशा पितरो की दिशा मानी जाती है. 

आइये जानते हैं श्राद्ध पक्ष में दी जाने वाली पंचबली :

श्राद्ध कर्म के लिए दिन का समय शुभ होता हैं और पवित्र होक क्रियाओं को करना चाहिए. भोजन बना के उसमे से भगवान्, गौ माता, कुत्ता, कौआ और चीटियों के लिए भोजन निकला चाहिए. इसे ही पंच्बली कहते हैं. इसके अलावा किसी ब्राह्मण को भी भोजन, दक्षिणा, वस्त्र आदि से संतुष्ट करना चाहिये और आशीर्वाद लेना चाहिए. 
इसके अलावा तर्पण करना नहीं भूलना चाहिए.

आइये जानते हैं की पितृ पक्ष में तर्पण में क्या चीजे प्रयोग में आती हैं:

तर्पण के लिए कला टिल, अक्षत/चावल, दूध, जौ, सफ़ेद फूल, गंगा जल, कुषा आदि का प्रयोग सामान्यतः होता है. इनका प्रयोग करके मंत्रो के साथ तर्पण किया जाता है जिससे की पितृ गण प्रसन्न होते हैं.


आइये जानते हैं तर्पण के लिए 7 प्रमुख स्थल कौन से हैं :

वैसे तो तर्पण कही भी किया जा सकता है परन्तु नदी तट विशेष रहते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे तीर्थ हैं जहा पर अनुष्ठान बहुत पुण्यशाली माने जाते हैं-
  1. अयोध्या जहा पर श्री राम का मंदिर है.
  2. मथुरा जो की कृष्ण का शहर है.
  3. हरिद्वार जो की गंगा किनारे हैं.
  4. काशी जो की विश्वनाथ की नगरी है. 
  5. कांछी जो की तमिलनाडु में है.
  6. उज्जैन जो की माँ क्षिप्रा के तट पर है और महाकाल की नगरी है.
  7. जगन्नाथपुरी
अतः पितरो की प्रसन्नता के लिए अनुष्ठान करे और जीवन को धन्य बनाए, सफल बनाए.
सभी की उन्नति हो, सभी का कल्याण हो, सभी का मंगल हो.

Shradh paks se sambandhit kuch tathya, श्राद्ध से सम्बंधित कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य, Facts Related To Shraadha, तर्पण में उपयोग होने वाले वस्तुए, गोत्र का महत्तव , पितरो को प्रसन्न करने का सही समय, तर्पण के लिए 7 मुख्य स्थल.

Comments

Popular posts from this blog

Suar Ke Daant Ke Totke

Jyotish Me Suar Ke Daant Ka Prayog, pig teeth locket benefits, Kaise banate hai suar ke daant ka tabij, क्या सूअर के दांत का प्रयोग अंधविश्वास है.

सूअर को साधारणतः हीन दृष्टि से देखा जाता है परन्तु यही सूअर पूजनीय भी है क्यूंकि भगवान् विष्णु ने वराह रूप में सूअर के रूप में अवतार लिया था और धरती को पाताल लोक से निकाला था. और वैसे भी किसी जीव से घृणा करना इश्वर का अपमान है , हर कृति इस विश्व में भगवान् की रचना है.
सूअर दांत के प्रयोग के बारे में आगे बताने से पहले कुछ महत्त्वपूर्ण बाते जानना चाहिए :इस प्रयोग में सिर्फ जंगली सूअर के दांत का प्रयोग होता है.किसी सूअर को जबरदस्त मार के प्रयोग में लाया गया दांत काम नहीं आता है अतः किसी भी प्रकार के हिंसा से बचे और दुसरो को भी सचेत करे.वैदिक ज्योतिष में सूअर के दांत के प्रयोग के बारे में उल्लेख नहीं मिलता है.इसका सूअर के दांत के प्रयोग को महुरत देख के ही करना चाहिए.कई लोगो का मनना है की सुकर दन्त का प्रयोग अंधविश्वास है परन्तु प्रयोग करके इसे जांचा जा सकता है , ऐसे अनेको लोग है जो अपने बच्चो को इसका ताबीज पहनाते हैं और कुछ लोग खुद भी पहनते है …

Kala Jadu Kaise Khatm Kare

काला जादू क्या है , कैसे पता करे काला जादू के असर को, कैसे ख़त्म करे कला जादू के असर को, hindi में जाने काले जादू के बारे में. काला जादू अपने आप में एक खतरनाक विद्या है जो की करने वाले, करवाने वाले और जिस पर किया जा रहा है उन सब का नुक्सान करता है. यही कारण है की इस नाम से भी भय लगता है. अतः ये जरुरी है की इससे जितना हो सके बचा जाए और जितना हो सके उतने सुरक्षा के उपाय किया जाए.
ज्योतिष संसार के इस लेख में आपको हम उसी विषय में अधिक जानकारी देंगे की कैसे हम काले जादू का पता कर सकते हैं और किस प्रकार इससे बचा जा सकता है. प्रतियोगिता अच्छी होती है परन्तु जब ये जूनून बन जाती है तब व्यक्ति गलत ढंग से जीतने के उपाय करने से भी नहीं चुकता है. आज के इस प्रतियोगिता के युग में लोग बस जीतना चाहते हैं और इसके लिए किसी भी हद तक जाने से नहीं चुकते हैं और यही पर काला जादू का प्रयोग करने की कोशिश करते है. संपर्क करे ज्योतिष से मार्गदर्शन के लिए >>
आखिर में क्या है काला जादू? हर चीज के दो पहलु होते हैं एक अच्छा और एक बुरा. काला जादू तंत्र, मंत्र यन्त्र का गलत प्रयोग है जिसके अंतर्गत कुछ शक्तियों को प…

Gola Khisakna Kya Hota Hai Aur Iska Ilaaj Kya Hai

Kya Hota hai gola khisakna, nabhi hatne ka matlab kya hai, kaise thik kar sakte hain dharan ko, janiye kuch asaan tarike nabhi ko thik karne ke.
साधारण शब्दों में नाभि खिसकना : जब हम बात करते हैं शारीर के मध्य इस्थान का तब नाभि का ध्यान आता है, जब हम योग के सन्दर्भ में मनिपुरक चक्र की बात करते हैं तब हमे ध्यान आता है नाभि का, जब भी पेट में दर्द होता है तो ध्यान आता है नाभि का. अतः नाभि हमारे शारीर का एक महात्वपूर्ण अंग है, इसी नाभि को गोला या धारण भी कहते हैं. अंग्रेजी में नाभि को Navel कहते हैं.
ये वास्तव में एक संगम है जहाँ से नाड़ियाँ गुजरती हैं हर प्रकार की , अतः यहाँ पर जाल बना हुआ है नाड़ियों का, इन नाड़ियो को सहारा देने के लिए मांसपेशियां भी होती है और जब ये अपनी जगह से कभी खिसकती हैकिसी कारण से तो उसे कहते हैं “नाड़ी का खिसकना या गोला खिसकना या धरण ”. कभी ये बाएं खिसकता है, कभी ये दायें खिसकता है, कभी ऊपर और कभी निचे खिसकता है.
गोला खिसकने के ज्योतिषीय कारण: मैंने अपने शोध में पाया है की जिन लोगो का गोला ज्यादा खिसकता है उनके कुंडली में छ्टे भाव में कमजोरी होती है अर्थात वहां या त…