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Guru Kab Uday Honge Kya Prabhav Hoga 12 Rashiyo Par

Guru kab uday honge, गुरु कब उदय होंगे, 12 rashiyo par kya asar hoga guru ke uday hone se, Jupiter Rise 2026 in cancer. देव गुरु बृहस्पति 9 August रविवार को कर्क  राशि में उदित हो रहे हैं जिससे अनेक लोगों को फायदा होगा. व्यापार बढेगा, लोग नए निर्णय ले पायेंगे, लोगों के जीवन में नई उर्जा का संचार होगा. गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, सुख-समृद्धि-सम्पन्नता, अध्यात्म और भाग्य का कारक माना जाता है।  गुरु ग्रह के उदय से विवाह, शिक्षा, आर्थिक लाभ, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में सुधार के रास्ते खुलने लगते हैं.  Guru Kab Uday Honge Kya Prabhav Hoga 12 Rashiyo Par 9 अगस्त को कर्क राशि में गुरु का उदय: 12 राशियों का विस्तृत राशिफल 9 अगस्त को गुरु ग्रह कर्क राशि में उदय होने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान, भाग्य, धन, संतान, विवाह, धर्म और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी हैं, इसलिए इनके उदय का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। आइए जानते हैं कि गुरु के कर्क राशि में उदय होने से आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा। मेष रा...

Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen

Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen? जानें सही तिथि

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस महीने में आने वाला सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना गया है। इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि प्रदोष व्रत 10 अगस्त को रखा जाए या 11 अगस्त को?

वैदिक पंचांग के अनुसार उत्तर बिल्कुल स्पष्ट है।

Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen 2026? पूजा का शुभ मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि, पूजा विधि, FAQ.
Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen


त्रयोदशी तिथि

  • प्रारंभ: 10 अगस्त 2026, सुबह 8:03 बजे
  • समाप्ति: 11 अगस्त 2026, सुबह 4:55 बजे

चूंकि प्रदोष काल 10 अगस्त को पड़ रहा है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 (सोमवार) को ही रखा जाएगा।


प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

प्रदोष पूजा का सर्वोत्तम समय

शाम 7:09 बजे से रात 9:23 बजे तक

इसी समय भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

अभिजित मुहूर्त

दोपहर 12:18 बजे से 1:09 बजे तक

यदि किसी कारणवश पूजा की तैयारी करनी हो या शुभ कार्य प्रारंभ करना हो, तो अभिजित मुहूर्त भी अत्यंत शुभ माना जाता है।


सोम प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

इस व्रत के प्रमुख लाभ बताए गए हैं—

  • मानसिक तनाव कम होता है।
  • मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
  • आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
  • संतान सुख और परिवार की उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
  • भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

यदि आप पहली बार प्रदोष व्रत रख रहे हैं, तो यह सरल पूजा विधि अपनाएं।

सुबह

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव का ध्यान करें।
  • व्रत का संकल्प लें।

दिनभर

  • फलाहार या निर्जल व्रत अपनी श्रद्धा के अनुसार रखें।
  • सात्विक भोजन का पालन करें।
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।
  • शिव मंत्र का जाप करते रहें।

शाम को प्रदोष काल में

  • शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
  • गंगाजल अर्पित करें।
  • दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
  • धूप और दीप जलाएं।
  • शिव चालीसा एवं शिव आरती करें।
  • "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

प्रदोष व्रत में क्या करें?

  • भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
  • नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहें।
  • गरीबों को भोजन कराएं।
  • सफेद वस्तुओं का दान करें।
  • शिव मंदिर में दीपक जलाएं।

प्रदोष व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

  • तामसिक भोजन से बचें।
  • मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • झूठ न बोलें।
  • क्रोध और विवाद से दूर रहें।
  • पूजा के समय मन को शांत रखें।

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

स्कंद पुराण और शिव पुराण में प्रदोष काल का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं।

ऐसा भी माना जाता है कि प्रदोष काल में शिव पूजा करने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है तथा जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।


भगवान शिव को क्या अर्पित करें?

प्रदोष व्रत में भगवान शिव को निम्न वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है—

  • बेलपत्र
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • दही
  • शहद
  • घी
  • शक्कर
  • भस्म
  • धतूरा
  • आक के फूल
  • सफेद चंदन
  • सफेद पुष्प

प्रदोष व्रत का उद्यापन कब करें?

प्रदोष व्रत का उद्यापन सामान्यतः 11, 21 या 26 व्रत पूरे होने के बाद किया जाता है। उद्यापन के दिन भगवान शिव का विशेष अभिषेक, हवन, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करने की परंपरा है।


निष्कर्ष

यदि आप सोच रहे हैं कि Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen 2026, तो पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष का सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त सुबह 8:03 बजे से प्रारंभ होकर 11 अगस्त सुबह 4:55 बजे तक रहेगी, लेकिन प्रदोष काल 10 अगस्त को प्राप्त होने के कारण इसी दिन व्रत और पूजा करना शुभ एवं शास्त्रसम्मत है।

भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल शाम 7:09 बजे से रात 9:23 बजे तक श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा अवश्य करें।


FAQ (Rank Math FAQ Schema)

1. Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen 2026?

प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा।

2. प्रदोष पूजा का शुभ समय क्या है?

शाम 7:09 बजे से रात 9:23 बजे तक।

3. त्रयोदशी तिथि कब शुरू होगी?

10 अगस्त 2026 को सुबह 8:03 बजे।

4. त्रयोदशी तिथि कब समाप्त होगी?

11 अगस्त 2026 को सुबह 4:55 बजे।

5. सोम प्रदोष व्रत से क्या लाभ मिलता है?

इस व्रत से मानसिक शांति, दांपत्य सुख, पारिवारिक खुशहाली तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

Pradosh Ka Vrat Kab Rakhen 2026? जानें 10 या 11 अगस्त में सही प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि, पूजा विधि, सोम प्रदोष व्रत का महत्व और FAQ.

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