गुरु कब अस्त होंगे? 15 जुलाई 2026 से शुरू होगा प्रभाव, जानें 12 राशियों पर क्या असर पड़ेगा और क्यों
वैदिक ज्योतिष में गुरु (बृहस्पति) को देवताओं का गुरु, ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान, शिक्षा, विवाह, धन, आध्यात्मिकता और शुभ फलों का कारक ग्रह माना जाता है। जब गुरु सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाते हैं, तब उनकी किरणें सूर्य के तेज में विलीन हो जाती हैं। इस अवस्था को गुरु अस्त (Combust Jupiter) कहा जाता है।
15 जुलाई 2026 को गुरु अस्त होने जा रहे हैं। इस अवधि में गुरु की शुभता सामान्य रूप से कमजोर मानी जाती है। विशेष रूप से विवाह, शिक्षा, धार्मिक कार्य, निवेश, संतान से जुड़े निर्णय और बड़े शुभ कार्यों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में गुरु की वास्तविक स्थिति, दृष्टि और दशा के अनुसार इसके परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।
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| Guru Kab Ast Honge |
गुरु अस्त क्यों होते हैं?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत निकट पहुंच जाता है, तब सूर्य का तेज उस ग्रह के प्रभाव को कम कर देता है। इसी स्थिति को ग्रह का अस्त होना कहा जाता है।
गुरु ग्रह ज्ञान, विवेक, धार्मिकता, शिक्षा, संतान, विवाह, धन और भाग्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इनके अस्त होने पर इन क्षेत्रों में थोड़ी धीमी गति, विलंब या अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
गुरु अस्त का सामान्य प्रभाव
- शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।
- विवाह योग्य लोगों के लिए रिश्तों में देरी संभव है।
- निवेश और आर्थिक फैसलों में सावधानी आवश्यक रहेगी।
- धार्मिक कार्यों में रुचि कुछ कम हो सकती है।
- संतान से जुड़े मामलों में धैर्य रखना होगा।
- गुरुजनों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध मधुर रखें।
15 जुलाई 2026 से कर्क राशि में गुरु अस्त: 12 राशियों का विस्तृत वैदिक राशिफल
मेष राशि
गुरु का कर्क राशि में अस्त होना आपके चौथे भाव को प्रभावित करेगा। इस दौरान घर-परिवार, माता के स्वास्थ्य और संपत्ति संबंधी मामलों में थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता होगी। यदि आप नया घर, वाहन या भूमि खरीदने की योजना बना रहे हैं तो निर्णय सोच-समझकर लें। पारिवारिक वातावरण में छोटी-छोटी बातों पर मतभेद हो सकते हैं, इसलिए संयमित व्यवहार लाभदायक रहेगा। नौकरी करने वालों को कार्यस्थल पर वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा, लेकिन अपेक्षित पदोन्नति या लाभ मिलने में कुछ विलंब हो सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अधिक एकाग्रता रखनी होगी। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दें। धार्मिक कार्यों और गुरुजनों के आशीर्वाद से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
वृषभ राशि
गुरु का अस्त होना आपके तीसरे भाव में प्रभाव डालेगा। इस अवधि में साहस और आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक होगा। भाई-बहनों के साथ संबंधों में मधुरता बनाए रखें, क्योंकि छोटी गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। यदि आप व्यवसाय में नए समझौते या साझेदारी करने की सोच रहे हैं तो सभी दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करें। नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का फल मिलेगा, लेकिन पहचान मिलने में समय लग सकता है। आर्थिक मामलों में आय बनी रहेगी, परंतु बचत पर विशेष ध्यान देना होगा। यात्रा के योग बनेंगे, हालांकि यात्रा के दौरान सावधानी आवश्यक है। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों को निरंतर प्रयास करते रहने से सफलता मिलेगी।
मिथुन राशि
गुरु का अस्त होना आपके दूसरे भाव को प्रभावित करेगा। इस समय धन संचय और पारिवारिक मामलों में सतर्कता आवश्यक होगी। किसी भी प्रकार का बड़ा निवेश सोच-समझकर करें। परिवार में संवाद की कमी विवाद का कारण बन सकती है, इसलिए अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें। नौकरी और व्यापार दोनों में आय के नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन लाभ अपेक्षा से थोड़ा कम रह सकता है। स्वास्थ्य के मामले में खान-पान पर ध्यान देना आवश्यक होगा। विद्यार्थियों के लिए यह समय मेहनत बढ़ाने का संकेत देता है। धार्मिक कार्यों और दान-पुण्य से मानसिक शांति प्राप्त होगी।
कर्क राशि
गुरु आपकी ही राशि में अस्त हो रहे हैं, इसलिए इसका प्रभाव सबसे अधिक आपके व्यक्तित्व, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास पर दिखाई देगा। इस समय बड़े निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। करियर में प्रगति की गति कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन आपकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ संवाद बनाए रखना आवश्यक होगा। स्वास्थ्य में पाचन संबंधी समस्याएं या थकान महसूस हो सकती है। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी, लेकिन खर्चों में वृद्धि संभव है। आध्यात्मिक गतिविधियों और ध्यान से मानसिक संतुलन बना रहेगा। यह समय आत्ममंथन और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए उत्तम रहेगा।
सिंह राशि
गुरु का अस्त होना आपके बारहवें भाव में रहेगा। इस दौरान खर्चों में वृद्धि हो सकती है, इसलिए बजट बनाकर चलना उचित रहेगा। विदेश से जुड़े कार्यों में कुछ देरी संभव है, लेकिन अंततः सफलता मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। स्वास्थ्य के मामले में नींद की कमी और मानसिक तनाव से बचें। व्यापार में नए निवेश फिलहाल टालना बेहतर रहेगा। आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी और धार्मिक यात्राओं के योग भी बन सकते हैं। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से शुभ फल प्राप्त होंगे।
कन्या राशि
गुरु का अस्त होना आपके ग्यारहवें भाव में प्रभाव डालेगा। आय के स्रोत बने रहेंगे, लेकिन अपेक्षित लाभ मिलने में कुछ समय लग सकता है। मित्रों और सामाजिक संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखें। व्यापार में नए अवसर प्राप्त होंगे, लेकिन जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय न लें। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन नियमित दिनचर्या बनाए रखना आवश्यक होगा। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।
तुला राशि
गुरु का अस्त होना आपके दशम भाव में रहेगा, जिससे करियर और कार्यक्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। नौकरी बदलने या नए व्यवसाय की शुरुआत करने से पहले अच्छी तरह विचार करें। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध मधुर रखें। व्यापार में लाभ के अवसर मिलेंगे, लेकिन निर्णय लेते समय अनुभव का सहारा लें। परिवार का सहयोग मिलेगा, जिससे मानसिक संतुलन बना रहेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य से अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य में थकान और कार्यभार के कारण तनाव महसूस हो सकता है। नियमित योग और ध्यान लाभदायक रहेगा।
वृश्चिक राशि
गुरु का अस्त होना आपके नवम भाव में प्रभाव डालेगा। भाग्य का साथ थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है, इसलिए केवल भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय कर्म पर ध्यान दें। उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा और धार्मिक कार्यों में कुछ विलंब संभव है। पिता या गुरु समान व्यक्ति के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नौकरी और व्यवसाय में मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहेगी। विद्यार्थियों के लिए यह समय अनुशासन बनाए रखने का है। धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।
धनु राशि
गुरु आपके स्वामी ग्रह हैं और उनका अस्त होना आपके आठवें भाव को प्रभावित करेगा। इस दौरान अचानक होने वाले खर्चों और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार के जोखिम भरे निवेश से बचें। शोध, गूढ़ विद्या और आध्यात्मिक विषयों में रुचि बढ़ सकती है। नौकरी में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन कार्यभार बढ़ सकता है। पारिवारिक जीवन में धैर्य और समझदारी से कार्य लें। जीवनसाथी के साथ संबंधों में विश्वास बनाए रखें। नियमित स्वास्थ्य जांच कराना लाभदायक रहेगा।
मकर राशि
गुरु का अस्त होना आपके सप्तम भाव में रहेगा। वैवाहिक जीवन और साझेदारी के मामलों में धैर्य रखने की आवश्यकता होगी। जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें। व्यवसाय में साझेदारी से जुड़े निर्णय सावधानीपूर्वक लें। नौकरी में सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना आवश्यक होगा। आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, हालांकि तनाव से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें। परिवार में शुभ कार्यों की योजना बन सकती है।
कुंभ राशि
गुरु का अस्त होना आपके छठे भाव को प्रभावित करेगा। इस समय विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों से सावधान रहने की आवश्यकता होगी, लेकिन अंततः आपकी मेहनत आपको सफलता दिलाएगी। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यापार में पुराने विवाद समाप्त होने के संकेत हैं। स्वास्थ्य के मामले में खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें। ऋण लेने या देने में सावधानी रखें। विद्यार्थियों के लिए यह समय निरंतर अभ्यास करने का है। नियमित पूजा-पाठ और सेवा कार्य शुभ फल देंगे।
मीन राशि
गुरु आपके स्वामी ग्रह हैं और उनका अस्त होना आपके पंचम भाव को प्रभावित करेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अधिक एकाग्रता रखनी होगी। प्रेम संबंधों में धैर्य और स्पष्ट संवाद आवश्यक रहेगा। संतान पक्ष से जुड़ी चिंताएं हो सकती हैं, लेकिन समय के साथ समाधान मिलेगा। नौकरी और व्यवसाय में रचनात्मक कार्यों से लाभ होगा। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहेगी, हालांकि सट्टा या अत्यधिक जोखिम वाले निवेश से बचना उचित रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
गुरु अस्त के दौरान क्या करें?
- गुरुवार का व्रत रखें।
- भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें।
- "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का नियमित जप करें।
- गुरुजनों, शिक्षकों और बुजुर्गों का सम्मान करें।
- धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यों में भाग लें।
- ज्योतिष की सलाह लेके पुखराज धारण कर सकते हैं.
क्या गुरु अस्त के समय शुभ कार्य किए जा सकते हैं?
वैदिक ज्योतिष की मान्यता के अनुसार गुरु अस्त की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन और अन्य प्रमुख मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी भी शुभ कार्य के लिए व्यक्तिगत जन्मकुंडली और स्थानीय पंचांग के अनुसार योग्य ज्योतिषाचार्य से मुहूर्त अवश्य जांच लेना चाहिए।
निष्कर्ष
15 जुलाई 2026 को गुरु के अस्त होने से सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है। यह समय धैर्य, विवेक और सोच-समझकर निर्णय लेने का रहेगा। शिक्षा, विवाह, संतान, धन, धर्म और भाग्य से जुड़े मामलों में थोड़ी धीमी गति या विलंब संभव है। यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में गुरु मजबूत स्थिति में हैं या शुभ दशा चल रही है, तो नकारात्मक प्रभाव काफी कम हो सकते हैं। इसलिए सामान्य राशिफल के साथ व्यक्तिगत कुंडली का विश्लेषण भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
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