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Papankush Ekadashi Kab Hai | Katha of पापांकुशा एकादशी

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Shree Adya Stotram Lyrics with Hindi Meanings माँ काली की कृपा के लिए आद्य स्तोत्रम्

Shree Adya Stotram, Lyrics of आद्य स्तोत्रम् in sanskrit, Hindi Meanings of Strotram, क्या फायदे हैं काली आद्य स्तोत्रम् पाठ के.

🌺 श्री आद्य काली स्तोत्रम् –

  1. यह स्तोत्र देवी आद्या काली की महिमा का वर्णन करता है।
  2. इसका नियमित पाठ करने से:
    • मृत्यु और रोग का भय दूर होता है।
    • संतान की प्राप्ति होती है।
    • बंधन से मुक्ति मिलती है।
    • युद्ध या संकट में विजय मिलती है।
    • घर में अग्नि और चोरी का भय नहीं रहता।
    • सभी देवता प्रसन्न रहते हैं।
  3. यह स्तोत्र देवी के विभिन्न रूपों और उनके विभिन्न तीर्थस्थानों में निवास का वर्णन करता है।
  4. इसके पाठ से करोड़ों तीर्थों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
  5. यह ज्वर, रोग और भय का नाश करता है।
  6. साधक को सुख, भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Shree Adya Stotram, Lyrics of आद्य स्तोत्रम् in sanskrit, Hindi Meanings of Strotram, क्या फायदे हैं काली आद्य स्तोत्रम् पाठ के.
Shree Adya Stotram Lyrics

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श्री आद्य काली स्तोत्रं

ब्रह्मोवाच
शृणु वत्स प्रवक्ष्यामि आद्यास्तोत्रं महाफलम् ।
यः पठेत् सततं भक्त्या स एव विष्णुवल्लभः ॥ 1 ॥ Shree Adya Stotram

मृत्युर्व्याधिभयं तस्य नास्ति किंचित् कलौ युगे ।
अपुत्रा लभते पुत्रं त्रिपक्षं श्रवणं यदि ॥ 2 ॥

द्वौ मासौ बंधनान्मुक्ति विप्रवक्त्रात् श्रुतं यदि ।
मृतवत्सा जीववत्सा षण्मासं श्रवणं यदि ॥ 3 ॥ Shree Adya Stotram

नौकायां संकटे युद्धे पठनाज्जयमाप्नुयात् ।
लिखित्वा स्थापयेद्गेहे नाग्निचौरभयं क्वचित् ॥ 4 ॥

राजस्थाने जयी नित्यं प्रसन्नाः सर्वदेवता ।
ॐ ह्रीम् ।
ब्रह्माणी ब्रह्मलोके च वैकुंठे सर्वमंगला ॥ 5 ॥

इंद्राणी अमरावत्यामंबिका वरुणालये ।
यमालये कालरूपा कुबेरभवने शुभा ॥ 6 ॥

महानंदाग्निकोणे च वायव्यां मृगवाहिनी ।
नैरृत्यां रक्तदंता च ऐशान्यां शूलधारिणी ॥ 7 ॥

पाताले वैष्णवीरूपा सिंहले देवमोहिनी ।
सुरसा च मणिद्विपे लंकायां भद्रकालिका ॥ 8 ॥ Shree Adya Stotram

रामेश्वरी सेतुबंधे विमला पुरुषोत्तमे ।
विरजा औड्रदेशे च कामाक्ष्या नीलपर्वते ॥ 9 ॥

कालिका वंगदेशे च अयोध्यायां महेश्वरी ।
वाराणस्यामन्नपूर्णा गयाक्षेत्रे गयेश्वरी ॥ 10 ॥

कुरुक्षेत्रे भद्रकाली व्रजे कात्यायनी परा ।
द्वारकायां महामाया मथुरायां महेश्वरी ॥ 11 ॥

क्षुधा त्वं सर्वभूतानां वेला त्वं सागरस्य च ।
नवमी शुक्लपक्षस्य कृष्णस्यैकादशी परा ॥ 12 ॥

दक्षसा दुहिता देवी दक्षयज्ञविनाशिनी ।
रामस्य जानकी त्वं हि रावणध्वंसकारिणी ॥ 13 ॥

चंडमुंडवधे देवी रक्तबीजविनाशिनी ।
निशुंभशुंभमथिनी मधुकैटभघातिनी ॥ 14 ॥

विष्णुभक्तिप्रदा दुर्गा सुखदा मोक्षदा सदा ।
आद्यास्तवमिमं पुण्यं यः पठेत् सततं नरः ॥ 15 ॥

सर्वज्वरभयं न स्यात् सर्वव्याधिविनाशनम् ।
कोटितीर्थफलं तस्य लभते नात्र संशयः ॥ 16 ॥

जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः ।
नारायणी शीर्षदेशे सर्वांगे सिंहवाहिनी ॥ 17 ॥ Shree Adya Stotram

शिवदूती उग्रचंडा प्रत्यंगे परमेश्वरी ।
विशालाक्षी महामाया कौमारी शंखिनी शिवा ॥ 18 ॥

चक्रिणी जयदात्री च रणमत्ता रणप्रिया ।
दुर्गा जयंती काली च भद्रकाली महोदरी ॥ 19 ॥

नारसिंही च वाराही सिद्धिदात्री सुखप्रदा ।
भयंकरी महारौद्री महाभयविनाशिनी ॥ 20 ॥ Shree Adya Stotram

इति श्रीब्रह्मयामले ब्रह्मनारदसंवादे श्री आद्या स्तोत्रम् सम्पूर्णं


📖 श्लोकवार हिंदी अर्थ (Simple Hindi Meaning)

श्लोक 1

ब्रह्माजी कहते हैं — हे पुत्र! मैं तुम्हें यह आद्या स्तोत्र बताता हूँ जो महान फल देने वाला है। जो इसे भक्ति से पढ़ता है, वह भगवान विष्णु का प्रिय बनता है।

श्लोक 2

कलियुग में उसे मृत्यु और रोग का भय नहीं रहता। जो तीन पक्ष तक इसे सुनता है, उसे संतान प्राप्त होती है।

श्लोक 3

दो महीने तक ब्राह्मण से सुनने पर बंधन से मुक्ति मिलती है। छह महीने सुनने से मृत संतान भी जीवित रहती है। Shree Adya Stotram

श्लोक 4

नौका, युद्ध या संकट में इसका पाठ विजय देता है। इसे लिखकर घर में रखने से अग्नि और चोर का भय नहीं रहता।

श्लोक 5–6

देवी ब्रह्मलोक में ब्रह्माणी, वैकुण्ठ में सर्वमंगला, अमरावती में इंद्राणी, वरुणलोक में अंबिका, यमलोक में कालरूपा और कुबेर के घर में शुभा के रूप में रहती हैं।

श्लोक 7

अग्निकोण में महानंदा, वायव्य दिशा में मृगवाहिनी, नैऋत्य में रक्तदंता और ईशान में शूलधारिणी रूप में स्थित हैं।

श्लोक 8 Shree Adya Stotram

पाताल में वैष्णवी, सिंहल में देवमोहिनी, मणिद्वीप में सुरसा और लंका में भद्रकालिका रूप में हैं।

श्लोक 9

सेतुबंध (रामेश्वर) में रामेश्वरी, पुरुषोत्तम में विमला, उड़ीसा में विरजा और नील पर्वत में कामाख्या हैं।

श्लोक 10

वंगदेश में कालिका, अयोध्या में महेश्वरी, वाराणसी में अन्नपूर्णा और गया में गयेश्वरी हैं।

श्लोक 11

कुरुक्षेत्र में भद्रकाली, वृंदावन में कात्यायनी, द्वारका में महामाया और मथुरा में महेश्वरी हैं।

श्लोक 12

हे देवी! आप सभी प्राणियों की भूख हैं और समुद्र की सीमा हैं। शुक्ल पक्ष की नवमी और कृष्ण पक्ष की एकादशी भी आप ही हैं। Shree Adya Stotram

श्लोक 13

आप दक्ष की पुत्री सती हैं और दक्षयज्ञ का विनाश करने वाली हैं। आप राम की पत्नी सीता बनकर रावण का नाश करने वाली हैं।

श्लोक 14

आप चंड-मुंड का वध करने वाली, रक्तबीज का नाश करने वाली, शुंभ-निशुंभ का मर्दन करने वाली और मधु-कैटभ का संहार करने वाली हैं।

श्लोक 15

आप विष्णुभक्ति देने वाली, दुर्गा, सुख और मोक्ष देने वाली हैं। जो इस स्तोत्र का पाठ करता है—

श्लोक 16

उसे ज्वर और रोग का भय नहीं रहता। उसे करोड़ों तीर्थों के बराबर फल मिलता है। Shree Adya Stotram

श्लोक 17–20

देवी के अनेक रूप साधक की रक्षा करते हैं — आगे जया, पीछे विजया, सिर पर नारायणी, पूरे शरीर में सिंहवाहिनी, शिवदूती, उग्रचंडा, विशालाक्षी, दुर्गा, काली, भद्रकाली, नारसिंही, वाराही आदि रूप भय का नाश करते हैं।


🌸 निष्कर्ष

यह स्तोत्र देवी आद्या काली की सर्वव्यापक शक्ति का वर्णन करता है।
वे हर लोक, दिशा और तीर्थ में विभिन्न रूपों में विराजमान हैं।
इसका श्रद्धा से पाठ करने से:

  • भय समाप्त होता है
  • रोग दूर होते हैं
  • विजय मिलती है
  • सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है
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