Skip to main content

Latest Astrology Updates in Hindi

Surya Ka Mithun Rashi Mai Gochar Ka Prabhav

Surya Ka Mithun Rashi Mai Gochar Ka Prabhav, Surya Mithun Rashi Mai kab jayenge, surya gochar june 2024, मिथुन संक्रांति क्या है, १२ राशियों पर असर | मिथुन संक्रांति का महत्त्व: Surya Ka Mithun Rashi Mai Gochar 2024:  जब सूर्य वृषभ राशि से मिथुन में प्रवेश करते हैं  तो उसे मिथुन संक्रांति कहते हैं| ज्योतिष के हिसाब से इस दिन के बाद अगले करीब ३१ दिन तक सूर्य मिथुन राशी में रहता है| जब सूर्य मिथुन राशि में रहते हैं तो भारत के गुवाहाटी में कामख्या मंदिर में  अम्बुबाची का मेला लगता है जब मंदिर के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद किये जाते हैं, ऐसा कहा जाता है की साल में एक बार माता कामख्या रजस्वला होती है अतः इसीलिए कुछ दिनों के लिए मंदिर का पठ बंद रहता है और इन्ही दिनों मंदिर में मेला लगता है | ये सिर्फ साल में एक बार होता है और पुरे विश्व से लोग यहाँ आते है| भारत के बहुत से भागो में इस दिन लोग भगवान् विष्णु की पूजा करते हैं. कई भागो में मानसून आ जाता है और लोग बारिश का भी आनंद लेते हैं|  Surya Ka Mithun Rashi Mai Gochar 2024 Surya Ka Mithun Rashi Mai Gochar Ka Prabhav आइए जानते हैं कि सू

Supt Shaktiyo Ko Kaise Jagrut Karen

हमारे अन्दर की असीमित शक्तियों को कैसे जागृत करें, क्या फायदे हैं सुप्त शक्तियों को जागृत करने के, super energy generator in our body, जानिए वो तरीके जिनसे हम पा सकते हैं अद्भुत और अविश्वसनीय शक्तियां | 

हमारा शरीर अद्भुत तरीके से बना हुआ है जिसमे पञ्च तत्त्व को सभी ने स्वीकारा है जिसमे शामिल हैं पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि और इसी के कारण हम इनके बिना जीवित नहीं रह सकते हैं | 

योग ग्रंथो के अनुसार जब शरीर में पंचतत्त्व बिगड़ते हैं तो रोगों की उत्पत्ति होती है और जो व्यक्ति इनको बैलेंस कर लेता है वो एक स्वस्थ और सफल जीवन जीता है |

और जो व्यक्ति इन पञ्च तत्त्वों पर अधिकार कर लेता है वो सिद्ध हो जाते हैं और अपनी ईच्छा से कुछ भी करने में समर्थ हो जाते हैं |

योग ग्रंथो के अनुसार हमारे शरीर में असीमित शक्तियां मौजूद हैं जिन्हें हम जागृत भी कर सकते हैं और एक अलग ही दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं जहाँ दिव्यता है, परम शांति, परम शक्तियां हैं, परम आनंद है |

असीमित शक्तियों को कैसे जागृत करें, क्या फायदे हैं सुप्त शक्तियों को जागृत करने के, super energy generator in our body, kundlini ki shaktiyan.
Supt Shaktiyo Ko Kaise Jagrut Karen 

ये हमारा दुर्भाग्य है की जानकारी के अभाव में हम सुख और शांति के लिए दोस्त ढूंढते हैं, नए रिश्ते बनाते हैं, व्यापार करते हैं, नौकरी करते हैं, प्रेम करते हैं, शादी करते हैं  परन्तु सब करने के बाद भी सुख और शांति की प्राप्ति नहीं होती है |

तो आखिर उस सुख और शांति को प्राप्त करने का रास्ता क्या है ?

  • क्या संन्यास ले कर हिमालय की और जाने से सुख शांति प्राप्त होगी ?
  • क्या सबकुछ छोड़ कर सिर्फ ध्यान करने से सुख शांति प्राप्त होगी ?
  • क्या धार्मिक जगहों में रोज जाने से सुख शांति की प्राप्ति होगी ?
  • क्या ग्रंथो के अध्ययन से सफलता हासिल होगी ?

तो इसका जवाब है नहीं !

ये सब जगह और तरीके हमे कुछ समय के लिए शांत कर सकते हैं पर स्थाई सुख और शांति के लिए ये काफी नहीं है |

Watch Video Here

तो प्रश्न उठता है की क्या किया जाए जिससे हम वास्तविक सुख का अनुभव कर सके ?

  1. तो इसके लिए सबसे पहले हमे ये समझना होगा की हमारे अन्दर असीमित शक्तियां मौजूद हैं जिन्हें जगाना जरुरी है | इस बात का प्रमाण हमे योगियों की आत्मकथा/autobiography पढने से मिलेगा | वर्तमान में भी youtube और गूगल में हम ढूंढ सकते हैं उन लोगो को जिनके पास सामान्य व्यक्ति के मुकाबले कुछ ज्यादा शक्तियां देखने को मिलती है जिनमे योग साधना करने वाले, वैज्ञानिक, जादूगर आदि आते हैं जिन्होंने अपने अभ्यास से अनजाने सत्य का रहस्य लोगो के सामने प्रकट किया है और कुछ ऐसे कारनामे किये हैं जो की सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं है | तो ये बात तो साबित होती है की हमारे अन्दर अद्भुत शक्तियां मौजूद हैं |
  2. दूसरी बात हमे अपने शरीर के अन्दर मौजूद उस उर्जा के स्त्रोत का पता लगाना होगा जहाँ से पुरे शारीर को उर्जा मिलती है और योग ग्रंथो के अनुसार वो स्त्रोत है कुंडलिनी शक्ति /kundlini shakti | इसके प्रमाण को जानने के लिए अगर कुछ समय नियमित रूप से योग ग्रंथो में बताये गए चक्रों की जगह पर ध्यान किया जाए या फिर किसी शक्तिपात समर्थ गुरु के सानिध्य में रहा जाए तो हमे इस कुंडली शक्ति की मौजूदगी का अनुभव हो जाता है |
  3. तीसरी बात हमे ये विश्वास होना चाहिए की कोई शक्ति है जो की पुरे ब्रह्मांड को चला रहा है | इसका प्रमाण ये है की सूर्य और चन्द्र अपने समय पर उदित होते हैं, 9 ग्रह अपने अपने स्थान पर टिके हुए हैं, इंसान की संरचना जिस तरीके से हुई है वो आज तक कोई विज्ञान नहीं कर पाया है | तो ये भी सत्य है की कोई तो शक्ति है जो सबकुछ जानता है और जिसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है |

जब आपको ऊपर की 3 बातो पर भरोसा हो जाएगा तो अब आप नेक्स्ट लेवल के लिए तैयार है और वो है अभ्यास करना अपने अन्दर की सुप्त शक्तियों को जागने के लिए |

पढ़िए अद्भुत शक्तिचालिनी मुद्रा क्या होती है ?

आइये अब जानते हैं की सुप्त शक्तियों को जागृत करने के क्या फायदे हैं? 

  1. इसके द्वारा शरीर में उर्जा को बढ़ाया जा सकता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मन शांत और प्रसन्न रहने लगता है|
  2. सुप्त शक्तियों को जागृत करने से हमे ब्रहमांड के सत्य का पता चलने लगता है हम प्रकृति से और गहरे रूप से जुड़ पाते हैं | 
  3. पंचतत्त्वो पर अधिकार होने लगता है जिससे हम अविश्वसनीय लगने वाले कार्यो को भी कर पाते हैं | 
  4. हम न सिर्फ अपने जीवन को सुखी कर सकते हैं वरन दुसरो के लिए भी सुख के रास्ते खोल सकते हैं उनके पथ प्रदर्शक बन के |
  5. हम परम सुख और परम आनंद में अवस्थित रह सकते है |
  6. हम परिवार, समाज, देश और पूरे विश्व केलिए उपयोगी हो जाते हैं सही मायने में |

तो अब सोचने की बात ये है की जब सुप्त शक्तियों को जगाने के इतने फायदे हैं तो फिर सभी इन शक्तियों को जगाने का अभ्यास क्यों नहीं करते हैं |

तो इसका उत्तर सरल है की अद्भुत और चमत्कारी शक्तियों को प्राप्त करना आसान नहीं होता है | सोचिये जब कुछ हजार की नौकरी के लिए हमे अपना आधा दिन दे देते हैं तो असीमित शक्तियों को पाने के लिए कितने अभ्यास की जरुरत है | 

परन्तु एक सत्य और है की अगर सोच समझकर सही तरीके से आगे बढ़ा जाए तो हम अपने दैनिक कार्यो को करते हुए भी नियमित अभ्यास से अपने अन्दर के सुप्त शक्तियों को जागृत कर सकते हैं | 

आइये अब जानते हैं सुप्त शक्तियों को जागृत करने के कौन कौन से प्रकार हैं?

  1. सबसे आसान तरीका है किसी शक्तिपात समर्थ गुरु के सानिध्य में रहके साधना की जाए | पर सभी को ऐसे सिद्ध गुरु मिलना मुश्किल होता है |
  2. दूसरा तरीका है की अष्टांग योग का अभ्यास करना | अष्टांग योग, योग के आठ अंगों का एक समूह है. यह एक प्राचीन भारतीय अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने के लिए हमारे ऋषि मुनियों द्वारा बनाया गया है |
  3. अष्टांग योग के आठ अंग हैं:

    1. यम: नैतिक सिद्धांत जो हमें दूसरों के साथ अच्छे तरीके से व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं |
    2. नियम: शारीरिक और मानसिक विकास के लिए नियमित अभ्यास करना |
    3. आसन: शरीर के संतुलन और लचीलेपन को बढ़ाने के लिए किए जाने वाले शारीरिक मुद्रा|
    4. प्राणायाम: सांस को नियंत्रित करने के लिए किए जाने वाले अभ्यास |
    5. प्रत्याहार: इंद्रियों को बाहरी दुनिया अर्थात भ्रम से दूर करने और ध्यान को भीतर की ओर केंद्रित करने के लिए किए जाने वाले अभ्यास |
    6. धारणा: एक विचार को बनाए रखने के लिए किए जाने वाले अभ्यास |
    7. ध्यान: मन को शांत और स्थिर करने के लिए किए जाने वाले अभ्यास|
    8. समाधि: मन को पूर्ण शांति और एकता की स्थिति में लाने के लिए किए जाने वाले अभ्यास |

    अष्टांग योग एक समग्र अभ्यास है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है. यह तनाव को कम करने, मांसपेशियों को मजबूत करने, लचीलेपन में सुधार करने, और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है. अष्टांग योग मन को शांत और स्थिर करने, ध्यान और एकाग्रता में सुधार करने, और तनाव और चिंता को कम करने में भी मदद करता है. अष्टांग योग एक शक्तिशाली अभ्यास है जो जीवन के सभी पहलुओं में सुधार करता है और सुप्त शक्तियों को जागृत करने लगता है |

  4. तीसरा तरीका है भक्तियोग में प्रविष्ट होना जिसके अंतर्गत अपने इष्ट को ही सबकुछ मानके उनसे मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना करना जैसे मीरा जी ने किया था, राधा रानी ने किया था | जब हम ह्रदय से जुड़ के प्रार्थना करने लगते हैं तो स्वतः ही अष्टांग योग के नियम क्रियाशील होने लगते हैं और हमारे अन्दर की सुप्त शक्तियां जागृत होने लगती है | हम परम सुख और परम शांति की और बढ़ने लगते हैं |

याद रखिये सुप्त शक्तियों को जागृत करने की प्रक्रिया सरल नहीं है|  इसमें समय, धैर्य और अभ्यास की आवश्यकता होती है. लेकिन अगर आप नियमित रूप से अभ्यास करते हैं तो आप अपनी सुप्त शक्तियों को जागृत कर सकते हैं और अपनी दिव्यता का अनुभव स्वयं कर सकते हैं |

आइये अब जानते हैं की जब सुप्त शक्तियां जागृत होने लगती है तो जातक को कौन कौन से चक्रों से गुजरना पड़ता है ?

योग ग्रंथो के अनुसार हमारे शरीर में जब कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है तो वो सात चक्रों में मौजूद सुप्त शक्तियों को पूरी तरह से जागृत करती है और ये 7 चक्र है-

  1. मूलाधार चक्र (Muladhara Chakra)
  2. स्वाधिष्ठान चक्र (Svadhisthana Chakra)
  3. मणिपुर चक्र (Manipura Chakra)
  4. अनाहत चक्र (Anahata Chakra)
  5. विशुद्धि चक्र (Vishuddha Chakra)
  6. आज्ञा चक्र (Ajna Chakra)
  7. सहस्रार चक्र (Sahasrara Chakra)

चक्र शरीर के ऊर्जा केंद्र हैं. वे हमारी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं. जब ये चक्र संतुलित होते हैं तो हम स्वस्थ, खुश और सकारात्मक होते हैं. जब ये चक्र असंतुलित होते हैं तो हम बीमार, दुखी और नकारात्मक होने लगते हैं| 

इसलिए अष्टांग योग का अभ्यास जरुरी होता है | 

चक्रों को संतुलित करना एक जीवन भर की प्रक्रिया है. लेकिन अगर आप नियमित रूप से इन तरीकों का अभ्यास करते हैं तो आप अपने चक्रों को संतुलित कर सकते हैं और अपने जीवन में शांति, खुशी और समृद्धि पा सकते हैं.

आइये अब समझते हैं की कुंडलिनी शक्ति क्या हैं ?

ये शरीर के अन्दर मौजूद एक अद्भुत शक्ति है जो की स्थूल रूप से नजर नहीं आती है परन्तु जो लोग नियमित ध्यान करते हैं और जिन्होंने गहरे ध्यान की अनुभूति की है उन्हें पता है की ये शक्ति नहीं दिखती हुई भी मौजूद है | इसमें जैसे ही हलचल होती है वैसे ही साधक के साथ विभिन्न प्रकार की घटनाएं होने लगती है जिसे सिर्फ वही अनुभव कर सकता है | योगियों के अनुसार जब ये शक्ति सहस्त्रधार में पंहुचती है तो साधक सिद्ध हो जाता है, उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं रहता है, अष्ट सिद्धियाँ उसके पास होती है, उससे कुछ छिपा नहीं रहता, पञ्च तत्त्वों पर उसका अधिकार हो जाता है, वो परम सुख में और परम शांति में अवस्थित रह सकता है | 

तो सही मायने में कहा जाए तो कुंडलिनी शक्ति है super energy generator है हमारे शरीर के अन्दर |

हमारे अन्दर की असीमित शक्तियों को कैसे जागृत करें, क्या फायदे हैं सुप्त शक्तियों को जागृत करने के, super energy generator in our body, जानिए वो तरीके जिनसे हम पा सकते हैं अद्भुत और अविश्वसनीय शक्तियां |

Comments

Popular posts from this blog

84 Mahadev Mandir Ke Naam In Ujjain In Hindi

उज्जैन मंदिरों का शहर है इसिलिये अध्यात्मिक और धार्मिक महत्त्व रखता है विश्व मे. इस महाकाल की नगरी मे ८४ महादेवो के मंदिर भी मौजूद है और विशेष समय जैसे पंचक्रोशी और श्रवण महीने मे भक्तगण इन मंदिरों मे पूजा अर्चना करते हैं अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए. इस लेख मे उज्जैन के ८४ महादेवो के मंदिरों की जानकारी दी जा रही है जो निश्चित ही भक्तो और जिज्ञासुओं के लिए महत्त्व रखती है.  84 Mahadev Mandir Ke Naam In Ujjain In Hindi आइये जानते हैं उज्जैन के ८४ महादेवो के मंदिरों के नाम हिंदी मे : श्री अगस्तेश्वर महादेव मंदिर - संतोषी माता मंदिर के प्रांगण मे. श्री गुहेश्वर महादेव मंदिर- राम घाट मे धर्मराज जी के मंदिर मे के पास. श्री ढून्देश्वर महादेव - राम घाट मे. श्री अनादी कल्पेश्वर महादेव- जूना महाकाल मंदिर के पास श्री दम्रुकेश्वर महादेव -राम सीढ़ियों के पास , रामघाट पे श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर मंदिर -धुंधेश्वर महादेव के ऊपर, रामघाट पर. श्री त्रिविश्तेश्वर महादेव - महाकाल सभा मंडप के पास. श्री कपालेश्वर महादेव बड़े पुल के घाटी पर. श्री स्वर्न्द्वार्पलेश्वर मंदिर- गढ़ापुलिया

om kleem kaamdevay namah mantra ke fayde in hindi

कामदेव मंत्र ओम क्लीं कामदेवाय नमः के फायदे,  प्रेम और आकर्षण के लिए मंत्र, शक्तिशाली प्रेम मंत्र, प्रेम विवाह के लिए सबसे अच्छा मंत्र, सफल रोमांटिक जीवन के लिए मंत्र, lyrics of kamdev mantra। कामदेव प्रेम, स्नेह, मोहक शक्ति, आकर्षण शक्ति, रोमांस के देवता हैं। उसकी प्रेयसी रति है। उनके पास एक शक्तिशाली प्रेम अस्त्र है जिसे कामदेव अस्त्र के नाम से जाना जाता है जो फूल का तीर है। प्रेम के बिना जीवन बेकार है और इसलिए कामदेव सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका आशीर्वाद जीवन को प्यार और रोमांस से भरा बना देता है। om kleem kaamdevay namah mantra ke fayde in hindi कामदेव मंत्र का प्रयोग कौन कर सकता है ? अगर किसी को लगता है कि वह जीवन में प्रेम से वंचित है तो कामदेव का आह्वान करें। यदि कोई एक तरफा प्रेम से गुजर रहा है और दूसरे के हृदय में प्रेम की भावना उत्पन्न करना चाहता है तो इस शक्तिशाली कामदेव मंत्र से कामदेव का आह्वान करें। अगर शादी के कुछ सालों बाद पति-पत्नी के बीच प्यार और रोमांस कम हो रहा है तो इस प्रेम मंत्र का प्रयोग जीवन को फिर से गर्म करने के लिए करें। यदि शारीरिक कमजोरी

Mrityunjay Sanjeevani Mantra Ke Fayde

MRITYUNJAY SANJEEVANI MANTRA , मृत्युंजय संजीवनी मन्त्र, रोग, अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाला मन्त्र |  किसी भी प्रकार के रोग और शोक से बचाता है ये शक्तिशाली मंत्र |  रोग, बुढ़ापा, शारीरिक कष्ट से कोई नहीं बचा है परन्तु जो महादेव के भक्त है और जिन्होंने उनके मृत्युंजय मंत्र को जागृत कर लिए है वे सहज में ही जरा, रोग, अकाल मृत्यु से बच जाते हैं |  आइये जानते हैं mrityunjaysanjeevani mantra : ऊं मृत्युंजय महादेव त्राहिमां शरणागतम जन्म मृत्यु जरा व्याधि पीड़ितं कर्म बंधनः।। Om mriyunjay mahadev trahimaam sharnagatam janm mrityu jara vyadhi peeditam karm bandanah || मृत्युंजय संजीवनी मंत्र का हिंदी अर्थ इस प्रकार है : है कि हे मृत्यु को जीतने वाले महादेव मैं आपकी शरण में आया हूं, मेरी रक्षा करें। मुझे मृत्यु, वृद्धावस्था, बीमारियों जैसे दुख देने वाले कर्मों के बंधन से मुक्त करें।  Mrityunjay Sanjeevani Mantra Ke Fayde आइये जानते हैं मृत्युंजय संजीवनी मंत्र के क्या क्या फायदे हैं : भोलेनाथ दयालु है कृपालु है, महाकाल है अर्थात काल को भी नियंत्रित करते हैं इसीलिए शिवजी के भक्तो के लिए कु