2026 में सोमवती अमावस कब है?, सोमवती अमावस्या को क्या करना चाहिए?, सोमवती अमावस्या का महत्व क्या है?, ज्योतिष उपाय सफल जीवन के लिए, अमावस्या के लिए मंत्र. भारत मे साधारणतः ये देखा जाता है की सोमवती अमावस्या को लोग पवित्र नदियों मे स्नान करते है, विशेष पूजा पाठ करते है , दान करते है. 9 November 2026 को है "सोमवती अमावस्या" जब कुंडली में मौजूद चन्द्र दोष और पितृ दोष से छुटकारे के लिए विशेष पूजन किया जा सकता है | अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:29 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:32 बजे Somwati Amavasya Ka Mahattwa In Hindi आइये समझते है सोमवती अमावस्या को: जब अमावस सोमवार को आती है तब उसे सोमवती अमावस कहते हैं. ये भगवान् शिव के पूजा का विशेष दिन माना जाता है, पितरो के पूजन के लिए भी शुभ दिन है साथ ही चन्द्र देव के पूजन के लिए भी शक्तिशाली दिन माना जाता है ज्योतिष के अनुसार. महाभारत मे भीष्म पितामह ने युधिस्ठिर को भी सोमवती अमावस्या के महत्त्व के बारे मे बताया था. इस दिन भगवान् शिव और पितरो की कृपा आसानी स...
साल के शुरू में शनि अमावस्या ! क्या करे, कैसे बनाए जीवन को सफल, कौन की पूजा करे शनि-अमावस को.
2019 की शुरुआत ज्योतिष की दृष्टि से बहुत अच्छी हो रही है, साल का पहला दिन एकादशी रहेगी अर्थात भगवान् विष्णु की पूजा से हम सभी नए साल का स्वागत कर सकते हैं.
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| Saal ke Shuru Mai Shani Amavasya |
वहीँ दूसरी तरफ पहले ही हफ्ते हमे शनि अमावस्या भी मिलेगी जो की पितृ दोष शांति एवं शनि शांति के लिए बहुत ही शुभ दिन होगा.
अमावस्या देखा जाए तो वैसे भी बहुत महत्त्व रखता है क्यूंकि इस दिन तंत्र साधनाए भी होती है, उतारे भी होते हैं, देवी देवताओं, पितरों को प्रसन्न करने के लिए भी पूजा-पाठ होता हैं.
जिनके ऊपर शनि के ढैया या साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है उनके लिए तो साल के शुरुआत में शनि अमावस्या का पड़ना वरदान से कम नहीं है क्यूंकि शुरुआत में ही आप शनि देव को खुश कर अपने संकटों को कम कर सकते हैं.
पढ़िए नया साल का प्रभाव आपके राशि पर क्या असर होने वाला है >>
अमावस्या देखा जाए तो वैसे भी बहुत महत्त्व रखता है क्यूंकि इस दिन तंत्र साधनाए भी होती है, उतारे भी होते हैं, देवी देवताओं, पितरों को प्रसन्न करने के लिए भी पूजा-पाठ होता हैं.
जिनके ऊपर शनि के ढैया या साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है उनके लिए तो साल के शुरुआत में शनि अमावस्या का पड़ना वरदान से कम नहीं है क्यूंकि शुरुआत में ही आप शनि देव को खुश कर अपने संकटों को कम कर सकते हैं.
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5 जनवरी २०१९ उन सभी लोगो के लिए ख़ास है जो शनि ग्रह से पीड़ित हैं, जिनको नौकरी नहीं मिल रही है, जिनका विवाह शनि के कारण बिगड़ रहा है, जिनके ऊपर काले जादू का प्रभाव हो, जिनके ऊपर साढ़े साती का प्रभाव हो, ढैया का प्रभाव हो, जिनकी कुंडली में शनि ख़राब हो, जिनके कुंडली में पितृ दोष हो आदि.
क्या करे सुखी जीवन के लिए शनि अमावस को ?
- पितृ दोष मुक्ति व शनि की शांति के लिए इस दिन आप पीपल पेड़ की पूजा कर सकते हैं और उसकी ८ परिक्रमा अवश्य लगाएं, साथ ही कष्टों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करे.
- शनि से संबंधित वस्तुओं जैसे काला वस्त्र, काले तिल, उड़द की दाल, सरसों का तेल, लोहे का सामान, छतरी, जूते, कंबल, भैंस, आदि का दान भी आप कर सकते हैं, ध्यान दे की ये दान आप संध्या को करे.
- इस दिन भिक्षुकों को आप चाय पिला सकते हैं.
- शनि मंदिर में ८ दीपक सरसों के तेल का जलाएं और शनि चालीसा का पाठ करे.
- आप गीता का पाठ भी अपने पितरों के शांति के निमित्त कर सकते हैं.
- इस दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक भी बहुत फायदा देगा.
- भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्रो का जप भी लाभ देता है.
शनि कुंडली में अगर मेष राशि के साथ बैठा हो तो नीच का हो जाता है और अगर तुला राशि के साथ बैठे तो उच्च का हो जाता है, नीच राशि में ये जातक को बहुत तकलीफे देता है वही उच्च राशी में ये बहुत फायदेमंद होता है.
- शनि का मंत्र : ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
- शनि का बीज मंत्र : ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।।
साल के शुरू में शनि अमावस्या ! क्या करे, कैसे बनाए जीवन को सफल, कौन की पूजा करे शनि-अमावस को.

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