Adhik Maas Ka Mahattw Jyotish Mai

Adhik Maas Ka Mahattwa In Hindi, अधिक मास क्यों है ख़ास,  कैसे कमाए पुण्य पुरुषोत्तम मास मे.
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Adhik Maas Ka Mahattw Jyotish Mai

अधिक मास का महत्त्व

अधिक मास मे साधारणतः हमने लोगो को पूजा आराधना, दान, धर्म करते हुए देखा है. ज्योतिष में भी अधिक महीने के महत्त्व के बारे में बहुत कुछ कहा गया है. ये महिना ख़ास तौर पर धर्म साधना, देव दर्शन, तीर्थ यात्रा, भगवत कथा श्रवण, उपासना आदि के लिए बना है.

अधिक मास को खर मास,मल मास या फिर पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है.

पंचांग अनुसार इस बार ज्येष्ठ के महीने में मल मास आ रहा है जो की १६ मई २०१८ से शुरू होकर १३ जून तक रहेगा. पुरुषोत्तम मास में भक्तगण मंत्र जप, भागवत कथा श्रवण, दान आदि करते हैं. एक और ख़ास बात है जो अधिक मास का महत्त्व और बढ़ाता है वो ये की ऐसे में चन्द्रमा अपनी उच्च राशि में अवस्थित होगा जिसके कारण पूजा पाठ, साधना, दान आदि का महत्त्व और बढ़ जाएगा.

अधि मास भगवान् विष्णु को समर्पित है और इस समय में केवल पूजा पाठ , अनुष्ठान आदि ही किया जाने का उल्लेख मिलता है.
आइये जानते हैं कौन कौन से ख़ास मौके आ रहे हैं इस बार अधिक मास में –
  • विनयकी चतुर्थी व्रत आएगा १८ मई शुक्रवार को.
  • गंगा दुशेरा आएगा 24 मई को.
  • कमला एकादशी २५ मई और १० जून को आएगी.
  • प्रदोष व्रत 26 मई और ११ जून को पड़ेगा.
  • पूर्णिमा २९ मई को रहेगी मल मास मे.
  • १३ तारीख को अमावस्या के साथ अधिक मास की समाप्ति होगी.
अपनी सफलता के लिए श्रद्धा और भक्ति से पूजन पाठ करना चाहिए.

क्या करे अधिक मास में जीवन से समस्याओं को कम करने के लिए:

भगवान् विष्णु की कृपा से मल मास या अधिक मास बहुत ही पवित्र महिना माना जाता है. अतः इन दिनों में सफलता के रास्ते खोलने के लिए कुछ आसान उपाय दे रहे है. हालांकि अपने ज्योतिष से भी सलाह ले लेना चाहिए आपको.
  1. पुरे माहिने जल्दी उठके अपने नियमित कार्यो से मुक्त होक विष्णु जी के आगे, धुप, दीप, भोग आदि लगा के उनके 108 मंत्रो का जप करे. अगर ये न हो सके तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जप करे.
  2. रोज किसी विष्णु मंदिर या शिव मंदिर जाना चाहिए और दीप दान करना चाहिए.
  3. किसी से झूठ न बोले, धोखा न दे और हर समय भगवान् विष्णु का ध्यान करे.
  4. जरुरत मंदों की सहायता करे और उनको भी इश्वर का रूप समझे.
  5. जब भी हो सके विशेषकर ग्यारस, पूर्णिमा को भगवान् विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करे.
  6. पुरुषोत्तम मास में भागवत का पठान या श्रवण भी उत्तम होता है.
  7. इस महीने में सप्त सगरो की यात्रा से भी पुण्य प्राप्त होता है.
पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा , आराधना खाली नहीं जाती अतः अधिक मास का उपयोग करे और जीवन को सफल बनाए इश्वर कृपा से.


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