मिथुन लग्न: अस्त चंद्रमा के 12 भावों में प्रभाव व उपाय, Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Me Prabhav, Jyotish Updates. मिथुन लग्न में चंद्रमा दूसरे भाव का स्वामी होता है, जो परिवार, वाणी, धन-संपत्ति, मूल्य और भोजन की आदतों का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा अस्त (Combust) हो जाता है (अर्थात सूर्य के बहुत नज़दीक आ जाता है), तब उसकी प्राकृतिक शक्तियाँ कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे भावनात्मक स्थिरता, आर्थिक पक्ष और पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है—यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्र किस भाव में स्थित है। अस्त चंद्रमा मानसिक तनाव बढ़ाता है क्योंकि मिथुन राशि का स्वामी बुध है—जो बुद्धि और विश्लेषण का ग्रह है—जबकि चंद्रमा भावनाओं का प्रतिनिधि है। Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Mai Prabhav aur Upay अस्त चंद्रमा क्या होता है? जब चंद्रमा सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तब उसे अस्त (Combust) कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की शक्ति कम हो जाती है, जिससे: भावनाओं की अभिव्यक्ति कमजोर होती है अधिक सोचने की प्रवृत्ति बढती है आर्थिक अस...
Kalsarp Yog Se Mukti Ke Liye Totke | कालसर्प योग दूर करने के उपाय
कालसर्प योग (Kalsarp Yog) ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण योग माना जाता है। बहुत से लोग इसे बेहद खतरनाक मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह उतना भयावह नहीं है जितना समझा जाता है। कुंडली में ऐसे कई योग होते हैं जो कालसर्प से भी अधिक प्रभावशाली होते हैं।
कालसर्प योग से मुक्ति पाने के आसान टोटके
कालसर्प योग कैसे बनता है?
जब सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि – ये सातों ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प योग का निर्माण होता है। यह योग जातक के जीवन में बाधाएं और विलंब पैदा करता है।
कालसर्प योग से होने वाली समस्याएँ:
- कड़ी मेहनत करने पर भी उचित फल न मिलना
- जीवन साथी मिलने में देरी
- विद्यार्थियों को पढ़ाई में कठिनाई
- संतान से संबंधित समस्याएँ
- मानसिक तनाव, उदासी और क्रोध
कालसर्प योग से छुटकारा पाने के टोटके
अगर आपकी जन्म कुंडली में कालसर्प योग है तो इन आसान उपायों को अपनाने से राहत मिल सकती है:
- पंचमी तिथि को शिवालय में जाकर नाग पूजा करें।
- नाग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करें।
- सांप की बाम्बी की मिट्टी लाकर ताबीज में धारण करें।
- अगर पंचमी बुधवार को हो तो चांदी/तांबे का नाग-नागिन का जोड़ा जल में प्रवाहित करें।
- प्रतिदिन नवनाग स्तोत्र का पाठ करें।
- शिव पूजा सबसे प्रभावशाली उपाय है।
- चांदी/सोने/तांबे के नाग-नागिन बनवाकर 18 दिन पूजा करें और फिर उन्हें जल में विसर्जित करें।
- कालसर्प शांति पूजा कराएं।
- नाग पंचमी पर विशेष पूजा करें।
- कालसर्प यंत्र की स्थापना कर नियमित पूजन करें।
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