मिथुन लग्न: अस्त चंद्रमा के 12 भावों में प्रभाव व उपाय, Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Me Prabhav, Jyotish Updates. मिथुन लग्न में चंद्रमा दूसरे भाव का स्वामी होता है, जो परिवार, वाणी, धन-संपत्ति, मूल्य और भोजन की आदतों का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा अस्त (Combust) हो जाता है (अर्थात सूर्य के बहुत नज़दीक आ जाता है), तब उसकी प्राकृतिक शक्तियाँ कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे भावनात्मक स्थिरता, आर्थिक पक्ष और पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है—यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्र किस भाव में स्थित है। अस्त चंद्रमा मानसिक तनाव बढ़ाता है क्योंकि मिथुन राशि का स्वामी बुध है—जो बुद्धि और विश्लेषण का ग्रह है—जबकि चंद्रमा भावनाओं का प्रतिनिधि है। Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Mai Prabhav aur Upay अस्त चंद्रमा क्या होता है? जब चंद्रमा सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तब उसे अस्त (Combust) कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की शक्ति कम हो जाती है, जिससे: भावनाओं की अभिव्यक्ति कमजोर होती है अधिक सोचने की प्रवृत्ति बढती है आर्थिक अस...
फेंग शुई क्या है, फेंग शुई के फायदे, फेंग शुई की शक्ति, कब प्रयोग करे फेंग शुई का.
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| Fengshui Kya Hota Hai |
करीब ४००० वर्ष पूर्व चाइना में एक चमत्कारी विद्या की खोज हुई जिसे फेंग शुई कहा गया. इसमें उर्जा के बारे में जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है की कैसे हम उर्जाओं में सामंजस्य बिठा सकते हैं शारीर में, वास्तु में और घर में और सफलता को आकर्षित कर सकते हैं.
क्या है फेंग शुई?
भारतीय वास्तु विद्या के जैसा फेंगशुई भी है. भारत में हम वास्तु के सिद्धांतो का प्रयोग घर, फैक्ट्री, बिल्डिंग आदि बनाने में करते हैं उसी प्रकार चाइना में फेंगशुई का प्रयोग वास्तु में सकारात्मक उर्जा को बढाने में किया जाता है. फेंग शुई शब्द का अर्थ है हवा और पानी. चीनियों का मानना है की उर्जा का सामंजस्य बहुत जरुरी है व्यक्तिगत और कामकाजी जीवन को सफल बनाने के लिए.फेंगशुई में “ईन” और “यांग” उर्जा का उल्लेख मिलता है. इनके अनुसार ये २ उर्जा पुरे विश्व को नियंत्रण करती है. सौर्य उर्जा को “ची” कहा जाता है जो सब जगह उपलब्ध रहती है. ये ची शारीर में भी बहती है. इस ची का नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव होता है. अच्छी सेहत के लिए दोनों शक्तियों में सामंजस्य जरुरी है. ये ची ५ तत्त्वों में विभाजित है – जल, लकड़ी, आग, प्रथ्वी और धातु.
फेंगशुई बहुत ही सरल तरीके से उर्जा को संतुलित करने के तरीके बताती है जिसके लिए बागुआ मिरर, फव्वारे, रंगों, मछली घर, मूर्तियाँ, बांस, ड्रैगन्स आदि का प्रयोग होता है.
आइये देखते हैं फेंगशुई के कुछ फायदे जो ये बताएगी की फेंगशुई का प्रयोग क्यों करे :
- फेंगशुई का प्रयोग करके हम घर, ऑफिस, बिल्डिंग आदि में उर्जा को संतुलित कर सकते हैं.
- फेंगशुई का स्तेमाल करके वास्तु में स्वस्थ वातावरण का निर्माण किया जा सकता है.
- उर्जा से भरपूर्ण आंतरिक सज्जा किया जा सकता है वास्तु में.
- फेंगशुई का स्तेमाल सफलता के रास्ते खोल देता है.
- बहुत से वास्तु दोषों का हल फेंगशुई के स्तेमाल से हो जाता है बिना तोड़ फोड़ के.
- इसके स्तेमाल से संबंधो में भी मधुरता बढती है.
- इससे व्यापार भी बढ़ता है.
- फेंगशुई के स्तेमाल से स्वस्थ और संपन्न जीवन जिया जा सकता है.
अतः फेंगशुई के बहुत लाभ होते हैं, सभी का वर्णन तो संभव नहीं है बस इसके लाभ को महसूस किया जा सकता है. इसे जानने के लिए इसका प्रयोग करके देखना चाहिए.
कब प्रयोग करे फेंगशुई का?
इसका जवाब बहुत ही सरल है, जब भी ये लगे की वास्तु में उर्जा में कोई समस्या आ गई है तो फेंगशुई के सिद्धांतो का प्रयोग करके वास्तु में उर्जा को ठीक किया जा सकता है. अतः अगर आप वास्तु दोषों को दूर करना चाहते हैं तो फेंगशुई आपकी मदद कर सकता है, अगर आप संबंधो को सुधारना चाहते हैं तो फेंगशुई आपकी मदद कर सकता है, अगर आप आर्थिक समस्याओं से बहार आना चाहते हैं तो फेंगशुई आपकी मदद कर सकता है, अगर आप परीक्षा में सफल होना चाहते हैं तो भी फेंगशुई की मदद ले सकते हैं.फेंग शुई क्या है, फेंग शुई के फायदे, फेंग शुई की शक्ति, कब प्रयोग करे फेंग शुई का.

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