Shravan Mahine Ki Kalashtmi Kab Hai, Kalashtmi ko kya kare, Kalashtmi ko kinki pooja hoti hai. श्रावण मास की पावन कालाष्टमी हिंदू धर्म में प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के उग्र एवं रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। वर्ष 2026 में 5 अगस्त, बुधवार को श्रावण मास की कालाष्टमी पड़ रही है। श्रावण मास स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस माह की कालाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी 5 अगस्त 2026 को रात में लगभग 8:44 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी 6 अगस्त 2026 को शाम में लगभग 6:53 बजे Shravan Mahine Ki Kalashtmi Kab Hai कालाष्टमी का धार्मिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान काल भैरव, भगवान शिव के ही एक दिव्य और शक्तिशाली स्वरूप हैं। वे समय (काल), न्याय, धर्म और सुरक्षा के अधिष्ठाता माने जाते हैं। भक्तों का विश्वास है कि कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से भय, नकारात्मक शक्तियों, शत्रुओं और जीवन की बाधाओं से रक्षा होती है...
शमी के पेड़ का महत्त्व, शनि और शमी में सम्बन्ध, जानिए क्यों पूजते हैं शमी के पेड़ को.
दशको से शमी पेड़ की पूजा विद्वानों, ब्राह्मणों, तांत्रिको, ज्योतिशो द्वारा किया जाता रहा हैं. अब प्रश्न ये है की क्यों शमी वृक्ष की पूजा की जाती है , क्या महत्त्व है इसका. इस लेख में हम शमी के पेड़ के बारे में ही जानेंगे.
शमी को अलग अलग नामो से जाना जाता है कुछ लोग इसे सांगरी में कहते हैं और कुछ इसे खेजरी भी कहते हैं. अंग्रेजी में इसे "प्रोसोपिस सिनेरेरिया " कहते हैं.
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| shami ka ped aur jyotish |
ज्योतिष के हिसाब से शमी का सम्बन्ध शनि ग्रह से है अतः शनि ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए शमी की पूजा की जाती है, शनि साढ़े साती से बचने के लिए भी शमी की पूजा की प्रथा है.
दूसरी तरफ शमी भूमि के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसको लगाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता बढती है क्यूंकि इससे भूमि को नाइट्रोजन मिलता है प्राकृत तौर पर और ये बहुत कम पानी में भी फलता फूलता है. शमी का प्रयोग दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है जैसे मानसिक रोग और शक्ति की औषधियों में.
दूसरी तरफ शमी भूमि के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसको लगाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता बढती है क्यूंकि इससे भूमि को नाइट्रोजन मिलता है प्राकृत तौर पर और ये बहुत कम पानी में भी फलता फूलता है. शमी का प्रयोग दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है जैसे मानसिक रोग और शक्ति की औषधियों में.
मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवो ने शमी वृक्ष के निचे अपने शश्त्रो को रखके पूजा था युद्ध में जीत के लिए . अतः युद्ध में जाने से पहले लोग भी ऐसा करने लगे. पढ़िए दशहेरे के लिए टोटके हिंदी में .
आइये जानते हैं शमी वृक्ष के कुछ ज्योतिषीय लाभ:
- अगर शनि ग्रह के कारण जीवन में परेशानी आ रही है तो शमी के पेड़ के निचे दीपक जलाना चाहिए.
- अगर शनि साड़े साती चल रही हो तो भी शमी के पेड़ की पूजा से लाभ होता है.
- भूमि सम्बन्धी किसी समस्या को दूर करने के लिए भी शमी की पूजा से लाभ होता है.
- भारत के कुछ प्रान्तों में शमी की पत्तो को भाग्योदय के लिए एक दुसरे को दिए जाने की परंपरा है दशहरे में.
- शमी की लकडियो की समिधा का प्रयोग शनि के हवन में किया जाता है.
- अगर कोई जातक शनिवार के दिन ही सिर्फ शमी की पूजा करे तो इसमें कोई शक नहीं की शनि देव की कृपा उसे प्राप्त होती है.
- अगर कुंडली में शनि शुभ है तो शमी के पेड़ को पश्चिम दिशा में लगाने से लाभ होता है.
अतः शमी की पेड़ से लाभ ले , इसकी पूजा से लाभ उठाये और जीवन को सफल बनाए.
शमी के पेड़ का महत्त्व, शनि और शमी में सम्बन्ध, जानिए क्यों पूजते हैं शमी के पेड़ को.

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