वर्ष 2026 में सूर्य दक्षिणायन 16 जुलाई 2026, गुरुवार की रात को होगा। सूर्य का दक्षिणायन (कर्क संक्रांति): धार्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व भारतीय संस्कृति में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वे जीवन, ऊर्जा, प्रकाश और चेतना के स्रोत हैं। वैदिक काल से ही सूर्य की गति के आधार पर ऋतुओं, कृषि, पर्व-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का निर्धारण किया जाता रहा है। जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है, तब इस घटना को कर्क संक्रांति कहा जाता है और इसी के साथ दक्षिणायन का प्रारंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में सूर्य का दक्षिणायन 16 जुलाई 2026, गुरुवार की रात को होगा। यह दिन केवल ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। Surya Dakshinayan Kab Honge दक्षिणायन क्या है? दक्षिणायन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— दक्षिण + अयन । 'अयन' का अर्थ है 'गमन' या 'यात्रा'। जब सूर्य की आभासी गति उत्तर से दक्षिण की ओर मानी जाती है, तब उस अवधि को दक्षिणायन कहा जाता है। यह लगभग छह महीने तक चलता है और इस...
शमी के पेड़ का महत्त्व, शनि और शमी में सम्बन्ध, जानिए क्यों पूजते हैं शमी के पेड़ को.
दशको से शमी पेड़ की पूजा विद्वानों, ब्राह्मणों, तांत्रिको, ज्योतिशो द्वारा किया जाता रहा हैं. अब प्रश्न ये है की क्यों शमी वृक्ष की पूजा की जाती है , क्या महत्त्व है इसका. इस लेख में हम शमी के पेड़ के बारे में ही जानेंगे.
शमी को अलग अलग नामो से जाना जाता है कुछ लोग इसे सांगरी में कहते हैं और कुछ इसे खेजरी भी कहते हैं. अंग्रेजी में इसे "प्रोसोपिस सिनेरेरिया " कहते हैं.
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| shami ka ped aur jyotish |
ज्योतिष के हिसाब से शमी का सम्बन्ध शनि ग्रह से है अतः शनि ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए शमी की पूजा की जाती है, शनि साढ़े साती से बचने के लिए भी शमी की पूजा की प्रथा है.
दूसरी तरफ शमी भूमि के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसको लगाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता बढती है क्यूंकि इससे भूमि को नाइट्रोजन मिलता है प्राकृत तौर पर और ये बहुत कम पानी में भी फलता फूलता है. शमी का प्रयोग दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है जैसे मानसिक रोग और शक्ति की औषधियों में.
दूसरी तरफ शमी भूमि के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसको लगाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता बढती है क्यूंकि इससे भूमि को नाइट्रोजन मिलता है प्राकृत तौर पर और ये बहुत कम पानी में भी फलता फूलता है. शमी का प्रयोग दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है जैसे मानसिक रोग और शक्ति की औषधियों में.
मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवो ने शमी वृक्ष के निचे अपने शश्त्रो को रखके पूजा था युद्ध में जीत के लिए . अतः युद्ध में जाने से पहले लोग भी ऐसा करने लगे. पढ़िए दशहेरे के लिए टोटके हिंदी में .
आइये जानते हैं शमी वृक्ष के कुछ ज्योतिषीय लाभ:
- अगर शनि ग्रह के कारण जीवन में परेशानी आ रही है तो शमी के पेड़ के निचे दीपक जलाना चाहिए.
- अगर शनि साड़े साती चल रही हो तो भी शमी के पेड़ की पूजा से लाभ होता है.
- भूमि सम्बन्धी किसी समस्या को दूर करने के लिए भी शमी की पूजा से लाभ होता है.
- भारत के कुछ प्रान्तों में शमी की पत्तो को भाग्योदय के लिए एक दुसरे को दिए जाने की परंपरा है दशहरे में.
- शमी की लकडियो की समिधा का प्रयोग शनि के हवन में किया जाता है.
- अगर कोई जातक शनिवार के दिन ही सिर्फ शमी की पूजा करे तो इसमें कोई शक नहीं की शनि देव की कृपा उसे प्राप्त होती है.
- अगर कुंडली में शनि शुभ है तो शमी के पेड़ को पश्चिम दिशा में लगाने से लाभ होता है.
अतः शमी की पेड़ से लाभ ले , इसकी पूजा से लाभ उठाये और जीवन को सफल बनाए.
शमी के पेड़ का महत्त्व, शनि और शमी में सम्बन्ध, जानिए क्यों पूजते हैं शमी के पेड़ को.

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