Falgun Amavasya Kab Hai, फाल्गुन महीने की अमावस्या की सही तारीख, अमावस्या के उपाय, jyotish updates, amavasya ka rashifal. फाल्गुन अमावस्या 2026: परंपरा, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का पर्व Falgun Amavasya Kab Hai: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। प्रत्येक मास की अमावस्या आत्मचिंतन, संयम और पितृ तर्पण के लिए उपयुक्त मानी जाती है। वर्ष 2026 में फाल्गुन मास की अमावस्या 17 फरवरी को है। अमावस्या तिथि की शुरुआत होगी 16 फरवरी सोमवार को शाम में लगभग 5:36 बजे अमावस्या तिथि समाप्त होगी 17 फ़रवरी को शाम में लगभग 5:32 पे. तो अमावस्या का पूजन, दान, तर्पण आदि १७ फ़रवरी मंगलवार को किया जाएगा. यह दिन न केवल पितरों की स्मृति और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देता है, बल्कि मनुष्य को अपने जीवन की दिशा पर विचार करने और नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग कर सकारात्मक मार्ग अपनाने की प्रेरणा भी देता है। Falgun Amavasya Kab Hai आइये जानते हैं गोचर कुंडली में ग्रहों की स्थिति कैसी रहेगी अमावस्या को : अमावस्या के दिन कुम्भ राशि में पञ्च ग्रही योग ब...
क्या पत्थर उठाने से शादी हो सकती है, चमत्कारी शादी करवाने वाला पत्थर भारत में .
भारत में अनुको ऐसे परम्पराएं मौजूद है जिसके पीछे के वैज्ञानिक पहलु को जितना समझने की कोशिश करे उतना ही उलझन बन जाती है. ऐसी ही एक विचित्र परंपरा सिवनी में देखने को मिलती है. सिवनी, मध्य प्रदेश में आज के डिजिटल युग में भी एक विचित्र परंपरा मौजूद है. यहाँ एक विशेष दिन ११ लोग ६० किलो वजनी पत्थर उठाते है.
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| shadi ke liye totka |
हर साल पोला त्यौहार यहाँ मनाया जाता है , इसके दुसरे दिन इस पत्थर उठाओ कार्यक्रम का आयोजन होता है. पहले पत्थर को कुंवारे लड़के पीठ पर उठाते हैं. और बाद में ११ शादी सुदा लोग अपने १-१ ऊँगली लगा के पत्थर को उठाते हैं.
ये प्रथा ५०० साल पुरानी है और आज भी लोगो को विश्वास है की ऐसा करने से विवाह हो जाता है.
आश्चर्य की बात ये है की –
जहाँ शादी सुदा लोग इस पत्थर को १ -१ ऊँगली से आसानी से उठा लेते हैं वहीँ कुंवारे लोगो को इसे पीठ पे उठाने में भी पसीने आ जाते हैं.
जहाँ शादी सुदा लोग इस पत्थर को १ -१ ऊँगली से आसानी से उठा लेते हैं वहीँ कुंवारे लोगो को इसे पीठ पे उठाने में भी पसीने आ जाते हैं.
आइये जानते हैं की ये चमत्कारी पत्थर है कहाँ :
सिवनी मध्य प्रदेश से ३५ किलोमीटर की दुरी पर खैरी गाँव है, यहाँ पर घोरलाई पहाड़ी है जहाँ पर ये चमत्कारी पत्थर मौजूद है. मान्यता ये है की जो कुंवारा युवक इसे अपने कंधे तक उठा लेता है उसका विवाह एक वर्ष में हो जाता है. और ऐसा प्रत्यक्ष देखा जाता रहा है , इसीलिए ये परंपरा अभी भी बनी हुई है.इस आयोजन में भाग लेने के लिए भीड़ जमा रहती है.
ये है भारत में मजूद अनोखी परंपरा.
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