Shukra Kab Ast Honge 2026, शुक्र अस्त का क्या प्रभाव होगा 12 Rashiyo Par, शुक्र कब तक अस्त रहेंगे, क्या सावधानी रखना होगी, jyotish updates. Shukra Ast: 12 अक्टूबर 2026, सोमवार, शाम 6:19 बजे से 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार, सुबह 6:00 बजे तक। शुक्र ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट होने के कारण "अस्त " स्थिति में रहेंगे जिसके कारण प्रेम, सौंदर्य, कला, वित्त और संबंधों का कारक ग्रह शुक्र अपनी पूर्ण शक्ति से फल नहीं दे पायेगा । सूर्य की प्रखरता के कारण शुक्र के कोमल और सामंजस्यकारी गुण दब जाते हैं, जिससे जीवन के भावनात्मक और भौतिक पक्षों में उथल–पुथल या पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता उत्पन्न होती है। Shukra Kab Ast Honge यह अवधि व्यक्ति को मजबूर करती है कि वह अपने संबंधों, इच्छाओं, भोग-विलास और वित्तीय व्यवहार की गहराई से जांच करे। सूर्य का प्रभाव सत्य को उजागर करता है—जहाँ दिखावा या अधूरी अपेक्षाएँ हो, वह सामने आ जाती हैं। हालांकि चुनौतियाँ बन सकती हैं, पर यह समय आत्मचिंतन, शुद्धिकरण और वास्तविकता को अपनाने का अवसर भी प्रदान करता है। आइये जानते हैं अस्त शुक्र का 12 राशियों पर क्या प्रभ...
Narad jayanti ka mahatwa in hindi, कौन है नारद मुनि, क्या महत्तव है नारद जयंती का, क्या सीखे नारद मुनी से.
एक बहुत ही रोचक चरित्र का उल्लेख मिलता है हिन्दुओ के पौराणिक कथाओं में, एक ऐसा व्यक्ति जो सभी के लिए पूजनीय है, आदरणीय है, जो की भगवान् विष्णु के भक्त है, जो की हर समय “नारायण नारायण” का जप करते रहते हैं.
ये व्यक्तित्व है “नारद मुनि”, ये ब्रह्मा जी के पुत्र है और लगातार घूमते रहते हैं. दैविक जानकारियों को इधर से उधर पहुचाने का कार्य ये बहुत ही खूबी से करते हैं. इनके पास हर समय एक वाद्य यन्त्र होता है जिसे हम वीणा के नाम से जानते हैं.
इन्होने बहुत से भक्ति सूत्र लिखे हैं, भजन लिखे हैं जो की अलग अलग ग्रन्थ में उपलब्ध है जैसे “नारद भक्ति सूत्र ”, नारद संहिता आदि.
ये बहुमुखी प्रतिभा के धनि है और कई विद्याओं में महारत रखते हैं जैसे गायन, वादन, प्रस्तुतीकरण, ज्योतिष, शब्दों का प्रयोग करना आदि.
नारद मुनि ने अपनी पूरी जिन्दगी नारायण सेवा में ही व्यतीत की है.
एक बहुत ही रोचक चरित्र का उल्लेख मिलता है हिन्दुओ के पौराणिक कथाओं में, एक ऐसा व्यक्ति जो सभी के लिए पूजनीय है, आदरणीय है, जो की भगवान् विष्णु के भक्त है, जो की हर समय “नारायण नारायण” का जप करते रहते हैं.
ये व्यक्तित्व है “नारद मुनि”, ये ब्रह्मा जी के पुत्र है और लगातार घूमते रहते हैं. दैविक जानकारियों को इधर से उधर पहुचाने का कार्य ये बहुत ही खूबी से करते हैं. इनके पास हर समय एक वाद्य यन्त्र होता है जिसे हम वीणा के नाम से जानते हैं.
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| narad jayanti |
इन्होने बहुत से भक्ति सूत्र लिखे हैं, भजन लिखे हैं जो की अलग अलग ग्रन्थ में उपलब्ध है जैसे “नारद भक्ति सूत्र ”, नारद संहिता आदि.
ये बहुमुखी प्रतिभा के धनि है और कई विद्याओं में महारत रखते हैं जैसे गायन, वादन, प्रस्तुतीकरण, ज्योतिष, शब्दों का प्रयोग करना आदि.
नारद मुनि ने अपनी पूरी जिन्दगी नारायण सेवा में ही व्यतीत की है.
हम उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं जैसे –
कैसे समर्पण किया जाता है, कैसे जुनूनी होक कार्य किया जाता है, कैसे कार्यो को मस्ती से किया जाता है. नारद मुनि एक ज्ञानी है और जिज्ञासुओ की शंका समाधान के लिए तत्पर रहते हैं.नारद मुनि देव दूत है और उन लोगो के लिए गुरु है जो भक्ति सीखना चाहते हैं, वादन सीखना चाहते हैं, ज्ञान पाना चाहते हैं.
जब भी हम किसी दैविक कथा को सुनते हैं या पढ़ते हैं तो नारद मुनि का जिक्र जरुर मिलता है, हम बिना इनके किसी भी दैविक कहानियो की कल्पना नहीं कर सकते हैं.
आइये जानते हैं नारद जयंती का महत्तव:
ये वो पुण्य दिन है जब हम विष्णु जी के साथ साथ नारद मुनि को भी पूजते है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.नारद मुनि के आशीर्वाद से भक्त विद्वान् बन सकता है, तेज दिमाग वाला बन सकता है, अच्छा कलाकार बन सकता है, समाज में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त कर सकता है.
नारद मुनि का योगदान जो उन्होंने अपने उपदेशो, सूत्रों, बजन द्वारा किया है उसे भुलाया नहीं जा सकता है. आज भी लोग इन सबका लाभ ले रहे हैं और जीवन को सुखी बना रहे है.
आइये जानते हैं कैसे मनाये नारद जयंती आसानी से :
- सुबह जल्दी उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त हो ले.
- नारद जी की मूर्ति या फोटो विष्णु जी के साथ रखे.
- विधिवत पंचोपचार पूजा करे
- किसी भी विष्णु मंत्र का जप करे.
- आप चाहे तो पूरा दिन उपवास भी रख सकते हैं और दिन भर भक्तिमय वातावरण में दिन बिता सकते हैं.
- ब्राह्मणों का आशीर्वाद जरुर ले इस दिन.
नारद जयंती की सभी को शुभ कामनाये.
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Narad jayanti ka mahatwa in hindi, कौन है नारद मुनि, क्या महत्तव है नारद जयंती का, क्या सीखे नारद मुनी से.

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