November 2026 Grah Gochar, कौन से ग्रह बदलेंगे राशि नवम्बर महीने में, किन राशियों को मिलेगा फायदा, November Masik Rashifal, नवम्बर में ग्रह गोचर, planetary transits in November 2026. Vedic jyotish के अनुसार एक निश्चित समय में हर ग्रह अपना राशि परिवर्तन करते हैं जिसे की गोचर कहा जाता है, ग्रहों के बदलाव के कारण लोगो के जीवन, वातावरण, व्यापार आदि में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं | November 2026 Grah Gochar: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवम्बर में बहुत से ग्रह राशी बदलेंगे साथ ही कुछ ग्रहों की चाल भी बदलेगी जिसके कारण जन जीवन में, मौसम में काफी बदलाव देखने को मिलेंगे | November Grah Gochar in Hindi Jyotish आइये जानते हैं किस तारीख को किस समय होगा ये बदलाव : 6 November 2026 को शुक्र ग्रह कन्या राशि में प्रवेश करेंगे दिनमे लगभग 10:34 AM पर. 12 November को मंगल ग्रह सिंह राशी में गोचर करेंगे रात्री में लगभग 8:46 PM पर. 13 नवम्बर को बुध मार्गी होंगे 16 नवम्बर को सूर्य वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे रात्री में लगभग 7:35 PM पर. 22 नवम्बर को शुक्र स्व राशि तुला में प्रवेश करेंगे शाम को लग...
अच्छे स्वास्थ्य का महत्त्व, कुछ ज्योतिषीय योग जो की बिमारी का कारण हो सकते हैं, जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग और ज्योतिष, अलसर- घाव से सम्बंधित योग, गुप्त रोग और ज्योतिष, मनो रोग के ज्योतिषीय कारण.
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| Swasthya Se Sambandhit Jyotishiya Yog |
स्वास्थ्य का जीवन मे सबसे अधिक महत्त्व है, इस क्षणभंगुर जीवन को सफलता पूर्वक जीने के लिए जरुरी है की स्वास्थ्य अच्छा रहे. ज्योतिष के माध्यम से भी हम स्वास्थ्य के बारे मे बहुत कुछ जान सकते हैं. विभिन्न ग्रहों का हमपर अलग अलग असर होता है, ग्रहों की उर्जा हमारे जीवन पर असर डालती है. बीमारी एक ऐसा श्राप है जो होता तो एक को है पर पूरा परिवार प्रभावित होता है.
ये भी सच है की अगर व्यक्ति खान पान मे समन्वय रखे तो भी बहुत सारी बिमारियों से बचा भी जा सकता है. इसी के साथ अगर कुछ ज्योतिषीय उपाय कर लिए जाए, कुंडली मे मौजूद ख़राब ग्रहों के प्रभावों को कम करने के लिए तो बहुत हद तक परेशानियों को कम किया जा सकता है.
बीमारी के कारण को जानने के लिए कुंडली के छठे भाव को देखा जाता है, आठवे भाव को देखा जाता है. त्रिक भावों (6, ८, १२ )मे ख़राब ग्रहों की मौजूदगी भी स्वास्थय सम्बंधित परेशानियों की तरफ इशारा करती है.
आइये जानते है कुछ ज्योतिषीय नियम की कैसे बीमारियों को जाना जाता है :
- अगर ११वे भाव का स्वामी कमजोर होक छठे भाव मे बैठ जाए तो जातक बीमार रहता है.
- अगर शनि पापी ग्रह के साथ बैठा हो ५वे, ९वे, या १२वे भाव मे तो स्वस्थ्य सम्बंधित परेशानियां देता है.
- अगर आठवे भाव का स्वामी किसी भी त्रिक स्थान मे बैठा हो तो भी बीमारी देता है.
- अगर लग्न का स्वामी कमजोर हो, शनि और मंगल साथ मे आठवे भाव मे बैठे हो साथ ही सूर्य बारहवे भाव मे बैठ जाए तो भी बीमारियों को आकर्षित करता है.
- अगर ग्यारहवे भाव का स्वामी छठे भाव मे बैठ जाए तो भी हेल्थ समस्या देता है.
आइये अब जानते हैं की घाव / अल्सर आदि से सम्बंधित ज्योतिषीय योग:
- अगर छठे भाव का स्वामी चन्द्र के साथ लग्न मे या फिर आठवे भाव मे बैठ जाए तो मूंह मे या फिर तालू मे घाव हो सकता है.
- अगर छठे भाव का स्वामी मंगल, सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र, शनि , रहू, केतु के साथ आठवे भाव मे बैठ जाए तो धीरे धीरे गले, माथा, आँखों के आस पास, पेट, पाँव और मूंह पर घाव दे सकता है.
आइये अब जानते हैं जनेन्द्रिय सम्बंधित बीमारियों के ज्योतिषीय कारण :
- अगर सूर्य लग्न मे हो और मंगल सातवे घर मे हो तो जातक मूत्र सम्बंधित रोग या फिर सुगर से ग्रस्त हो सकता है.
- अगर मंगल दसवे घर मे हो, शनि साथ मे हो या फिर मंगल शनि द्वारा दृष्ट हो तो भी जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग दे सकता है.
- अगर सूर्य, शुक्र, शनि पांचवे घर मे बैठे तो भी ऐसे रोग हो सकते है.
- अगर शुक्र नीच का हो या फिर शत्रु का हो या फिर पापी ग्रहों के साथ बैठा हो तो वीर्य सम्बंधित रोग हो सकता है.
- अगर चन्द्रमा, मंगल और शनि छठे, आठवे और बारहवे भाव मे बैठे हो तो भी जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग हो सकते हैं.
- अगर छठे और सातवे भाव मे बहुत से पापी ग्रह हो तो भी रोग दे सकता है.
आइये कुछ और योग गुप्त रोग से सम्बंधित देखते हैं:
अच्छे स्वास्थ्य का महत्त्व, कुछ ज्योतिषीय योग जो की बिमारी का कारण हो सकते हैं, जनेन्द्रिय सम्बंधित रोग और ज्योतिष, अलसर- घाव से सम्बंधित योग, गुप्त रोग और ज्योतिष, मनो रोग के ज्योतिषीय कारण.
- जब छठे भाव का स्वामी , बुध, मंगल साथ मे बैठे हो कही भी या फिर सातवे भाव मे तो गुप्त रोग दे सकता है.
- जब आठवे भाव मे पापी ग्रह बैठ जाए या फिर पापी ग्रह से दृष्ट हो तो भी गुप्त रोग हो सकता है.
- अगर लग्न मे वृषभ या कन्या हो और इसका स्वामी बुध के साथ हो और सिंह राशी का मंगल चौथे या बारहवे भाव मे बैठे तो लिंग सम्बंधित समस्या हो सकता है.
आइये अब जानते है कुछ मनो रोग से सम्बंधित ज्योतिषीय योग:
आज के तनाव भरे जीवन मे मनो रोग भी बहुत तेजी से बढ़ रहे है. ज्योतिष द्वारा मानसिक समस्याओं को भी जाना जा सकता है, मिर्गी, हिस्टीरिया आदि भी मनो रोग मे आते हैं.
- जब चन्द्रमा राहू के साथ युति करता है तो भी मनो रोग दे सकता है.
- अगर आठवे भाव मे बहुत से पापी ग्रह हो और शुक्र , चन्द्रमा के साथ किसी भी केंद्र स्थान मे तो भी मनोरोग दे सकता है.
- अगर राहू लग्न मे हो, चन्द्रमा छठे भाव मे हो, साथ ही सूर्य, चन्द्रमा, मंगल साथ मे आठवे भाव मे हो तो भी मन सम्बंधित रोग दे सकता है.
- जब शनि और मंगल छठे या आठवे भाव मे हो तो भी मनोरोग हो सकता है.
अगर आप भी किसी रोग से परेशान हो और ज्योतिषीय कारन जानना चाहते हो तो ज्योतिष से संपर्क कर सकते है.
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