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Latest Astrology Updates in Hindi

आलस्य बाण निवारण स्तोत्रम् | आलस्य दूर करने का शक्तिशाली स्तोत्र

आलस्य बाण निवारण स्तोत्रम् का महत्व आलस्य बाण निवारण स्तोत्रम् माँ आदिशक्ति की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन से आलस्य, प्रमाद, नकारात्मकता और मानसिक जड़ता को दूर करने के उद्देश्य से किया जाने वाला एक प्रेरणादायक स्तोत्र है। इसका नियमित श्रद्धापूर्वक पाठ साधक के भीतर नई ऊर्जा, उत्साह और कर्मशीलता का संचार करता है। आलस्य बाण निवारण स्तोत्रम्  इस स्तोत्र में माँ से प्रार्थना की जाती है कि वे साधक को सदैव जागरूक रखें, उचित विवेक प्रदान करें, आलस्य और अत्यधिक निद्रा का नाश करें तथा प्रत्येक कार्य को पूर्ण करने की शक्ति दें। यह केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर कर्म करने की प्रेरणा भी देता है। नियमित पाठ के लाभ मन में उत्साह, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आलस्य, टालमटोल की आदत तथा मानसिक जड़ता कम होने लगती है। अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय और दैनिक कार्यों में एकाग्रता एवं कार्यक्षमता बढ़ती है। विवेक, निर्णय लेने की क्षमता और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। नियमित दिनचर्या अपनाने और समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा मिलती है। आध्यात्मि...

Shukra ka KANYA Raashi Mai Gochar Rashifal

Shukra ka gochar kanya Rashi mai kab hoga, शुक्र का कन्या राशि में प्रवेश का राशिफल हिंदी ज्योतिष अनुसार, लव राशिफल, Venus Transit in virgo in october 2026. Shukra Ka Kanya Rashi Mai Gochar: शुक्र ग्रह 1 August 2026 को दिन में लगभग 9:23 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे | इसका असर हमे 12 राशियों के लोगो के ऊपर, राजनीती, मौसम व्यापार आदि में देखने को मिलेगा | वैदिक ज्यो|तिष  के अनुसार  कन्या राशि में शुक्र नीच के होते हैं जिसके कारण कुछ लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है | Shukra ka KANYA Raashi Mai Gochar Rashifal शुक्र का सम्बन्ध प्रेम, सौंदर्य, रचनात्मकता, आकर्षण शक्ति, धन, सुख सुविधा के साधन आदि से हैं | जब यह बुध के राशि कन्या में गोचर करते हैं तो व्यापारिक जगत में बड़े बदलाव को लाते हैं साथ ही संबंधो में भी बदलाव देखने को मिलते हैं |  कन्या राशि में शुक्र के गोचर का विशिष्ट प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली के आधार पर अलग-अलग होगा। यदि आप कन्या राशि के हैं, तो आप अन्य राशियों के लोगों की तुलना में इन प्रभावों को अधिक तीव्रता से अनुभव कर सकते हैं। आइये जानत...

August Mai Surya Karenge Bade Badlaaw Gochar Kundli Mai

अगस्त 2026 में सूर्य के चार प्रमुख गोचर का 12 राशियों पर प्रभाव अगस्त 2026 में सूर्य देव चार बार अपनी स्थिति बदलेंगे, जिससे सभी 12 राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे। 3 अगस्त को सूर्य आश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, 17 अगस्त को सिंह राशि में प्रवेश करने के साथ ही मघा नक्षत्र में गोचर करेंगे तथा 31 अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। आइए जानते हैं इन चारों गोचरों का सभी राशियों पर विस्तृत प्रभाव। August Mai Surya Karenge Bade Badlaaw Gochar Kundli Mai मेष राशि अगस्त का महीना मेष राशि के जातकों के लिए आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सफलता लेकर आएगा। 3 अगस्त को सूर्य के आश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश से पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और घर-परिवार से जुड़े कुछ पुराने मामलों का समाधान मिलने की संभावना रहेगी। आर्थिक मामलों में समझदारी से लिए गए निर्णय भविष्य में लाभ देंगे। 17 अगस्त को सूर्य सिंह राशि और मघा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे आपकी बुद्धि, शिक्षा, संतान सुख, प्रेम संबंध और रचनात्मक कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति होगी। विद्यार्थियों को ...

Dev Shayani Ekadashi Ki Mahima in Hindi

Dev Shayani Ekadashi kab hai 2026 में , पद्मा एकादशी , हरी शयनी एकादशी किसको कहते है, क्या करे देव शयनी एकादशी को सफलता के लिए, जानिए ग्रहों की स्थिति . Devshayani Ekadashi 2026: अषाढ़ शुक्ल पक्ष का ग्यारहवां दिन बहुत ख़ास होता है भारत मे विशेषतः क्यूंकि मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान् विष्णु क्षीर सागर मे सोने के लिए चले जाते हैं. अलग अलग प्रान्तों मे अषाढ़ मास के ग्यारस को अलग लग नामो से जाना जाता है जैसे पद्मा एकादशी, प्रथमा एकादशी, हरी शयनी एकादशी आदि.   Dev Shayani Ekadashi Ki Mahima in Hindi इस पुरे दिन और रात भक्त गण भगवान् विष्णु की पूजा और आराधना मे लगे रहते हैं. इसी दिन चातुर्मास की शुरुआत भी होती है अर्थात इस दिन से ४ महीने तक साधू संत विशेष पूजा आराधना करते हैं और कहीं जाते आते भी नहीं है. वर्ष  2026  मे हरी शयनी एकादशी 25 जुलाई को है|  एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:14 बजे एकादशी तिथि का समापन: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026 को सुबह 05:39 से 08:22 बजे के बीच  मान्यता के अनुसार पद्मा एकादश...

July Purnima Ka 12 Rashiyo Par Prabhav

जुलाई पूर्णिमा कब है, जुलाई 2026 पूर्णिमा का 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, ज्योतिष भविष्यवाणियां, July Purnima Ka 12 Rashiyo Par Prabhav, गुरु पूर्णिमा 2026. **जुलाई 2026 में पूर्णिमा** 29 जुलाई को है जो भावनात्मक स्पष्टता, अनुशासन और कर्म संबंधी रहस्योद्घाटन के शक्तिशाली कंपन लेकर आएगा। वैदिक परंपरा में **गुरु पूर्णिमा** के रूप में जानी जाने वाली इस पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह गुरुओं के ज्ञान का सम्मान करती है। चाहे आप वैदिक या पश्चिमी ज्योतिष का पालन करें, यह पूर्णिमा हमारे जीवन के उन क्षेत्रों को रोशन करेगा, जिनमें परिपक्वता, संरचना और आधार की आवश्यकता होती है। July Purnima Ka 12 Rashiyo Par Prabhav आइए जानें 🌕 जुलाई 2026 पूर्णिमा का 12 राशियों पर प्रभाव : वैदिक ज्योतिष के अनुसार 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे । शनि की राशि में स्थित चंद्रमा कर्म, अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यावहारिक सोच को बढ़ावा देगा। वहीं गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक प्रभाव गुरु कृपा, ज्ञान, आत्मचिंतन और धर्म-कर्म के लिए अत्यंत शुभ ...

Surya Dakshinayan Kab Honge

वर्ष 2026 में सूर्य दक्षिणायन 16 जुलाई 2026, गुरुवार की रात को होगा। सूर्य का दक्षिणायन (कर्क संक्रांति): धार्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व भारतीय संस्कृति में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वे जीवन, ऊर्जा, प्रकाश और चेतना के स्रोत हैं। वैदिक काल से ही सूर्य की गति के आधार पर ऋतुओं, कृषि, पर्व-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का निर्धारण किया जाता रहा है। जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है, तब इस घटना को कर्क संक्रांति कहा जाता है और इसी के साथ दक्षिणायन का प्रारंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में सूर्य का दक्षिणायन 16 जुलाई 2026, गुरुवार की रात को होगा। यह दिन केवल ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। Surya Dakshinayan Kab Honge दक्षिणायन क्या है? दक्षिणायन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— दक्षिण + अयन । 'अयन' का अर्थ है 'गमन' या 'यात्रा'। जब सूर्य की आभासी गति उत्तर से दक्षिण की ओर मानी जाती है, तब उस अवधि को दक्षिणायन कहा जाता है। यह लगभग छह महीने तक चलता है और इस...

Surya Ka kark Rashi Mai Gochar Ka Fal

Surya ka kark rashi mai gochar kab hoga 2026, सूर्य का गोचर कर्क राशि में, क्या असर होगा 12 राशियों पर, Rashifal in Hindi Jyotish. Surya Ka kark Rashi Mai Gochar:  वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रह है क्योंकि इसके राशि परिवर्तन से मौसम में, लोगों के जीवन में, राजनीति में बड़े बदलाव होने लगते हैं। सूर्य हर महीने राशि बदलता है और उसके अनुसार हमारे जीवन में भी बदलाव होते रहते हैं। सूर्य 16 जुलाई, 2026 को भारतीय समय के अनुसार  रात्री में  लगभग  11:25 बजे कर्क राशि में गोचर करेंगे । यहाँ ये  बुध और गुरु के साथ युति करेंगे. कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर महत्वपूर्ण है। इस समय के दौरान, कर्क राशि के लोग अधिक भावुक और सहज महसूस कर सकते हैं, और वे अपने  आप के साथ अधिक संपर्क में रह सकते हैं। वे दूसरों का अधिक पोषण करने वाले और देखभाल करने वाले भी हो सकते हैं। यह गोचर अन्य राशियों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि सूर्य एक शक्तिशाली ग्रह है जो सकारात्मक ऊर्जा और अवसर लाने में मदद करता है।  Surya Ka kark Rashi Mai Gochar Surya Ka kark R...

Guru Kab Ast Honge | 12 Rashiyo Par Prabhav

गुरु कब अस्त होंगे? 15 जुलाई 2026 से शुरू होगा प्रभाव, जानें 12 राशियों पर क्या असर पड़ेगा और क्यों वैदिक ज्योतिष में गुरु (बृहस्पति) को देवताओं का गुरु, ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान, शिक्षा, विवाह, धन, आध्यात्मिकता और शुभ फलों का कारक ग्रह माना जाता है। जब गुरु सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाते हैं, तब उनकी किरणें सूर्य के तेज में विलीन हो जाती हैं। इस अवस्था को गुरु अस्त (Combust Jupiter) कहा जाता है। 15 जुलाई 2026 को गुरु अस्त होने जा रहे हैं। इस अवधि में गुरु की शुभता सामान्य रूप से कमजोर मानी जाती है। विशेष रूप से विवाह, शिक्षा, धार्मिक कार्य, निवेश, संतान से जुड़े निर्णय और बड़े शुभ कार्यों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में गुरु की वास्तविक स्थिति, दृष्टि और दशा के अनुसार इसके परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। Guru Kab Ast Honge गुरु अस्त क्यों होते हैं? वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत निकट पहुंच जाता है, तब सूर्य का तेज उस ग्रह के प्रभाव को कम कर देता है। इसी स्थिति को ग्रह का अस्त होना कहा जाता है। गुरु ग्रह ज्ञान, ...