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Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Pravesh Ka 12 Rashiyo Par Prabhav

Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Pravesh Ka 12 Rashiyo Par Prabhav,  shani ka naskhatra parivartan kab hoga, shani nakshatra gochar 2026. Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Gochar: 20 जनवरी को धीमी गति से चलने वाला कर्मफलदायक ग्रह शनि (Shani) नक्षत्र परिवर्तन करते हुए उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। नक्षत्र अधिपत्य के अनुसार उत्तराभाद्रपद को शनि का अपना नक्षत्र माना जाता है जिससे शनि और शक्तिशाली हो जायेंगे, अतः यह गोचर विशेष रूप से प्रभावशाली और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बन जाता है। Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Pravesh आइये शनि के नक्षत्र गोचर को समझते हैं : ग्रह: शनि (Shani) प्रवेश नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद (जो 17 मई 2026 तक रहेगा) नक्षत्र का स्वामी: शनि (नक्षत्राधिपति नियम अनुसार) शनि की वर्तमान राशि: मीन (Pisces) शनि अनुशासन, कर्म, न्याय, धैर्य और दीर्घकालिक परिणामों का प्रतीक है, जबकि उत्तराभाद्रपद आत्मिक जागरण, स्थिरता, गहराई एवं आध्यात्मिकता से जुड़ा है। यह संयोजन आत्मचिंतन, कर्मिक शुद्धि और जीवन के पुनर्गठन को प्रोत्साहित करता ह...

Ghorkashtodharan Mantra

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र Ghorkashtodharan Stotra with Lyrics, क्यों पाठ करना चाहिए इस स्त्रोत्रम का ?, अर्थ जानिए |

Ghorkashtodharan Mantra: हिंदू धार्मिक ग्रंथों में कई प्रकार के उपायों का उल्लेख मिलता है जैसे मंत्र, तंत्र, भजन, स्तोत्र पाठ आदि | भगवान को प्रसन्न करने का सरल उपाय है स्त्रोत्रम का पाठ | देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए स्तोत्र का जाप किया जाता है और हिंदू धर्म में यह प्रथा बहुत पहले से चली आ रही है।

विशेष कार्य के लिए हर भगवान् को प्रसन्न करने के लिए विशेष प्रकार के स्त्रोत बने हैं | 

इस लेख में हम घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र को जानेंगे । इसके नियमित पाठ से जीवन में कैसा भी कष्ट हो वो दूर होता है | अतः इसका पाठ रोज करना चाहिए | 

घोरकष्टोधारणा स्तोत्र दत्त सम्प्रदाय का एक बहुत प्रसिद्ध स्तोत्र है, दत्त सम्प्रदाय के लोग हमेशा इस स्तोत्र का पाठ करते हैं। इस स्तोत्र के माध्यम से भक्त श्री दत्त से निवेदन करते हैं कि हे प्रभु, मुझे इस जीवन और मृत्यु की पीड़ा से मुक्त करें। मानव जीवन जन्म मरण के बंधन में बँधा हुआ है, मुझे इससे मुक्त करो।

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र Ghorkashtodharan Stotra with Lyrics, क्यों पाठ करना चाहिए इस स्त्रोत्रम का ?, अर्थ जानिए |
Ghorkashtodharan Mantra

Read in english about GHORKASHTODHARAN Strotram

मनुष्य के लिए सबसे घोर कष्ट ये मनुष्य जीवन ही है और इससे मुक्ति के लिए इस स्त्रोत में दत्त गुरु से प्रार्थना की जाती है | 

जन्म और मरण का जो चक्र है इसमें मनुष्य फंसा ही रह जाता है और ये एक घोर कष्टकारक है | इससे छुटकारा पाने के लिए गुरु दत्तात्रेय से प्रार्थना करते हैं इस घोरकष्टोधरणस्तोत्र में | Ghorkashtodharan Mantra

श्री सद्गुरु भगवान श्री श्रीपाद वल्लभ स्वरूप श्री वासुदेवानंद सरस्वती, श्री टेम्बेस्वामी ने मिलकर इस घोरकष्टोधरन स्तोत्र की रचना की। इस स्तोत्र के पाठ से हमें मानव जीवन से जुड़े अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति तथा भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा मिलती है | 

श्री मुख से प्राप्त इस स्तोत्र का पाठ करने से धर्म प्रेम, सु-मति, भक्ति, सत-संगति की प्राप्ति होती है। तो अंत में इस शरीर में सभी सांसारिक और पारलौकिक इच्छाएँ पूरी होती हैं। परिणामस्वरूप आपको चौथे पुरुषार्थ मुक्ति का लाभ मिलता है। धर्म, कर्म, अर्थ और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की पूर्ति के बाद भक्ति का पाँचवाँ पुरुषार्थ प्राप्त होता है।

इस प्रकार जो मनुष्य इन पांच श्लोकों का नियमित पाठ करता है, वह सब प्रकार से धन्य हो जाता है। इसके अलावा, ऐसे भक्त श्री दत्तात्रेय को प्रिय होते हैं। घोरकष्टोधारण स्तोत्र को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाइए जिससे सभी इसका लाभ ले सके |

पढ़िए दत्तात्रेय कवच के फायदे क्या है ?

|| घोरकष्टोधरणस्तोत्रम || Ghorkashtodharan Mantra

श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वम् सदैव । श्रीदत्तास्मान्पाहि देवाधिदेव ।।

भावग्राह्य क्लेशहारिन्सुकीर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ।। १।।


त्वम् नो माता त्वम् पिताऽऽप्तोऽधिपस्त्वम् । त्राता योगक्षेमकृत्सद्गुरुस्त्वम् ।।

त्वम् सर्वस्वम् नोऽप्रभो विश्वमूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ।। २।।


पापम् तापम् व्याधिमाधिम् च दैन्यम् । भीतिम् क्लेशम् त्वम् हराऽऽशु त्वदन्यम् ।।

त्रातारम् नो वीक्ष्य ईशास्तजूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ।। ३।।


नान्यस्त्राता नापि दाता न भर्ता । त्वत्तो देव त्वम् शरण्योऽकहर्ता ।।

कुर्वात्रेयानुग्रहम् पूर्णराते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ।। ४।। Ghorkashtodharan Mantra


धर्मे प्रीतिम् सन्मतिम् देवभक्तिम् । सत्संगाप्तिम् देहि भुक्तिम् च मुक्तिम् ।

भावासक्तिम् चाखिलानन्दमूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ।। ५।।

श्लोकपंचकमेततद्यो लोकमङ्गलवर्धनम् । प्रपठेन्नियतो भक्त्या स श्रीदत्तप्रियो भवेत् ॥ ६॥


|| इति श्रीमद वासुदेवानन्द सरस्वती विरचितं घोरकष्टोधरणस्तोत्रम सम्पूर्णम् ||


घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र Ghorkashtodharan Stotra with Lyrics, क्यों पाठ करना चाहिए इस स्त्रोत्रम का ?, अर्थ जानिए |

Ghorkashtodharan Stotram Meaning In Hindi:

हे भगवान! श्रीपाद श्रीवल्लभ! आप नित्य निराकार हैं। आप स्वयं श्री दत्तात्रेय के स्वरुप हैं। हमारी प्रार्थनाओं को स्वीकार करें और हमारी रक्षा करें। हमारे सभी दुखों और कष्टों को दूर करो, हम आपकी पूजा करते हैं। मैं आपके सुंदर नाम की स्तुति करता हूं, कीर्तन गाता हूं। हमको घोर संकट से उबारो, हम आपको प्रणाम करते हैं॥

आप ही माँ हो, आप पिता हो, भाई हो और बहन हो। हे सद्गुरु, आप ही मुक्तिदाता हैं, अर्थात आप ही हमें इस घोर संकट से बाहर निकालने वाले हैं, आप ही हमारे योगक्षेम का पथ प्रदर्शन करने वाले हैं। Ghorkashtodharan Mantra

आपके बिना हम कुछ नहीं, आप सब कुछ हो विश्वमूर्ति हो,  हमें घोर संकटों से बचाते हैं, हम आपको नमस्कार करते हैं।

हे परमेश्वर, आप हमारे पाप, ज्वर को हरने वाले हैं। आप सभी रोग, दुख, कष्ट, दरिद्रता को दूर करने वाले हैं। आप ही हैं जो मुझे इस जन्म और मृत्यु के भय और पीड़ा से मुक्त करते हैं। आपके अलावा कोई और नहीं कर सकता। आप ही मालिक हैं। हमको घोर संकट से उबारो, हम आपको प्रणाम करते हैं॥

हे सद्गुरु! हमें बचाने वाला आपके सिवा कोई नहीं है। आपके सिवा हमें देने वाला और पालने वाला कोई नहीं है। हे सद्गुरु, हम आपके ही शरण हैं क्योंकि आप हमारे भगवान हैं। हे अत्रिय (अत्रि के पुत्र), हम पर कृपा करें, हमें घोर कष्ट से बचाएं, हम आपको नमस्कार करते हैं। Ghorkashtodharan Mantra

हे अखिलंदमुर्ते! आप दुनिया के सभी आनंद की मूर्ति हैं। हमें धार्मिकता, सन्मति और ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम दो। हे भगवान, हमें सत्संग भुक्ति और मुक्ति प्रदान करें  हमें भयानक संकट से बचाएं, हम आपको नमस्कार करते हैं।

उपरोक्त पांचों श्लोक लोक कल्याण के लिए हैं। जो कोई भी निरंतर भक्ति के साथ इस स्तोत्र का जाप करेगा, वह श्रीदत्त को प्रिय होगा।

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र Ghorkashtodharan Stotra with Lyrics, क्यों पाठ करना चाहिए इस स्त्रोत्रम का ?, अर्थ जानिए |

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