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Latest Astrology Updates in Hindi

Surya Aur Shani Ke Beech SHADASHTAK YOG ka 12 Rashio Par Prabhav aur Sawdhaniyan

17 अक्टूबर से सूर्य-शनि का षडाष्टक योग: 12 राशियों पर प्रभाव 17 अक्टूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही सूर्य और शनि के बीच षडाष्टक संबंध बनेगा। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, पिता, नेतृत्व, प्रशासन और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन, देरी, जिम्मेदारियों और संघर्ष से जुड़े हैं। सूर्य और शनि के बीच 6-8 का संबंध होने पर इसे षडाष्टक योग कहा जाता है, जिसे सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में अहंकार और अनुशासन के बीच टकराव, कार्यक्षेत्र में दबाव, वरिष्ठों से मतभेद, पारिवारिक जिम्मेदारियों में वृद्धि और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से परेशानी हो सकती है। हालांकि, सावधानी, संयम और सही कर्म से इस समय को सकारात्मक दिशा भी दी जा सकती है। Surya Aur Shani Ke Beech SHADASHTAK YOG आइये जानते हैं 12 राशियों पर क्या प्रभाव होगा सूर्य और शनि के बीच षडाष्टक योग के कारण: ♈ मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय रिश्तों, साझेदारी और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की परीक्षा ले सकता है। जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ किसी बात को ...

Kab Kare Ganesh Sthapna

कब करे गणेश स्थापना?, जानिए महूरत बाप्पा को स्थापित करने का, कैसे लाभ ले अच्छे महूरत का, 2026 गणेश स्थापना महुरत.

Ganesh Sthapna Mahurat 2026: गणेश उत्सव शुरू हो रहा है और ऐसे में सभी लोग विघ्नहर्ता को मनाने में लगे रहेंगे क्यूंकि वो दुर्भाग्य नाशक है, परेशानियों को दूर करने वाले हैं. इन्हें प्रथम पूज्य कहा गया है देवताओं में इसीलिए गणेशजी का विशेष स्थान है सभी के हृदय में.

हर साल भाद्रपद के महीने में चतुर्थी को एक विशेष दिन होता है जब से गणेश उत्सव प्रारम्भ होता है, पूरे भारत में लोग बड़े हर्ष और उल्लास के साथ इस उत्सव को मनाते हैं. करीब १० दिन ये उत्सव चलता है.

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Kab Kare Ganesh Sthapna

अगर गणेश पूजन शिव और पार्वती जी के साथ की जाए तो और भी अच्छा होता है.

ऐसी मान्यता है की चतुर्थी को बाप्पा का जन्म होता था इसीलिए उनके जन्म के उपलक्ष में गणेश उत्सव मनाया जाता है.

आइये अब जानते हैं गणेश स्थापना के महुरत 2026:

चतुर्थी तिथि 14 September को प्रातः में लगभग 7:07 पे शुरू होगी और 15 September को प्रातः में लगभग 7:43 तक रहेगी तो उदया तिथि के अनुसार गणेश स्थापना 14 सितम्बर सोमवार को किया जायेगा. 

आइये जानते हैं चोघडिया महुरत :
  • दिन में 9:00  से 10:30 तक शुभ का चोघडिया रहेगा |
  • दिन में 1:30 से 3:00 तक चर का चोघडिया रहेगा |
  • 3:00 से शाम 4:30 तक लाभ का चोघडिया रहेगा |
  • शाम 4:30 से 6 बजे तक अमृत का चोघडिया रहेगा | 
  • अभिजीत  महूरत  दिन में लगभग 11:58 से शुरू होगा और 12:46 तक रहेगा.
इस दिन राहुकाल सुबह 7:30 से 9बजे तक रहेगा.

    आइये जानते हैं गणेश जी के पूजन में किन सामग्रियों की जरुरत पड़ेगी ?

    कलश स्थापना सामग्री :
    कलश/लौटा, लाल कपडा, आम के या फिर पान के पत्ते (5), सुपारी, हल्दी की गांठ, चावल, दूर्वा घास, सिक्का, नारियल, मौली/कलावा/नाड़ी, 1 दीपक  |

    पूजन सामग्री List :
    गणेश जी की छोटी मूर्ति और साथ 7 सुपारी(रिद्धि और सिद्धि माता की स्थापना के लिए और भोग के लिए), चौकी, गंगाजल, लौटा, जनेऊ, पान के पत्ते(5), दीपक, हार, फूल, फल(5 प्रकार के ) प्रसाद (लड्डू/ मोदक), नारियल का सूखा गोला , गुड, लौंग, इलायची, चावल, अष्टगंध, आरती की थाली, माचिस, पंचमेवा,  धूप, कपूर, रुई की बत्तियां, इत्र, कुशा, दक्षिणा, लाल और सफ़ेद कपडा, मौली, दीपक, रोली, अक्षत, हल्दी की गाँठ, दूर्वा घास, घी या तेल, गूगल धूप के लिए, धूप दानी, आसन. Ganesh Sthapna Mahurat 2026

    आइये जानते हैं भगवान गणेश की स्थापना और पूजन कैसे कर सकते हैं ?

    1. गणेश जी की स्थापना ईशान कोण में करें तो बहुत अच्छा रहता है |
    2. सबसे पहले चौकी लीजिये और उसे अच्छे से साफ करके गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लीजिये |
    3. फिर उसपे लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर अक्षत रखें और गणेशजी को स्थापित करें और अगल बगल में रिद्धि-सिद्धि को स्थापित करें | 
    4. कलश स्थापना के लिए उसमे जल भरें, गंगाजल डालिए, फिर उसमे सुपारी, दूर्वा, अक्षत और एक सिक्का डालिए फिर 5 आम के पत्ते या फिर पान के पत्ते लगा के उसपे श्रीफल को स्थापित करें | श्री फल को रखने से पहले उसपे मौली बाँध दे और स्वस्तिक बना दें |
    5. इसके बाद गणेशजी और कलश का पूजन करें | उन्हें फूल, फल, धुप, दीप दिखाएँ |
    6. उन्हें पान अर्पित करें |
    7. पूजन करते हुए इनके मंत्र "ॐ गं गणपतये नम:" का जाप करते रहें |
    8. पूजा के अंत में भगवान श्री गणेश की आरती उतारें और आशीर्वाद मांगे, प्रसाद सभी में बाँट दे |Ganesh Sthapna Mahurat 2026

    श्री गणेश की कृपा सभी को प्राप्त हो, सभी के जीवन में से बाधाओं का नाश हो, सभी सफलता प्राप्त करें.

    क्या भेंट करे गणेशजी को प्रसन्न करने के लिए ?

    1. ऐसी मान्यता है की गणेशजी को दूर्वा घास बहुत पसंद है अतः जो भक्त उनको दूर्वा अर्पित करते हैं उनकी मनोकामना पूरी करते हैं.
    2. मोतीचूर के लड्डू भी उनको बहुत पसंद है.
    3. केले भी उनको बहुत पसंद है.
    गणेश उत्सव के दौरान अलग अलग दिन ना ना प्रकार के भोग उनको अर्पित करना चाहिए और फिर उसे परिवार के लोगो, पड़ोसियों, आदि में बाटना चाहिए. सभी तरफ प्रेम, सौहार्द्र, शांति, समानता की भावना का विकास करे. सभी के लिए स्वास्थ्य और सम्पन्नता के लिए प्रार्थना करे और बदले में खुद के लिए भी यही पायें.

    • अगर कोई धन की समस्या से ग्रस्त है तो गणेश पूजन करना चाहिए.
    • अगर कोई पारिवारिक समस्या से ग्रस्त है तो उन्हें गणेश पूजन करना चाहिए.
    • अगर कोई कुंडली में ख़राब ग्रहों के कारण परेशान हैं तो उन्हें भी गणेश पूजन से लाभ हो सकता है.
    • स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा हो तो भी गणेश पूजन लाभदाय होता है.
    • शत्रुओं, नकारात्मकता और नवग्रह दोष से सुरक्षा मिलती है गणेश जी की कृपा से |
    • दिव्य बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है |
    • व्यापार घाटे और कर्ज पर अंकुश लगाने में मदद करता है श्री गणेश ।
    • सभी कष्टों, अनिश्चितताओं और समस्याओं को नष्ट कर देने में समर्थ है गणपति |
    • खराब स्वास्थ्य से राहत मिलती है | 
    • आठ प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है | 
    • विपत्तियों से मुक्ति मिलती है और सौभाग्य बढ़ता है।
    • मनचाहा जीवनसाथी ढूंढने में मदद मिलती है |
    • बुद्धि तीव्र होती है|
    • मानसिक शांति मिलती है
    • करियर में सफलता सुनिश्चित होती है |
    • असामयिक मृत्यु से बचावो होता है और दुःख दूर होते हैं |

    गणेश जी से जुड़ने के कुछ त्वरित तरीके यहां दिए गए हैं:

    1. पवित्र भजनों का गान.
    2. गणेश मंत्रों से हवन करें।
    3. भगवान गणेश के 108 नामों का जाप करें।
    4. गणेश सहस्त्रनाम का पाठ.
    5. महागणपति तर्पण प्रयोग यानी गणेश जी का जलाभिषेक करें।
    गणेशजी वो देवता है जिनको किसी भी पूजा में सबसे पहले पूजा जाता है इसीलिए इनको प्रथम पूज्य कहा जाता है सभी देवी देवताओं में. इन्हें विघ्न विनाशक, विघ्नहरता, सर्व प्रदाय आदि नामो से जाना जाता है.

    वक्र तुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ |
    निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्व कार्येशु सर्वदा ||

    इसका अर्थ है – गणेशजी आपकी सूंड वक्राकार है और आपका शारीर महाकाय और शक्तिशाली है, कोटि सूर्यो का तेज आपमे हैं, आप हमारे जीवन से परेशानियों को ख़त्म करे, हमारे मार्ग निष्कंटक करे.

    Note: There may be little bit change as per local place.

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