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Jivika Sadhan Aur Jyotish

ज्योतिष से जानें जीविका के रहस्य, क्या होगा जीविका क्षेत्र, ज्योतिष की राय: जानें, किस रोजगार में भाग्य देगा साथ, आईये जाने जीविका प्राप्ति के योग ज्योतिष.
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Jivika Sadhan Aur Jyotish

कुंडली में भाव अनुसार रोजगार जानिए ज्योतिष में:

जीविका साधन का जीवन में बहुत महत्त्व है, सही जीविका मिल जाए तो जीवन आसान हो जाता है परन्तु गलत जीविका चुनने से कई परेशानियाँ जीवन में आने लगती है और सही सफलता भी नहीं मिल पाती है. ज्योतिष में कुंडली के ग्रहों को देखके सही रोजगार को चुनने में सहायता मिलती है. इस लेख में हम देखेंगे की ज्योतिष में रोजगार को कैसे जाना जा सकता है विभिन्न तरीको से. 

आइये देखते हैं की कुंडली का दसवां भाव से रोजगार या जीविका को कैसे जाना जा सकता है:

  1. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी लग्न में बैठे तो जातक कड़ी मेहनत करने में सक्षम होता है और खुद की मेहनत से जीवन में सफलता प्राप्त करता है. ऐसे लोग व्यापार चला के सफल जीवन व्यतीत कर सकते हैं. 
  2. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के दुसरे घर में बैठे तो जातक भाग्यवान होता है और वो किसी भी साधन को चुनके सफलता प्राप्त कर सकता है. ऐसे में ये भी देखा गया है की जातक पारिवारिक रोजगार को ही अपनाता है जीवन जीता है. ऐसे में उसके लिए जीवन आसान हो जाता है. 
  3. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के तीसरे भाव में बैठे तो जातक को अपने भाई या बहन से मदद मिलती है जीविका को अपनाने में. ऐसे जातक अच्छे वक्ता और घुमने के शौक़ीन भी होते हैं. 
  4. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी चोथे भाव में बैठे तो जातक बहुत भाग्यशाली होता है, नाम, यश, ख्याति आसानी से हासिल कर लेता है. ऐसे लोग राजनीति, खेती, जमीन के कार्य, वाहन से जुड़े व्यापार आदि में सफल देखे जाते हैं ज्योतिष के हिसाब से. 
  5. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी पांचवे भाव में बैठे तो जातक सट्टे बाजी में सफल हो सकते हैं, इन लोगो के लिए शेयर मार्किट, ट्रेडिंग का कार्य, वित्तीय सम्बन्धी कार्य सफलता के दरवाजे खोल सकते हैं. 
  6. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के छठे भाव में बैठे तो जातक चिकित्सा सम्बन्धी कार्य, न्याय सम्बन्धी कार्यो में रोजगार प्राप्त करके सफल जीवन जी सकता है. ऐसे लोगो के लिए व्यापार ठीक नहीं होता है, ऐसे लोगो को नौकरी करना चाहिए. 
  7. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के सातवें भाव में बैठे तो जातक साझेदारी में कार्य करके लाभ ले सकता है. ऐसे जातक का विवाह बाद भाग्योदय होता है और विदेश जाने के योग भी बनते हैं. 
  8. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के आठवे भाव में बैठे तो जातक को थोड़ी कठिनाई आती है रोजगार में, बाधाओं के साथ जीवन में आगे बढ़ना होता है. जीवन में सफलता के लिए बहुत मेहनत करना होती है. 
  9. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के नवें भाव में बैठे तो जातक एक अच्छा सलाहकार बन सकता है, ऐसे जातक अध्यात्मिक जीवन में भी काफी आगे बढ़ पाते हैं और कई बार अध्यात्मिक कार्यो को करके जीवन व्यापन करते हैं. 
  10. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के दसवें भाव में बैठे तो जातक अपना खुद का कोई कार्य करके अपार सफलता प्राप्त करता है. 
  11. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के ग्यारहवें भाव में बैठे तो जातक बड़ा कारखाना डालने की योग्यता रखता है और अपने ज्ञान और कर्म के द्वारा काफी ख्याति अर्जित करता है. 
  12. जब कुंडली के दसवे भाव का स्वामी कुंडली के बारहवें भाव में बैठे तो जातक को जीवन में कुछ परेशानियों के साथ आगे बढ़ना होता है. बदकिस्मती कई बार बनते कार्यो को बिगाड़ देता हैं परन्तु जातक अपनी कड़ी मेहनत से अपना जीवन बदलने में सक्षम होता है. 
ज्योतिष से जानिए कौन सा रोजगार और जीविका में आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं. कैसे पा सकते हैं अपार सफलता जीवन में ज्योतिष के हिसाब से, कौन सी पूजा आपके लिए शुभ है, कौन सा रत्न आपके सफलता के द्वार खोलेगी.
ज्योतिष से जानें जीविका के रहस्य, क्या होगा जीविका क्षेत्र, ज्योतिष की राय: जानें, किस रोजगार में भाग्य देगा साथ, आईये जाने जीविका प्राप्ति के योग ज्योतिष.


आइये अब जानते हैं जीविका के साधन के बारे में कुंडली के विभिन्न भावों के अनुसार:

कुंडली का हर घर अलग अलग कार्यो से जुड़ा है, जीविका या फिर रोजगार को चुनने से पहले ज्योतिष में भावो का अध्ययन भी किया जाता है. 
  1. कुंडली का पहला घर : इस घर को लग्न भी कहते हैं और इस घर के स्वामी की स्थिति और स्थान के अनुसार जीवन में बहुत कुछ घटित होता है. ये भाव हमारे दिमाग से सम्बन्ध रखता है अतः अगर लग्नेश शक्तिशाली हो तो जातक को व्यापारी बना सकता है, सफल राजनीतिज्ञ बना सकता है, सलाहकार बना सकता है, गुरु बना सकता है. 
  2. कुंडली का दूसरा घर : ये भाव लाभ भाव भी कहलाता है और अगर इस घर का स्वामी अच्छी स्थिति में हो तो जातक एकाउंटिंग, निवेश, बैंकिंग, लेखक आदि के क्षेत्र में जाके सफल रोजगार प्राप्त कर सकते हैं. 
  3. कुंडली का तीसरा घर और जीविका: ज्योतिष के हिसाब से अगर कुंडली का तीसरा घर शक्तिशाली हो तो जातक रचनात्मक होता है और ऐसे ही कार्यो में सफल होता है जैसे कला, सेल्स, विज्ञापन, आदि. 
  4. कुंडली का चौथा घर और जीविका: ये भाव जातक के खुशियों से जुड़ा है, आराम से जुड़ा है अतः अगर ये भाव मजबूत हो तो जातक जमीन सम्बंधित कार्यो में सफल हो सकता है, गाड़ी सम्बंधित कार्य कर सकता है, खेती, जल सम्बंधित कार्यो को कर सकता है. 
  5. कुंडली का पांचवा घर और जीविका:ये भाव ज्ञान से जुड़ा है और अगर ये भाव अच्छा है तो तो जातक को शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार लेके सफलता हासिल करना चाहिए, ऐसे जातक राजनीति, सलाहकारी आदि क्षेत्र में भी जा सकते हैं. 
  6. कुंडली का छठा घर और जीविका: ये भाव का स्वामी अगर शक्तिशाली हो या फिर ये घर अगर शक्तिशाली हो तो जातक रक्षा सेवाओं जैसे फ़ौज, पुलिस, जल सेना, चिकित्सा क्षेत्र, भोअजन सम्बंधित क्षेत्र, अंडर गारमेंट्स के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं. 
  7. कुंडली का सातवां घर और जीविका: ज्योतिष के हिसाब से अगर कुंडली का सातवां घर मजबूत हो तो जातक साझेदारी के कार्यो में सफलता प्राप्त कर सकता है, ट्रेडिंग कर सकता है, आयात और निर्यात आदि के कार्यो को कर सकता है. 
  8. कुंडली का आठवां घर और जीविका : अगर कुंडली का आठवां घर शक्तिशाली हो तो जातक बीमा क्षेत्र चिकित्सा क्षेत्र, यौन इंडस्ट्री में सफल कार्य कर सकता है. 
  9. कुंडली का नौवां घर और जीविका : अगर कुंडली का नौवां घर शक्तिशाली हो तो जातक को विदेश में सफलता मिल सकती है, जातक अध्यात्मिक कार्यो से भी जीविका कम सकता है, शिक्षा क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त कर सकता है. 
  10. कुंडली का दसवां घर और जीविका : ज्योतिष के हिसाब से कुंडली का दसवां भाव अगर मजबूत हो तो जातक सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकता है, राजनीति में जा सकता है, पैतृक कार्य भी कर सकता है, किसी कंपनी में मैनेजमेंट में रहके कार्य कर सकता है.
  11. कुंडली का ग्यारहवां घर और जीविका : अगर कुंडली में ये भाव मजबूत हो तो जातक व्यापार में सफल हो सकता है, ट्रेडिंग के कार्यो में सफल हो सकता है, वो एक से अधिक कार्यो को करके भी जीविका कम सकता है. 
  12. कुंडली का बारहवां घर और जीविका :ज्योतिष के हिसाब से अगर ये भाव शक्तिशाली हो तो जातक विदेश में सफ़ल हो सकता है, घुमने फिरने के कार्यो को कर सकता है, जासूसी में जा सकता है, किसी NGO के साथ जुड़ सकता है. 
अतः रोजगार निर्णय में कुंडली का बहुत महत्त्व है. 
इसी प्रकार कुंडली में ग्रहों की स्थिति और शक्ति का अध्ययन भी जीविका चुनने में मदद करता है. 

आइये जानते हैं कुंडली में ग्रहों को देखके कैसे रोजगार या जीविका चुन सकते हैं:

ज्योतिष से जानें जीविका के रहस्य, क्या होगा जीविका क्षेत्र, ज्योतिष की राय: जानें, किस रोजगार में भाग्य देगा साथ, आईये जाने जीविका प्राप्ति के योग ज्योतिष.
  1. ज्योतिष के हिसाब से सूर्य का सम्बन्ध प्रबंधन, राजनीति, सरकारी काम, चिकित्सा, यात्रा आदि से है. 
  2. चन्द्रमा का सम्बन्ध यात्रा, समुद्री क्षेत्र, आयात-निर्यात आदि से है. 
  3. मंगल का सम्बन्ध रक्षा सेवाएँ, धातु, भूमि, हथियार, सर्जरी, इंजीनियरिंग आदि से है. 
  4. बुध ग्रह का सम्बन्ध लेखन, लेखा जोखा, शिक्षा, सलाहकारी अदि से है. 
  5. गुरु ग्रह का सम्बन्ध वित्तीय क्षेत्र, धार्मिक क्षेत्र, राजनीति, सामाजिक आदि क्षेत्रो से है. 
  6. शुक्र का सम्बन्ध मनोरंजन, ठाठ-बाट, यौन क्षेत्र, होटल, कला आदि से है. 
  7. शनि ग्रह का सम्बन्ध श्रम, भूमि, खेती, धातु, तेल आदि से है. 
  8. राहु का सम्बन्ध शोध सम्बन्धी कार्यो से है, जादू से है, सट्टा, बिजली, बेकार की चीजो से है, रहस्यमई कार्यो, जादू आदि से है.
  9. केतु का सम्बन्ध रहस्यमय कार्यो से है, धार्मिक क्षेत्र से है, तंत्र, मंत्र अदि से है. 
अतः ज्योतिष की सहयता से हम जीविका और रोजगार को चुन सकते हैं और सफलता पूर्वक अपना जीवन यापन कर सकते हैं. 
किसी भी प्रकार के ज्योतिषीय सहायता के लिए अभी संपर्क कर सकते हैं ज्योतिष से.


और सम्बंधित लेख पढ़े:
करियर चुनने में ज्योतिष का योगदान 
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ज्योतिष से जानें जीविका के रहस्य, क्या होगा जीविका क्षेत्र, ज्योतिष की राय: जानें, किस रोजगार में भाग्य देगा साथ, आईये जाने जीविका प्राप्ति के योग ज्योतिष.

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