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Jyoitish Sewaye Online || ज्योतिष सेवा ऑनलाइन

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ज्योतिष सेवा ऑनलाइन: एक अच्छा ज्योतिष कुंडली को देखके जातक का मार्गदर्शन कर सकता है. कुंडली मे ग्रह विभिन्न भावों मे बैठे रहते हैं और जातक के जीवन मे प्रभाव उत्पन्न करते हैं. अगर कोई व्यक्ति जीवन मे  समस्या से ग्रस्त है तो इसका मतलब है की उसके जीवन इस समय बुरे ग्रहों का प्रभाव चल रहा है और यदि कोई व्यक्ति सफलता प्राप्त कर रहा है तो इसका मतलब है की इस समय उसके जीवन मे शुभ ग्रहों का प्रभाव है.  विभिन्न ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा मे व्यक्ति अलग अलग प्रकार के प्रभावों से गुजरता है जिसके बारे एक अच्छा ज्योतिष जानकारी दे सकता है.  ग्रहों का असर व्यक्ति के कामकाजी जीवन पर पड़ता है.
ग्रहों का असर व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर पड़ता है.
सितारों का असर व्यक्ति के सामाजिक जीवन पर पड़ता है.
व्यक्ति के पढ़ाई –लिखाई , वैवाहिक जीवन, प्रेम जीवन, स्वास्थ्य आदि पर ग्रह – सितारों का असर पूरा पड़ता है.  आप “www.jyotishsansar.com” माध्यम से पा सकते हैं कुछ ख़ास ज्योतिषीय सेवाए ऑनलाइन :जानिए क्या कहती है आपकी कुंडली आ…

Sheetla Mata Ka Mahatwa In Hindi

शीतला अष्टमी का महत्व , शीतला माता का व्रत, कैसे करते है शीतला माता का पूजन, क्या फायदे होते हैं शीतला माता की पूजा करने के.
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भारत में प्राचीन काल से शीतला माता का पूजन करने की परंपरा रही है, साल में एक बार होली के बाद शीतला अष्टमी का त्यौहार मनाया जाता रहा है, ऐसा विश्वास किया जाता है की शीतला माता का पूजन कई गंभीर बिमारिओं से हमारी रक्षा करता है. 
होली के सात दिन बाद अर्थात कृष्णा पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतलाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है जिसमे की माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है. इसी कारण इस त्यौहार को “बासोड़ा” के नाम से भी जाना जाता है. 

क्या फायदे होते हैं शीतला माता पूजन का:

मान्यता के अनुसार शीतला माता भक्तो को कई प्रकार की गंभीर बिमारिओं से बचाती है जैसे की चेचक, खसरा , चरम रोग कई प्रकार के आदि. 
सुन्दरता के लिए शारीर का निरोगी होना अति आवश्यक है इसी कारण शीतला माता का पूजन हमे जरुरी होता है, इनकी कृपा से एक स्वस्थ शारीर मिलता है जिससे की हम जीवन को सुगमता से जी सकते हैं. 
स्कन्द पुराण में शीतलामाता पूजन का विवरण मिलता है. ये उत्सव हमे प्रेरित करता है सफाई रखने के लिए, ये उत्सव हमे वातावरण को साफ़ सुथरा रखने के फायदे बताता है, ये हमे स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है. 

कैसे करते हैं शीतलामाता पूजन:

hindi पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को शीतला माता का पूजन करने का विधान है. परन्तु इस दिन से एक दिन पहले ही भक्त गण माता को भोग लगाने के लिए भोजन तैयार कर लेते हैं. 
अष्टमी तिथि को सुबह ब्रह्म मुहुर्त में उठके साफ़ सफाई करके स्नान करके शीतला माता के मंदिर जाके विधिवत पूजा की जाती है और बसी भोजन का भोग लगाया जाता है. इसके बाद कुछ भक्त उपवास भी रह्लेते हैं और शाम को बसी भोजन से उपवास खोलते हैं.
  • जो उपवास नहीं रखते हैं वो बासी भोजन की प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. इस दिन कोई भी चूल्हा नहीं जलाता है. 
  • पूजन के बाद शीतला अष्टक स्त्रोत का पाठ भी करने का विधान है. और प्रसाद सगे सम्बन्धियों में, पड़ोसियों में बांटा जाता है. 
  • देखा जाए तो शीतला माता का पूजन हमे एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है, हमे बासी भोजन के महत्व को बताता है, हमे वातावरण को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है.
अतः माता का पूजन करे और आशीर्वाद प्राप्त करे, सबका सम्मान करे, साफ़ , सफाई और पवित्रता बनाए रखे. इससे सब निरोगी रहेंगे और जीवन को सुगमता से जी पायेंगे.

शीतला अष्टमी का महत्व , शीतला माता का व्रत, कैसे करते है शीतला माता का पूजन, क्या फायदे होते हैं शीतला माता की पूजा करने के.

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