मिथुन लग्न: अस्त चंद्रमा के 12 भावों में प्रभाव व उपाय, Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Me Prabhav, Jyotish Updates. मिथुन लग्न में चंद्रमा दूसरे भाव का स्वामी होता है, जो परिवार, वाणी, धन-संपत्ति, मूल्य और भोजन की आदतों का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा अस्त (Combust) हो जाता है (अर्थात सूर्य के बहुत नज़दीक आ जाता है), तब उसकी प्राकृतिक शक्तियाँ कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे भावनात्मक स्थिरता, आर्थिक पक्ष और पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है—यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्र किस भाव में स्थित है। अस्त चंद्रमा मानसिक तनाव बढ़ाता है क्योंकि मिथुन राशि का स्वामी बुध है—जो बुद्धि और विश्लेषण का ग्रह है—जबकि चंद्रमा भावनाओं का प्रतिनिधि है। Mithun Lagn Ki Kundli Mai Ast Chandrama Ka 12 Bhavon Mai Prabhav aur Upay अस्त चंद्रमा क्या होता है? जब चंद्रमा सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तब उसे अस्त (Combust) कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की शक्ति कम हो जाती है, जिससे: भावनाओं की अभिव्यक्ति कमजोर होती है अधिक सोचने की प्रवृत्ति बढती है आर्थिक अस...
सूर्य वृश्चिक राशी में, आइये जानते है वृश्चिक संक्रांति का महत्त्व, क्या करे सफलता के लिए.
जब सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है गोचर में तो उसे वृश्चिक संक्रांति कहते हैं. ये एक महत्त्वपूर्ण दिन होता है क्यूंकि इससे पहले सूर्य अपने नीच राशि तुला में होता है जिसके कारण बहुत परेशानिया आती है. वृश्चिक संक्रांति से लोगो को थोडा आराम मिलना शुरू होता है.
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| Surya Vrischik Rashi Me |
हिन्दू धर्म में वृश्चिक संक्रांति का काफी महत्त्व है , ये एक पवित्र दिन है जब लोग सूर्य भगवान् की पूजा करते हैं जीवन को सफल बनाने के लिए. लोग जरुरतमंदों को दान भी देते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. पितरो को खुश करने के लिए भी इस दिन पूजाए की जाती है.
राशी चक्र में वृश्चिक का आठवां स्थान होता है और इसका स्वामी मंगल होता है. सूर्य वृश्चिक राशि में शुभ प्रभाव उत्पन्न करता है. इसके पहले सूर्य तुला राशि में होता है जिससे की सूर्य नीच का होता है और जीवन में कई नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है परन्तु वृश्चिक राशि में आने से लोगो को परेशानियों से राहत मिलना शुरू होता है. अतः ये संक्रांति ख़ुशी लाता है, तरक्की लाता है, सफलता के रास्ते खोलता है.
लोग बाजार में सकारात्मक सोचते है जिससे की तरक्की दिखने लगती है.
आइये सूर्य के वृश्चिक राशि में आने के महत्त्व को जानते हैं :
- वृश्चिक राशी का सूर्य सकारात्मक होता है और प्रसन्नता लाता है जीवन में. नाम, यश , सम्मान को जीवन में लाने के रास्ते खोलता है.
- वो लोग जिनके कुंडली में वृश्चिक का सूर्य बैठा है , उनको जीवन में जरुर से कुछ अच्छे बदलाव नजर आते हैं वृश्चिक संक्रांति से.
- जिनको अपने पितरो को खुश करना है उनके लिए भी ये दिन शुभ है.
- जो लोग जीवन में सूर्य के कारण परेशानी उठा रहे है उनको भी इस संक्रांति से फायदे नजर आने लगते हैं.
- वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है.
आइये अब जानते हैं की वृश्चिक संक्रांति को सफलता के लिए क्या कर सकते हैं ?
- इस दिन सूर्य पूजा शुभता लाती है.
- सूर्य देव को जल में लाल फूल डाल के अर्ध्य देना शुभ होता है.
- भूखो को भोजन और मीठा बाटना शुभ होता है.
- इस दिन ब्राहमणों और बड़ो का आशीर्वाद लेना शुभ होता है.
- आदित्य हृदय का पाठ शुभता लाता है.
- गायो को चारा खिलाना शुभ होता है.
- पितरो के नाम से भी भोग निकालना शुभ होता है.
इस प्रकार से हम वृश्चिक संक्रांति को सफल बना सकते है और सफलता के रास्ते खोल सकते हैं.
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