Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Pravesh Ka 12 Rashiyo Par Prabhav, shani ka naskhatra parivartan kab hoga, shani nakshatra gochar 2026. Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Gochar: 20 जनवरी को धीमी गति से चलने वाला कर्मफलदायक ग्रह शनि (Shani) नक्षत्र परिवर्तन करते हुए उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। नक्षत्र अधिपत्य के अनुसार उत्तराभाद्रपद को शनि का अपना नक्षत्र माना जाता है जिससे शनि और शक्तिशाली हो जायेंगे, अतः यह गोचर विशेष रूप से प्रभावशाली और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बन जाता है। Shani Ka UttarBhadrapad Nakshatra Mai Pravesh आइये शनि के नक्षत्र गोचर को समझते हैं : ग्रह: शनि (Shani) प्रवेश नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा (जो 17 मई 2026 तक रहेगा) नक्षत्र का स्वामी: शनि (नक्षत्राधिपति नियम अनुसार) शनि की वर्तमान राशि: मीन (Pisces) शनि अनुशासन, कर्म, न्याय, धैर्य और दीर्घकालिक परिणामों का प्रतीक है, जबकि उत्तराभाद्रपद आत्मिक जागरण, स्थिरता, गहराई एवं आध्यात्मिकता से जुड़ा है। यह संयोजन आत्मचिंतन, कर्मिक शुद्धि और जीवन के पुनर्गठन को प्रोत्साहित करता ...
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ऐसे देवता जो की शिव का अंश है, ऐसे भगवान् जो की श्री राम के प्रति अपनी भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं, ऐसे देवता जिनको अन्य सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त है , वो है केसरी नंदन हनुमानजी.
हनुमानजी शक्ति का केंद्र है, उनके सामान शक्तिशाली पुरे ब्रह्माण्ड में कोई नहीं, उनके सामान ज्ञानवान भक्त भी कोई नहीं.
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| hanuman sadhna in hindi |
इस कलयुग में भी भक्तगण उनका दर्शन करते है और उनकी कृपा प्राप्त करके निडर जीवन जीते हैं. इसमें कोई शक नहीं की अपनी शरण में आये हुए व्यक्ति की हनुमानजी रक्षा करते हैं. जो भी व्यक्ति हनुमानजी की साधना करते हैं उनके ऊपर किसी भी प्रकार के जादू, नजर दोष, बुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं होता है.
हनुमानजी सर्वशक्तिमान है, सर्वज्ञ है, सर्वव्यापी है. हम उनसे अनुशाशन, भक्ति, समर्पण का पाठ आसानी से सीख सकते हैं. हम उनसे ये भी सीख सकते हैं की किस प्रकार अपने ज्ञान का प्रयोग समाजोत्थान के लिए किया जा सकता है.
इस लेख में में आपको यही बताने जा रहे हैं की किस प्रकार आसानी से हनुमानजी की कृपा को पाया जा सकता है.
ध्यान रखने योग्य बातें:
- हनुमानजी की साधना करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- लाल रंग का ऊनी आसन प्रयोग करना चाहिए.
- पंचोपचार पूजन करके लड्डू, चूरमा, रोट आदि का भोग लगाना चाहिए.
- रात्री को 10 बजे बाद साधना उत्तम रहती है.
- सिद्ध हनुमान यन्त्र की स्थापना करके साधना करना भी उचित है .
- श्रीफल भी भेट करना चाहिए.
जप के लिए हनुमानजी का मंत्र:
“ ॐ हं हनुमते नमः “
कोई भी व्यक्ति बहुत आसानी से इस मंत्र का प्रयोग करके हनुमानजी को प्रसन्न कर सकता है. अगर किसी को दर लगता हो, घबराहट रहती हो, नकारात्मक उर्जाओं से परेशानी हो तो हनुमान साधना द्वारा सफलता प्राप्त कर सकते है. अतः अपने जीवन में सफलता के लिए प्राप्त करे हनुमान कृपा और बनाइये अपने जीवन को निष्कंटक.
अगर आप चाहते हैं कोई भी ज्योतिषीय सलाह विश्वसनीय ज्योतिष से ऑनलाइन तो अभी संपर्क करे ईमेल से. जानिए अपनी कुंडली का विवेचन, जानिए अपने लिए अच्छा रत्न, अच्छी पूजा, दान, यन्त्र आदि.
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