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Vedic Jyotish Me Uch Aur Neech Grah

ज्योतिष में उच्च और नीच ग्रह, उच्च और नीच ग्रह का प्रभाव और महत्त्व वैदिक ज्योतिष में, जानिए कब कोई ग्रह नीच का या फिर उच्च का होता है.
ज्योतिष में उच्च और नीच ग्रह, उच्च और नीच ग्रह का प्रभाव और महत्त्व वैदिक ज्योतिष में, जानिए कब कोई ग्रह नीच का या फिर उच्च का होता है.
Vedic Jyotish Me Uch Aur Neech Grah
कुंडली का अध्ययन करने के समय एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण बात याद रखना होता है और वो है कुंडली में मौजूद उच्च और नीच ग्रह की मौजूदगी जिसका असर जीवन पर बहुत ज्यादा पड़ता है.

उच्च को अंग्रेजी में exalted कहते हैं और नीच को अंग्रेजी में debilitated कहते हैं.

ज्योतिष में ऐसा माना जाता है की अगर कोई ग्रह उच्च का हो जाए तो वह जातक को बहुत फायदा देता है वहीँ अगर कोई ग्रह नीच का हो जाए तो उससे जातक को नुक्सान होता है.
साधारण भाषा में हम ऐसे समझ सकते हैं की उच्च का अर्थ है सकारात्मक ग्रह, अच्छा ग्रह, और नीच ग्रह का अर्थ है नकारात्मक या ख़राब ग्रह.

परन्तु किसी भी निर्णय पर पंहुचने से पहले ये भी ध्यान रखना चाहिए की उस ग्रह की शक्ति कितनी है क्यूंकि शक्तिहीन ग्रह का असर जातक पर बहुत कम होता है.

नीचे देखिये कैसे और कब कौन सा ग्रह उच्च या नीच का होता है?


उच्च नीच ग्रह तालिका
ग्रह किस राशि में उच्च का किस राशि में नीच का
सूर्य मेष तुला
चन्द्रमा वृषभ वृश्चिक
मंगल मकर कर्क
बुध कन्या मीन
गुरु कर्क मकर
शुक्र मीन कन्या
शनि तुला मेष
राहू वृषभ वृश्चिक
केतु वृश्चिक वृषभ
आइये समझते हैं ग्रहों के उच्च – नीच तालिका को:
  1. अगर सूर्य कुंडली में मेष राशि के साथ बैठा हो तो उच्च का हो जाता है और अगर तुला राशी के साथ बैठा हो तो नीच का हो जाता है.
  2. अगर चन्द्रमा कुंडली में वृषभ राशि का हो तो उच्च का हो जाता है और अगर वृश्चिक राशि में बैठा हो तो नीच का हो जाता है.
  3. मंगल अगर मकर राशी के साथ बैठ जाए तो उच्च का हो जाता है और अगर कर्क राशी के साथ बैठे तो नीच का हो जाता है.
  4. कन्या राशि के साथ बुध कुंडली में बैठे तो उच्च का हो जाता है और अगर मीन राशि के साथ बैठे तो नीच का हो जाता है.
  5. गुरु कर्क राशि में उच्च का होता है और मकर राशि में नीच का होता है.
  6. शुक्र मीन राशि में उच्च का होता है और कन्या राशि में नीच का होता है.
  7. शनि तुला राशि में उच्च का होगा और मेष राशी में नीच का होगा.

कुंडली का अध्ययन करते समय ये बात भी ध्यान में रखना चाहिए की उच्च ग्रह का अर्थ है मजबूत ग्रह जो की जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं परन्तु तभी जब ये शक्तिशाली हो अन्यथा इनका प्रभाव इनकी शक्ति के आधार पर बदलता रहता है.

इसी प्रकार नीच ग्रह अर्थात बहुत ख़राब ग्रह जो की जीवन में संघर्ष बढ़ाएगा परन्तु इसका प्रभाव भी ग्रह की शक्ति के ऊपर निर्भर करेगा.

हम ऐसा भी समझ सकते हैं की नीच ग्रह अर्थात हानिकारक और उच्च अर्थात कल्याणकारी.
कुंडली पढ़ते समय ये भी ध्यान रखना चाहिए की जीवन में जो संघर्ष है, बदकिस्मती है, उसका एक कारण नीच ग्रह भी हो सकता है.

उच्च या नीच ग्रह जीवन के किस भाग को प्रभावित करते हैं?
अगर हम ये जानना चाहते हैं की जीवन के किस भाग को ये ग्रह प्रभावित करेंगे तो इसके लिए हमे ये देखना होगा की उच्च या नीच ग्रह कुंडली के कौन से भाव में बैठा है. उदाहरण के लिए उच्च का सूर्य कुंडली के दशम भाव में बैठे तो जातक को पैतृक सम्पात्ति दिला सकता है या फिर सरकारी नौकरी पर लगा सकता है, मान सम्मान दिला सकता है. वही अगर उच्च का सूर्य १२वे भाव में बैठ जाए तो जातक अध्यात्मिक कार्यो में खूब खर्च कर सकता है, घुमने फिरने में खूब पैसा खर्च कर सकता है आदि.

अतः अच्छे ज्योतिष से संपर्क करके कुंडली दिखाना चाहिए.

Read In english about Exalted and Debilitated Planets in Astrology

ज्योतिष में उच्च और नीच ग्रह, उच्च और नीच ग्रह का प्रभाव और महत्त्व वैदिक ज्योतिष में, जानिए कब कोई ग्रह नीच का या फिर उच्च का होता है.

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