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Jyotish sikhiye Bhaag 2- Mahino Ko Janiye

पिछले पाठ मे हमने देखा ज्योतिष क्या है और इसका महत्त्व क्या है. इस ज्योतिष के पाठ मे हम जानेंगे महीनो के बारे मे और ग्रहों से सम्बंधित कुछ जानकारियां. 
वैदिक ज्योतिष मे महीने ज्योतिष सीखिए भाग २, वैदिक ज्योतिष मे १२ महीनो के नाम, ग्रह और तत्त्वों मे सम्बन्ध उत्तरायण और दक्षिणायन को समझे.
ज्योतिष पाठ २

चन्द्र मॉस के हिसाब से १२ महीने होते हैं जिसकी गणना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से की जाती है. 
सूर्य मास के हिसाब से भी १२ महीने होते हैं जिसकी गणना मेष संक्रांति से होती है अर्थात जब सूर्य मेष राशि मे प्रवेश करता है उस समय से. 
आइये अब जानते है १२ महीनो के नाम :
चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठा, आशाद, श्रवण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन. 
आइये अब जानते हैं इन महीनो के वैदिक नाम :
मधु, माधव, शुक्र, शुची, नभ, नमस्य , इश, उर्ज, सह, शस्य, तप तपस्या 
आइये अब जानते हैं कुछ ग्रहों के बारे मे: 
ज्योतिष के हिसाब से 7 तो मुख्य ग्रह है और 2 छाया ग्रह है, इनके नाम है –
सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू, केतु .
आइये अब जानते हैं की कौन से ग्रह की क्या हेसियत होती है:
सूर्य को ग्रहों के रजा के रूप मे मान्यता प्राप्त है. 
चन्द्र को रानी के रूप मे लिया जाता है.
मंगल को सेनापति के रूप मे जानते हैं. 
बुध को कुमार के रूप मे जानते हैं. 
गुरु और शुक्र को मंत्री का पड़ प्राप्त है. 
शनि को नौकर के रूप मे लिया जाता है. 

व्यक्ति का व्यक्तित्त्व इस बात पर निर्भर करता है की जन्म के समय कौन से ग्रह का बल ज्यादा है. उदाहरण के लिए सूर्य और चन्द्र का बल ज्यादा होने पर व्यक्ति के अन्दर राजशाही अंदाज मे जीने की ख्वाहिश होती है. शक्तिशाली शनि व्यक्ति को अच्छा, ईमानदार और शक्तिशाली काम करने वाला बनता है, मंगल व्यक्ति को स्वतंत्र जीवन जीने की शक्ति देता है, अच्छा बुध व्यक्ति को राजकुमार जैसे जीवन दे सकता है. 
अतः भाविस्यवानी के समय इन सब चीजो को ध्यान मे रखना होता है. 

आइये अब जानते हैं की ग्रहों का पांच तत्त्वों से क्या सम्बन्ध है?

सूर्य का सम्बन्ध अग्नि तत्त्व से होता है. 
चन्द्र का सम्बन्ध जल से होता है. 
मंगल का सम्बन्ध अग्नि से होता है. 
बुध का सम्बन्ध प्रथ्वी तत्त्व से होता है. 
गुरु का सम्बन्ध आकाश तत्त्व से होता है. 
शुक्र का सम्बन्ध जल तत्त्व से होता है. 
शनि का सम्बन्ध वायु तत्त्व से होता है. 
आइये अब उत्तरायण और दक्षिणायन के बारे मे जाने वैदिक ज्योतिष मे :
हर साल सूर्य १२ राशियों से गुजरता है. सूर्य एक राशि मे करीब १ महीने के लिए रहता है. सूर्य का १२ राशियों मे गुजरने को 2 भागो मे बात सकते है –
अ) जब सूर्य मकर से मिथुन राशी से गुजरता है तो उस समय को उत्तरायण कहते हैं. 
आ) जब सूर्य कर्क से धनु राशी तक गुजरता है तो उसे दक्षिणायन कहते हैं. 

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