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Rajyog Jyotish Mai, राजयोग को जानिए

Rajyog Jyotish Mai, राजयोग को जानिए,  कुंडली में राजयोग, ग्रहों की स्थिति राज योग में, कैसे जाने कुंडली में राजयोग को. 
kya hai raj yog, kya fayde hai raj yog ke
राज योग कुंडली मे 

कुंडली में मौजूद योगो को जानने की लालसा सभी को रहती है, जिन लोगो को ज्योतिष में रूचि होती है वो ये जानना चाहते हैं की उनके कुंडली में राज योग है की नहीं. इस लेख में इसी विषय पर प्रकाश डाला जा रहा है. क्या होता है राज योग, क्यों लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं. क्या करे अगर राज योग न हो कुंडली में, कैसे जीए एक सुखी और सफल जीवन.

राजयोग के बारे में गलत धारणा :
लोग साधारणतः ऐसा सोचते हैं की राज योग सिर्फ एक ही प्रकार का होता है और इसमे सिर्फ एक ही प्रकार से ग्रहों की स्थिति होती है. परन्तु ये सरासर गलत धरना होती है. राज योग अलग अलग प्रकार के होते हैं और सभी में ग्रहों की स्थिति अलग अलग प्रकार के होते हैं. एक अच्छा और अनुभवी ज्योतिष आपकी कुंडली को देखके इसके बारे में सही जानकारी दे सकता है. 
क्या है राज योग ?
राजयोग का अर्थ होता है कुंडली में ग्रहों का इस प्रकार से मौजूद होना की जीवन में सफलताओं को आसानी से व्यक्ति प्राप्त कर सकता हो. अगर कुंडली में राज योग होता है  तो इसमे कोई शक नहीं की जातक का जीवन सुखी और प्रभावशाली होता है. कई बार कमजोर राज योग और भंग राज योग के कारण भी परिणाम में अंतर आता है. 

आइये जानते हैं राजयोग के कारण जातक को क्या फायदे हो सकते हैं :
1. इसके कारण व्यक्ति स्वस्थ, संपन्न और बुद्धिमान होता है.
2. अगर कोई राजनीती में हो और उसके कुंडली में राज योग हो तो वो अच्छे पद तक पहुचता है. 
3. अगर किसी इंजिनियर के कुंडली में राज योग हो तो वो अपने कार्य से अच्छे पद को प्राप्त करता है. 
4. अगर किसी साधक के कुंडली में राज योग हो तो वो अपनी साधना में जल्दी तरक्की करता है. 
5. अगर किसी डॉक्टर के कुंडली में ये योग हो तो उसे चिकित्सा क्षेत्र में बहुत सफलता अर्जित करते हम देख सकते हैं. 
6. नाम, यश, ख्याति , धन , वैभव सभी कुछ राज योग के कारण जातक प्राप्त करता है जीवन में. 
आइये अब जानते हैं की राजयोग होने पर भी क्यों  कोई व्यक्ति इच्छित सफलता नहीं प्राप्त कर पाता है ?
कई बार लोग इस प्रकार के प्रश्न करते हैं की मेरे कुंडली में गजकेसरी योग है पर में बहुत परेशान रहता हूँ,खाने के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ता है, क्यों. यहाँ यही कहना चाहेंगे की कुंडली में ग्रहों की सही तरीके से अध्ययन जरुरी है अगर हम सच जानना चाहते हैं. कई बार योग बहुत कमजोर होता है और कई बार उसका समय नहीं होता है. समय से पहले भी परिणाम की अपेक्षा हम नहीं कर सकते हैं. 
एक उदाहरण से समझते हैं मेरे एक मित्र की कुंडली में गज केसरी योग था परन्तु उसे हमेशा ही परेशान देखता था, ज्योतिष उसकी कुंडली देख के यही बोलते की तुम्हारे पास तो बहुत धन है, तुम बहुत तरक्की करोगे परन्तु सच्चाई ये है की आज भी वो परेशान घूम रहा है न शादी हुई और न कोई स्थाई नौकरी और न खाने को घर. 
जब मैंने उसकी कुंडली देखि तो पाया की उसके कुंडली में राज योग तो था पर गुरु और चन्द्र दोनों की शक्तिहीन थे जिससे उसे इस योग का लाभ नहीं मिल पा रहा था. अतः योग होक भी नहीं था. अतः ये जरुरी है की ग्रहों की स्थिति का पूर्ण अध्ययन करे किसी नतीजे पर पहुचने से पहले. 

राज योग के कुछ प्रकार :
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कुंडली में विभिन्न प्रकार के राज योग बनते हैं जिनमे से कुछ की जानकारी यहाँ दी जा रही है.
1. कुंडली में राज योग : 
अगर कुंडली में गुरु उच्च का हो, शुक्र नवे भाव में बैठा हो, मंगल और शनि सातवे भाव में हो तो ये एक विशेष प्रकार का राज योग बनाता है और इसके प्रभाव से व्यक्ति जल्द ही सरकारी नौकरी प्राप्त करके अच्छा नाम, पैसा कमाता है और हंसी ख़ुशी जीवन व्यतीत करता है. 
2. गजकेसरी योग कुंडली में :
अगर कुंडली में गुरु केंद्र में बैठा हो लग्न या चन्द्रमा से या फिर वो शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो गजकेसरी योग का निर्माण होता है. परन्तु इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गुरु नीच का न हो या फिर शत्रु का न हो. 
गजकेसरी योग के कारण जातक को उच्च कोटि का ऑफिसर बनता है साथ ही उसका अलग ही नाम और ख्याति होती है.
3. सिंघासन योग :
अगर सभी ग्रह दुसरे, तीसरे, छठे, आठवे और बारहवे घर में बैठ जाए तो सिंघासन योग बनता है कुंडली में. इसके प्रभाव से व्यक्ति शासन अधिकारी बनता है और नाम प्राप्त करता है.
4. हंस योग :
अगर कुंडली में मौजूद सभी ग्रह मेष, कुम्भ, मकर, वृश्चिक और धनु राशि में हो तो हंस योग का निर्माण होता है. इसके कारण व्यक्ति ऐश्वर्या और भव्य जीवन व्यतित करता है. 
5. चतुः सार योग :
अगर कुंडली में ग्रह मेष, कर्क, तुला और मकर राशि में स्थित हो तो ये योग बनता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति इच्छित सफलता जीवन में प्राप्त कर सकता है और किसी भी समस्या से आसानी से बहार आ जाता है.
6. श्रीनाथ योग :
अगर लग्न का स्वामी, सातवे भाव का स्वामी दसवे घर में मौजूद हो और दसवे घर का स्वामी नवे घर के स्वामी के साथ मौजूद हो तो श्रीनाथ योग का निर्माण होता है. इसके प्रभाव से जातक को धन नाम, यश, वैभव की प्राप्ति होती है. 
7. शंख योग :
अगर लग्न मजबूत हो या फिर लग्न का स्वामी शक्तिशाली हो, पांचवे और छठे घर का स्वामी केंद्र में बैठे हो, साथ ही लग्न और दसवे घर का स्वामी चार राशि के साथ बैठे हो तो शंख योग बनता है. इस योग के कारण जातक इमानदार, पवित्र भावनाओं वाला, बुद्धिमान, दयावान बनता है और दीर्घायु होता है. 
शाशक योग:
ये भी एक महत्त्वपूर्ण योग है लग्नाधिपति शनि किसी केंद्र स्थान में मौजूद हो. ऐसे लोग संगठन बनाने में माहिर होते हैं और जीवन का आनंद लेते हैं. 
अतः यहाँ कुछ शुभ योगो की जानकारी दी गई है परन्तु किसी भी निर्णय पर बिना अच्छे ज्योतिष से सलाह लिए नहीं पहुचना चाहिए. 
कैसे राजयोग को मजबूत किया जा सकता है ?
अगर कुंडली में राज योग हो और वो कमजोर हो तो नव रत्नों की सहायता से, मंत्र जप आदि करके भी जीवन को सफल बनाया जा सकता है.
और ये बात भी ध्यान रखना चाहिए की राज योग नहीं होने पर भी व्यक्ति बहुत सफल हो सकते हैं अगर कुंडली में ग्रह शुभ, शक्तिशाली हो. 

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